बारहवें भाव से नाम, यश व समृद्धि

बारहवें भाव से नाम, यश व समृद्धि  

बारहवां भाव नवम भाव से चतुर्थ है अर्थात भाग्य का सुख व संतोष। कालपुरुष की कुंडली में भी बारहवें भाव में मीन राशि आती है जिसका स्वामी गुरु एक शुभ ग्रह है। मीन राशि व बारहवां भाव मोक्ष स्थान है। मीन में ही शुक्र ग्रह उच्च का होता है। इसलिये बारहवें भाव से एक शुभ आशा की किरण की उम्मीद की जा सकती है। त्रिक भाव यानि बारहवें भाव से संबंधित ग्रहों की दशा में जातक से अनुशासित जीवन की आशा की जाती है ताकि शास्त्रों में बताये गये बारहवें भाव के अशुभ फलों से बचा जा सके। यदि एक बार जातक अपने शरीर, मन व आत्मा से अनुशासित जीवन जीने का संकल्प कर लेता है तो फिर उसे उन्नति करने से कोई नहीं रोक सकता। लेकिन च ूंकि बारहवां भाव खर्च का भी है तो जातक को नाम, यश व समृद्धि पाने के लिये कोई न कोई कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। उक्त वक्तव्य को निम्न प्रसिद्ध व्यक्तियों की कुंडलियों द्वारा आसानी से समझा जा सकता है- 1 जवाहर लाल नेहरु - 14.11.1889, 23ः06, बारहवें भाव से नाम, यश व समृद्धि डाॅ. संजय बुद्धिराजा, फरीदाबाद इलाहाबाद - कर्क लग्न की उनकी कुंडली में चंद्रमा लग्न में व सूर्य पंचम में स्थित है जिस कारण लग्न व च ंद्रमा से बारहवें भाव का स्वामी बुध हुआ जो चतुर्थ भाव में है और सूर्य से बारहवें भाव का स्वामी शुक्र हुआ जो भी चतुर्थ भाव में है। इस प्रकार बुध व शुक्र का युति संबंध बना जिस कारण वे विश्व भर में प्रसिद्ध व्यक्ति व भारत के प्रधानमंत्री भी रहे। 2 इंदिरा गांधी - 19.11.1917, 21ः11, इलाहाबाद - कर्क लग्न की कंुडली में चंद्रमा सप्तम भाव में व सूर्य पंचम भाव में स्थित है। इस प्रकार इनसे बारहवें भाव के स्वामी हो गये - बुध, गुरु व शुक्र। जन्म कुंडली में गुरु एकादश में व शुक्र छठे भाव में स्थित होकर राशि परिवर्तन कर संबंध बना रहे हैं। गुरु व बुध एक द ूसरे से सप्तम हैं। उनके नाम, यश व समृद्धि के बारे में कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है। गुरु/शुक्र की दशा में वे पहली बार मंत्री बनीं तथा गुरु/सूर्य की दशा में वे भारत की प्रधानमंत्री बनी थीं। 3 राजीव गांधी - 20.08.1944, 08ः11, मुंबई - सिंह लग्न की उनकी कुंडली में लग्न में ही सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु व शुक्र स्थित हैं जिस कारण लग्न, चंद्र व सूर्य से बारहवें भाव का एक ही स्वामी चंद्रमा हुआ। लग्न में चंद्रमा (बारहवें भाव का स्वामी) पर इतने सारे ग्रहों के प्रभाव के कारण ही वे आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक थे व लोकप्रिय नेता हुये। 4 चै. चरण सिंह - 23.12.1902, 07ः23, मेरठ - धनु लग्न की उनकी कुंडली में लग्न में ही सूर्य व दशम में च ंद्रमा स्थित है। इसलिये लग्न व सूर्य से बारहवें भाव का स्वामी मंगल हुआ जो दशम भाव में है। चंद्रमा से बारहवें भाव का स्वामी सूर्य हुआ जो लग्न में स्थित है। यहां मंगल की चतुर्थ दृष्टि सूर्य पर है। वे किसानों के एक लोकप्रिय नेता थे जो बाद में भारत के प्रधानमंत्री भी बने। 