दीपावली पूजन पैक

दीपावली पूजन पैक  

दीपावली पूजन पैक रेखा कल्पदेव, फ्यूचर पाॅइंट दीपावली पूजन पैक अन्यान्य चमत्कारिक, दुर्लभ एवं ऐसी बहुमूल्य वस्तुओं को एक साथ सम्मिलित कर निर्मित किया गया है जो देवी महालक्ष्मी को अत्यधिक प्रिय हैं। भारतीय धर्मग्रंथों में ऐसा उल्लिखित है कि यदि देवी महालक्ष्मी का पूजन इन सामग्रियों के साथ तथा इनका उपयोग कर शास्त्रसम्मत विधि से किया जाय तो सभी अभीष्ट अभिलाषाएं पूर्ण होती हैं। सम्मिलित सामग्रियां पूर्णतः शुद्ध हैं एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान से निर्मित की गयी हैं। मरगज लक्ष्मी गणेश भगवान् श्री गणेष बुद्धि और षिक्षा के कारक ग्रह बुध के अधिपति देवता हैं। मरगज गणेष बुध के सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है एवं नकारात्मक प्रभाव को कम करता है। मरगज गणेष के शुभत्व से व्यापार और धन में वृद्धि होती है। बच्चों की पढ़ाई हेतु भी यह विषेष शुभ फलदायक होता है। यह मानसिक अषांति को कम करने में मदद करता है तथा गणेष के प्रभाव से बच्चे की बुद्धि कुषाग्र होती है तथा उसके आत्म विष्वास में वृद्धि होती है। सुख-षांति-समृद्धि की प्राप्ति के लिए मरगज लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इनकी शुभता से धन-प्राप्ति, व्यापार वृद्धि, धन, ऋद्धि-सिद्धि, कार्य में सफलता व आर्थिक स्थिति में उन्नति होती है तथा नियमित रूप से मरगज लक्ष्मी गणेष जी का पूजन करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होकर सदैव बनी रहती हैं। मरगज लक्ष्मी-गणेष और मरगज श्रीयंत्र की पूजा मिथुन एवं कन्या राषि के व्यक्तियों को चमत्कारिक फल देती है। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों पर बुध की महादषा-अंतर्दषा चल रही हो, उन सभी व्यक्तियों को मरगज सामग्री का उपयोग पूजन सामग्री के रूप में विषेष रूप से करना चाहिए। दीपावली की शुभ रात्रि पर माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ-साथ निम्न मंत्र का जाप हरी हकीक माला पर 7, 11 या 108 बार करें। ऐसा करने पर वर्षपर्यंत समृद्धि प्राप्त होगी। व्यवसाय से अधिक लाभ प्राप्त होगा। बुध मंत्र: ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः। मरगज श्री यंत्र भगवती महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति का सबसे प्रभावी उपाय है मरगज श्री यंत्र की विधिवत साधना। यह एक ऐसा विधान है जो अभूतपूर्व सफलता प्रदायक है। जब किसी भी अन्य उपाय से भगवती की प्रसन्नता प्राप्त न हो पा रही हो, तो यह साधना प्रयोग करनी चाहिए। मरगज श्रीयंत्र के बारे में कहा गया है कि मरगज श्रीयंत्र प्रमुख रूप से ऐष्वर्य तथा समृद्धि प्रदान करने वाली महाविद्या त्रिपुरसुंदरी महालक्ष्मी का सिद्ध यंत्र है। यह यंत्र सही अर्थों में यंत्रराज है। मरगज यंत्र को स्थापित करने का तात्पर्य श्रीयंत्र को अपने संपूर्ण ऐष्वर्य के साथ आमंत्रित करना होता है। इस अद्भुत यंत्र से अनेक लाभ हैं, इनमें प्रमुख हैं- मरगज श्री यंत्र की स्थापना मात्र से भगवती लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। घर पर मरगज श्री यंत्र नित्य पूजन करने से संपूर्ण दांपत्य सुख प्राप्त होता है। पूरे विधि विधान से मरगज श्री यंत्र पूजन यदि प्रत्येक दीपावली की रात्रि को संपन्न कर लिया जाय तो उस घर में सालभर किसी प्रकार की कमी नहीं होती है। मरगज श्री यंत्र पर ध्यान लगाने से मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है। उच्च यौगिक दषा में यह सहस्रार चक्र के भेदन में सहायक माना गया है। मरगज श्री यंत्र विविध वास्तु दोषों के निराकरण के लिए श्रेष्ठतम उपाय है। मरगज श्री यंत्र की निर्मलता के समान ही साधक का जीवन भी सभी प्रकार की मलिनताओं से परे हो जाता है। गणेश शंख प्रत्येक विषेष पूजा में शंख द्वारा अभिषेक का महत्व है। सभी विद्वान और आम जन इस चमत्कारी गणेष शंख के प्रभाव और चमत्कार के बारे में एकमत हैं। समुद्र देव द्वारा निर्मित गणेष तेजस्वी शंख को जो मनुष्य अपने घर और व्यापार स्थल के पूजा स्थान अथवा तिजोरी में रखकर नित्य पूजा करता है, उस व्यक्ति की दरिद्रता, अभाव, असफलता और सभी रोगों का नाष होता है। राज सम्मान की प्राप्ति, लक्ष्मी वृद्धि, यष और कीर्ति वृद्धि, संतान वृद्धि, बांझपन से मुक्ति, आयु की वृद्धि, राज्य से लाभ, शाकिनी, भूत, बेताल, पिषाच, ब्रह्मराक्षस आदि से मुक्ति, आकस्मिक मृत्यु के भय से मुक्ति, शत्रु भय से मुक्ति, अग्नि भय से मुक्ति, चोर भय से मुक्ति, सर्प भय से मुक्ति, दरिद्रता से मुक्ति मिलती है। गणेष शंख से उपयुक्त फलों के साथ-साथ सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कमलगट्टे की माला कमलगट्टे की माला लक्ष्मी जी के सर्वाधिक प्रिय कमल पुष्प के बीजों से बनायी जाती है। लक्ष्मी जी को कमल पुष्प विषेष प्रिय हैं। इस माला पर लक्ष्मी मंत्र का जप करने से साधक को शीघ्र मनोवांछित कार्यसिद्धि की प्राप्ति होती है व लक्ष्मी पूजन में कमल गट्टा माला का प्रयोग करने से धन शीघ्रातिषीघ्र आता है। दुकान में उन्नति और सफलता के लिए कमलगट्टे की माला बिछाकर ऊपर भगवती लक्ष्मी का चित्र स्थापित कर नित्य पूजन किया जाए तो व्यापार निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर होता है। कमलगट्टे की माला भगवती लक्ष्मी के चित्र पर पहनाकर किसी नदी या तालाब में विसर्जित करने पर घर में निरंतर लक्ष्मी का आगमन बना रहता है। जो व्यक्ति प्रत्येक बुधवार को 108 कमलगट्टे के बीज लेकर घी के साथ एक-एक करके अग्नि में 108 आहुतियां देता है, उसके घर से दरिद्रता हमेषा के लिए चली जाती है। जो व्यक्ति पूजा-पाठ के दौरान प्रयुक्त माला अपने गले में धारण करता है उस पर लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है। कौड़ी प्राचीनकाल से कौड़ी का अपना विषेष महत्व है। इसे लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। लक्ष्मी को समुद्रवासिनी माना गया है इसलिए समुद्र से उत्पन्न जितनी भी चीजें हंै वो किसी न किसी रूप में लक्ष्मी के पूजन में उपयोग में लाई जाती हैं। यही कारण है कि कौड़ियों को पूजा घर में स्थापित करना विषेष शुभ माना जाता है। कौड़ी पूजन