कार्य क्षेत्र में सफलता, यश और प्रतिष्ठा भी दिलाता है काल सर्प योग

कार्य क्षेत्र में सफलता, यश और प्रतिष्ठा भी दिलाता है काल सर्प योग  

कार्यक्षेत्र में सफलता, यश औरप्रतिष्ठा भी दिलाता है कालसर्प योग जय निरंजन यकालसर्प योग के फल की शुभता- अशुभता अन्य शुभाशुभ योगों पर निर्भर करती है। यदियुति या दृष्टि संबंधों से अच्छे योग बन रहे हों और कुंडली में पंचमहापुरुष योग विद्यमान होतो जातक निसंदेह अपने कार्यक्षेत्र में सफलता अवश्य पाता है। ऐसी ग्रह स्थितियों काउदाहरण कुंडलियों के साथ विस्तृत विवेचन इस लेख में किया गया है। ह सच है कि जातक कीजन्मकुंडली में यदि कालसर्पयोग विद्यमान है तो जातक को जीवनमें अत्यधिक संघर्ष करना पड़ता है।लेकिन व्यवहार में यह भी पाया गयाकि जिन जातकों की कुंडली मेंकालसर्प योग है उन्हें उनके जीवन मेंसंघर्ष और अवरोध के बावजूद भीकार्यक्षेत्र में आश्चर्य जनक सफलता,यश और प्रतिष्ठा भी प्राप्त होती है।अतः कालसर्प योग को दुख औरअसफलता का प्रतीक बताना ज्योतिषके प्रति घोर अन्याय है।वस्तुतः काल सर्प योग का फल शुभहै या अशुभ, यह निर्भर करता हैइसके कारक ग्रह राहु-केतु, राहु-केतुअधिष्ठित राशि के स्वामी ग्रह तथादशमेश और चतुर्थेश के मध्य बननेवाले शुभाशुभ योगों पर। किसी जातककी कुंडली में कालसर्प योग हो तथाकालसर्प योग के साथ यदि युति यादृष्टि संबंधों से अन्य अच्छे योग बनरहे हों तथा कुंडली में पंचमहापुरुषयोग जैसे शुभ योग निर्मित हों तोजातक निःसंदेह अपने कार्यक्षेत्र मेंसफलता पाता है। कुछ अन्य शुभ ग्रह स्थितियां इस प्रकार हैं।1.राहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रहों का आपस में युति या दृष्टिसंबंध हो, या येग्रह राहु-केतु से केंद्र या त्रिकोणभाव में हो अथवा राहु-केतु के साथहों। याराहु-केतु, अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रहों पर दृष्टि डालते हों अथवाराहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रह, राहु-केतु पर दृष्टि डालते हों।2. राहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रह केंद्र, त्रिकोण, धन, लाभ या पराक्रमभाव में किसी उच्च राशिस्थ ग्रह केसाथ हों।3. राहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रहों की दशमेश या चतुर्थेश के साथयुति या दृष्टि संबंध हो।4. राहु-केतु के साथ दशमेश याचतुर्थेश की युति या दृष्टि संबंध हो।5. राहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रह, दशमेश - चतुर्थेश अधिष्ठित राशिके स्वामी ग्रह के साथ युति या दृष्टिसंबंध बनाते हों।6. राहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामी ग्रह स्वराशि, उच्चराशि या मित्र ग्रहकी राशि में स्थित हों।7. राहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रह केंद्र में पंचमहापुरुष योग बनातेहों।8. राहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रह केंद्र या त्रिक भाव में नीचभंगराजयोग बनाते हों।उपर्युक्त ग्रह योगों में से कोई चार यापांच योग भी किसी जातक की कुंडलीमें हों तो उस जातक को कालसर्पयोग से शुभ फलों की प्राप्ति अधिकहोगी। उपर्युक्त ग्रह योगों को अबऐसे जातकों की कुंडलियों में देखनासमीचीन होगा जिनकी कुंडलियों मेंकालसर्प योग होने के बावजूद भीजीवन में उच्चस्तरीय सफलता, यशऔर प्रतिष्ठा मिली।डॉ. राजेंद्र प्रसाद :1.राहु अधिष्ठित राशि कर्क का स्वामीचंद्रमा अपने मित्र ग्रह सूर्य के साथसिंह राशि में स्थित है।2.राहु की दृष्टि चतुर्थेश गुरु पर हैतथा चतुर्थेश गुरु की दृष्टि राहु तथाकेतु अधिष्ठित राशि के स्वामी शनिपर है। 3. केतु अधिष्ठित राशि के स्वामी शनिकी राहु से युति तथा दशमेश बुध परदृष्टि भी है।4. केतु की दृष्टि अधिष्ठित राशि केस्वामी शनि तथा दशमेश बुध पर है।5. दशमेश बुध लग्न में भद्र पंचमहापुरुषयोग निर्मित कर रहा है।पं. जवाहर लाल नेहरु :1. राहु अधिष्ठित राशि मिथुन का स्वामीबुध चतुर्थ भाव में चतुर्थेश शुक्र केसाथ स्थित है।