लाफ्टर किंग – राजू श्रीवास्तव

लाफ्टर किंग – राजू श्रीवास्तव  

लाफ्टर किंग - राजू श्रीवास्तव पं. शरद त्रिपाठी हमारे जीवन में कुछ समय ऐसा भी चाहिए जब हम सारी चिंता फिक्र छोड़कर कुछ मनोरंजन कर सकें तो कुछ समय को ही सही एक सांत्वना तो मिलती है। जिसका एक बहुत अच्छा साधन है टीवी। आजकल लगभग हर टीवी चैनल पर मनोरंजन का एक खास कार्यक्रम प्रसारित किया जाता है और वह मौजूद है ‘लाफ्टर प्रोग्राम’ जो हमें हंसा गुदगुदा कर हमारा मनोरंजन तो करता ही है, दिल को सकून भी देता है। इस कार्यक्रम के फलस्वरूप हमें तनावों से थोड़ी राहत मिलती है। वैसे तो कई कलाकार इस कार्यक्रम में आते हैं और सभी का अपना एक स्टाइल होता है। पर इन सभी में अलग एक ऐसा कलाकार है जो बड़े ही सहज ढंग से हमारे आस-पास की घटनाओं से ही हास्य निकाल कर हमारे सामने सरलतम तरीके से प्रस्तुत करता है और वह हैं शहर कानपुर के श्री सत्य प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ राजू श्रीवास्तव। इनका जन्म श्री रमेश चंद्र श्रीवास्तव (बलईकाका) के घर 25-12-1963 को सायं 9ः30 बजे कानपुर में हुआ। उनकी माता जी श्रीमती सरस्वती देवी एक घरेलू महिला हैं। राजू श्रीवास्तव के तीन बड़े भाई, एक बड़ी बहन व दो छोटे भाई हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा कानपुर शहर में ही हायर सेकेंडरी तक हुई है। अपने स्कूली दिनों में राजू एक सामान्य विद्यार्थी थे और तभी से वे फिल्मी कलाकारों के अभिनय एवं उनकी आवाज की नकल करने लगे थे। आइए इन सब बातों को हम ज्योतिषीय आधार पर परखते हैं और देखते हैं कि राजू की जन्म पत्रिका क्या कहती है। कोई व्यक्ति चाहे किसी भी शहर में किसी भी परिवेश में पैदा हुआ हो, उसकी जन्म पत्री और आने वाली महादशाएं ये बता देती हैं कि वह कितना महान होगा क्योंकि ऐसे व्यक्तियों की जन्मपत्री अलग ही दिखाई देती है। सूर्य और चंद्र ज्योतिष में दो ऐसे प्रमुख ग्रह हैं जिन्हें राजा और रानी का दर्जा प्राप्त है। इन दो ग्रहों के लग्नों अर्थात कर्क और सिंह में पैदा हुआ व्यक्ति समाज में विशिष्ट स्थान रखता है। इसी कारण इन दोनों लग्नों को राजसी कहते हैं। प्रस्तुत जन्मांग सिंह लग्न का है। इस सिंह लग्न में सूर्य और चंद्र दोनों ग्रह क्रमशः पंचम और नवम अर्थात कुंडली के त्रिकोण स्थान में बैठे हुए हैं जो इस जातक की महानता और प्रसिद्धि को दर्शाता है। पंचम भाव में लग्नेश सूर्य के साथ भाग्येश और सुखेश मंगल की युति तथा इसके साथ धनेश और लाभेश बुध की युति दोनों इस फल को, राजयोग को और बढ़ा रही हैं। राजू श्रीवास्तव अपने चुटीले हास्य अंदाज और नकल उतारने के लिए प्रसिद्ध हैं। ज्योतिष में इस चीज का प्रतिनिधित्व करने वाला ग्रह बुध है। बुध वाणी का भी कारक है और व्यक्ति के द्वितीय भाव को निर्देशित करता है। इस कुंडली में द्वितीय भाव का स्वामी बुध है और वह लग्नेश