से ऋण से मुक्ति मिलती है। कर्ज में डूबा धन भी वापस प्राप्त होने के योग बनते हैं। दीपावली में कौड़ी पूजन द्वारा मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकते हैं। दीपावली के दिन सात लक्ष्मीकारक कौड़ियां रात्रि में अपने पूजन स्थान पर लक्ष्मीजी के चरणों में रखें। पूजन के बाद आधी रात को इन कौड़ियांे को घर के किसी कोने में गाड़ दें। इस प्रयोग से शीघ्र ही आर्थिक उन्नति होने लगेगी। दीपावली के पूजन में पीली कौड़ियां रखकर पूरे विधि-विधान से पूजा करने के बाद गल्ले में रखने से लक्ष्मी आकर्षित होती हैं। पुराने चांदी के सिक्के और रुपयों के साथ कौड़ी रखकर उनका लक्ष्मी पूजन के समय केसर और हल्दी से पूजन करें। पूजा के बाद इन्हें तिजोरी में रख दें। लक्ष्मी पूजा के दिन लक्ष्मी मंदिर में लक्ष्मीकारक कौड़ियां चढ़ाएं। गोमती चक्र गोमती चक्र समुद्र से प्राप्त एक दुर्लभ और चमत्कारी वस्तु है जो कि मनुष्य के जीवन में आने वाली हर कठिनाई को दूर करने में सक्षम है और जिसका उपयोग धन समृद्धि संबंधित उपायों में अक्सर किया जाता है। गोमती चक्र को लक्ष्मी पूजन में शामिल करने से धन का त्वरित आगमन तथा बरकत बनी रहती है। दीपावली के दिन ग्यारह गोमती चक्रों को लक्ष्मी पूजन के बाद जिस जल से लक्ष्मी जी का पूजन किया हो उस जल में डुबोकर रखें और अगले दिन लाल कपड़े में बांधकर अपनी दुकान, शो-रूम, आॅफिस, फैक्ट्री अथवा व्यवसाय स्थल या घर के मुख्य द्वार के पास किसी गुप्त स्थान (जो किसी को दिखाई न दे) पर गोमती चक्र बांध दें। ऐसा करने से व्यापार में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। गोमती चक्र को लाल कपड़े में बांधकर यदि दुकान की चैखट पर बांध दिया जाय तो इससे व्यवसाय में वृद्धि होगी, साथ ही व्यवसाय में किसी भी प्रकार की बाधा दूर होती है। गोमती चक्र को लकड़ी की डिब्बी में पीले कुंकुम (कुमकुम) के साथ रख दिया जाय तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में सफलता मिलने लगती है। धन आगमन के सभी मार्ग बंद हो गये हों, तो इसको करने से शीघ्र ही धन लाभ का मार्ग खुल जाता है। गुंजा दीपावली पूजन में उपयोग में आने वाली विषेष सामग्रियों में गुंजा का भी विषेष रूप से प्रयोग किया जाता है। गुंजा को लक्ष्मी मंत्र से अभिमंत्रित कर तिजोरी में रखने से धन की रक्षा होती है। गुंजा सभी धन संबंधी समस्याओं का निराकरण करता है। गुंजा पूजन से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर-व्यवसाय में निरंतर धन प्रवाह बना रहता है। नजर दोष दूर करने के लिए गुंजा अपने ऊपर से सात बार उतारकर दक्षिण दिषा की ओर फेंक देने से किसी भी प्रकार की नजर लगी हो तो वह दूर होती है कुंकुम (कुमकुम लक्ष्मी जी को कुमकुम का तिलक अत्यंत प्रिय है। दीपावली पूजन के समय इस अभिमंत्रित कुमकुम को अनामिका अंगुली से मां लक्ष्मी को तिलक करें। इससे लक्ष्मी जी की कृपा शीघ्र प्राप्त होगी। मेती घर-व्यवसायिक स्थल में स्थिर लक्ष्मी की कामना हेतु शंख, मोती, गोमती चक्र इत्यादि को शास्त्रों में लक्ष्मी के सहोदर भाई की संज्ञा दी गई