ईशान व नैर्ऋत्य की महत्ता

ईशान व नैर्ऋत्य की महत्ता  

सितम्बर माह के अन्त में पं. जी दुबई में स्थित एक गुजराती व्यवसायी के नवनिर्मित विला को देखने गऐ। व्यवसायी ने बताया कि यह घर उन्हें बहुत पसंद है परन्तु चाहते हुये भी वे पिछले कई माह से उसमें शिफ्ट नहीं कर पा रहे हैं। क्या यह किसी वास्तु दोष के कारण है? परीक्षण करने पर पाए गए वास्तु दोष - उत्तर-पूर्व वास्तु पुरुष का सिर माना जाता है यह स्थान पानी के लिये सर्वोत्तम है तथा हल्का व गर्मी रहित सामान ही यहां रखा जा सकता है परन्तु उन्होंने उत्तर, उत्तर-पूर्व में व्यायाम-कक्ष/स्पा बनाया हुआ था जिसमें भारी भारी मशीनें व बिजली से चलने वाले संयंत्र लगा रखे थे। - व्यवसायी दंपत्ति दोनों पश्चिमी ग्रुप के थे और विला का पश्चिमी स्थान कटा था, इसलिये वह घर पर आराम कर रहा था ;ॅमेज पे त्मेजद्ध। किसी भी घर में चहल-पहल के लिये पश्चिमी क्षेत्र कटा नहीं होना चाहिए तथा पूर्वी दिशा से कम खुला होना चाहिए। - पीछे दक्षिण में खुले स्थान में नैर्ऋत्य क्षेत्र में तरणताल बना था। यह मालिक के लिये भारी धन व स्वास्थ्य हानि का कारण होता है। यदि ग्रह गोचर अच्छे न हों तो दक्षिण-पश्चिम का वास्तु दोष मालिक को अन्दर भी आने नहीं देता है। यदि समय खराब हो तो व्यक्ति मकान में आकर भारी जन धन हानि का सामना करता है। - विला के पीछे काफी खुला स्थान व ढलान थी जिससे भी हर शुभ कार्य में देरी होने की संभावना रहती है। सुझाव - पश्चिमी दिशा की दीवारों को ढंग से बनाने को कहा गया। - व्यायाम कक्ष तथा स्पा की मशीनें पश्चिमी स्थल में निर्माण कर वहां स्थानांतरित करने को कहा गया। - तरणताल तुरंत बन्द करने को कहा गया। यदि तरणताल चाहिए तो उत्तर/उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में बनाया जा सकता है। - विला की पिछली चारदीवारी के साथ प्रकाश की व्यवस्था तथा भारी ऊँचे पेड़ लगवाये गये तथा पीछे की तरफ सफेद व लाल पेन्ट की खड़ी स्ट्रिप बनाने को कहा गया। पंडित जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि सभी सुझावों को कार्यान्वित करने के बाद उन्हें अवश्य लाभ होगा, और वे अपने इस घर में सुखपूर्वक रह पायेंगे। प्रश्न: पंडित, जी कृप्या मेरे घर का नक्शा देखकर बतायें कि मेरे घर में कोई वास्तु दोष तो नहीं है क्योंकि हर समय कोई न कोई बीमारी व आर्थिक समस्या बनी रहती है। कृप्या मार्गदर्शन करें। श्री नारायण दत्त, भोपाल उत्तर: आपके घर में मुख्य वास्तु दोष दक्षिण पूर्व का कोना बन्द होना, उत्तर में सीढ़ियां एवं सीढियों के नीचे शौचालय होना है। दक्षिण-पूर्व का कोना जहां सर्वेन्ट ब्लाॅक व गैराज बना हुआ है बन्द होने के कारण घर में मालिक या मालकिन का स्वास्थ्य खराब रहता है उसे आप अविलम्ब खुलवा दें। चाहें तो आगे बढ़ा सकते हैं। उत्तर में सीढियों के कारण परिवार का पूर्णतया आर्थिक विकास नहीं हो सकता। सीढ़ियों के नीचे शौचालय होने से घर की बहन बेटी तकलीफ में रहती हैं। परिवार में आपसी मतभेद के कारण गृहस्थी भी खराब हो सकता है। शौचालय को सीढ़ियों को नीचे से हटा कर गैरेज के वायव्य कोण में बना देने से अवश्य लाभ होगा।


वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2014

फ्यूचर समाचार के वास्तु विषेषांक में अनेक रोचक व ज्ञानवर्धक लेख जैसे भवन और वास्तु, वास्तु शास्त्र का वैदिक स्वरूप, वास्तु शास्त्र के मूलभूत तत्व, वास्तु शास्त्र व दाम्पत्य जीवन, उद्योग धन्धे क्यों बन्द हो जाते हैं?, फ्लैट/प्लाॅट खरीदने हेतु वास्तु तथ्य, अनुभूत प्रयोग एवं सूत्र, वास्तु सम्मत सीढ़ियां भी देती हैं सफलता, घर में क्या न करें?, विभिन्न दिषाओं में रसोईघर, वास्तुदोष समाधान, वास्तु संबंधी कहावतें, वास्तु दोष दूर करने के सरल उपाय, पंचतत्व का महत्व तथा स्वास्थ्य संबंधी वास्तु टिप्स। इसके अतिरिक्त वास्तु पर हुए एक शोध कार्य पर लिखा गया सम्पादकीय, करियर परिचर्चा, सुखी दाम्पत्य जीवन का आधार: शादी के सात वचन, सत्य कथा, हैल्थ कैप्सूल, पावन स्थल में बांसवाड़ा का प्राचीन मां त्रिपुरासुन्दरी मन्दिर, ज्योतिष व महिलाएं तथा ग्रह स्थिति एवं व्यापार, पंचपक्षी के रहस्य, मंत्र व तंत्र साधना का स्वरूप, कर्णबेधन संस्कार, गृह सज्जा एवं वास्तु फेंगसुई आदि लेखों को समायोजित किया गया है।स्थायी स्तम्भ विचार गोष्ठी के अन्तर्गत ‘पिरामिड का वास्तु में प्रयोग’ विषय पर विभिन्न विद्वानों के विचारों को प्रस्तुत किया गया है। आषा है फ्यूचर समाचार के पाठकों को यह विषेषांक विषेष पसंद आयेगा।

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