कस्पल पद्धति

कस्पल पद्धति  

कस्पल ज्योतिष के मूल सूत्र कस्पल ज्योतिष का यह एक स्वर्णिम सिद्धांत है (पहला सूत्र) कि किसी भी ग्रह की स्टार लाॅर्ड पोजीशन यानि कि इन्वोल्वमेंट हुए भाव से सब लाॅर्ड यानि कि कम्मिटमेंट हुए भाव की पोजीशन अगर 1, 3, 5, 9 या 11वीं पोजीशन है तो यह फेवरेबल (Favourable) यानि कि सहायक पोजीशन है। ऐसी स्थिति बनने पर इन्वोल्व्ड भाव की सिगनिफिकेशन्स (शक्ति) में बढ़ोत्तरी हो जाती है क्योंकि यह इन्वोल्व्ड भाव से गुणात्मक भाव है। यह स्थिति इन्वोल्व्ड (संबद्ध) भाव की सिगनिफिकेशन में वृद्धि करेगी। आईये इसे एक उदाहरण के साथ समझने का प्रयास करें। मान लीजिये 7वें भाव की इन्वोल्वमेंट हुई है और सब लेवल यानि कि कम्मिटमेंट लेवल पर 5वें और 11वें भाव से कम्मिटमेंट हो जाती है तो यह स्थिति 7वें भाव (इन्वोल्व्ड हुए) के लिये बेहतर स्थिति है क्योंकि फल तो 7वें भाव के मिलने हैं। वह फल हाँ होंगे या न यह बतलायेगा सब लाॅर्ड कम्मिटमेंट वाला ग्रह। अब यहां आप यह समझिये कि कम्मिटमेंट तो 5वें और 11वें भाव से हुई है और 7वें भाव से 5वें भाव की पोजीशन तो 11वीं पोजीशन होती है और 7वें भाव से 11वें भाव की पोजीशन 5वीं पोजीशन पड़ती है। इसका तात्पर्य है कि ये दोनों ही पोजीशन 7वें भाव के लिये (फेवरेबल पोजीशन्स हैं यानि कि ये पोजीशन्स 7वें भाव के लिये गुणात्मक (Multiplication) पोजीशन्स है। यह 7वें भाव के फल में वृद्धि करेगी यानि कि इस जातक के विवाह होने में किसी प्रकार की रूकावट या बाधा उत्पन्न नहीं करेगी बल्कि यह स्थिति जातक के विवाह को सम्पन्न करवाने में सहायक होगी क्योंकि 5वाँ और 11वाँ भाव विवाह के मूल भाव 7वें ;च्तपउंतल ब्नेचद्ध के लिये आवश्यक और सहायक भाव है। (दूसरा सूत्र) स्टार लाॅर्ड पोजीशन यानि कि इन्वोल्वमेंट पोजीशन से सब लाॅर्ड यानि कि कम्मिटमेंट की पोजीशन अगर 4थी, 7वीं 8वीं या 12वीं पड़ती है तो यह स्थिति इन्वोल्व्ड हुए भाव की सिगनिफिकेशन (शक्ति/अभिप्राय) में कमी लायेगी। इस विचार को भी हम यहाँ एक उदाहरण से स्पष्ट करेंगे। मान लीजिये 7वें भाव की इन्वोल्वमेंट हुई है और 6ठे भाव से कम्मिटमेंट होती है तो यह स्थिति 7वें भाव के लिये 12वीं पोजीशन है तो यह 7वें भाव के फल नेगेटिव रूप से प्रदान करेगी यानि कि इस विशिष्ट ग्रह की दशा में जातक को विवाह नहीं देगी और अगर जातक पहले से ही विवाहित है तो उस विशिष्ट ग्रह की दशा में जातक का अपने पार्टनर से सम्बन्ध विच्छेद हो जायेगा। (तीसरा सूत्र) स्टार लाॅर्ड पोजीशन यानि कि इन्वोल्वमेंट पोजीशन से सब लाॅर्ड यानि कि कम्मिटमेंट की पोजीशन अगर 2री, 6ठी या 10वीं है तो यह स्थिति न्यूट्रल कहलाती है। यानि कि इन्वोल्व्ड हुए भाव के फल मिल जायेंगे बिना किसी सपोर्ट या बिना किसी बाधा के। इसे आप एक उदाहरण से समझिये। अगर 7वें भाव की इन्वोल्वमेंट हो गई है और सब ;उपद्ध लेवल पर 8वें भाव से, 12वें भाव से या 4थे भाव से कम्मिटमेंट अगर होती है तो ये तीनों भाव 7वें भाव से 2री, 6ठी और 10वीं पोजीशन्स पर है क्योंकि यह पोजीशन्स न्यूट्रल पोजीशन हैं। इस लिये जातक को 7वें