है। इन दुर्लभ वस्तुओं की स्थापना करने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं। मोती पूजन से धन, वैभव, सुख, संपत्ति की प्राप्ति होती है। दीपावली पर विधिवत पूजन से सुख-समृद्धि की कामना पूर्ण होती है। लघु नारियल लघु नारियल को दीपावली के शुभ पूजन के अवसर पर भक्तिभाव से मौली बांधकर गंध, अक्षत् से पूजन करें, लक्ष्मीजी को चढ़ाएं, इसके प्रभाव से लक्ष्मी जी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और धन-धान्य के द्वार खोलती हैं। इत्र लक्ष्मी पूजन में इत्र का प्रयोग विषेष शुभ फल देता है। इसकी शुभता से साल भर घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। गुलाबी बिल्लौर लक्ष्मी गणेश गुलाबी बिल्लौर लक्ष्मी गणेष पूजन का बड़ा महत्व है। गुलाबी बिल्लौर लक्ष्मी गणेष पूजन से माता लक्ष्मी व गणेष शीघ्र प्रसन्न होते हैं। घर में सुख सौभाग्य और धन-संपदा की बरसात होती है। गुलाबी बिल्लौर माता लक्ष्मी व गणेष जी का नित्य पूजन करने से धन संपदा व ऐष्वर्य के साथ-साथ बुद्धि और विवेक का भी विकास होता है। गुलाबी बिल्लौर लक्ष्मी-गणेष और गुलाबी बिल्लौर श्रीयंत्र की पूजा धनु और मीन राषि के व्यक्तियों को चमत्कारिक फल देती है। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों पर गुरु की महादषा-अंतर्दषा चल रही हो, उन सभी व्यक्तियों को गुलाबी बिल्लौर सामग्री का उपयोग पूजन सामग्री के रूप में विषेष रूप से करना चाहिए। दीपावली के दिन शुभ समय में गुलाबी बिल्लौर लक्ष्मी गणेष की पूजा करने से संपूर्ण विघ्न-बाधाओं का निराकरण होता है। व्यापार एवं नौकरी में अच्छी तरक्की होती है। घर परिवार में सुख समृद्धि एवं मंगल होता है। गुलाबी बिल्लौर लक्ष्मी गणेष के शुभ प्रभाव से अक्षय धन कोष की प्राप्ति होती है। नवीन आय के स्रोत बनते हैं। व्यवसाय में वृद्धि होती है। साल भर घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। दीपावली की शुभ रात्रि पर माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ-साथ निम्न मंत्र का जप सफेद हकीक माला पर 7, 11 या 108 बार करें। ऐसा करने पर वर्षपर्यंत धन वर्षा होगी और लाभ की स्थिति बनी रहेगी। गुरु मंत्र: ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः। गुलाबी बिल्लौर श्रीयंत्र गुलाबी बिल्लौर श्रीयंत्र की जितनी प्रषंसा की जाए, कम है। विषेष रूप से जब श्रीयंत्र गुलाबी बिल्लौर जैसे बहुमूल्य रत्न से बना हो तो उसकी महिमा और अधिक बढ़ जाती है। इससे लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं, धन के द्वार खुलते हैं तथा धन की स्थिरता सुनिश्चित होती है। गुलाबी बिल्लौर श्रीयंत्र के दर्षन मात्र से मनुष्य धन्य हो जाता है। इस यंत्र की पूजा साधना करने से साधक की समस्त मनोकामनाएं इसी जन्म में पूर्ण होती हैं। धन के साथ ही यष-कीर्ति भी बढ़ती है। मूंगा लक्ष्मी-गणेश दीपावली के दिन कोई भी व्यक्ति अगर अपने घर में विधिपूर्वक मूंगा लक्ष्मी-गणेष की मूर्ति की विधिपूर्वक पूजा करता है तो उसके जीवन में श्री महालक्ष्मी एवं गणेष जी की कृपा से कभी भी धन का अभाव नहीं होता है। मूंगा लक्ष्मी-गणेष की पूजा मेष, वृष्चिक राषि के व्यक्तियों को चमत्कारिक फल देती है। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों पर मंगल की महादषा-अंतर्दषा चल रही हो, उन सभी व्यक्तियों को मूंगा की सामग्री का उपयोग पूजन सामग्री के रूप में विषेष रूप से करना चाहिए। मूंगा लक्ष्मी गणेष दुर्लभ पूजन सामग्रियों की श्रेणियों में आते हैं। यही कारण है कि दीपावली के अवसर पर मूंगा लक्ष्मी गणेष पूजन से सुख, धन, सौभाग्य, सिद्धि व निरोगी जीवन की प्राप्ति होती है। धनबाधा योग दूर होते हैं। माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। धन रक्षा और ऋण मुक्ति के लिए भी इनकी पूजा सर्वोŸाम मानी गयी है। दीपावली की शुभ रात्रि पर माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ-साथ निम्न मंत्र का जप मूंगा माला पर 7, 11 या 108 बार करें। ऐसा करने पर वर्षपर्यंत समृद्धि प्राप्त होगी। नौकरी में शीघ्र उन्नति प्राप्ति होगी। मंगल मंत्र: ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः पारद सामग्री पारद सामग्री पूजन मानसिक वेदना को समाप्त करती है। पारद धातु भगवान् षिव की प्रिय वस्तुओं में से एक है। इसलिए शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या अथवा शनि के दुष्प्रभाव से बचने का सबसे सरल उपाय पारद सामग्री का पूजन है। इनके दर्षन, स्पर्ष एवं पूजन चमत्कारिक लाभ प्रदान करते हंै। यह ज्ञान मार्ग एवं भक्ति मार्ग दोनों को प्रषस्त करता है तथा अनैतिक कृत्यों के दुष्प्रभाव को कम करता है। पारद लक्ष्मी-गणेष और पारद श्रीयंत्र की पूजा कुंभ, मकर राषि के व्यक्तियों को चमत्कारिक फल देती है। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों पर शनि की महादषा -अंतर्दषा चल रही हो, उन सभी व्यक्तियों को पारद सामग्री का उपयोग पूजन सामग्री के रूप में करना चाहिए। पारद लक्ष्मी गणेश पारद सामग्री घर, व्यवसाय, वाहन आदि में रखने से उसकी दैवीय शक्ति जातक को लाभ प्रदान करती है। शास्त्रों में पारद सामग्री को अलौकिक, दुर्लभ, मूल्यवान एवं शुद्ध माना गया है। पारद लक्ष्मी गणेष की स्थापना करने पर लक्ष्मी संबंधी सभी दोषों का शमन होता है तथा धनादि की वृद्धि होती है। धन संबंधी विघ्न बाधाएं दूर होती हैं। षिक्षा और व्यापार क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने के लिए भी पारद लक्ष्मी गणेष विषेष रूप से शुभ माने जाते हैं। पारद लक्ष्मी गणेष के पूजन से जीवन मंगलमय होता है। पारद लक्ष्मी गणेष पूजन दरिद्रता, बौद्धिक तनाव, मानसिक रोग से मुक्त करता है। भौतिक सुख पाने, लक्ष्मी दोष, दरिद्रता, धन लाभ, धन रक्षा, धन संचय आदि कार्यों में लाभ प्राप्त होता है। दीपावली की शुभ रात्रि पर माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ-साथ निम्न मंत्र का जप काला हकीक माला पर 7, 11 या 108 बार करें। ऐसा करने पर वर्षपर्यंत समृद्धि प्राप्त होगी। व्यवसाय से अधिक लाभ प्राप्त होगा। शनि मंत्र: ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। पारद श्रीयंत्र