नेत्र योग करें, स्ट्रेस फ्री रहें

नेत्र योग करें, स्ट्रेस फ्री रहें  

अपने ड्रोइंग रूम या बेडरूम की दीवार पर तीन आकारों में कागज पर अलग-अलग आकार के बिन्दु बना लें तथा इन्हें क्रमशः पहले बड़ा फिर छोटा और फिर उससे छोटा इस क्रम में रखें। दिन हो या रात जब कभी भी आपको फुर्सत मिले दीवार से करीब दो फुट की दूरी बनाएं और पालती मारकर सुखासन में बैठ जायें अब दोनों हाथों को घुटनों पर रख लें रीढ़ की हड्डी और गर्दन को बिल्कुल सीधा रखें तथा दोनों हाथों की मुठ्ठियों को भींच लें। तीन बार गहरी श्वांस लेकर छोड़े इससे आप तनाव रहित व रिलेक्स महसूस करेंगे। इसके पश्चात् बारी-बारी से तीनों बिन्दुओं पर गहरी नजर जमायें। एक बिन्दु पर कम से कम 30 सेकेण्ड, फिर दूसरे बिन्दु पर अन्ततः तीसरे बिन्दु को स्थिर नेत्रों से ध्यानपूर्वक निहारें। यह प्रक्रिया बिना पलकों को झपकाये करनी है। यह नेत्र-योग 15 से 20 मिनट प्रतिदिन करें। लाभ: इसके अनेक लाभ हैं- प्रथम तो यह कि इस नेत्र-योग को प्रतिदिन करने से 2-3 माह में आपका मूलाधर चक्र जागृत होने लगेगा, मन एकाग्र होगा, स्मरण शक्ति तेज होगी, मन तनाव रहित शान्त और आनन्दित रहने लगेगा, क्रोध नहीं आयेगा, निद्रा अच्छी आयेगी एवं इच्छा-शक्ति दृढ़ होगी। नेत्र योग से हृदय, कण्ड, भृकुटी के मध्य श्वास नली के ऊपरी भाग एवं आंखों की पलकों के पास जो हमारे (गोड़-प्राण) होते हैं वे शुद्धत्व विकार रहित होते हैं। नेत्र योेग करने से चश्मा हटेगा दूर व पास देखने की शक्ति बढ़ेगी। आंखें साफ रहेंगी और सबसे बड़ी बात नेत्र योग करने से आपकी आंखें अति प्रभावपूर्ण भाव प्राप्त करेंगी। नेत्र योग करने से आपके व्यक्तित्व में सकारात्मकता बढ़ेगी।


विघ्नहर्ता गणेश विशेषांक  सितम्बर 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के विघ्नहर्ता गणेश विशेषांक में गणपति के प्राकट्य की कथा, गणपति पूजन विधि, उच्छिष्ट गणपति पूजन, गणपति के विभिन्न स्वरूप, गणपति के विभिन्न रूपों की पूजा से दुःख निवारण, गणपति के प्रमुख तीर्थ स्थलों का परिचय, सर्वप्रथम गणपति पूजन क्यों? आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त एक जांबाज के दुःखद अंत की सत्यकथा, तारकासुर का वध, अंक ज्योतिष के रहस्य एवं दुःख निवारक शनि की भूमिका जैसे रोचक आलेख विशेष जानकारी से युक्त तो हैं ही साथ ही इनको पढ़ने से आप आनंदित भी महसूस करेंगे।

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