लाल किताब एवं ग्रह दोष के चमत्कारिक उपाय

लाल किताब एवं ग्रह दोष के चमत्कारिक उपाय  

लाल किताब एवं ग्रह दोष के चमत्कारिक उपाय रंजू नारंग ल किताब एक ऐसा ग्रंथ है जो प्राचीन भारतीय ज्योतिष से बहुत कुछ भिन्न होने पर भी ज्योतिष के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। मूल रूप से उर्दू में लिखी गई है। पंजाब प्रदेश के विद्वान ज्योतिष मर्मज्ञों ने लाल किताब के सरल उपायों का गहन अध्ययन कर उन्हें प्रकाशित किया और जन सामान्य के लिए उपयोगी बनाया। ग्रहों को अनुकूल बनाने के लिए इसमें वर्णित उपाय बहुत उपयोगी सिद्ध हुए हैं। कुछ उपाय हमारी परंपराओं में भी रचे बसे हैं। उ द ा ह र ण् ा स् व रू प कन्याओं को वस्त्र एवं भोजन आदि करवा कर प्रसन्न रखना, बहन बेटी को उपहार में मिठाई देना, मीठा खाकर घर से निकलना, गाय कुत्ता, कौआ बंदर आदि को भोजन देना। परंपरागत ज्योतिष के आधार पर बनी जन्मकुंडली तथा लाल किताब के अनुसार बनी कुंडली में अंतर स्पष्ट होना चाहिए। इस कुंडली में जहां लग्न लिखा है वहां 1 का अंक लिखकर बाईं ओर चलते हुए 12 तक के अंक पूरे करें और ग्रहों को वहीं रहने दें जहां वे जातक की कुंडली में लिखे हैं। इस प्रकार कुंडली लाल किताब के अनुरूप हो जाएगी। जहां 1 का अंक लिखा है वह कुंडली का पहला भाव कहलाता है। इसी क्रमानुसार कुंडली के 12 भाव होते हैं। लाल किताब में कुंडली भावों को ‘खाना’ व ‘घर’ कहा गया है। 1 से 12 तक की राशि क्रमशः मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ, मीन राशियों के नामों से जाने जाते हैं। लाल किताब के अनुसार किसी भी संबंधित ग्रह की महादशा में जो अंतर्दशा चल रही हो उस ग्रह को अच्छे घर में स्थापित कर देने से मनचाहा फल प्राप्त किया जा सकता है। यदि वह अपने पक्के घर का नहीं हो तो अवश्य ही फल देगा। ग्रहों को अलग-अलग भावों में पहुंचाने की विधि इस प्रकार है। जिस ग्रह को पहले घर में पहुंचाना हो उसकी चीजें गले में धारण करनी चाहिए। जिस ग्रह को दूसरे भाव में पहुंचाना हो उसकी चीजें मंदिर या गुरुद्वारे में रखनी चाहिए। जिस ग्रह को तीसरे भाव में पहुंचाना हो उसकी चीजें नग के रूप में या धातु के रूप में हाथ में धारण करनी चाहिए। जिस ग्रह को चैथे भाव में पहुंचाना हो उसकी चीजें बहते पानी में प्रवाहित करना चाहिए। जिस ग्रह को पांचवें घर में पहुंचाना हो उसकी चीजें स्कूल में देनी चाहिए। जिस ग्रह को छठे भाव में पहुंचाना हो उसकी चीजें कुएं में डालनी चाहिए। जिस ग्रह को सातवें घर में पहुंचाना हो उसकी चीजें जमीन के नीचे दबानी चाहिए। जिस ग्रह को आठवें घर में पहुंचाना हो उसकी चीजें श्मशान में दबानी चाहिए। जिस ग्रह को नौवंे घर में पहुंचाना हो उसकी चीज धारण करनी चाहिए। जिस ग्रह को दसवें घर में पहुंचाना हो उसकी चीजें पिता को खिलानी या पहनानी अथवा सरकारी कार्यालय के समीप जमीन में गाड़नी चाहिए जहां उस भवन की छाया पड़ रही है। जिस ग्रह को ग्यारहवें भाव में पहुंचाना हो उसका किसी भी तरह से उपाय नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस भाव में कोई भी ग्रह उच्च या नीच का नहीं होता है। जिस ग्रह को बारहवें भाव में पहुंचाना हो उस ग्रह की चीजें अपने घर कीे छत पर रखनी चाहिए। इसके अतिरिक्त यदि कुंडली के ग्रह अथवा गोचर ग्रह अनिष्ट फल दे रहें हो तो लाल किताब के उपायों से ग्रह-दोष तथा रोगों को दूर किया जा सकता है। वर्षफल के ग्रहदोष को दूर करने में भी ये उपाय प्रभावी होते हंै। सामान्य रूप से यदि ग्रहों की प्रतिकूलता से संबंधित कष्टों व रोगों के लक्षण दिखाई दें तो निम्नलिखित उपाय करने चाहिए। ये उपाय बहुत कम खर्चीले हैं। सूर्य: सूर्य की अशुभ स्थिति के लक्षण हैं आंखों में कष्ट खासकर दांईं आंख में, हृदयाघात, उदर विकार, हड्डियों की कमजोरी आदि। उपाय गुड़ का दान करना। गेहूं का दान करना। ताम्रपात्र का दान करना। गुड़ को बहते पानी में बहाना। चंद्र: चंद्र का संबंध मन से है। जल तत्व होने के कारण यह मानसिक परेशानी, खांसी, कफ तथा फेफड़े संबंधी रोग भी देता है। चंद्र