ग्रह स्थिति एवं व्यापार

ग्रह स्थिति एवं व्यापार  

गोचर फल विचार मासारंभ मं नीच राशि स्थित मंगल का शनि से परस्पर दृष्टि संबंध होना तथा उच्च राशि के शनि का बुध, शुक्र व राहु के साथ चतुग्र्रही योग में होना उग्रवादी तत्वों के उग्र व हिंसक गतिविधियों में बढ़ावा करेगा और अशांति का वातावरण बनाकर जन मानस में भय का माहौल बनाएगा। कहीं भयानक बाढ़, आंधी, तूफान, भूकंप, अग्निकांड इत्यादि प्राकृतिक आपदाओं से जन धन की हानि का योग बनाता है। सीमावर्ती प्रांतों पर शत्रु देशों द्वारा नुकसान का योग बनाएगा और पूर्वी प्रांतों में अराजकता का वातावरण बनेगा। 2 अक्तूबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आना तथा 5 अक्तूबर को मंगल का सिंह राशि में आकर शुक्र को पूर्ण दृष्टि से देखना तथा सूर्य से द्विद्र्वादश योग में आना राजनीति में परस्पर विरोधाभास को बढ़ावा देगा। राजनीतिज्ञों को अपने शत्रुओं की गतिविधियों को विशेष ध्यान में रखना चाहिए। राजनीति में खींचातानी और उथल-पुथल अधिक करेगा। 17 अक्तूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश कर नीचस्थ होना तथा शनि व राहु से राशि संबंध बनाना वरिष्ठ अधिकारियों के अपने कर्मचारियों में परस्पर तनाव व परेशानियों को बढ़ाएगा। अत्यधिक महंगाई के कारण जनता को विरोध के लिए आन्दोलन करने पर विवश करेगा। सरकार को झुकाव की तरफ ले जाएगा। पेयजल की समस्या को बढ़ाएगा। बृहस्पति की शनि, राहु व सूर्य पर दृष्टि होना आम जनता को धार्मिक आयोजनों के प्रति रूझान बढ़ाएगा। सोना व चांदी मासांरभ में 2 अक्तूबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आना चांदी में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी का योग बनाएगा। सोने में भी तेजी का ही योग बनता है। 5 अक्तूबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को सर्वतोभद्रचक्र द्वारा वेधना तथा इसी दिन मंगल का मघा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को तथा दक्षिण वेध से अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी की लहर ही चलाएगा। 6 अक्तूबर को चंद्र दर्शन रविवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारों में तेजी का वातावरण बनाए रखेगा। 7 अक्तूबर को शनि का स्वाति नक्षत्र के दूसरे चरण में आना बाजारों की तेजी के रूख को आगे बढ़ाएगा। 10 अक्तूबर को सूर्य का चित्रा नक्षत्र में आकर पूर्वा भाद्रपद, मूला व मृगशिरा नक्षत्रों को वेधना बाजारों में तेजी का रूझान ही बनाएगा। 12 अक्तूबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना भी बाजारों में आगे तेजी का ही कारक है। 17 अक्तूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश कर बुध, शनि व राहु से राशि संबंध बनाना तथा गुरु ग्रह से पूर्ण दृष्टित होना व कार्तिक मास की संक्रांति का 45 मुहूर्ती में आना ये योग बाजारों में तेजी का वातावरण ही बनाएंगे। इसी दिन शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र पर आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारा में उतार-चढ़ाव के साथ मंदी का रूख दर्शाता है। 20 अक्तूबर को शनि का अस्त होना तथा 21 अक्तूबर को बुध का वक्री गति में आ जाना बाजारों में उतार-चढ़ाव अधिक करते हुए तेजी की लहर चला देगा। 23 अक्तूबर को सूर्य का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा, ज्येष्ठा व रोहिणी नक्षत्रों को वेधना बाजारों में तेजी का रूझान बना देगा। 26 अक्तूबर को बुध का अस्त हो जाना बाजार में मंदी का वातावरण बनाएगा। 27 अक्तूबर को मंगल का पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र पर आकर अश्विनी नक्षत्र को वेधना दक्षिण वेध से पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारों में पुनः तेजी की लहर चला देगा। 29 अक्तूबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में उतार चढ़ाव के साथ तेजी का ही रूख दर्शाता है। 30 अक्तूबर को शुक्र का मूल नक्षत्र पर प्रवेश कर पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना सोने की तेजी को और आगे बढ़ाएगा। गुड़ व खांड़ मासारंभ में 2 अक्तूबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आना गुड़ में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी का योग बनाएगा, खांड़ में भी तेजी का रूख ही बनाएगा। 5 अक्तूबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना तथा इसी दिन मंगल का मघा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को तथा दक्षिण वेध से अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी की लहर ही चलाएगा। 