प्लाॅट के पूर्व, उत्तर में मार्ग समृद्धि का प्रतीक

प्लाॅट के पूर्व, उत्तर में मार्ग समृद्धि का प्रतीक  

पिछले माह जून में पंडित जी को फोम के गद्दे बनाने वाली एक बहुत बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कम्पनी के निर्माणाधीन काॅरपोरेट आॅफिस का वास्तु निरीक्षण करने के लिए ग्रेटर नोएडा बुलाया गया। वास्तु निरीक्षण के दौरान उनके प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि काम की रफ्तार सुस्त चल रही है। यह प्लाॅट उत्तर, उत्तर-पूर्वी मार्ग पर स्थित है जो वास्तु अनुसार सर्वोत्तम है। प्लाॅट के सामने खुला स्थान/ पार्क इसके गुणों को और भी बढ़ाता है। इससे निर्माण कार्य में धन की कोई कमी नहीं होगी। परन्तु उत्तरी कोण में स्थित ट्रांसफाॅर्मर कई कार्यों के पुनः निर्माण द्वारा अनावश्यक खर्चे बढ़ाता है। - मुख्य सड़क उत्तर दिशा में है जो प्लाॅट के ईशान कोण की दिशा में है। प्लाॅट की यह स्थिति कम्पनी की समृद्धि और उन्नति के लिए हर प्रकार से सर्वोत्तम है। प्लाॅट के सामने खुले क्षेत्र और हरियाली का होना और भी शुभ एवं लाभकारी है। - प्लाॅट का मुख्य प्रवेश ईशान कोण से है जो आर्थिक उन्नति और कार्यों की वृद्धि के लिए अति उत्तम है। भवन का उत्तर व पूर्वी हिस्सा बढ़ा हुआ है जो समृद्धि के लिये सर्वश्रेष्ठ है। भवन के समस्त भूतल के नीचे पार्किंग के लिए बेसमेन्ट बनी है जो वास्तु शास्त्र से मान्य है। - अगर संभव हो सके तो गार्ड रूम की दीवार को बाउंड्री वाॅल से हटाकर बनाएं। निर्माण शीघ्र होने लगेगा क्योंकि उत्तर-पूर्वी दीवार पर किसी भी तरह का वजन होना कार्य को धीमा करता है। - मीटर और बिजली उपकरण कक्ष की स्थिति उत्तर एवं उत्तर-पूर्व में स्थित है जो कि अच्छी नहीं है, परन्तु देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि इस कक्ष को पूर्व अथवा वायव्य कोण में बदलना अत्यंत दुष्कर है। अतः इस कक्ष और बाउंड्री वाॅल के मध्य कुछ स्थान छोड़ देना चाहिए। उत्तर के कोण को ट्रांसफाॅर्मर कक्ष द्वारा बन्द करना भी कम्पनी के आर्थिक विकास के लिए हानिकारक रहेगा, क्योंकि यह जल और धन का स्थान है, जिसका आवागमन होते रहना ही अच्छा है परन्तु वर्तमान स्थिति में व्यावहारिक रूप से उत्तम यही होगा कि इस कक्ष और बाउंड्री वाॅल के मध्य में अधिक से अधिक स्थान छोड़ा जाये। - दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम के पिछले हिस्से में सर्विस एरिया/ग्रीन एरिया और पार्किंग मान्य है। - पूर्व, दक्षिण-पूर्व में और पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम दिशाओं में जो स्थान खुला छोड़ा गया है वह ठीक है। - पानी का पंप कक्ष ठीक है। यदि इसको दक्षिण दिशा की ओर जहां पर ट्रीटमेंट वाटर एवं वर्षा के पानी का टैंक है, वहाँ स्थानांतरण कर दिया जाय तो बेसमेंट की पश्चिम दिशा में वृद्धि है वह समाप्त हो जायेगी और यह स्थान करेंसी नोट की तरह आयताकार हो जायेगा। - लिफ्ट व इसके लिए जो गड्ढा पश्चिम कोण में किया गया है वह मान्य है - पश्चिम की सीढ़ियां भी बहुत अच्छी हैं। - तीन मीटिंग रूम गोल हैं जो अच्छे हैं। चैथे मीटिंग कक्ष को या तो चैकोर, या आयताकार या गोल बनाना चाहिए। तभी वहाँ लाभदायक विचार विमर्श हो सकेंगे। - सर्वर रूम का स्थान ठीक है परन्तु रूकावट/ब्रेक डाउन कम करने के लिए इसे भी आयताकार ही बनाना लाभदायक होगा। - वर्षा के जल भण्डारण हेतु जो गड्ढा दक्षिण-पूर्व दिशा में बनाया गया है, उसे पूर्वी क्षेत्र में स्थानांतरित कर दें। ऐसा करने से दक्षिण में जो नीचापन बढ़ोत्तरी हो रहा है वह समाप्त हो जायेगा और फालतू खर्चें एवं कार्यों में अनावश्यक देरी समाप्त हो जाएगी। - ई.टी.पी. प्लांट सही दिशा में है परंतु इसका कोई भी भाग जमीन के नीचे नहीं होना चाहिए क्योंकि दक्षिण में नीचे पानी/गड्ढा होने से सरकारी समस्याएं पैदा होती रहती हैं। - ट्रीटमेंट किये हुए पानी का टैंक, वर्षा के पानी का टैंक और आग बुझाने वाले पानी का टैंक नैर्ऋत्य कोण से हटा दें। वास्तु के सिद्धांत के अनुसार इससे भारी आर्थिक नुकसान और लाइलाज बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। इन तीनों टैंकांे को नजदीक के पश्चिमी क्षेत्र में स्थानांतरित कर दें। अगर संभव हो सके तो इनका स्थानांतरण पूर्व अथवा ईशान कोण के क्षेत्र में कर दें। ऐसा करने से कम्पनी में अप्रत्याशित धन वृद्धि एवं अनावश्यक खर्चों से बचत होगी। प्रश्नः- पंडित जी नमस्कार, मैं अपनी लड़की व दामाद के लिए यह घर खरीदना चाहता हँू। यह बना हुआ मकान बहुत पुराना है जिसे कुछ समय बाद हम तोड़ कर दोबारा आपके कहे अनुसार बनाना चाहते हैं। कृप्या सुझाव दें ? एस. के. मल्होत्रा, शिकागो उत्तरः- प्रिय मल्होत्रा जी यह प्लाॅट अनियमित आकार का है। उत्तर-पूर्व, पूर्व में बढ़ोत्तरी बहुत बढ़िया हंै, परन्तु आग्नेय व दक्षिण, पश्चिम में बढ़ोत्तरी तथा दक्षिण व नैर्ऋत्य में कटना बहुत गम्भीर वास्तु दोष है। इनसे आग लगना, बीमारी व झगड़ांे की सम्भावना बनी रहती है। धन व स्वास्थ्य की हानि तथा मालिक को किसी न किसी कारण से बाहर रहने की सम्भावनायें बढ़ जाती हैं। आप बिल्डिंग को तो ठीक कर सकते हैं लेकिन प्लाॅट का ठीक होना नामुमकिन है अतः कृप्या इसे खरीदने का विचार त्याग दें।


