भूखंड का अनियमित आकार, दुखों का भंडार

भूखंड का अनियमित आकार, दुखों का भंडार  

पिछले माह पंडित जी देहरादून के एक प्रसिद्ध व्यवसायी के यहाॅं वास्तु परीक्षण करने गए। उनसे मिलने पर उन्होंने बताया कि जब से वह नये घर में आए हैं तभी से जीवन में एक के बाद एक परेशानी बढ़ती जा रही है। उनके पिता जी का अकस्मात देहान्त हो गया तथा परिवार में कोई न कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या बनी रहती है। बहुत मेहनत करने पर भी उचित विकास नहीं हो पा रहा है तथा कई नये काम रुक से गये हैं। कुछ समय पूर्व उनके एक कर्मचारी की बिजली के करंट से मृत्यु हो गई जिससे उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी। वास्तु परीक्षण करने पर पाये गये वास्तु दोष - उनके प्लाट का आकार अनियमित था। वस्तुतः उत्तर-पश्चिम तथा दक्षिण-पूर्व हिस्सा बढ़ा हुआ था जो कि अग्नि से हानि, आर्थिक हानि, लड़ाई-झगड़े, जीवन में कोई भी काम समय पर न होना तथा घर की महिलाओं के दुख का कारण होता है। - दक्षिण-पश्चिम में सैप्टिक टैंक बना था जो कि घर के मालिक के लिए घातक हो सकता है तथा गंभीर आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होने का डर रहता है। - बिल्डिंग का पश्चिमी कोना कटा हुआ था जो कि जीवन में सुख व आराम कम करता है तथा संघर्ष बढ़ाता है। - उत्तर-पूर्व व दक्षिण-पश्चिम में शौचालय बने थे जो कि गंभीर वास्तु दोष हैं तथा सभी ओर से विकास में रुकावटों, घर में स्वास्थ्य व आर्थिक हानि तथा मानसिक तनाव का कारण बनते हंै। - बिल्डिंग का उत्तर-पश्चिम हिस्सा नीचा होना भी एक मुख्य वास्तु दोष था जिससे जीवन में सुख, शान्ति का अभाव रहता है। सुझाव - उत्तर-पश्चिम तथा दक्षिण-पूर्व की तरफ तीन फीट ऊॅंची दीवार बनाने को कहा गया जिससे प्लाट आयताकार हो सके तथा आने जाने के लिए सीढ़ियां बनाने को कहा गया। - दक्षिण-पश्चिम में बने सैप्टिक टैंक को पश्चिम की तरफ मुख्य द्वार के पास बनाने को कहा गया। - बिल्डिंग को मैटल का परगोला बनाकर आयताकार बनाने को कहा गया तथा बैठक से सटे हुए हिस्से में आने के लिए द्वार बनाने को कहा गया। - शौचालयों की नकारात्मक ऊर्जा को कम करने के लिए उसमें समुद्री नमक रखने, दहलीज बनाने तथा शौचालय के दरवाजे पर बाहर की ओर पिरामिड़ लगाने की सलाह दी गई। - उत्तर-पश्चिम के नीचे हिस्से को भी ठीक करने को कहा गया। जीवन में आमूलचूल सकारात्मक परिवर्तन के लिये पंडित जी ने उनको घर बदलने की सलाह दी क्योंकि शौचालय बदलना तथा बिल्डिंग के नीचे हिस्से को ठीक करना उन्हें कठिन लग रहा था जिसके लिए उन्हें दो मंजिला बनी बिल्डिंग को गिराकर ही ठीक करना होगा।


तंत्र एवं दश महाविद्या विशेषांक  अकतूबर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के तंत्र एवं दशमहाविद्या विशेषांक में दस महाविद्याओं का संक्षिप्त परिचय व मंत्र, तंत्र एवं दस महाविद्या, तंत्र में प्रयुक्त शब्दों की धारक मारक शक्ति, शिव शक्ति का साक्षात श्री विग्रह श्रीयंत्र, तंत्र का आरंभि अर्थ एवं अंतिम लक्ष्य, तंत्र मंत्र अभिन्न संबंध, तंत्र परिभाषा एवं महत्वपूर्ण प्रयोग, दैनिक जीवन में तंत्र, दश महाविद्याओं का लौकिक एवं आध्यात्मिक विवेचन तथा इनके प्रसिद्ध शक्ति पीठों की जानकारी, तंत्र व् महाविद्या की प्राचीनता, मूल एवं विकास के विभिन्न प्रक्रम, तंत्र के अधिपति देव एवं मूल अधिष्ठात्री देवी, दश महाविद्या रहस्य, इसके अतिरिक्त तंत्र की शिक्षा भूमि तारापीठ, फलादेश में अंकशास्त्र की भूमिका, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, मंत्र चिकित्सा, सम्मोहन, मुहूर्त विचार, टैरो कार्ड, सत्यकथा, अंक ज्योतिष के रहस्य, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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