6 अक्तूबर को चंद्र दर्शन रविवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारांे में तेजी का योग बनाएगा। 7 अक्तूबर को शनि का स्वाति नक्षत्र के दूसरे चरण में आना बाजारों को तेजी के वातावरण की ओर आगे बढ़ाएगा। 10 अक्तूबर को सूर्य का चित्रा नक्षत्र पर आकर पूर्वा भाद्रपद, मूला व मृगशिरा नक्षत्रों को वेधना बाजारों में तेजी का रूझान ही बनाएगा। 12 अक्तूबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना बाजारो में तेजी का ही कारक है। 17 अक्तूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश कर बुध, शनि व राहु से राशि संबंध बनाना तथा गुरु ग्रह से दृष्टित होना तथा कार्तिक मास की संक्रांति का 45 मुहूर्ती में होना बाजारांे में तेजी की लहर के बाद कुछ मंदी का रूख बनाएगा। इसी दिन शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र पर आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारांे में कुछ मंदी का वातावरण दर्शाता है। 20 अक्तूबर को शनि का अस्त हो जाना तथा 21 अक्तूबर को बुध का वक्री गति में आना बाजारों में तेजी की लहर बनाए रखेंगे। 23 अक्तूबर को सूर्य का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा, ज्येष्ठा व रोहिणी नक्षत्रों को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनाएगा। व्यापारी वर्ग बाजार के रूख को विशेष ध्यान में रखें। 26 अक्तूबर को बुध का अस्त हो जाना बाजारों में तेजी का रूख ही दर्शाता है। 27 अक्तूबर को मंगल का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर आकर अश्विनी नक्षत्र को वेधना तथा दक्षिण वेध से पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारांे में तेजी के वातावरण में और वृद्धि करेगा। 29 अक्तूबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी का ही योग बनाता है। 30 अक्तूबर को शुक्र का मूल नक्षत्र पर आकर पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना बाजारों में आगे तेजी का रूझान ही बनाएगा। अनाज व दलहन मासारंभ में 2 अक्तूबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आना गेहूं, जौ, चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजों तथा मूंग, मौठ, मसूर, अरहर इत्यादि दलहन के बाजारों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी का योग ही दर्शाता है। 5 अक्तूबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र पर आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना तथा मंगल का मघा नक्षत्र पर आकर भरणी नक्षत्र को तथा दक्षिण वेध से अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारांे में तेजी की लहर ही चलाएगा। 6 अक्तूबर को चंद्र दर्शन रविवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारों में मंदी का रूख दर्शाता है। 7 अक्तूबर को शनि का स्वाति नक्षत्र के दूसरे चरण में आना बाजार के रूख को बदल कर तेजी का वातावरण बनाएगा। 10 अक्तूबर को सूर्य का चित्रा नक्षत्र पर आकर पूर्वाभाद्रपद, मूला व मृगशिरा नक्षत्रों को वेधना बाजारां में तेजी के रूख को आगे बढ़ाएगा। 12 अक्तूबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना गेहूं, जौ, चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजों तथा मंूग, मौठ, समूर, अरहर इत्यादि दलहन के बाजारों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी का योग ही दर्शाता है। 5 अक्तूबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र पर आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना तथा मंगल का मघा नक्षत्र पर आकर भरणी नक्षत्र को तथा दक्षिण वेध से अश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी की लहर ही चलाएगा। 6 अक्तूबर को चंद्र दर्शन रविवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना बाजारों में मंदी का रूख दर्शाता है। 7 अक्तूबर को शनि का स्वाति नक्षत्र के दूसरे चरण में आना बाजार के रूख को बदल कर तेजी का वातावरण बनाएगा। 10 अक्तूबर को सूर्य का चित्रा नक्षत्र पर आकर पूर्वाभाद्रपद, मूला व मृगशिरा नक्षत्रों को वेधना बाजारों में तेजी के रूख को आगे बढ़ाएगा। 12 अक्तूबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना गेहूं, जौ, चना इत्यादि अनाजों तथा मूंग, मौठ, मसूर इत्यादि दलहन में तेजी की ही लहर चलाता है। 17 अक्तूबर को सूर्य का तुला राशि में आकर बुध शनि व राहु से राशि संबंध बनाना तथा गुरु ग्रह से दृष्टित होना तथा कार्तिक मास की संक्रांति का 45 मुहूर्ती में आना एवं इसी दिन शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र पर आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव के बाद तेजी का वातावरण ही बनाएगा। 