हाथ पर शनि का प्रभाव

हाथ पर शनि का प्रभाव  

हाथ पर शनि का प्रभाव आचार्या मिथिलेश गुप्ता जीवन पर होने वाले प्रभाव को हाथ में स्थित शनि के स्थान से जाना जा सकता है। शनि का प्रभाव अच्छा है या बुरा यह बात पुरुष अपने बांए हाथ से और स्त्रियां अपने दाहिने हाथ से देखें। शनि की स्थिति को समझे, शनि द्वारा परेशानियां-साढ़ेसाती कब होगी। होगी यह निश्चत करें उसके अनुसार अनिष्ट शनि का उपाय करें। हाथ की सबसे बड़ी अंगुली को मध्यमा कहा जाता है। इसे सामुद्रिक शास्त्र में शनि की अंगुली कहते हैं। जिनके पास अपनी जन्म कुंडली नहीं है वे अपने हाथ से शनि की स्थिति को समझे। हाथ के मध्य में जो रेखा लंबी निकलती है वह शनि रेखा है। कलाई के ऊपर के हिस्से में मणिबंध से शुरु होती है या हथेली के बीच से कही से भी हो सकती है। यह रेखा शनि पर्वत यानी शनि की अंगुली तक जाती है। यह रेखा निर्दोष हो जो व्यक्ति को अपने संपूर्ण जीवन में शनि का सहयोग प्राप्त होता है क्योंकि शनि ही भाग्य रेखा है अर्थात व्यक्ति को भाग्य बहुत अच्छा है। कई बार जीवन ेरख से कोई रेखा भी शनि पर्वत की ओर आगे बढ़ती है तो शनि की सहायक रेखा होती है। यह रेखा शनि पर्वत तक पहंुचे तो फल अच्छा मिलता है नहीं तो जीवन में महासंकट खड़ा होता है। मंगल पर्वत से और जीवन रेखा से कोई रेखा आरंभ होकर शनि पर्वत की ओर बढ़ती हो तो व्यक्ति के परिवार में किसी की बेसमय में मौत होती है। व्यक्ति के स्वयं के लिए भी यह खराब होती है। यह रेखा दो होने पर अपने यानी स्वयं के लिए भी प्राणघातम होती है। भाग्य रेखा से कोई रेखा निकलकर जीवन रेखा को काटे तो बेसमय मौतम का खतरा होता है। ज ी व न रेखा और म स् त क रेखा पर द्वीप बनता हो तो जातक को कैंसर, पागलपन जैसे भयंकर रोग होते हैं। अगर यह रेखा गुरु पर्वत से शनि रेखा तक एक सीधी रेखा हो तो व्यक्ति का अंर्तमय जीवन को यश की ओर ले जाता है। भाग्य रेखा के आरंभ में, मध्य में या अंत में द्वीप हो तो बचपन, जवानी और बुढ़ापा इन तीनों अवस्थाओं में रोग उत्पन्न होते हैं। भाग्य रेखा शुरु में या अंत टूटे तो बचपन में अनाथ होने, मध्य में, पत्नी की मृत्यु और अंत टूटने पर तो संतान की मृत्यु होती है। शनि की अंगुली सीधी और लम्बी हो तो अच्छे भाग्य का सूचक है। शनि अंगुली, सूर्य, तर्जनी की अपेक्षा छोटी होती है तो भाग्य दुर्भाग्य में बदल जाता है। शनि की अंगुली सर्यू की तरफ झुकी हो तो व्यक्ति किसी कला के माध्यम से धन कमाता है। गुरु पर्वत पर क्राॅस हो या अंगुठी हो तो मठाधीश या महाराधिराज की पदवी मिलती है। दोनों हाथों की अंगुलियों में शनि की अंगुलियों में नाखूनों में चंद्र न हो तो यह दरिद्रता का लक्षण है। नाखून वर्गाकार एवं गुलाबी हों तो बहुत श्रेष्ठ लक्षण माने