सूर्य के साथ पंचम भाव में स्थित है। बुध धनु राशि में 270-20’ का है अर्थात वह सूर्य के नक्षत्र में और चंद्रमा के उप नक्षत्र में है। अब यदि महर्षि जैमिनी के सिद्धांतानुसार देखें तो कैरियर के लिये आत्म कारक ग्रह (सबसे अधिक अंशांे वाला) व्यक्ति के जीवन को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। प्रस्तुत कुंडली में बुध आत्म कारक ग्रह है। महर्षि पराशर के अनुसार षड्बल में जिस ग्रह को सबसे ज्यादा बल प्राप्त होता है वह अपने स्वभावानुरूप आदमी के जीवन को प्रभावित करता है। इस कंुडली में बुध सबसे बली (षडबल में बली) ग्रह है। इन कारणों से इस व्यक्ति के जीवन में जो कुछ भी होगा वह बुध के द्वारा अधिक होगा। एक महत्वपूर्ण ग्रहों की चाल इस कुंडली में और भी है जिसे ध्यान और गहराई से समझना पड़ेगा। द्वितीय भाव का स्वामी बुध पंचम भाव अर्थात अपने से चतुर्थ में स्थित है। बुध लग्नेश सूर्य के नक्षत्र में स्थित है और जिस राशि (धनु) में स्थित है उसका स्वामी गुरु अपने से चैथे अर्थात मीन राशि में अष्टम भाव में बुध के नक्षत्र में स्थित है और द्वितीय भाव का स्वामी राहु से दृष्ट है जो एकादश भाव में बैठा हुआ है। इस तरह बुध लग्नेश के नक्षत्र में होकर तथा लग्नेश के साथ युत होकर जिस राशि में बैठा है उस राशि का स्वामी स्वयं बुध के नक्षत्र में बैठा है। अतः इस व्यक्ति को सफलता बुध से संबंधित कार्यों से प्राप्त होगी। राजू ने पहली बार सन् 1981 में मुंबई जाकर संघर्ष शुरू किया परंतु अथक परिश्रम व दौड़ भाग के बाद भी उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। तब वे निराश होकर अपने गृह नगर वापस आ गए और यहां के स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी कला का प्रदर्शन करने लगे। धीरे-धीरे यहां उन्हें सफलता मिलने लगी। तब सन् 1982 में वे फिर मुंबई गए और काम की तलाश शुरू कर दी। वहां इनकी मुलाकात गायकी व कव्वाली के मशहूर कलाकार शंकर शंभू जी से हुई जिन्होंने प्रोत्साहन तो दिया ही साथ ही राजू को काम दिलवाने में भी काफी मदद की और धीरे-धीरे राजू की गाड़ी चलने लगी। राजू ने मनोरंजन जगत में अपने कैरियर की शुरुआत ‘मिनी अमिताभ’ के रूप में की। इनकी हर अदा अमिताभ जी से मेल खाती थी जैसे, चलना, बोलना, डांस आदि हालांकि इसके लिए इन्होंने दिन रात अथक परिश्रम व अभ्यास किया। निरंतर अभ्यास व प्रयासों से राजू कई अन्य फिल्मी कलाकारों की आवाज भी हूबहू निकालने लगे और अपनी मंजिल की ओर बढ़ने लगे। आइए इसे अब ज्येातिषीय आधार पर देखते हैं कि क्या और क्यों हुआ। सन् 1981 में शुक्र में गुरु का अंतर चल रहा था जो पंचमेश भी है और लाभेश बुध के नक्षत्र में बैठा है। उसने इन्हंे ज्ञान के क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए मुंबई भेजा लेकिन 20 नवंबर 1981 से जैसे ही शुक्र में शनि का अंतर चला, उन्हें अपने कार्य