भाव के फल मिलने में बाधा उत्पन्न नहीं करेंगे और न ही यह सपोर्ट करेंगे। कस्पल प्रणाली बहुत ही सरल प्रणाली बनाई गई है। अगर आपको किसी भी ग्रह का पोटेंशियल पढ़ना हो चाहे वह विशिष्ट ग्रह दशा स्वामी ग्रह हो या चाहे वह विशिष्ट ग्रह किसी भी भाव का सब सब लाॅर्ड हो। उसे पढ़ने का तरीका एक ही है, हर एक ग्रह इन्वोल्वमेंट, कम्मिटमेंट और फाईनल कनफर्मेशन लेवल पर ही फल देता है। इन्वोल्वमेंट यानि कि स्टार लेवल पर ग्रह जिन-जिन कस्पल पोजीशन्स में प्रकट होता है और जिस भाव में स्टार लाॅर्ड ग्रह बैठता है तो हम कहते हंै कि यह ग्रह स्टार लेवल पर उन सब भावों/कस्पों का फल प्रदान करने में सक्षम हो गया है जिन जिन भावों/ कस्पों में स्टार लाॅर्ड प्रकट हो रहा है। तात्पर्य, ग्रह स्टार लाॅर्ड लेवल पर इन भावों का सिग्निफिकेटर बन गया या जिस भाव में बैठा होगा (ऐसा तभी लिया जायेगा तब सब लाॅर्ड का उस विशिष्ट कंुडली में पोजीशनल स्टेटस होगा अन्यथा नहीं) वह कम्मिटमेंट लेवल पर उन सभी कस्पों/भावों का सिगनिफिकेटर बन जायेगा जिन जिन भावों/कस्पों में सब लाॅर्ड प्रकट होगा यानि कि कमिटमेंट लेवल पर सब लाॅर्ड ग्रह उन भावों/कस्पों का फल प्रदान करने में सक्षम हो जायेगा जिन कस्पल पोजीशन्स या कस्पों में वह प्रकट होगा। तीसरा अब फाईनल कनफर्मेशन लेवल यानि कि ग्रह का सब सब लाॅर्ड जिन कस्पों/भावों में प्रकट होगा या वह जिस भाव में बैठा होगा (यहाँ भी इस विशिष्ट ग्रह का पोजीशनल स्टेटस होगा तो ही हम ग्रह जिस भाव में बैठा है उस भाव को लेंगे अन्यथा नहीं) वह ग्रह सब सब लेवल यानि कि फाईनल कनफर्मेशन लेवल पर उन सभी भावों/कस्पांे का सिगनिफिकेटर बन जायेगा जिन जिन कस्पल पोजीशन्स या कस्पांे में वह विशिष्ट ग्रह (सब सब ग्रह) प्रकट होगा। इसे हम कस्पल भाषा में इन्वोल्वमेंट लेवल, कम्मिटमेंट लेवल और फाईनल कनफर्मेशन लेवल पर सिगनिफिकेटर बनना बोलते हंै। अब हम आपका ध्यान एक और विचार की तरफ दिलवाना चाहेंगे। हमने उपर पढ़ा कि सब लाॅर्ड जिसका कार्य कम्मिटमेंट करना है यानि कि इन्वोल्व हुए भाव का फल पोजिटिव होगा या नेगेटिव या क्या वह इवेंट होगा या नहीं होगा यह कार्य करता है किसी भी ग्रह का सब लाॅर्ड यानि कि कम्मिटमेंट करने वाला ग्रह। कस्पल कुंडली में कम्मिटमेंट करने वाले ग्रह के दो कार्य ;निदबजपवदद्ध हैं। पहला कार्य यह क्वालीफाई/ उत्तीर्ण ;फनंसपलिद्ध करने का करता है यानि कि हाँ या न और दूसरा कार्य यह स्पेसीफाई/विशेष टिप्पणी ;ैचमबपलिद्ध करने का करता है। इसे हम उदाहरण से ऊपर समझ चुके हैं। एक बार फिर से समझने का प्रयास करें। हमने ऊपर पढ़ा कि 7वें भाव की इन्वोल्वमेंट होने के बाद 5वें और 11वें भाव से कम्मिटमेंट होने पर जातक का विवाह होना निश्चित है। यह कार्य तो क्वालीफाई/उत्तीर्ण करने का है और 5वें और 11वें भाव से कम्मिटमेंट करने का तात्पर्य इस जातक का वैवाहिक जीवन सुखमय रहने वाला है यह कार्य स्पेसीफाई करने का है कि जातक शादी के बाद सुखमय विवाहित जीवन व्यतीत करने वाला है। इसी विचार को हम एक और उदाहरण के साथ प्रस्तुत करना चाहेंगे। मान लीजिये 6ठे