2. राहु, अधिष्ठित राशि स्वामी बुधतथा चतुर्थेश शुक्र पर अपनी दृष्टिडाल रहा है।3. केतु अपनी अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रह गुरु के साथ स्थित है।4. गुरु और केतु की संयुक्त दृष्टिदशम भाव पर पड़ रही है।5. दशमेश मंगल की दृष्टि गुरु तथा केतु पर पड़ रही है।6. शुक्र केंद्र में चतुर्थ भाव में मालव्यपंचमहापुरुष योग बना रहा है।जुल्फ़िकार अली भुट्टो :1. राहु दशम अधिष्ठित राशि के स्वामीचंद्र के साथ स्थित है तथा नीचभंगराजयोग बना रहा है।2. राहु के साथ दशमेश चंद्रमा कीयुति है तथा राहु-चंद्र की संयुक्तदृष्टि केतु, चतुर्थेश शनि और राहुअधिष्ठित राशि स्वामी ग्रह बुध पर है।3. केतु की दृष्टि केतु अधिष्ठित राशिस्वामी ग्रह गुरु तथा दशमेश चंद्रमापर है।4. केतु अधिष्ठित राशि के स्वामी गुरुकी दृष्टि, केतु, राहु अधिष्ठित राशिस्वामी बुध तथा चतुर्थेश शनि पर है।5. दशम भाव में गुरु हंस पंचमहापुरुषयोग बना रहा है। नेल्सन मंडेला :1. राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी मंगलकेतु से दृष्ट है।2. राहु अधिष्ठित राशि का स्वमाी मंगलदशमेश भी है।3. केतु अधिष्ठित राशि का स्वामीशुक्र स्वराशिस्थ होकर केतु से युतिकर रहा है।4. केतु अधिष्ठित राशि का स्वामीशुक्र चतुर्थेश भी है।अमजद अली खान (सरोद वादक):1. राहु-केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीग्रह बुध और गुरु की दशम भाव मेंयुति हो रही है।2. राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी बुधदशमेश तथा केतु अधिष्ठित राशि कास्वामी गुरु चतुर्थेश है।3. राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी तथादशमेश बुध दशम भाव में शुभ भद्र पंचमहापुरुष योग बना रहा है।उर्मिला मातोडकर :1. दशमेश शनि और चतुर्थेश चंद्रमाकेतु से युति कर रहे हैं।2. दशमेश शनि, चतुर्थेश चंद्रमा औरराहु से दृष्टि संबंध बना रहा है।3. लग्न में लग्नेश मंगल रूचकपंचमहापुरुष योग बना रहा है।4. केतु अधिष्ठित राशि के स्वामी बुधपर केतु की दृष्टि पड़ रही है।अनिल कपूर :1. राहु अधिष्ठित राशि के स्वामी बुधऔर केतु अधिष्ठित राशि के स्वामीगुरु की युति हो रही है।2. चतुर्थेश चंद्रमा राहु से युति कररहा है।3. दशमेश शनि की चतुर्थेश चंद्रमातथा राहु पर दशम दृष्टि है।4. केतु की दृष्टि चतुर्थेश चंद्रमा तथाराहु-केतु अधिष्ठित राशि स्वामी ग्रहबुध और गुरु पर पड़ रही है।5. सप्तम भाव में शुक्र मालव्यपंचमहापुरुष योग बना रहा है।मल्लिका सेहरावत :1. राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी बुधउच्च राशिस्थ होकर राहु से केंद्र में है। 2. केतु अधिष्ठित राशि का स्वामी गुरुउच्च राशिस्थ चतुर्थेश शनि के साथलग्न में है।3. चतुर्थेश शनि की दृष्टि केतु परतथा दशमेश चंद्रमा पर भी है।4. दशमेश चंद्रमा केतु से युति कररहा है।5. राहु की दृष्टि चतुर्थेश शनि, दशमेशचंद्रमा तथा केतु अधिष्ठित राशि केस्वामी ग्रह गुरु पर पड़ रही है।6. लग्न में शश और मालव्यपंचमहापुरुष योग बन रहे हैं।अभिनेता चिरंजीवी :1. राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी मंगलकेतु अधिष्ठित राशि के स्वामी शुक्र सेयुति कर रहा है।2. राहु की दशम भाव पर तथा केतुकी चतुर्थ भाव पर दृष्टि है। 3. केतु की दृष्टि दशमेश चंद्रमा परहै।4. राहु अधिष्ठित राशि के स्वामी मंगलकी राहु पर दृष्टि है।5. शनि तथा गुरु के द्वारा केंद्र मेंशश तथा हंस पंचमहापुरुष योग निर्मितहो रहे हैं। दशमस्थ गुरु अमलकीर्तियोग भी बना रहा है।सचिन तेंदुलकर : 1. राहु अधिष्ठित राशि का स्वामीगुरु चतुर्थ भाव में नीच भंग राज योगबना रहा है।2. राहु अधिष्ठित राशि का स्वामी गुरुचतुर्थ भाव में उच्च राशिस्थ मंगल सेयुति कर रहा है।3. राहु अधिष्ठित राशि के स्वामी गुरुकी चतुर्थेश शनि पर पंचम दृष्टि है।4. दशमेश चंद्रमा राहु से युति कररहा है।5. केतु अधिष्ठित राशि का स्वामी बुधषष्ठ भाव में नीचभंग राजयोग बनारहा है।6. चतुर्थ भाव में मंगल रूचकपंचमहापुरुष योग बना रहा है।


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