उत्तर-पूर्व दिशा के मकान भूखंड

उत्तर-पूर्व दिशा के मकान भूखंड  

उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण अथवा वास्तु पूजा कोण अथवा ईश्वर का कोण कहा जाता है। ईशान कोण सर्वाध्कि महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि ईशान कोण कम हो तो परिवार एवं परिवार के सदस्यों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यदि ईशान कोण सापफ-सुथरा हो, इस कोने में कोई वृ(ि हो तो परिवार के सदस्यों की स्थिति निरंतर बेहतर होती जाती है। वे शांतिपूर्ण एवं आनंददायक जीवन व्यतीत करते हैं। इस दिशा के अध्पिति ईशान अथवा ईश्वर हैं। यह वास्तु की सभी आठ दिशाओं में सबसे पवित्रा दिशा है। यह दिशा खुला होना चाहिए तथा यहां पर दूसरे दिशाओं की तुलना में कम से कम भार होना चाहिए। इनका शरीर सपफेद है। इनके एक मुख तथा चार भुजाएं हैं। दो दायीं भुजाओं में से एक वरदान के लिए उठा हुआ है तथा दूसरे हाथ में एक त्रिशूल है। दो बायीं हाथों में से एक में जाप करने का माला तथा दूसरा वर देने के लिए उठा हुआ है। इनकी पत्नी को गौरी कहा जाता है। ये ईश्वर अथवा शिव के अवतार हैं। जिस भूखंड की सड़कें पूर्व एवं उत्तर की ओर हों उन्हें उत्तर-पूर्वी खंड में रखा जाता है। उत्तर-पूर्वी खंड वाले मकान का प्रभाव पुरुष गृह स्वामी एवं संतति पर अध्कि होता है। वास्तु विज्ञान इस खंड को सभी खंडों में सर्वश्रेष्ठ मानता है। उत्तर-पूर्वी खंड की तुलना कुबेर के साम्राज्य अल्कापुरी से की जाती है जो ध्न के देवता हैं तथा जिनके पास खजाना है। ये मनुष्य को सुख एवं समृ(ि प्रदान करते हैं। चूंकि इन्हें मृत्युंजय कहा जाता है अतः ये मनुष्य को दीर्घायु का वरदान देते हैं। ये परिवार में संतति के जन्म के लिए उत्तरदायी हैं। इन्हें ‘बाल’ भी कहा जाता है, जो यह प्रदर्शित करता है कि यह दिशा बच्चों की शिक्षा एवं उनके विकास के लिए उत्तरदायी है। इन्हें गंगाध्र भी कहा जाता है अतः गंगा अथवा जल का स्रोत इस दिशा में जमीन के नीचे टंकी बनाकर किया जा सकता है। यदि इस दिशा में खुला स्थान न हो अथवा कम खुला स्थान हो तो ऐसे मकान में दुष्ट आत्माओं से खतरा उत्पन्न होता है। बच्चों का विकास भी अवरु( हो जाता है। यह दिशा एक एन्टीना की भांति कार्य करता है तथा ब्रह्माड से ब्रह्माण्डीय ऊर्जा प्राप्त करता है। वास्तु पुरुष इस दिशा से श्वांस लेकर छोड़ते हैं जो दंिक्षण-पश्चिम कोने की ओर जाता है तथा बलों के इस सामंजस्य के कारण पूरा मकान ऊर्जावान बना रहता है। अतः यह दिशा थोड़ा नीचा होना चाहिए साथ ही यहां दूसरे सात दिशाओं के मुकाबले अध्कि खुला स्थान रहना चाहिए ताकि मकान को अध्कितम लाभ मिल सके। जो लोग उत्तर-पूर्व मुखी मकान में निवास करते हैं वे लोग अध्कि शिक्षित तथा कानून का पालन करने वाले होते हैं। इनकी अभिरुचि साध्ना, पराविज्ञान, ललितकला एवं अनुसंधन आदि कार्यों में होती है। इनमें अपने कार्य के प्रति अदम्य उत्साह एवं साहस होता है। ये सही तरीके से अच्छी कमाई करते हैं। ये अपने घर को कापफी सुंदर एवं सुसज्जित रखते हैं तथा अपव्ययी होते हैं। इन्हें जीवन में सब कुछ प्राप्त करने की चाह होती है। किंतु ये आसानी से क्रोध्ति हो जाते हैं। हालांकि कुल मिलाकर ये अच्छे स्वास्थ्य के साथ सुखी एवं समृ( जीवन व्यतीत करते हैं। यहां उत्तर-पूर्व कोना का तात्पर्य पूर्व एवं उत्तर दिशाओं के मध्य से है। नीचे उत्तर-पूर्व खंड के कुछ चित्रा प्रदर्शित किए गए हैं। सामान्यतः लोग यह सोचते हैं कि उत्तर-पूर्व कोणीय भूखंड अथवा मकान अथवा पफैक्ट्री अथवा फ्रलैट का तात्पर्य है कि उसके सामने से उत्तर दिशा में एक सड़क तथा पूर्व दिशा में एक सड़क जा रही हो, यहां हमने उत्तर-पूर्व खंड में अनेक प्रकार के मकान प्रदर्शित किए हैं। चूंकि उत्तर-पूर्व दिशा सभी आठों दिशाओं में सबसे महत्वपूर्ण है अतः बिल्डर को इस दिशा के प्रति निर्माण के प्रारंभ से निर्माण के अंत तक विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। यदि दूसरे सभी दिशा ठीक हों किंतु उत्तर-पूर्व कटा हो तो इससे समृ(ि प्रभावित होती है तथा विपत्तियों का आगमन होता है। उत्तर-पूर्व कोने से किसी भी प्रकार का समझौता करना घातक साबित हो सकता है क्योंकि अच्छी कमाई के बावजूद भी यह विपत्ति एवं निराशा को आमंत्रित करता है। यह उत्तर-पूर्व खंड का मकान है। इस मकान के उत्तर एवं पूर्व में सड़कें हैं तथा दोनों सड़कें मकान के सामने से पार हो रही हैं तथा भूखंड के क्षेत्रा में नहीं रूक रहीं। निःसंदेह इस भूखंड को उत्तर-पूर्व कोने का भूखंड