20 अक्तूबर को शनि का अस्त हो जाना तथा 21 अक्तूबर को बुध का तुला राशि में वक्री गति में आना बाजारों में तेजी का रूख ही बनाएगा। 23 अक्तूबर को सूर्य का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा, ज्येष्ठा व रोहिणी नक्षत्रों को वेधना बाजारों की तेजी की लहर को आगे चलाएगा। 26 अक्तूबर को बुध का अस्त हो जाना अनाजां में तेजी का योग बनाता है। 27 अक्तूबर को मंगल का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर अश्विनी नक्षत्र को वेधना तथा दक्षिणी वेध से पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी की रूख में वृद्धि करेगा। 29 अक्तूबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी का माहौल ही दर्शाता है। 30 अक्तूबर को शुक्र का मूल नक्षत्र पर आकर पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना बाजारों में आगे तेजी का रूझान ही दर्शाता है। घी व तेलहन मासारंभ में 2 अक्तूबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आना बाजारां में तेजी का वातावरण ही बनाएगा। 5 अक्तूबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र पर आकर अश्लेषा नक्षत्र को वेधना तथा मंगल का मघा नक्षत्र पर आकर भरणी तथा अश्लेषा नक्षत्रों को वेधना बाजारांे में तेजी का ही लहर चलाएगा। 6 अक्तूबर को चंद्र दर्शन रविवार के दिन 15 मुहूर्ती में होना भी तेजी का ही कारक है। 7 अक्तूबर को शनि का स्वाति नक्षत्र के दूसरे चरण में आना बाजारों की तेजी के लहर को और आगे बढ़ाएगा। 10 अक्तूबर को सूर्य का चित्रा नक्षत्र में आकर पूर्वाभाद्र, मूला व मृगशिरा नक्षत्रों को, बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना तेजी का ही कारक बनता है। 17 अक्तूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश कर बुध, शनि व राहु से राशि संबंध बनाना तथा कार्तिक मास की संक्रांति का 45 मुहूर्ती में होना तथा इसी दिन शुक्र का ज्येष्ठा नक्षत्र पर आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना ये सभी योग तेलवान में मंदी का रूख लेकिन घी में तेजी का वातावरण बनाते हैं। 20 अक्तूबर को शनि का अस्त होना तथा 21 अक्तूबर को बुध का वक्री गति में आना ये योग घी की तेजी के रूख को बनाए रखेंगे लेकिन तेलवान में कुछ मंदी का रूख ही दर्शाता है। 23 अक्तूबर को सूर्य का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा, ज्येष्ठा व रोहिणी नक्षत्रों को वेधना बाजारों में तेजी की लहर चला देगा। 26 अक्तूबर को बुध का अस्त हो जाना बाजारांे में तेजी का ही कारक बनता है। 27 अक्तूबर को मंगल का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पर आकर अश्विनी नक्षत्र को वेधना तथा दक्षिण वेध से पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारों के तेजी के रूझान को और आगे बढ़ाएगा। 29 अक्तूबर को बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजारांे में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी का रूझान ही बनाएगा। 30 अक्तूबर को शुक्र का मूल नक्षत्र पर आकर पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना बाजारों में आगे तेजी का ही योग बनाता है। नोट: उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है, पाठकों का बेहतर मार्ग दर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। इसके साथ-साथ संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेदार नहीं हैं।



दुगर्तिनाशिनी मां दुर्गा विशेषांक  अकतूबर 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के दुगर्तिनाशिनी मां दुर्गा विशेषांक में भगवती दुर्गा के प्राकट्य की कथा, महापर्व नवरात्र पूजन विधि, नवरात्र में कुमारी पूजन, नवरात्र और विजय दशमी, मां के नौ स्वरूप, मां के विभिन्न रूपों की पूजा से ग्रह शांति, नवरात्रि की अधिष्ठात्री देवी भगवती दुर्गा, काली भी ही दुर्गा का रूप तथा देवी के 51 शक्तिपीठों का परिचय आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त गोत्र का रहस्य एवं महत्व, लोकसभा चुनाव 2014, संस्कृत कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग हेतु सर्वश्रेष्ठ भाषा, अंक ज्योतिष के रहस्य, कुंडली मिलान एवं वैवाहिक सुख, विभिन्न राशियों में बृहस्पति का फल व गंगा की उत्पत्ति की पौराणिक कथा आदि आलेख भी ज्ञानवर्धक व अत्यंत रोचक हैं।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.