पारद को षिव वीर्य कहा गया है। पारद से निर्मित कोई भी सामग्री विषेष शुभ फलदायी होती है। जीवन में पारद श्रीयंत्र का पूजन करना सौभाग्यकारी होता है। जीवन में आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और धन का निरंतर प्रभाव बनाए रखने के लिए घर-व्यवसाय स्थल, फैक्ट्री या कार्यालय में नियमित रूप से पारद श्रीयंत्र की पूजा करना अतिउŸाम फल देता है। पारद शंख पारद शंख को विजय, समृद्धि, सुख, यष, कीर्ति तथा लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। वैदिक अनुष्ठानों एवं तांत्रिक क्रियाओं में विभिन्न प्रकार के शंखों का प्रयोग किया जाता है। आरती, धार्मिक उत्सव, हवन-क्रिया, राज्याभिषेक, गृह-प्रवेष, वास्तु-षांति आदि शुभ अवसरों पर शंख ध्वनि से लाभ मिलता है। शंखराज सबसे पहले वास्तु-दोष दूर करते हैं। मान्यता है कि पारद शंख में कपिला (लाल) गाय का दूध भरकर भवन में छिड़काव करने से वास्तुदोष दूर होते हैं। परिवार के सदस्यों द्वारा आचमन करने से असाध्य रोग एवं दुःख-दुर्भाग्य दूर होते हैं। पारद शंख को दुकान, आॅफिस, फैक्ट्री आदि में स्थापित करने पर वहां के वास्तु-दोष दूर होते हैं तथा व्यवसाय आदि में लाभ होता है। पारद शंख की स्थापना से घर में लक्ष्मी का वास होता है। स्वयं माता लक्ष्मी कहती हैं कि शंख उनका सहोदर भ्राता है। पारद शंख जहां पर होगा, वहां वे भी हांेगी। शंख न सिर्फ वास्तु-दोषों को दूर करता है, बल्कि आरोग्य वृद्धि, आयुष्य प्राप्ति, लक्ष्मी प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति, पितृ-दोष शांति, विवाह में विलंब जैसे अनेक दोषों का निराकरण एवं निवारण भी करता है। इसे पापनाषक बताया जता है। अतः पारद शंख का विभिन्न प्रकार की कामनाओं के लिए प्रयोग किया जा सकता है। स्फटिक पूजन सामग्री स्फटिक सामग्री धन की देवी लक्ष्मी के भाई शुक्र की वस्तु है। इसलिए जहां स्फटिक सामग्री की पूजा की जाती है वहां धन और सुख-समृद्धि स्वयं ही बनी रहती है। देवी महालक्ष्मी संपूर्ण ऐष्वर्य, चल-अचल, संपत्ति, धन, यष, कीर्ति एवं सकल सुख वैभव देने वाली देवी हैं। श्री गणेष जी समस्त विघ्नों के नाषक, अमंगलों के हरणकत्र्ता, सद्विद्या एवं बुद्धि के दाता हैं। स्फटिक सामग्री में लक्ष्मी-गणेष जी की पूजा करने से धन, संपत्ति का सुख चिरकाल तक बना रहता है। स्फटिक लक्ष्मी-गणेष के प्रभाव से नौकरी व्यापार में दिनों दिन उन्नति बढ़ती जाती है। स्फटिक लक्ष्मी-गणेष और स्फटिक श्रीयंत्र की पूजा वृषभ, तुला राषि के व्यक्तियों को चमत्कारिक फल देती है। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों पर शुक्र की महादषा - अंतर्दषा चल रही हो, उन सभी व्यक्तियों को स्फटिक सामग्री का उपयोग पूजन सामग्री के रूप में विषेष रूप से करना चाहिए। स्फटिक लक्ष्मी गणेश देवी लक्ष्मी का सभी देवी-देवताओं में एक विषेष स्थान है। यह सुख-समृद्धि यष, मान आदि को देने वाली देवी कही जाती है। धन की देवी लक्ष्मी जी के आषीर्वाद से व्यक्ति को सभी दिषाओं में सफलता प्राप्त होती है। धन की देवी लक्ष्मी जी के आषीर्वाद से व्यक्ति