ग्रहों एवं दिशाओं से संबंधित व्यवसाय वास्तु में प्रत्येक दिशा किसी न किसी ग्रह द्वारा शासित होती है। अतः किसी भी व्यवसाय को तत्संबंधी दिशाओं एवं ग्रहों के अनुकूल रहने पर विशेष लाभ मिलता है। प्र0-पूर्व दिशा में किस तरह का व्यवसाय करना चाहिए ? उ0- ग्रहों में सूर्य पूर्व दिशा का स्वामी होता है।दवा, औषधि आदि के लिए पूर्व की दिशा सबसे उपर्युक्त है।दवाईयां उतर एवं पूर्व के रैक पर रखें। उतर-पूर्व के निकट सूर्य की जीवनदायिनी किरणें सर्वप्रथम पड़ती है जो कि दवाईयां को ऊर्जापूर्ण बनाए रखती है जिनके सेवन से मनुष्य शीघ्रताशीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है। आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाओं को जिनका संबंध सूर्य ग्रह से है, अतः पूर्व दिशा की रैक पर रखना लाभप्रद होता है। इस तरह के भूखंड पर ऊनी वस्त्र, अनाज की आढ़त, आटा पीसने की चक्की तथा आटा मिलों का कार्य काफी लाभप्रद होता है। प्र0-उत्तर-पूर्व दिशा में किस तरह का व्यवसाय या कार्य करना चाहिए? उ0-उत्तर-पूर्व दिशा का स्वामी ग्रह गुरु है जो कि आध्यात्मिक एवं सात्विक विचारों के प्रणेता हैं। उतर-पूर्व दिशा अभिमुख भूखंड शिक्षक, प्राध्यापक, पुराणवेत्ता, धर्मोपदेशक, पुजारी, धर्मप्रमुख, प्राच्य एवं गुप्त विद्याओं के जानकार, न्यायाधीश, वकील, शासन से संबंधित कार्य करने वाले, बैंकिंग व्यवस्था से संबंधित कार्य, धार्मिक संस्थान, ज्योतिष से संबंधित कार्यों के लिए उत्तर-पूर्व की दिशा विशेष लाभप्रद होती है। आध्यात्मिक ग्रंथों की छपाई के कार्य के लिए भी यह दिशा विशेष लाभकारी होती है। साथ ही बिजली के पंखे तथा पंखों की फैक्ट्री का कार्य भी उत्तर-पूर्व दिशा अभिमुख भूखंड पर करना विशेष लाभप्रद होता है। ज्योतिष संबंधी कार्य पर, देव गुरू बृहस्पति और मनस चेतना के कारक ग्रह बुध का प्रभाव होता है। इसलिए ज्योतिष कार्यालय भूखंड के ईशान या उत्तर के क्षेत्र में रखना लाभप्रद होता है। ज्योतिष कार्यालय में हल्के पीले और हरे रंग का उपयोग अधिक से अधिक करना चाहिए। ज्योतिषी के बैठने के लिए कुर्सी का रंग हरा या पीला लाभप्रद होता है। इन्हें पूर्व या उत्तर की तरफ मुख कर कार्य करना चाहिए। कार्यालय में ज्योतिषी के दायें हाथ की तरफ किताब एवं पंचांग आदि रखना चाहिए। कार्यालय के उत्तर-पूर्व में मां सरस्वती, लक्ष्मी एवं गणेश का यंत्र तथा तस्वीर रखना चाहिए। प्र0-उत्तर दिशा में किस तरह का व्यवसाय या कार्य करना चाहिए ? उ0-उत्तर दिशा का ग्रह अधिपति बुध है जो मनस चेतना का कारक ग्रह है। उत्तर दिशा अभिमुख भूखंड पर ज्योतिष संबंधित कार्य या व्यवसाय काफी लाभप्रद होता है। धार्मिक ग्रंथ, काव्य लेखन,ं संपादन, दलाली, कमीशन, कम्प्यूटर इंजीनियर, चार्टर्ड एकाउंटेंट, बिजनेस मैंनेजमेंट हेतु बुध का शुभ स्थिति में रहना अच्छा होता है। बुध का संबंध हिसाब-किताब से भी है। अतः गणित संबंधित कार्य भी इस तरह के भूखंड पर शुभफलप्रद होता है। डाक-तार विभाग, कला, इलेक्ट्रोनिक से संबंधित कार्य, आयात-निर्यात, स्टेशनरी, वास्तुविद्, रेडियो और टेलीविजन विभाग के लिए उत्तर दिशा अभिमुख भूखंड को अच्छा माना जाता है। टेलीविजन. तथा रेडियो का संबंध बुध से है, क्योंकि जिन वस्तुओं से अपने आप आवाज पैदा होती है, वह बुध की कारक वस्तुएं होती है। जनरल स्टोर की दुकान, पंसारी की दुकान, परचून की दुकान तथा कपडें की छपाई से संबंधित कार्य हेतु भी उत्तर दिशा शुभ फलदायी होती है। प्र0- जलाषय एवं फव्वारे घर में लगाने से क्या लाभ होता है ? उ0- बड़े भवन, बहुमंजिला भवन या व्यावसायिक भवन में जल संबंधी दोष को दूर या कम करने के लिए जलाषय एवं फव्वारांे को व्यवस्थित कर के लगाया जाता है। घनागमन के प्रतीक फव्वारों एवं जलाषयों को बड़ी सूझ-बूझ के साथ लगाया जाता है क्योंकि यदि पानी का निकास गलत ढंग से हो, तो घर का सारा धन गलत ढंग से चला जायेगा।


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