की गहराई जानने के लिए कुछ दिनों को वापस घर आना पड़ा। पुनः मई 1982 से जैसे ही शुक्र, शनि व बुध का प्रत्यंतर समय चला, उनके स्थायी कार्य क्षेत्र की शुरुआत हो गई। शुक्र दशमेश, शनि षष्ठेश और बुध लाभेश है। सन् 1985 का समय राजू के लिए विशिष्ट था। इस समय उन्होंने प्रथम बार विदेश यात्रा की। सन् 1987 राजू के जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ, यहीं से स्टेज शो, फिल्में व अन्य कई प्रोगाम राजू को मिलते गए और राजू श्रीवास्तव प्रसिद्धि की ओर बढ़ने लगे। इन्हीं दिनों उन्होंने टीवी धारावाहिकों में भी अभिनय किया सर्वप्रथम छोटी बड़ी बातें, देख भाई देख और शक्तिमान जैसे धारावाहिकों में भी अभिनय किया। सन् 86-87 से ही राजू ने फिल्मी सफर की शुरूआत की। उनकी पहली फिल्म मिसाल थी। इसके बाद कई अन्य फिल्मों में अभिनय किया जिनमें सच, मि. आजाद, कातिल, बाजीगर, इश्क में जीना इश्क में मरना, मझधार, मैंने प्यार किया, आमदनी अठ्न्नी खर्चा रुपैया, मैं प्रेम की दीवानी हूं, बांबे टू गोवा प्रमुख हैं। सन् 1987 में ही राजू का पहला एलबम टार्जन इन सिटी भी रिलीज हुआ। और फिर प्रत्येक छः माह में जी भर के हंसो लोट पोट, हंसना मना है, हंसी के ठहाके और हंसो हंसाओ के 12 कैसेट रिलीज हुए। अब इस कालखंड को ज्योतिषीय दृष्टि से देखते हैं। 20 जनवरी 1985 से 20 नवंबर 1987 तक शुक्र में बुध का अंतर चल रहा था। यह समय उनके कैरियर को बढ़ाने और कार्यक्षेत्र में नए-नए अवसर दिलवाने में सहायक हुआ, क्योंकि शुक्र और बुध का फिल्म जगत, मनोरंजन व वाणी के क्षेत्र से भी गहरा नाता होता है। दशमेश शुक्र के साथ शनि की भी युति छठे भाव में है। यही शनि 85-87 तक गोचर में वृश्चिक राशि में स्थित था। यह वृश्चिक राशि से सीधी सप्तम दृष्टि वृष राशि अर्थात दशम भाव पर देता रहा इसी के फलस्वरूप वह अपने कार्य क्षेत्र में दूरस्थ देशों की यात्रा भी करते रहे। 17-05-1993 को राजू श्रीवास्तव का विवाह हुआ। 20-07-1994 को पुत्री अंतरा का और 16-03-1998 को पुत्र आयुष्मान का जन्म हुआ। आइए इसे ज्योतिषीय दृष्टि से देखें। 8 नवंबर 1992 से 14 सितंबर 1993 तक उन पर सूर्य में बुध का अंतर प्रभावी था तथा सप्तमेश शनि कुंभ राशि में सप्तम भाव पर ही गोचर कर रहा था। सूर्य लग्नेश और बुध (परिवार) द्वितीयेश है। इस स्थिति में सप्तमेश के गोचर ने उन्हें विवाह के बंधन में बांधा। सूर्य में शुक्र का समय जनवरी 1994 से जनवरी 1995 तक का रहा। सूर्य पंचम में और शुक्र सूर्य के नक्षत्र में स्थित है। शुक्र तीसरे भाव (पंचम से लाभ) का भी स्वामी है अतः इस दौरान उन्हें कन्या रत्न की प्राप्ति हुई। उनकी द्वितीय संतान का जन्म चंद्रमा में गुरु की दशा में हुआ। गुरु का अंतर पुत्र संतान का द्योतक है। गुरु पंचमेश है तथा चंद्र मेष राशि में नवम भाव (द्वितीय संतान/पंचम से पंचम से पंचम)। इस समय उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। सन 2005 में स्टार वन चैनल पर एक प्रोग्राम आया ‘लाफ्टर चैलैंज’ जिसने राजू को प्रसिद्धि के शिखर तक पहुंचाया। पहले तो राजू ने इसमें शामिल होने से मना कर दिया था क्योंकि वे इसमें शामिल होने वाले सभी कलाकारों से सीनियर थे पर निर्देशक गौतम जी ने जब समझाया और बताया कि पहले अमिताभ जी भी के.