कहा जाएगा। सड़कों के कारण भूखंड में उत्तर-पश्चिम-उत्तर की ओर वृ(ि है जो उत्तर की सड़क से निर्मित हो रहा है जिसका झुकाव दक्षिण-पूर्व की ओर है। यह अच्छा नहीं है। हम इसमें परिवर्तन एवं संशोध्न कर सकते हैं किंतु नैसर्गिक रूप से यह भूखंड अच्छा नहीं है। पूर्व के सड़क के झुकाव के कारण इस भूखंड में दक्षिण-पूर्व-पूर्व की ओर वृ(ि है। यह अच्छा नहीं है। दूसरा उत्तर-पूर्व का भूखंड यह भी उत्तर-पूर्व का भूखंड है तथा यहां उत्तर की सड़क का झुकाव दक्षिण-पूर्व की ओर है जिसके कारण उत्तर-पश्चिम-उत्तर में वृ(ि है। यह भी शुभ नहीं है। हम इसमें वृ(ि वाले हिस्से को काटकर संशोध्न कर सकते हैं। किंतु कुछ समय के लिए नैसर्गिक शक्ति यहां से अनुपस्थित है। यदि इसके उत्तर-पश्चिम-उत्तर का उपाय किया जाता है तो कुछ सालों अथवा महीनों के पश्चात इस भूखंड की नैसर्गिक शक्ति वापस आ जाएगी। पूर्व दिशा की सड़क का झुकाव उत्तर-पश्चिम-उत्तर की ओर यहां भूखंड में दक्षिण-पूर्व-पूर्व की ओर वृ(ि है क्योंकि पूर्व की सड़क उत्तर-पश्चिम-उत्तर की ओर जा रही है। इसके कारण भूखंड के उत्तर-पूर्व में कटाव हो गया है तथा दक्षिण-पूर्व-पूर्व में वृ(ि हो गयी है जो कि भूखंड के लिए शुभ नहीं है। यहां एक अच्छी बात उत्तर-पूर्व की ओर झुकाव है जिसके कारण भूखंड में उत्तर-पूर्व की ओर वृ(ि हो गयी है। यह शुभ है। इस चित्रा मंे एक शुभ तथा एक अशुभ गुण हैं। गोल उत्तर-पूर्व कोना वाला भूखंड चारदीवारी का उत्तरपूर्व कोना गोल नहीं होना चाहिए। सामान्यतः इस प्रकार का गोलाकार कोना वाला भूखंड दो सड़कों के मिलन बिंदु पर देखा जा सकता है। वास्तु के सि(ांतों के अनुसार उत्तर-पूर्व खंड में स्थित मकान अथवा भूखंड में इस प्रकार का गोलाकार कोना नहीं होना चाहिए। इसे पूर्ण समकोणीय होना चाहिए। उत्तर-पूर्व कोने में कटाव यह एक कटु सत्य है कि यदि किसी भूखंड अथवा मकान का उत्तर-पूर्व भाग कटा हुआ हो तो निवासियों को पुरुष संतति की प्राप्ति नहीं होगी तथा यदि होगी भी तो वह शारीरिक अथवा मानसिक रूप से अक्षम होगा तथा उसकी मृत्यु असामयिक हो जाएगी। यद्यपि कि चारदीवारी का उत्तर-पूर्व भाग ठीक भी हो किंतु यदि मकान का उत्तर-पूर्वी हिस्सा कटा हुआ हो तो वहां पूरी संभावना है कि घर के बड़ों को बच्चों अथवा युवाओं का दाह-संस्कार करना पड़ेगा। हो सकता है कि सभी मामलों में ऐसा न हो किंतु ऐसा होने की संभावना अवश्य है। यह मकान भी उसी प्रकार का है किंतु इसमें थोड़ा परिवर्तन है। मकान में उत्तर-पूर्व के कटाव को देखें। यहां चारदीवारी ठीक है किंतु मकान में कटाव है। यह अच्छा नहीं है। उत्तर की सड़क सीधी तथा पूर्व की सड़क झुकी हुई यहां उत्तर की सड़क बिल्कुल 90 डिग्री पर है किंतु पूर्व की सड़क झुकी हुई है जिसके कारण इस भूखंड का दक्षिण-पूर्व भाग थोड़ा दक्षिण-पूर्व-पूर्व की ओर बढ़ा हुआ है। यह अच्छा नहीं है। इसमें हम दक्षिण-पूर्व-पूर्व की वृ(ि को काटकर संशोध्न कर सकते हैं किंतु ऐसा किसी वास्तु विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। काफी आम उत्तर-पूर्व स्थित भूखंड इसे भी उत्तर-पूर्व खंड का ही मकान अथवा भूखंड कहा जाएगा किंतु यहां पूर्व की सड़क उत्तर की ओर नहीं जा रही है तथा उत्तर की सड़क पूर्व की ओर नहीं जा रही है बल्कि दोनों का अंत इस भूखंड पर हो रहा है। इसे भी उत्तर-पूर्व खंड ही कहा जाता है किंतु इसका परिणाम अन्य उत्तर-पूर्व भूखंड के समान नहीं होगा जिसकी चर्चा हम कर रहे हैं। सड़क का गुजरना महत्वपूर्ण है, सड़क के रूक जाने का अर्थ यह है कि परिणाम भी रूक जाएंगे अथवा कम हो जाएंगे। ऐसी गलियां उत्तर-पूर्व खंड को सकारात्मक प्रभाव प्रदान नहीं करती हैं। यदि आप इस प्रकार का भूखंड खरीदना चाहते हैं तो बिना विशेषज्ञों की सलाह से ऐसे भूखंड न खरीदें क्योंकि इनके पीछे भारी निर्माण हो सकते हैं। यह इस भूखंड के लिए नकारात्मक हो सकता है। पिफर भी यह भूखंड उत्तर अथवा पूर्व के भूखंड से बेहतर है। पूर्व की सड़क उत्तर की ओर जाती हुई इस उत्तर-पूर्व भूखंड से दो सड़कें पूर्व एवं उत्तर की ओर जा रही हैं, यहां पूर्व की सड़क उत्तर की ओर जा रही है जो कि शुभ है। किंतु इस भूखंड को खरीदने से पूर्व भी दो बार सोचें, ध्यान रखें कि यह अशुभ भूखंड नहीं हैं किंतु यहां उत्तर की सड़क पूर्व की ओर जा रही है किंतु अवरू( हो रही है। आप दूसरा भूखंड खरीदने का प्रयास करें। इस भूखंड को खरीदने से पूर्व यदि संभव हो तो ऐसा दूसरा भूखंड देखें जिसकी उत्तर दिशा की सड़क पूर्व की ओर जा रही हो, यह भविष्य के लिए बेहतर है।