5 नारायण दत्त तिवारी - 18.10.1925, 04ः50, नैनीताल - कन्या लग्न की उनकी कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य व च ंद्र स्थित हैं। इसलिये लग्न से बारहवें भाव का स्वामी सूर्य हुआ जो द्वितीय भाव में है और सूर्य व च ंद्र से बारहवें भाव का स्वामी बुध हुआ जो भी द्वितीय भाव में ही है। इस प्रकार सूर्य व बुध का युति संबध बन रहा है। कहीं-कहीं उनका जन्म समय शाम के 4 बजे का भी कहा गया है जिसके अनुसार उनकी कुंभ लग्न की कुंडली बनती है। यहां भी यदि लग्न से बारहवें भाव के स्वामी शनि को लिया जाये तो वह भी सूर्य व च ंद्र से बारहवें भाव के स्वामी सूर्य से युति करके नवम भाव में बैठा है। तिवारी जी अपने प्रभावशाली भाषण् ाों के कारण प्रसिद्ध थे जो उन्हें वाणी के कारक बुध (सूर्य व चंद्रमा से बारहवां) के कारण मिली। 6 मोहम्मद अली - 17.01.1942, 18ः35, अमेरिका - कर्क लग्न की उनकी कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य व च ंद्र स्थित हैं। इसलिये लग्न से बारहवें भाव का स्वामी बुध हुआ जो सप्तम भाव में ही है। सूर्य व च ंद्र से बारहवें भाव का स्वामी गुरु हुआ जो एकादश भाव में स्थित होकर सप्तम भाव में बुध पर दृष्टि डाल रहा है। जातक विश्व प्रसिद्ध मुक्केबाज रहे हैं और मुक्केबाजी की दुनिया में उनके नाम का डंका बजता था। 7 एक चार्टर्ड एकाउंटेंट - 05.03.1966, 20ः40, फरीदाबाद - कन्या लग्न की इनकी कुंडली में चंद्र बारहवें भाव में व सूर्य छठे भाव में है। इसलिये लग्न से बारहवें भाव का स्वामी सूर्य (छठे भाव में), चंद्र से बारहवें भाव का स्वामी चंद्र (बारहवें भाव में) व सूर्य से बारहवें भाव का स्वामी शनि (छठे भाव में) हुआ। यहां चंद्र बारहवें भाव से सूर्य व शनि दोनों को छठे भाव में पूर्ण दृष्टि दे रहा है। जातक उच्च शिक्षा प्राप्त व प्रसिद्ध व धनी चार्टर्ड एकाउंटेट हैं। 8 एक नृत्यांगना - 04. 02.1938, 07ः40, लखनऊ - कुंभ लग्न की उनकी कुंडली में चंद्र द्वितीय भाव में व सूर्य द्वादश भाव में हैं जिस कारण लग्न से बारहवें भाव का स्वामी शनि है जो द्वितीय भाव में है, चंद्र से बारहवें भाव का स्वामी भी शनि है व सूर्य से बारहवें भाव का स्वामी ग्रह गुरु है जो बारहवें भाव में स्थित है। यहां गुरु व शनि का संब ंध दृष्टि से नहीं बल्कि एक दूसरे की राशियों में स्थित होने से बन रहा है। गुरु मकर में व शनि मीन राशि में स्थित है। जातिका एक कुशल, गुणी व प्रसिद्ध नृत्यांगना रही हैं। 9 धीरेन्द्र ब्रह्मचारी - 13.02.1929, 04ः00, मध् ाुबनी बिहार - धनु लग्न की उनकी कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य व चतुर्थ भाव में चंद्र स्थित हैं। इसलिये लग्न, चंद्र व सूर्य से बारहवें भाव के स्वामी हुये - म ंगल, शनि व शनि। यहां म ंगल छठे भाव में स्थित होकर लग्न में स्थित शनि पर अष्टम दृष्टि डाल रहा है जिस कारण जातक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निकटतम सलाहकारों में से एक थे और टी.वी. पर योग सिखाया करते थे।


विवाह एवं मेलापक विशेषांक  अप्रैल 2015

रिसर्च जर्नल आॅफ एस्ट्रोलाॅजी के इस विवाह एवं मेलापक विषेषांक में जिन लेखों को शामिल किया गया है उनमें से एस्ट्रोलाॅजी एण्ड मैरिज, सप्तमेष के शुभाषुभ परिणाम, दषविध मेलापक के अतिरिक्त अन्य विषयों जैसे बर्थ टाइम रैक्टीफिकेषन (के.पी.), कॅरियर में उन्नति के लिए एस्ट्राॅवास्तु का महत्व, द्वादष भाव से यष और समृद्धि का विचार, शकुन और प्रष्न ज्योतिष, राहु केतु का कारकत्व, कैप्टेन कूल धोनी का अंकषास्त्र से विष्लेषण तथा जन्मकुण्डली से जन्मसमय, दिनांक, मास व वर्ष ज्ञात करने की विधि को शामिल किया गया है। साइंटिफिक फाॅरमेषन आॅफ हैण्ड नाम से शोधपरक सम्पादकीय रोचक व विषेष ज्ञानवर्धक है।

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