मंत्रों से समस्त बाधाओं की निवृत्ति

मंत्रों से समस्त बाधाओं की निवृत्ति  

Û श्री गणेश मंत्र ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।। कार्य को प्रारंभ करने से पहले यदि इस मंत्र का 3 बार उच्चारण कर लें तो निश्चित कार्य निर्विघ्न समाप्त होता है। Û श्री गणेश गायत्री मंत्र ऊँ एकदन्ताय विùहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात्। इस मंत्र का जप करने से श्री गणेश जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। Û श्री गणेश बीज मंत्र ऊँ गं गणपतये नमः ।। इस मंत्र का जप करने से श्री गणेश जी बुद्धि प्रदान करते हैं। श्री गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है। Û श्री शनि वैदिक मंत्र ऊँ शन्नो देवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंयो रभिस्र वन्तुनः।। निम्न मंत्रों का 23000 हजार जप करने से साढ़ेसाती शनि का दुष्प्रभाव शांत हो जाता है। Û श्री शनि पौराणिक मंत्र ऊँ नीलान्जन समाभासं, रवि पुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं, तं नमामि शनैश्चरम्।। इस मंत्र का जप करने से शनि की प्रसन्नता प्राप्त होती है। Û श्री नवग्रह मंत्र ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु।। इस मंत्र का प्रातःकाल पाठ करने से नवग्रह की कृपा प्राप्त होती है। Û श्री सूर्य लघु मंत्र ऊँ घृणिः सूर्याय नमः।। यदि जन्मकुंडली या गोचर में सूर्य का प्रभाव अशुभ हो तो इस मंत्र का 10,000 हजार जप करें तो निश्चित रूप से सूर्य जन्य दुष्प्रभाव शांत हो जाता है। Û श्री चंद्र लघु मंत्र ऊँ सों सोमाय नमः।। इस मंत्र का 11,000 हजार जप करने से चंद्रजन्य अरिष्ट दूर होता है। Û श्री मंगल लघु मंत्र: ऊँ अं अंगारकाय नमः।। इस मंत्र का 10,000 हजार जप करने से मंगल की प्रशन्नता प्राप्त होती है। Û श्री बुध लघु मंत्र: ऊँ बुं बुधाय नमः।। इस मंत्र का 8000 हजार जप करने से बुध जन्य सकल अरिष्ट दूर होता है। Û श्री गुरु लघु मंत्र ऊँ गं गुरुवे नमः।। इस मंत्र का 19,000 हजार जप करने से श्री गुरु जन्य अरिष्ट दूर होते हैं। Û श्री शुक्र लघु मंत्र ऊँ शुं शुक्राय नमः।। इस मंत्र का 11,000 हजार जप करने से श्री शुक्रजन्य अरिष्टों की शांति होती है। Û श्री शनि लघु मंत्र ऊँ शं शनैश्चराय नमः।। इस मंत्र का 23,000 हजार जप करने से निश्चित रूप से शनि की कृपा प्राप्त होती है। Û श्री राहु लघु मंत्र ऊँ रां राहवे नमः।। इस मंत्र का 18,000 जप करने से राहु प्रसन्न होते हैं। Û श्री केतु लघु मंत्र ऊँ कें केतवे नमः।। इस मंत्र का 7,000 हजार जप करने से केतु प्रसन्न होते हैं। Û श्री नवग्रह तांत्रिक मंत्र नीचे लिखे तांत्रिक मंत्रों का विधि विधान पूर्वक जो जप संख्या लिखी है उतनी संख्या में जप करने से निश्चित रूप से तुरंत आराम मिलता है। परंतु शास्त्रों में आया है कि कलियुग में चार गुना जप करने से सफलता प्राप्त होती है यथा- ‘‘कलौ चापि चतुर्गुणा’’ यानि जो जप संख्या लिखी है उसका चार गुना जप करने से निश्चित रूप से कष्टों का निवारण हो जाता है। सूर्य: ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः।। (10,000 हजार) चंद्र: ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः।। (11,000 हजार) मंगल: ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।। (10,000 हजार) बुध: ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः।। (8,000 हजार) गुरु: ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।। (19,000 हजार) शुक्र: ऊँ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः।। (11,000 हजार) शनि: ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।। (23,000 हजार) राहु: ऊँ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।। (18,000 हजार) केतु: ऊँ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।। (7,000 हजार) निम्न मंत्रों में से किसी एक का प्रतिदिन 108 बार जप करने से मां, महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। मंत्र इस प्रकार है। Û श्री महालक्ष्मी पुराणोक्त मंत्र या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरुपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमोनमः।। Û श्री महालक्ष्मी बीज मंत्र ऊँ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।। Û श्री त्रिपुरसंुंदरी बीज मंत्र ऊँ श्रीं श्रीं ललिता महात्रिपुरसुन्दर्यै श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।। Û श्री महालक्ष्मी महा मंत्र ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद। श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्म्यै नमः।। Û श्री महालक्ष्मी गायत्री मंत्र ऊँ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्।। Û श्री शिव गायत्री मंत्र: ऊँ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्। इस मंत्र का जप करने से श्री शिव की कृपा प्राप्त होती है। Û गायत्री मंत्र: ऊँ भूर्भवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गोदेवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्।। इस मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जप करने से मानसिक शांति तेज, ओज की वृद्धि तथा सूर्य की कृपा प्राप्त होती है। Û पुत्र प्राप्ति मंत्र ऊँ देवकीसुतगोविंद वासुदेवजगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः।। यदि किसी के यहां संतान न हो रही हो तो नीचे लिखे मंत्र को श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा भक्ति के साथ विधि विधान से 125,000 सवा लाख जप करने से निश्चित पुत्र की प्राप्ति होती है। Û पत्नी प्राप्ति मंत्र ऊँ पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्।। इस मंत्र का दुर्गाजी की प्रतिमा के सामने सवा लाख जप करने से सुंदर पत्नी की प्राप्ति होती है। Û पति प्राप्ति मंत्र नीचे लिखे मंत्रों में से किसी एक मंत्र का भी श्रद्धाभक्ति से दुर्गा मां के समक्ष प्रार्थना करने या जप करने पर सुंदर पति की प्राप्ति होती है। ऊँ कात्यायनि महामाये महायोगिन्य धीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नमः। हे गौरि शंकरार्धांगि! यथा त्वं शंकरप्रिया। तथा मां कुरु कल्याणि! कान्तकांतां सुदुर्लभाम्।। Û रोग नाशक महामृत्यंुजय बीज मंत्र ऊँ ह्रौं जूं सः ऊँ ।। इस मंत्र का नित्य 108 बार जप करने से शरीर स्वस्थ रहता है। Û रोग नाशक महामृत्यंुजय मंत्र ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृऽतात्।। इस मंत्र का प्रतिदिन एक माला जप करने से स्वास्थ्य अच्छा तथा घर में धन धान्य की वृद्धि होती है। Û रोग नाशक षट् प्रणव युक्त महामृत्युंजय मंत्र ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृऽतात्।।्।। इस मंत्र का सवालाख 1,25,000 जप करने से अकालमृत्यु आदि बाधायें शांत होती है। Û रोग नाशक मंत्र रोगानशेषानपहंसि तुष्टा, रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।। इस मंत्र से समस्त रोगों की शांति होती है। Û संपूर्ण विद्या प्राप्ति मंत्र ऊँ विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः, स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्, का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः।। Û विद्या प्राप्ति सरस्वती मंत्र ऊँ ऐं महासरस्वत्यै नमः।। Û विद्या प्राप्ति मंत्र ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै नमः।। Û शत्रुनाशक बंगलामुखी मंत्र ऊँ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय। जिह्वाम् कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ऊँ स्वाहा।। Û शत्रु नाशक बटुक भैरव मंत्र ऊँ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊँ स्वाहा।। Û महा शिव मंत्र ऊँ नमः शिवाय।। Û श्री हनुमान बीज मंत्र ऊँ हं हनुमते नमः।। Û श्री हनुमान मंत्र ऊँ हं हनुमते रूद्रात्मकाय हुं फट् स्वाहा।। Û श्री मन्नारायण मंत्र ऊँ ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायणाय नमः।। Û श्री नारायण बीज मंत्र ऊँ नमो नारायणाय।। Û श्री विष्णु मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय।। Û श्री कालसर्प मंत्र ऊँ क्रौं नमो अस्तु सर्पेभ्यो कालसर्प शांति कुरु-कुरु स्वाहा।। Û श्री सर्प वैदिक मंत्र ऊँ नमोस्तु सर्पेब्भ्यो येके च पृथिवीमनु। ये अन्तरिक्षे ये दिवितेभ्यः सर्पेभ्यो नमः।। Û श्री सर्प बीज मंत्र ऊँ सर्पेभ्यो नमः।। Û सर्व बाधा मुक्ति श्री शक्ति मंत्र ऊँ सर्वाबाधा-विनिर्मुक्तो, धनधान्यसुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन् भविष्यति न संशयः।। Û सर्व कल्याणी श्री शक्ति मंत्र ऊँ सर्वमंगल मंगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि, नारायणि नमोऽस्तुते।। Û शक्ति दायिनी श्री शक्ति मंत्र ऊँ सृष्टिस्थिति विनाशानां शक्तिभूते सनातनि। गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तुते।। Û समस्या निदान शक्ति मंत्र ऊँ शरणागतदीनार्त परित्राणपरायणे। सर्वस्यार्ति हरे देवि, नारायणि नमोऽस्तुते।। Û भय निवारण शक्ति मंत्र ऊँ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। भयेभ्यस्त्राहिनो देवि, दुर्गेदेवि नमोऽस्तुते।। Û सुरक्षा शक्ति मंत्र ऊँ शूलेन पाहिनो देवि, पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन नः पाहि, चापज्यानि स्वनेन च।। Û सौभाग्य शक्ति मंत्र ऊँ देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि, यशो देहि द्विषो जहि।। Û महामारी निवारण शक्ति मंत्र ऊँ जयन्ती मंगला काली, भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिावा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।। Û पाप मुक्ति शक्ति मंत्र ऊँ हिनस्ति दैत्य तेजांसि, स्वनेना पूर्यया जगत्। सा घण्टा पातु नो देवि । पापेभ्यो नः सुतानिव।। Û मुक्ति प्राप्ति शक्ति मंत्र ऊँ विधेहि देवि कल्याणं, विधेहि परमां श्रियम्। रूपं देहि जयं देहि, यशो देहि द्विषो जहि।। Û शत्रुनिष्फलीकरण शक्ति मंत्र ऊ ततो निशुम्भः सम्प्राप्य, चेतनामात्तकार्मुकः। आजघान शरैर्देवीं कालीं केसरिणं तथा।। Û श्री दुर्गा मंत्र ऊँ दुं दुर्गायै नमः।। Û श्री चामुण्ड़ा मंत्र ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै।। Û श्री मातंगी मंत्र ऊँ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।। Û वशीकरण मंत्र ऊँ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।। Û वशीकरण मंत्र ऊँ महामाया हरेच्चैषा यया सम्मोह्यते जगत्। ज्ञानिनामपि चेतांसि, देवी भगवती हि सा।। Û वशीकरण मंत्र ऊँ नमो महायक्षिण्यै मम पतिं मे वशं कुरू कुरू स्वाहा।।


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