ज्ञान की कुंजी - अंक विज्ञान

ज्ञान की कुंजी - अंक विज्ञान  

इस आधुनिक युग में किसी के पास समय नहीं है। सब अपने-अपने काम में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में हर किसी को अपनी समस्या का उत्तर जल्द से जल्द चाहिए। इस मशीनी युग में हर व्यक्ति चाहता है कि एक बटन दबाने से उसका काम हो जाए। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एक ऐसी पद्धति की खोज की गई है जहां पर एक बटन दबाने से तो नहीं पर ‘हां’ एक नंबर बताने से जरूर पता चल सकता है कि अमुक व्यक्ति का ”कार्य सिद्ध होगा या नहीं।“ अगर होगा तो उस काम को होने में कितना समय लगेगा ? जातक जब भी कोई प्रश्न पूछे तो आप उससे 1 से 108 के बीच का कोई एक अंक बोलने के लिए कहें। वह जो अंक बोलता है, उसे 12 से भाग दें। यदि शेष 2, 6, 11 या 0 हो तो कार्य सिद्ध होगा। यदि शेष 1, 3, 7 या 9 हो तो कार्य विलंब से होगा और यदि शेष 4, 5, 8, 10 हो तो कार्य होने में संदेह है। उदाहरण के तौर पर हम इसे इस तरीके से समझ सकते हैं। मान लें कि जातक ने अंक 48 बोला। इसे हमनें 12 से भाग किया तो शेष शून्य आया। अतः कार्य सिद्ध होगा। अब जातक कहता है कि कब तक कार्य सिद्ध होगा। उसके द्वारा बताये गये अंक 48 को 6 से गुणा करके 8 जोड़ें और उसे 7 से भाग करने के उपरांत शेष 2 आया। इस 2 अंक को निम्नलिखित तालिका में वार ग्रह ‘चंद्र’ 2 अंक के सामने का धू्रवांक देखेंगे। उपरोक्त तालिका में अंक 2 का धू्रवांक 21 है। अब 21 ध्रूवांक को बताये गये अंक 48 से गुणा किया तो संख्या 1008 आई। इस संख्या को 71 (सभी ग्रहों के ध्रुवांक का योग) से भाग करने पर शेष 14 आया। अंक 14 को संयुक्त ध्रूवांक वाले काॅलम में, 26 अंक में से घटाएं। शेष संख्या 12 आयी। यह 12 अंक अवधि को दर्शाता है। 26 के आगे अवधि ‘पक्ष’ लिखी हुई है। एक पक्ष 15 दिन का होता है। अतः कार्य 12 पक्षों या 6 महिने में संपन्न होगा।


परा विद्यायें विशेषांक  अकतूबर 2010

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