रोगों में रंगों का चमत्कार

रोगों में रंगों का चमत्कार  

रोगों में रंगों का चमत्कार आचार्य दलीप कुमार मानव जीवन में रंगों का बहुत महत्व है। रंग हमारे मन और शरीर को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं, इसीलिए जीवन में रंगों का सही संतुलन बनाने के लिए उनका चयन बहुत सावधानीपूर्वक करना चाहिए। हमारे शरीर के सभी अवयवों का रंगों से संबंध है। यदि मानव शरीर में रासायनिक द्रव्यों के कारण रंगों का असंतुलन हो जाता है तो शरीर में बीमारी उत्पन्न हो जाती है। रंगों द्वारा चिकित्सा के लिए संबंधित रंग की कांच की बोतल में तीन-चैथाई शुद्ध जल भरकर 6-8 घंटे धूप में रखकर शाम को उस जल को पीने से जातक को लाभ प्राप्त होता है। लाल रंग: लाल रंग के इस्तेमाल से ज्वर, दमा, कब्ज, चेचक, जोड़ों का दर्द, सिरदर्द, खांसी, दमा, निमोनिया, मलेरिया, गर्दन व कमर दर्द इत्यादि रोगों में लाभ प्राप्त होता है, घावों को भी ठीक करता है। लेकिन गर्म तासीर के कारण लाल रंग के अधिक उपयोग से फोड़े-फंुसी, खुजली व उच्च रक्तचाप इत्यादि हो सकते हैं। नारंगी रंग: नारंगी रंग बुखार, मानसिक पीड़ा, पागलपन, वात रोग, खांसी, निमोनिया, दमा, क्षय, अस्थमा, खूनी दस्त, अनिद्रा व सांस संबंधी रोग, कम सुनाई देना, पथरी, मूत्र रोग इत्यादि समस्याओं में लाभदायक होता है। जीवन में खुशियां प्राप्त होती हैं, बुद्धि का विकास होता है, नारंगी रंग भूख बढ़ाता है, सर्दी को दूर करता है। पेट की गैस कम करता है तथा अम्लता दूर करता है। स्त्रियों के मासिक स्राव संबंधी परेशानियों को भी दूर करता है। यह रंग एसिडीटी, स्नायु दुर्बलता, पक्षाघात, गठिया इत्यादि में भी लाभदायक होता है। पीला रंगा: पीला रंग पाचन शक्ति को बढ़ाता है तथा चोट, दुर्घटना, खून बहना, कब्ज, पिŸा की अधिकता व उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करने मंे बहुत सहायक होता है तथा दिमाग को तेज करता है। हरा रंग: हरे रंग में आक्सीजन, कैल्शियम आदि होते हैं जिससे टाईफाइड, नैत्र रोग, खांसी, जुकाम, बवासीर, मधुमेह इत्यादि में लाभ पहुंचता है। नीला रंग: नीला रंग अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, हैजा, बुखार, सिरदर्द, गले से संबंधित बीमारियां, आमाशय के रोग, योनी की जलन, प्रदर रोग, दांतों में दर्द, पायरिया, हिस्टीरिया, डायरिया, चर्म रोग, कीटाणुओं के काटने पर जलन, मुंह में छाले, मसूड़ों में दर्द इत्यादि रोगों के अशुभ प्रभाव को कम करता है। नीले रंग के सेवन से स्नायु तंत्र, मिर्गी, जख्म, कुष्ठ रोग व मानसिक पीड़ा में कमी आती है। जातक को बुखार, जलन या शरीर में पिŸा इत्यादि में भी लाभ प्राप्त होता है। आसमानी रंग: आसमानी रंग के उपयोग से स्नायु की ताकत बढ़ती है, खून का स्राव रुकता है, प्यास कम लगती है। सिर व बालों के रोग दूर होते हैं। बैगनी रंग: बैगनी रंग के उपयोग से खून में लाल कण बढ़ते हैं, बुखार, योनी, प्रदर रोगों में लाभ, गले की बीमारियां दूर होती हैं, स्नायु तंत्र मजबूत होता है। रंग-चिकित्सा में रंगों के सावधानीपूर्वक चयन और उपयोग से मानव लाभ प्राप्त कर अपने शरीर को निरोगी बना सकते हैं। नारंगी रंग बुखार, मानसिक पीड़ा, पागलपन, वात रोग, खांसी, निमोनिया, दमा, क्षय, अस्थमा, खूनी दस्त, अनिद्रा व सांस संबंधी रोग, कम सुनाई देना, पथरी, मूत्र रोग इत्यादि समस्याओं में लाभदायक होता है। जीवन में खुशियां प्राप्त होती हैं, बुद्धि का विकास होता है



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