कुछ अनुभव सिद्ध वास्तु टिप्स

कुछ अनुभव सिद्ध वास्तु टिप्स  

कुछ अनुभव सिद्ध वास्तु टिप्स आचार्य स्वामी श्याम राघवदास जी महाराज भारत की वैदिक सर्वोच्च सत्ता 'ऊ' के बारे में अनुसंधान की प्रक्रिया के दौरान ज्ञात हुआ कि ऊँ शब्द अ उ, म तथा चंद्र से मिलकर बना है। अतः चारों दिशाओं में इन्हीं अक्षरों के प्रयोग से चाइनीज फेंगसुई से कहीं ज्यादा फल प्राप्त होता है। इसमें संदेह नहीं है। यह अनुभव प्रमाणित हो चुका है कि प्रयोग में लाने से उत्तम फलों की प्राप्ति हुई है। वास्तु क्षेत्र में शांति है। अतः अनुसंधान के कुछ निष्कर्ष इस प्रकार हैं। - उत्तर दिशा में दोष हो तो देव नागरी लिपि का 'अ' लिखकर लगायें। - दक्षिण दिशा में दोष हो तो उसी दिशा में 'म' लिखकर लगायें। - पूर्व दिशा में वास्तु दोष होने पर उसी दिशा में ँ (चंद्र बिंदु) लिखकर लगायें। पश्चिम दिशा में वास्तु दोष होने पर, उसी दिशा में 'ऊ' लिखकर लगायें। जिस दिशा का जो रंग है उसी रंग के बेस पर सफेद अक्षरों को लिखकर लगायें। - गृह का ब्रह्मस्थान दोषयुक्त होने आचार्य स्वामी श्याम राघवदास जी महाराज पर गृह के मध्य भाग में एक 'घटी' लगायें। - मकान के सभी प्रकार के वास्तुदोष दूर करने के लिये मुखयद्वार के बाहर दाहिनी तरफ केली तथा बायीं तरफ तुलसी का पौधा गमले में लगाकर रखें। नियमानुसार उनकी पूजा करें, तो सर्वविध वास्तुदोष निवारण होगा।



पुनर्जन्म विशेषांक  सितम्बर 2011

पुनर्जन्म की अवधारणा और उसकी प्राचीनता का इतिहास पुनर्जन्म के बारे में विविध धर्म ग्रंथों के विचार पुनर्जन्म की वास्तविकता व् सिद्धान्त परामामोविज्ञान की भूमिका पुनर्जन्म की पुष्टि करने वाली भारत तथा विदेशों में घटी सत्य घटनाएं पितृदोष की स्थिति एवं पुनर्जन्म, श्रादकर्म तथा पुनर्जन्म का पारस्परिक संबंध

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