जाते हैं। नाखून चपटे हों तो ज्ञानी और पूर्ण जीवन जीती है। नाखून पर काल बिंदु हो तो मृत्यु निकट होती है। नाखून नीले या काले हों बहुत से रोग होते हैं। शनि की अंगुली का हिस्सा बाहर की तरफ झुकता है तो अपना धन अच्छे कामों नहीं बुरे कार्यों में लगाता है। श् ा िन की अंगुली गुरु की ओर झुकी या उसके साथ चिपकी हो तो अच्छा सकेंत है। उस पर शनि का प्रभाव कम पड़ता है। यह अंगुली टेड़ी हो तो गुण अबगुण में बदल जाते हैं। ऐसे व्यक्ति पर 80 प्रतिशत शनि का प्रभाव देखने को मिलता है। शनि की अंगुली सूर्य की ओर हो तो 75 प्रतिशत प्रभाव शनि का होता है। मध्य से गुरु की तरफ झुकी हो तो 35 से 55 वर्ष तक शनि का प्रभाव रहता है। तीसरे पोर से शनि की अंगुली गुरु पर हो तो ऐसा जातक अंहकारी और 50 प्रतिशत शनि के प्रभाव में होता है। जन्म से शनि से शनि की अंगुली न हो तो जातक की उम्र बचपन तक होती है। हाथ काला रंग हथेली पर हो तो चाहे रेखा अच्छी हो तब भी बुरा मिलता है। पैरों में शक्ति कम हो जाती है। रेखाएं भी काली हो तो अल्पायु योग भी ब न ा त ा है। सूर्य की अंगुली शनि के तरफ हो तो धन प्राप्ति का योग होता है लेकिन धन प्राप्ति का साधन कैसा है इसका विचार नहीं करता है। नेत्र विकार का डर रहात है। अंगुलियां फूली हेां तो 90 प्रतिशत शनि का प्रभाव रहता है। अंगूठा शनि की ओर झुका हो तो व्यभिचारी एवं स्वार्थी होता है। उसे गुप्त रोग होते हैं। गुरु की अंगुली शनि की तरफ हो तो व्यक्ति जीवन भर दूसरों की गुलामी करता है। नौकरी में उसे सफलता कम मिलती है। अंगुलियों का आकार अच्छा न होने पर शनि का प्रभाव पड़ता है। शनि पर्वत दबा हो और हथेली पर चमड़ी खराब हो तो शनि का अनिष्ट होता है। दुर्भाग्य उसका साथ नहीं छोड़ता/शनि की अंगुली अगर बिल्कुल सीधी और लंबी हो तो थोड़ा बचाव होता है। नहीं तो अशुभ फल अधिक मिलते हैं। साढ़ेसाती के पूरे साढ़े सात वर्ष दुःख में रहना पड़ेगा यह बात गलत है। साढ़ेसाती में अच्छी घटनाएं भी होती हैं। कन्याओं का विवाह भी सम्पन्न होता है। परदेश की यात्रा बहुत होती हैं। बहुत से लोगों को नौकरी में अच्छा पद प्राप्त होता है। हर एक को कभी न कभी शनि के प्रकोप से गुजरना पड़ सकता है मानवीय जवीन सुख-दुख का आधार है। उससे घबराने की जरा भी आवश्यकता नहीं है। परमात्मा इंसान को उतना ही कष्ट देता है जितना वह सहन कर सकता है। अगर शनि का पर्वत अच्छा है, शनि रेखा अच्छी है तो शनि की अंगुली अच्छी है तो कोई डर नहीं है शनि कुछ नहीं बिगाड़ेगा। शनि यंत्र की पूजा करने से सारे अड़चनेों और कष्टों का निवारण होता है। इससे भौमिक एवं अध्यात्मिक दोनों प्रकार के सुख मिलते हैं।



हस्तरेखा विशेषांक  जुलाई 2009

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