बी.सी. से इनकार कर रहे थे और बाद में यह कार्यक्रम बहुत प्रसिद्ध हुआ। तो राजू मान गए और अंत में विजेता बने। इस प्रोग्राम ने उन्हें देश ही नहीं, विदेशांे में भी बहुत ख्याति दिलाई यह वह समय था जिसने दुनिया में राजू को ख्याति दिलाई, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने गए। कहते हैं, भाग्य से बड़ी चीज कोई नहीं होती। इस कंुडली में भाग्येश मंगल है जो कर्म के स्वामी अर्थात शुक्र के नक्षत्र में स्थित है। मंगल पंचम भाव (यानि नवम से नवम) में स्थित है। इस भाग्येश मंगल की महादशा 20-01-2005 से प्रारंभ हुई इसी मंगल ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। 20-1-2005 से 18-06-2005 तक मंगल में मंगल का अंतर रहा। इसी मंगल ने उन्हें हठी भी बनाया पर भाग्येश ने अपना फल दिखाया और उन्हें यहां तक पहुंचाया। 18-06-2005 से 06-07-2006 तक मंगल में राहु का अंतर चला। राहु एकादश अर्थात लाभ भाव में स्थित है जिसने इन्हें अपार धन दिलाया। 16-07-2006 से 12-06-2007 तक मंगल से गुरु का समय चला। गुरु पंचमेश भी है। इस काल में उन्हें संतान की प्राप्ति होनी थी। इसी दौरान उन्हें पुत्री की प्राप्ति हुई और वीरतापूर्ण कार्य के लिए उ. प्र. सरकार से सम्मान प्राप्त हुआ। राजू के पसंदीदा कलाकारों में मुख्यतः अमिताभ बच्चन व दिलीप कुमार मुख्य हैं। किताबें पढ़ने व संवेदनशील विषयों पर आधारित फिल्में देखने का शौक है। अब तक राजू करीब 4000 से ज्यादा लाइव और स्टेज शो, कर चुके हैं। आने वाले कुछ समय में वे मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन व अभिषेक बच्चन, संगीतकार बप्पी लहरी आदि के साथ संग स्टेज शो करेंगे। राजू की आने वाली नई वी.सी. डी (अगर, मगर, लेकिन) है जो बहुत जल्द अपने दर्शकों को लोट पोट होने पर मजबूर कर देगी। ईश्वर पर राजू की पूर्ण आस्था है। वह ज्योतिष विज्ञान को पूरा सम्मान देते हैं। नित्य ईश्वर का ध्यान करके ही घर से निकलते हैं और समय-समय पर ज्योतिषीय सलाह भी लेते रहते हैं। उनका मानना है कि कर्म 60 प्रतिशत और भाग्य 40 प्रतिशत होता है। वर्तमान समय में 12-06-2007 से मंगल में शनि का समय चल रहा है जो 21-07-2008 तक चलेगा। मंगल भाग्येश और शनि षष्ठेश है। यह स्थिति काम में सफलता तो दे रही है लेकिन इस दौरान उन्हें अत्यधिक दिमागी उलझनों, काम के अत्यधिक बोझ व अत्प्रयाशित समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। मंगल चूंकि नवमेश है और नवम भाव पिता का भाव भी है। 