दीपावली विशेषांक  अकतूबर 2016

फ्यूचर समाचार के वर्तमान विशेषांक को विशेष रूप से मां लक्ष्मी को समर्पित किया गया है। प्रत्येक जन रातोंरात अमीर व सुख सुविधा वाली जिन्दगी की तमन्ना करता है लेकिन मां लक्ष्मी को प्रत्येक आदमी प्रसन्न नहीं कर पाता, लेकिन दीपावली के अवसर पर उनकी विधि विधान से पूजा करके आप मां लक्ष्मी को आकर्षिक कर सकते हैं। इस वर्तमान विशेषांक में मां लक्ष्मी के ऊपर कई अच्छे लेख सम्मिलित किये हैं। लक्ष्मी को आकर्षित करने के व प्रसन्न करने के टोटके आदि भी सम्मिलित किये गये हैं इनके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भों में पूर्व की भांति ही ज्योतिष पर आधारित लेख भी शामिल हैं, जिनमंे से कुछ लेख इस प्रकार हैं: महाशक्तिदायिनी मां दुर्गा पूजा का ज्योतिषीय योग, पंचमहा दिवसात्मक महापर्व दीपावली, दीपावली पूजन विधि, लक्ष्मी प्राप्ति के स्वर्णिम सरल प्रयोग, धन प्राप्त करने के सरल टोटके, धन प्राप्त करने के अचूक उपाय, प्रसन्न करें राशि अनुसार लक्ष्मी जी को, श्रीविद्या साधना आदि।

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