को सभी दिषाओं में सफलता प्राप्त होती है। शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। इस प्रकार स्फटिक गणेष का महत्व भी बहुत अधिक माना जाता है। स्फटिक श्री गणेष की मूर्ति को घर में या कार्यालय में स्थापित करने से पुण्य प्राप्त होता है। यह विभिन्न क्षेत्रों में सफलता दिलाने वाला और विघ्नों को नष्ट करने वाला माना जाता है। भगवान् षिव का सर्वप्रिय रत्न होने के कारण स्फटिक गणेष को भी अतिप्रिय है। स्फटिक गणेष प्रत्येक जाति धर्म के लिए शुभ माना गया है। इसके प्रभाव से ग्रहों की प्रतिकूलता भी नष्ट हो जाती है। दीपावली की शुभ रात्रि पर माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ-साथ निम्न मंत्र का जप स्फटिक माला पर 7, 11 या 108 बार करें। ऐसा करने पर वर्षपर्यंत समृद्धि प्राप्त होगी। व्यवसाय से अधिक लाभ प्राप्त होगा। शुक्र मंत्र: ऊँ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः भी बहुत अधिक माना जाता है। स्फटिक श्री गणेष की मूर्ति को घर में या कार्यालय में स्थापित करने से पुण्य प्राप्त होता है। यह विभिन्न क्षेत्रों में सफलता दिलाने वाला और विघ्नों को नष्ट करने वाला माना जाता है। भगवान् षिव का सर्वप्रिय रत्न होने के कारण स्फटिक गणेष को भी अतिप्रिय है। स्फटिक गणेष प्रत्येक जाति धर्म के लिए शुभ माना गया है। इसके प्रभाव से ग्रहों की प्रतिकूलता भी नष्ट हो जाती है। दीपावली की शुभ रात्रि पर माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ-साथ निम्न मंत्र का जप स्फटिक माला पर 7, 11 या 108 बार करें। ऐसा करने पर वर्षपर्यंत समृद्धि प्राप्त होगी। व्यवसाय से अधिक लाभ प्राप्त होगा। शुक्र मंत्र: ऊँ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः स्फटिक श्री यंत्र अनंत ऐष्वर्य व लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्रीविद्या व श्रीयंत्र का महत्व सर्वाधिक है। मां भगवती की कृपा प्राप्ति का सबसे सरल उपाय है, श्री यंत्र की घर में विधिवत पूजा-उपासना। इससे भगवती लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। कार्यस्थल पर इसका नित्य पूजन व्यापार में विकास देता है। घर पर इसका नित्य पूजन करने से संपूर्ण दांपत्य सुख प्राप्त होता है। स्फटिक श्री यंत्र पर ध्यान लगाने से मानसिक क्षमता में वृद्धि होती है। यह विविध वास्तु दोषों के निराकरण के लिए श्रेष्ठतम उपाय है। स्फटिक से बना हुआ श्री यंत्र अतिषीघ्र सफलता देता है। इस यंत्र की निर्मलता के समान ही साधक का जीवन भी सभी प्रकार की मलिनताआंे से परे हो जाता है। संग सितारा लक्ष्मी गणेश शुक्र ग्रह की शुभता हेतु और लक्ष्मी गणेष का आषीर्वाद प्राप्त करने के लिए संग सितारा लक्ष्मी गणेष की पूजा की जाती है। संग सितारा लक्ष्मी गणेष व्यवसाय के लिए उŸाम तथा कला में अभिरुचि, बुद्धि विकास और विघ्न बाधाओं से मुक्ति दिलाने में सहायक है। सभी कार्यों में सफलता हेतु भगवान् गणेष की उपासना ही सर्वश्रेष्ठ मानी गयी है। विघ्न को नष्ट करने के लिए गणेष की उपासना लाभदायक है। तीव्र बुद्धि की प्राप्ति और धनागमन