21-07-2008 से 18-07-2009 का समय मंगल में बुध का समय रहेगा जो उन्हें फिर से अपने कार्य क्षेत्र में अत्यधिक लाभ व नाम देगा। सूर्य का स्वभाव राजा का है। उसका राहु से दृष्टि संबंध है। लग्न सूर्य का है। अतः आगे 20-01-2012 से 18 वर्ष राहु दशा शुरू होगी इस दौरान वह फिल्म लाइन में निर्देशन करेंगे या अपने क्षेत्र के राजा कहे जाएंगे और वह वर्षों याद किए जाएंगे। इस समय तक वह हिन्दुस्तान के पहले कामेडी सुपर स्टार होंगे। सूर्य व राहु के दृष्टि संबंध से यह तय है कि इस व्यक्ति का कहीं न कहीं से राजनीति में प्रवेश भी होगा उन्हें कोई राजनीतिक पद प्राप्त होगा या वह चुनाव मैदान में भी उतर सकते हैं। ज्योतिषीय योग- राजू जी की जन्म पत्रिका में कुछ ज्योतिषीय योग ऐसे भी हैं जो पूर्णतः घटित हुए हंै। जानिए, उनके बारे में- महादान योग दानाधिपेन सदृष्टे लग्ने तन्नायूकेपि वा। तस्सिमन्केन्द्रत्रिकोणस्थे भदादानकरो भवेत्।। सर्वार्थ चिंतामणि, अं.-7, भाव-9, श्लो.-45 यदि पत्रिका में लग्नेश या लग्न पर नवमेश की दृष्टि हो तथा नवमेश भी केंद्र या त्रिकोण में हो तो जातक दानी प्रवृŸिा का होता है। राजू की कुंडली में यह योग पूर्ण रूपेण घटित हो रहा है जिसके फलस्वरूप से वह अक्सर दान किया करते हैं। अभी कुछ ही समय पूर्ण एक उभरते हुए क्रिकेट खिलाड़ी ने आत्महत्या कर ली थी। उसके घर जाकर राजू ने उनकी माता जी को गुप्त रूप से काफी धन मुहैया कराया था। भ्रातृ वृद्धि भ्रातपे कारके वापि शुभयोगनिरीक्षिते। भावे व बलसंपूर्णे भ्रातृंषा वर्धन भवतेत्।। -सर्वार्थ चितांमणि, अंव्म्-4, श्लो-16 यदि कंुडली में तृतीय स्थान तथा तृतीय भाव का कारक शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो एवं पूर्ण बली हो। शुभ ग्रह चंद्रमा नवम में बैठकर तृतीय भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। राजू जी भी सात भाई-बहन हैं। तीव्रबुद्धि एवं त्वरित निर्णय योग- बुद्धिस्थानाधिपस्यांश राशीशे शुभवीक्षिते। वैरोषिकांशके वापि तीव्र बुद्धि समादिशेत।। -सर्वार्थ चितांमणि, अंव्म्-5, श्लो-35 यदि जन्म पत्रिका में पंचमेश अपने नवमांश में हो और वह शुभ ग्रह से दृष्ट हो अथवा वैशेषिकांश में हो तो जातक तीव्र बुद्धि वाला होता है। राजू की कुंडली में पंचमेश गुरु अपने ही नवमांश में बुध के साथ स्थित है। इस योग के कारण उनकी बुद्धि तीव्र है, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता रखते ह ैं और हाजिर जवाब भी हंै।



श्री विद्या विशेषांक   मई 2008

श्री यंत्र की उत्पति एवं माहात्म्य, श्री यंत्र के लाभ, श्री यंत्र को सिद्ध करने की विधि, श्री यंत्र की उपासना तथा इसमें ली जाने वाली सावधानियां, पदार्थों एवं स्वरूप के आधार पर विभिन्न प्रकार के श्री यंत्र एवं उनका उपयोग पर यह विशेषांक आधारित है.

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