वैदिक ज्योतिष के आइने में हस्तरेखा शास्त्र

वैदिक ज्योतिष के आइने में हस्तरेखा शास्त्र  

वैदिक ज्योतिष के आइने में हस्तरेखा शास्त्र बी. आर. अग्रवाल समस्या निराकरण और भविष्य ज्ञान का आधार ज्योतिष शास्त्र के नौ ग्रह हैं। लग्न कुंडली की तरह ये नौ ग्रह हमारे हाथ में भी स्थापित हैं जिनसे वही सब बातें पता चलती हैं जो वैदिक ज्योतिष के माध्यम से कुंडली से पता चलती हैं। आइए जानें किससे, किस तरह और क्या पता चलता है। अधिकांश पुस्तकों में रेखाओं के बारे में तो बहुत विस्तार से जानकारी मिलती है लेकिन ग्रहों और पर्वतों के विषय में बहुत कम जानकारी मिलती है। सारा ज्योतिष शास्त्र नौ ग्रहों के इर्द-गिर्द ही घूमता है और उससे ही व्यक्ति की सभी समस्याओं और भविष्य का पता चलता है। हमारे हाथ पर भी नौ ग्रह उसी तरह स्थापित है जसैे कंडुली में होते हैं। समस्या उसको समझने की है जिसे आज तक सही प्रकार से और विस्तार से नहीं समझा गया। यह पाया गया है कि कुंडली में ग्रहों के माध्यम से जो कुछ भी देखा जा सकता है, हाथ के ग्रहों के द्वारा उससे भी अधिक देखा जा सकता है। बहुत सी बातें हैं जो कुंडली के ग्रहों से नहीं पता चलतीं। परंतु हाथ के ग्रहों से पता चल जाती हैं हाथ पर गह्रों का निर्माण प्रकृति ने किया है तो फिर वह कुंडली के ग्रहों से किस प्रकार से कम हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि सूर्य का अध्ययन हाथ के द्वारा किया जाये तो हमें वे सभी बातें पता चलती हैं जो कुंडली में सूर्य को देख कर पता चलती हैं। बल्कि उससे भी अधिक जानकारी मिलती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को राजा माना है, सरकार माना है, शरीर म ें आंख, दिल, सिर आरै रीढ ़ की हड्डी का स्वामी माना है। मान, प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि और सभी किये हुए अच्छे कार्यों को समाज में सम्मान दिलवाना और कोई भी अच्छा कार्य हो, उसको समाज में सूर्य ही नाम, प्रशंसा देता है। सूर्य रेखा हाथ में नही हो तो आपका जीवन साधारण ही रहता है किसी भी किये हुये अच्छे कार्य का कोई नाम नहीं मिलता। सूर्य कलाकार है, उसके पास चित्रकला, अभिनयकला और नृत्य कला है। वह नाम और प्रसिद्धि का कारक है। हाथ में सूर्य को देखकर यह पता चल जाता है कि इस व्यक्ति का सरकार से क्या सबंधं है यह सरकारी नौकर है या नही,ं सरकारी नौकरी मिल सकती है या नहीं और सरकारी नौकरी में समस्या होगी या नहीं, अगर होगी तो कब होगी। नौकरी में अडच़ न पड़ सकती है या नही,ं क्या उस पर केस बन जाएगा। क्या वह नौकरी से निकाल दिया जाएगा। क्या यह व्यक्ति नर्तक कलाकार और पेंटर है। क्या इसके सिर में दर्द रहता है, क्या इसकी रीढ़ की हड्ड़ी खराब हो गई है। क्या इसको हृदय की समस्या है, क्या इसकी आंखे खराब हैं। नाम और प्रसिद्धि के मामले में भी पता चलता है कि क्या यह व्यक्ति प्रसिद्धि पा रहा है या इसकी इज्जत मिट्टी में मिलने वाली है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के विषय में जो कुछ भी बताया गया है वह सब कुछ हाथ के सूर्य से मालूम किया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र में बुध को विज्ञान और वाणिज्य का कारक बताया गया है। बुध के पर्वत को देखकर ही पता चल जाता है कि यह व्यक्ति विज्ञान, इंजीनियरिंग, मैडिकल, एकाउंटस, लॉ की डिग्री या डिप्लोमा धारक है या नहीं। बुध जिगर और गले का स्वामी है। बुध के पर्वत को देखकर पता चल जाता है कि इसकी वाणी में कितनी मधुरता है। इसके अंदर चालाकी या धोखे बाजी की भावना है और यह कितना विश्वासपात्र है आरै इसमें कितना साहस है। बुध को गाने की कला मिली है। बुध का पर्वत देखते ही पता चल जाता है कि यह व्यक्ति संगीतज्ञ है या नहीं। चंद्रमा के पर्वत से व्यक्ति की मानसिक स्थिति तथा विदेश यात्रा का पता चलता है। ज्योतिष शास्त्र ने चंद्रमा को हमारे शरीर में गुर्दे, बच्चेदानी, फेफड़े तथा अंतड़ियों का स्वामी बताया है। चंद्रमा