के साधन खुलते हैं। संगसितारा लक्ष्मी-गणेष और संग सितारा श्रीयंत्र की पूजा सिंह राषि के व्यक्तियों को चमत्कारिक फल देती है। इसके अतिरिक्त जिन व्यक्तियों पर सूर्य की महादषा-अंतर्दषा चल रही हो, उन सभी व्यक्तियों को संग सितारा सामग्री का उपयोग पूजन सामग्री के रूप में विषेष रूप से करना चाहिए। संग सितारा लक्ष्मी-गणेष पूजन करने से विघ्नों का नाष होता है व घर में धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती है। लक्ष्मी धन-धान्य और समृद्धि की प्रतीक हैं और ये विवेक शून्य व्यक्ति के पास ज्यादा समय तक नहीं रह सकती। समृद्धि के लिए विवेक का होना बहुत जरूरी है और गणेष जी विवेक और बुद्धि के देवता हैं। संग सितारा लक्ष्मी-गणेष का एक साथ पूजन करने से धन-धान्य और बुद्धि की एक साथ प्राप्ति की जा सकती है। दीपावली के शुभ अवसर पर संग सितारा सामग्री का प्रयोग पूजन सामग्री के रूप में करना सर्वश्रेष्ठ फल देता है। दीपावली की शुभ रात्रि पर माता लक्ष्मी का पूजन करने के साथ-साथ निम्न मंत्र का जप माणिक्य माला पर 7, 11 या 108 बार करें। ऐसा करने पर वर्षपर्यंत समृद्धि प्राप्त होगी। व्यवसाय से अधिक लाभ प्राप्त होगा। सूर्य मंत्र - ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः। संग सितारा श्रीयंत्र संग सितारा श्रीयंत्र लक्ष्मी को आकर्षित करने वाला शक्तिषाली यंत्र है। संग सितारा श्रीयंत्र के प्रभाव से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। महालक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए संग सितारा श्रीयंत्र की पूजा प्र भ् ा ावष् ा ाली होती है। इस यंत्र की पूजा करने से समृद्धि एवं ऐष्वर्य की प्राप्ति होती है। संग सितारा श्रीयंत्र को घर, आॅफिस में बने पूजा स्थान पर रख सकते हैं तथा प्रतिदिन इसके सम्मुख धूप, दीप एवं मंत्र जाप करने से समृद्धि, वैभव, सौभाग्य की प्राप्ति होती है।



श्री महालक्ष्मी विशेषांक  नवेम्बर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के श्री महालक्ष्मी विशेषांक में महालक्ष्मी के उद्गम की पौराणिकता, हिन्दू धर्म शास्त्रों में महालक्ष्मी के स्वरूप का वर्णन, विश्व के अन्य धर्म ग्रंथों में महालक्ष्मी के समकक्ष, देवी-देवताओं के नाम तथा उनसे जुडी दन्त कथाएँ, लक्ष्मी पूजन विधि एवं शुभ मुहूर्त, दीपावली पूजन पैक, देवी कमला साधना, तंत्रोक्त लक्ष्मी कवच, लक्ष्मीजी के साथ गणपति पूजन क्यां, लक्ष्मीपूजन के विशेष उपाय, दीपावली पर किये जाने वाले विशेष उपाय व मंत्र, लक्ष्मी प्राप्ति के 51 अचूक उपाय, दीपावली पर किये जाने वाले अनूठे प्रयोगदीपावली पर किये जाने वाले दीपावली पर किये जाने वाले अदभुत टोटके, महालक्ष्मी के प्रमुख पूजा स्थल तथा उनकी महता और मान्यता के अतिरिक्त जन्मकालिक संस्कार, अहोईअष्टमी व्रत, फलादेश में अंकशास्त्र की भूमिका, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, टैरो कार्ड, सत्यकथा, अंक ज्योतिष के रहस्य, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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