संपूर्ण रोगनाशक महामृत्युंजय यंत्र

संपूर्ण रोगनाशक महामृत्युंजय यंत्र  

शरीरं व्याधि मंदिरम् इस प्राचीन शास्त्र वाक्य के अनुसार हमारा शरीर रोगों का घर है। संपूर्ण जीवन काल में मनुष्य किसी न किसी व्याधि से ग्रसित रहता है। चाहे शारीरिक रोग हों या मानसिक, हमारे शरीर पर अपना प्रभाव डालते हैं। विज्ञान ने निस्संदेह बड़ी उन्नति की है और उसकी उपलब्धियां और आविष्कार मानव सभ्यता के विकास में बहुत सहायक सिद्ध हुए हैं। किंतु दूसरी तरफ इन उपलब्धियों का मानव जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ा है और परिणामतः आज प्रायः हर व्यक्ति किसी मानसिक या शारीरिक रोग से ग्रस्त है। आज नई-नई और असाध्य बीमारियां जन्म ले रही हैं जो मानव जीवन के लिए चुनौती बन गई हैं। ऐसे में जहां आधुनिक चिकित्सा प्रणाली अक्षम होती है, वहंा हमारे प्राचीन ऋषियों के द्वारा विकसित यंत्र, मंत्र और ज्योतिष चिकित्सा प्रणालियां काम करती हैं। हमारे वेद शास्त्रों में सभी रोगों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय यंत्र और मंत्र की साधना का विशेष महत्व है। इस यंत्र के नित्य दर्शन-पूजन से कोई भी व्यक्ति जीवन में आरोग्य प्राप्त कर सकता है। संपूर्ण रोगनाशक महामृत्युंजय यंत्र के नित्य पूजन-दर्शन से व्यक्ति मन और शरीर से स्वस्थ रहता है। यंत्र के मध्य स्थापित महामृत्युंजय यंत्र के चारों ओर अन्य यंत्र स्थापित कर इसकी शक्ति में वृद्धि की गई है। इसकी साधना से रोग से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ्य उत्तम रहता है। इसमें स्थापित अन्य यंत्रों की अपनी-अपनी महिमा है। दुर्गा यंत्र मां दुर्गा का प्रतीक है। इसके दर्शन-पूजन से पारिवारिक सुख तथा शांति प्राप्त होती है। गीता यंत्र के दर्शन मात्र से भगवान कृष्ण मनुष्य की काम, क्रोध और लोभ से रक्षा करते ह और उसमें सतोगुण का संचार होता है। महाकाली यंत्र साधक की अकाल मृत्यु से रक्षा करता है। मत्स्य यंत्र के नित्य दर्शन से शत्रुओं के षडयंत्र से रक्षा होती है। कालसर्प यंत्र से जीवन में राहु, केतु जनित शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है। हनुमान यंत्र की साधना से शारीरिक शक्ति प्रबल होती है, जिससे व्यक्ति को रोग होने की संभावना नहीं रहती है। वाहनदुर्घटनानाशक यंत्र व्यक्ति की दुर्घटना से रक्षा करता है। शनि यंत्र की साधना से असाध्य बीमारियों से रक्षा होती है। सूर्य यंत्र के दर्शन मात्र से व्यक्ति नीरोग और उसका जीवन सुखमय रहता है। नवग्रह यंत्र के दर्शन-पूजन से जीवन में ग्रह दोष से होने वाली व्याधियों से मुक्ति मिलती है। गायत्री यंत्र की साधना से मन हमेशा शांत रहता है और मानसिक शक्ति दृढ़ बनी रहती है। गणपति यंत्र के पूजन से व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम रहता है और किसी रोग की संभावना नहीं रहती है। पूजन विधि: सोमवार अथवा गुरुवार को प्रातःकाल के समय स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। यंत्र को गंगाजल से धोकर और लकड़ी की चैकी पर लाल या सफेद स्वच्छ कपड़ा बिछाकर उस पर यंत्र स्थापित करके उसका चंदन, अक्षत, धूप, दीप से पूजन करें। तत्पश्चात यंत्र को घर के पूजा स्थान में अथवा पूर्व-उत्तर दिशा में स्थापित करें। शीघ्र फलप्राप्ति के लिए अपनी सुविधा के अनुसार निम्न मंत्रों में से किसी एक का नित्य एक माला जप करें। मंत्र: ¬ नमः शिवाय ¬ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिवबंधनान्मृत्योर्मुक्षीयमामृतात्।


पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  जून 2006

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