के पर्वत को देख कर पता चल जाता है कि क्या इन अंगों में कोई परेशानी है या ये सही हैं। यह व्यक्ति विदेश जाएगा या नहीं और अगर जाएगा तो कब जाएगा। शरीर में पानी का कारक भी चंद्रमा है। चंद्रमा के पर्वत से पता चल जाता है कि व्यक्ति के फेफड़ो में, पैरों में, जोड़ों में, रीढ़ की हड्डी में या किसी और स्थान पर पानी भर गया है या नहीं। श्वास, लीवर खराबी का भी और माता से भी इसको प्रेम मिलेगा या नहीं। क्या व्यक्ति में बिना मतलब की बाता ें म ें बहस करने की आदत ह ै विवाह का भी इस पर्वत से मालुम पड़ता है। बृहस्पति के पर्वत को दखे ा कर वह सभी बातें पता चलती हैं जो ज्योतिष शास्त्र ने बृहस्पति के विषय में बताई हैं। ज्योतिष शास्त्र बताता है कि बृहस्पति भाग्य का स्वामी है। बृहस्पति शासक है। बृहस्पति के पर्वत को देखकर पता चलता है कि यह व्यक्ति कितनी रोजी रोटी कमाता है। क्या यह व्यक्ति 40 हजार रुपये महीना कमाता है या 05 हजार रुपये या 15 हजार या एक लाख रुपये महीना कमाता है। बृहस्पति के पर्वत को देख कर पता चलता है कि ये व्यक्ति शासक या जज या एम. पी. , एम. एल. ए. बन सकता है या नहीं। बृहस्पति का पर्वत बताता है कि लड़की की ससुराल कैसी होगी, उसे ससुराल में सुख मिलेगा या नहीं। उसे पति से सुख मिलेगा या नहीं। लड़की के बृहस्पति के पर्वत पर ही सास, ससुर, जेठ, जेठानी, देवर, देवरानी आदि का स्थान है। बृहस्पति का पर्वत देख कर पता चल जाता है कि ये सभी लड़की को सुख देंगे या तंग करेंगे। व्यक्ति में कार्य करवाने की शक्ति है और उसमें सभी कार्यों को सही तरीके से करवाने का अनुशासन है। इसी प्रकार अन्य ग्रहों के पर्वत भी पूरी जानकारी देते हैं। हाथ में राहु के पर्वत को देख कर वह सभी बातें पता चलती है जो ज्योतिष शास्त्र राहु के विषय में बताता है। ज्योतिष शास्त्र में लिखा है कि राहु धोखेबाज है, राहु चोर है, राहु कर्ज चढ़ाता है। राहु के पर्वत को देख कर यह सभी बातें पता चलती हैं कि इस व्यक्ति को धोखा मिला है या नहीं, इसका रुपया मारा गया है या नहीं। यह कर्जदार है, इसको व्यापार में नुकसान हुआ है या नहीं। क्या यह झूठे मुकदमे में फंस गया है आदि। शनि धन का स्वामी है। शनि के पर्वत को देखकर व्यक्ति की धन संबंधी जानकारी मिल जाती है। बैंक बैलेंस शनि के पर्वत से ही पता चलता है। हमारे शरीर में शनि लातों, पैरों, घुटनों और स्नायु तंत्र का स्वामी है। शनि के पर्वत को देखते ही पता चल जाता है कि क्या इस व्यक्ति के घुटने खराब हो गये हैं, क्या इस की टांगों में दर्द है। इसका चलना-फिरना मुश्किल हो गया है या नहीं। स्नायु तंत्र की खराबी देख कर पता चलता है कि इस व्यक्ति को अधरंग या लकवा होने वाला है या नहीं। शनि से हम जान सकते हैं कि इंसान कितना स्वार्थी और उसके विचार कितने सही गलत हैं आदि। मंगल के पर्वत को देखकर पता चलता है कि इस के पास कितनी संपत्ति है। इसका मकान है या नहीं या इसका मकान कब बनगो। मगंल के पर्वत को दखोकर खनू की गर्मी का पता चलता है। व्यक्ति के गुस्से का भी पता चलता है। जो बच्चा पैदा होने वाला है, उसका और उसके पिता के हाथ के ग्रहों का सीधा संबंध होता है। बच्चे पर किस ग्रह का अधिक असर होगा, उसकी आदतें किस ग्रह के अनुसार होगी, उसका चेहरा किस ग्रह के अनुसार होगा, यह पिता का हाथ देख कर पता चल जाता है जो कि कुंडली के द्वारा बिलकुल भी संभव नहीं है। हाथ पर शरीर के सभी अंगों का स्थान है। हाथ पर नजर डालते ही इन सारे अंगों की बीमारियों के विषय में एक दम से पता चल जाता है परंतु कुंडली से इन सभी अंगों की बिमारियों का निश्चित रूप से और आसानी से नहीं पता चल पाता। इसके लिए बहुत अधिक गणित करनी पड़ती है। हमारे जीवन मं े किस गह्र का समय कौन से वर्ष में आऐगा और वह किस प्रकार का असर दिखलाएगा, यह सब बातें भी हाथ से पता चलती हैं जिसके अनुसार हम वर्तमान और भविष्य के विषय में जान सकते हैं।


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