पितृ दोष  सितम्बर 2016

फ्यूचर समाचार का वर्तमान अंक विशेष रूप से पितृ दोष को समर्पित है। हमारे धार्मिक ग्रन्थों से हमें पता चलता है कि हमें अपने पितरों को समय-समय पर भोजन व अन्य सामग्रियां प्रदान करते रहना चाहिए। विशेष रूप से भाद्रपद महिने के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से अमावस्या तक के 15 दिन पूर्ण रूप से पितरों की सेवा के लिए ही होते हैं। पुरानों और अन्य धार्मिक ग्रन्थों से पता चलता है कि इस समय हमारे पितर पृथ्वी पर विशेष रूप से अपने सम्बन्धियों से भोजन व सम्मान प्राप्त करने आते हैं तथा इसके बदले में सम्बन्धियों को पूर्ण आशीर्वाद प्रदान करके लौट जाते हैं। इस वर्तमान अंक में बहुत सारे पितृ दोष से सम्बन्धि अच्छे लेख शामिल किए गये हैं। उनमें से कुछ विशेष लेख हैं: जानें क्या होता है पितृ दोष, कैसे कम होता है इसका प्रभाव?, श्राद्ध के साथ करें पितरों को विदा, पितृ पूजा: पहचान एवं उपाय, पितृ दोष से उत्पन्न ऊपरी बाधाएं, पितृ दोष: ज्योतिषीय योग एवं निवारण आदि।

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