भाव की इन्वोल्वमेंट होकर 8वें भाव से कम्मिटमेंट हो जाती है तो इस केस में जातक की साधारण बीमारी, गंभीर बीमारी में बदलने वाली है या यह साधारण रोग सर्जरी में बदलने वाला है क्योंकि 6ठे भाव से 8वें भाव की पोजीशन तीसरी पड़ती है यानि कि गुणात्मक भाव ;भ्वनेम व िडनसजपचसपबंजपवदद्ध है। अब यहाँ क्वालिफिकेशन/पोजिटिव है और स्पेसीफिकेशन/विशेष टिप्पणी ;ैचमबपपिबंजपवदद्ध सर्जरी की ओर इशारा करती है और यही अगर 6ठे भाव से इन्वोल्वमेंट हो जाये और 5वें भाव से कम्मिटमेंट हो जाये तो बीमारी से रिकवरी हो जायेगी क्योंकि 6ठे भाव से 5वें भाव की पोजीशन 12वीं पड़ती है और हमने ऊपर लिखा कि 4थी, 7वीं 8वीं और 12वीं पोजीशन स्टार लाॅर्ड यानि कि इन्वोल्वमेंट पोजीशन से नकारात्मक ;न्दंिअवनतंइसमद्ध पोजीशन है। बीमारी से रिकवरी होने के लिये ऐसी ही लिंकेज की स्थापना होनी अनिवार्य है बेशक यह एक नेगेटिव लिंकेज है लेकिन बीमारी से रिकवरी होने के लिये यह एक प्रासंगिक लिंकेज है और इस कम्मिटमेंट का दूसरा कार्य यानि कि विशेष टिप्पणी करना है बीमारी से रिकवरी हो जायेगी। अब हम अन्त में बात करेंगे फाईनल कनफर्मेशन यानि कि ग्रह के सब सब लाॅर्ड की। फाईनल कनफर्मेशन यानि कि अन्तिम पुष्टिकरण का कार्य ;च्वतजविसपवद्ध है क्या अन्त में इवेंट होगा या नहीं। इस बात का विचार करने के लिये भी इस सब सब लाॅर्ड को ठीक उसी प्रकार पढे़ंगे जिस प्रकार हमने सब लाॅर्ड यानि कि कम्मिटमेंट वाले ग्रह को पढ़ा था। हमने ऊपर देखा था कि पोजीशन 1, 3, 5, 9 और 11 फेवरेबल पोजीशन्स हैं। इन्वोल्व हुए भाव से, पोजीशन 4, 7, 8 और 12 अन फेवरेबल/ पोजीशन्स हैं। इन्वोल्व हुए भाव से और पोजीशन 2, 6 और 10 न्यूट्रल पोजीशन्स हैं इन्वोल्व हुए भाव से। ठीक इसी प्रकार हम सब सब लाॅर्ड की पोजीशन भी स्टार लाॅर्ड यानि कि इन्वोल्व हुए भाव से पढं़ेगे। इसे हम एक उदाहरण से समझेंगे, मान लीजिये 7वें भाव को किसी ग्रह ने इन्वोल्व किया है और कम्मिटमेंट 6ठा और 7वें भाव दोनों से हो जाती है। तात्पर्य सब लेवल तक 7वें भाव के फल भी मिलेंगे और नहीं भी मिलेंगे, अब अगर फाईनल कनफर्मेशन यानि कि सब सब लाॅर्ड ग्रह 7वें कस्प/ भाव में प्रकट हो जाता है तो जातक का विवाह थोड़ी बहुत अड़चन के पश्चात् हो जायेगा, यही अगर सब सब लाॅर्ड ग्रह 6ठे भाव/कस्प में प्रकट हो जाये तो जातक का विवाह नहीं होगा और अगर जातक पहले से विवाहित है तो जातक का संबंध विच्छेद होने की पूर्ण रूप से आशा है।

हनुमत आराधना एवं शनि विशेषांक  जून 2016

फ्यूचर समाचार के जून माह के हनुमत आराधना एवं शनि विशेषांक में अति विशिष्ट व रोचक ज्योतिषीय व आध्यात्मिक लेख दिए गये हैं। कुछ लेख जो इसके अन्तर्गत हैं- श्री राम भक्त हनुमान एवं शनि देव, प्रेम की जीत, शनि देव का अनुकूल करने के 17 कारगर उपाय, वाट्सएप और ज्योतिष, शनि ग्रह का गोचर विचार आदि। इनके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भ में जो लेख प्रकाशित होते आए हैं। स्थायी स्तम्भ में भी पूर्व की भांति ही लेख सम्मिलित हैं।

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