के अशुभ होने पर घर का कुआं, हैंडपंप आदि सूख जाते हैं और दुधारू पशु कम हो जाते हैं या मर जाते हैं। उपाय शिवलिंग का जल अथवा दूध से अभिषेक करना। तर्क है शिवजी द्वारा चंद्रमा को सिर पर धारण करना। रुद्राभिषेक 43 दिन करने से चंद्र संबंधी कष्ट पूर्ण रूप से समाप्त हो जाते हैं। रात को दूध न पीएं। दूध या पानी रात को सिर के पास रखकर सोएं और सुबह कीकर अथवा पीपल के वृक्ष की जड़ में डाल दें। चंद्र से संबंधित वस्तु चांदी, दूध या पानी का दान करें। मंगल अग्नि तत्व प्रधान मंगल अशुभ स्थिति के सामान्य लक्षण हैं रक्त विकार, रक्त चाप, क्रोध की अधिकता, तीव्र सिर दर्द। उपाय तंदूर की मीठी रोटी दान करना। रेवड़ियां पानी में बहाना। मिष्ठान भोजन का दान करना। हनुमान जी को गुड़ और चूरमे का भोग लगाना। बुध: बुध की अशुभ स्थिति के लक्षण हैं चेचक, खसरा रोग, गंध का पता न लगाना, जीभ, नाड़ी या दांतों की बीमारियां। उपाय दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाएं। पेठा, कद्दू धर्मस्थान में दान दें। बकरी दान करें, नाक छिदवाएं। हरे वस्त्रों का दान करें। सुराख वाला तांबे का पैसा पानी में बहाएं। बृहस्पति गुरु के अनिष्ट होने पर शिक्षा अधूरी रह जाती है। निर्दोष होते हुए भी झूठे आरोप लगते हैं और पीलिया रोग होता है। उपाय केसर का तिलक माथे पर लगाएं। तथा केसर नाभि व जीभ पर भी लगाएं। मंदिर में दान दें। पीपल का वृक्ष उगाएं तथा उसकी सेवा करें। शुक्र शुक्र के प्रतिकूल होने पर चर्मरोग, स्वप्नदोष आदि बीमारियां होती हैं। अंगूठा निष्क्रिय अथवा कमजोर हो जाता है। उपाय साफ सुथरे कपड़े पहनें। इत्र लगाएं। गाय का दान करें, गायों को चारा खिलाएं। शुक्र की देवी लक्ष्मी जी हैं, उनके समक्ष कपूर अथवा घी का दीपक जलाएं और श्री सूक्त का पाठ करें। बिस्तर की चादरें साफ सुथरी सिलवट रहित रखें। शनि: शनि की अनिष्टता से मकान का गिर जाना, आग लगना, भौंहो व पलकों का झड़ जाना, गठिया रोग होना, नौकरों का काम छोड़ देना आदि घटनाएं होती हैं। उपाय नारियल सात शनिवार नदी में बहाएं। सरसों के तेल का छाया पात्र दान करें। बादाम, अंगीठी, चिमटा, तवा, शराब आदि दान करें। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं। कौओं को भोजन का अंश दें। राहु: राहु अशुभ हो तो जातक को क्षयरोग, मानसिक कष्ट आदि होते हैं वह दुर्घटना का शिकार होता है या बुखार, उसे अचानक चोट आती है। साथ ही उसके शत्रुओं की संख्या बढ़ जाती है। उपाय मूली दान करें। कच्चे कोयले पानी में बहाएं। जौ को दूध में धोकर बहते पानी में बहाएं। खोटे सिक्के पानी में बहाएं। केतु: केतु के अशुभ होने पर रीढ़, जोड़ों का दर्द, फोड़े फुंसी, पेशाब की बीमारी, संतान को कष्ट आदि होते हैं। उपाय कुत्ता पालें अथवा कुत्ते को रोज रोटी खिलाएं। कान छिदवाएं। काला सफेद कंबल मंदिर में दान दें। इस प्रकार लाल किताब में कष्ट निवारण के अनेक सरल एवं तुरंत प्रभावी उपाय दिए गए हैं। यदि ग्रहदोष के कारण समस्याएं आ रही हों तो इन छोटे-छोटे उपायों का प्रयोग करना चाहिए। ग्रहों से संबंधित रंग एवं वस्तुएं ग्रह रंग वस्तुएं सूर्य गेहुंआ गेहूं, सुर्ख तांबा, गुड़, माणिक्य, लाल वस्त्र चंद्र दूधिया चांदी, दूध, चावल, मोती, सफेद वस्त्र मंगल लाल सौंफ, मसूर की दाल, चीनी, बतासे, मूंगा, लाल वस्त्र बुध हरा साबुत मूंग, पन्ना, हरे वस्त्र गुरु पीला सोना, केसर, हल्दी, चने की दाल, पुखराज, बेसन, पीले वस्त्र शुक्र दही हीरा, ज्वार, दही, सफेद वस्तुएं, इत्र, रुई, मिट्टी। शनि काला लोहा, साबुत उड़द, सरसों का तेल, शराब, साबुत बादाम। राहु नीला जौ, सिक्का, गोमेद, सरसों केतु काला काले सफेद तिल, काला सफेद कंबल



लाल किताब विशेषांक  जून 2008

लाल किताब की उत्पति इतिहास एवं परिचय, लाल किताब द्वारा जन्मकुंडली निर्माण के सिद्धांत एवं विधि, लाल किताब द्वारा फलादेश करने की विधि, लाल किताब में वर्णित उपायों का विस्तृत वर्णन, लाल किताब के सिद्धांत व उपायों की अन्य विधायों से तुलना

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