सरकारी नौकरी योग का निर्धारण एवं प्रतिपादन

सरकारी नौकरी योग का निर्धारण एवं प्रतिपादन  

ज्योतिष ग्रंथों में ऐसे अनेक ज्योतिष योग एवं ग्रह-स्थितियां वर्णित हैं जिससे जातक की आजीविका का निर्धारण संभव है किन्तु जिस काल खण्ड के सामाजिक, आर्थिक एवं शैतिक परिपेक्ष्य में इनकी रचना की गई थीे, उनमें आमूलचूल परिवर्तन हो चुके हैं। षिक्षा के क्षेत्र में नवीन तकनीकी विषयों का प्रवेष हुआ है जिसके कारण रोजगार विशेष रूप से सरकारी नौकरी के नए अवसर उद्भूत हुए हैं। इन परिस्थितियों में यह आवष्यक हो जाता है कि आजीविका निर्धारित करने वाले ग्रह योग एवं स्थितियों को बदलते सामाजिक आर्थिक एवं शैक्षिक परिवेष के अनुरूप शोध कर वर्तमान कालखण्ड के परिपेक्ष्य में पुनः परिभाषित किया जावे। आजीविका शब्द विस्तृत है जिस पर आद्योपांत शोध करना एक बार में संभव नहीं है। हम यहां सरकारी क्षेत्र में नौकरी अर्जित करने वाले ग्रहयोगों एवं ग्रह स्थितियों की भूमिका पर ही अध्ययन केन्द्रित एवं सीमित रखेंगे । चॅूकि ज्यातिषशास्त्र के गं्रथों में सरकारी नौकरी परिलक्षित करने वाली ग्रह स्थितियों, योगों के संदर्भ में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है जिसके कारण यह आवष्यक प्रतीत होता है कि इस विषय पर शोध किया जावे। इन सभी ग्रह संभावनों को दृष्टिगत रखते हुए सरकारी नौकरी प्राप्ति हेतु संभावित ग्रह स्थितियों के सम्बन्ध में निम्नांकित मापदण्ड तैयार किए गए हैं जिनको विभिन्न कुण्डलियों पर प्रायोगिक तौर पर कसौटी पर कसा जावेगा तथा उसके आधार पर निष्कर्षों की प्राप्ति कर उसे प्रकाषित किया जावेगा। ƒƒ जन्मकुण्डली के केन्द्र-त्रिकोण अथवा 11वें भाव में बलवान सूर्य स्थित होना ƒƒ जन्मकुण्डली में लग्न अथवा चतुर्थ भाव में बृहस्पति बलवान होकर स्थित होना ƒƒ जन्मकुण्डली में दषमेष बलवान होकर केन्द्र अथवा 11वें भाव में स्थित/युति होना ƒƒ जन्मकुण्डली में केन्द्र-त्रिकोण भावों में चन्द्रमा स्थित होना ƒƒ जन्मकुण्डली में बलवान पाराषरी राजयोग विद्यमान होना ƒƒ जन्मकुण्डली में बलवान पंच महापुरूष योग विद्यमान होना ƒƒ जन्मकुण्डली में बलवान शनि मंगल मित्र रााषि में हो अथवा दोनों में से एक उच्च राषि में स्थित हो ƒƒ जन्मकुण्डली में षष्ठ एवं अष्ठम भाव एवं उनके स्वामी ग्रहों में सम्बन्ध स्थित होना -ƒƒ जन्मकुण्डली के षष्ठ भाव में बलवान गुरू हो तथा एकादष भाव में चन्द्रमा स्थित होना, ƒƒ -जन्मकुण्डली में नीच भंग राजयोग स्थित हो सारांष, निष्कर्ष एवं सुझाव निर्धारित मानदण्डों को संकलित आंकड़ों के रूप में 50 कुण्डलियों पर लागू कर निर्णय लिया गया कि कौन कौन से मापदण्ड किस किस कुण्डली पर लागू हो रहे हैं। प्राप्त परिण्ाामों के आंकड़ों को सारणी एवं चित्रों के माध्यम से इस अध्याय में दिया जा रहा है। कुल अंाकड़ों में 50 प्रतिषत आंकड़े सरकारी नौकरी में पदस्थापित अधिकारी/कर्मचारियों के हैं तथा 50 प्रतिषत आंकड़े व्यवसाय एवं जाॅब वर्क करने वाले व्यक्तियों के हैंे । दोनों प्रकार के आंकड़ों का अलग अलग विष्लेषण कर प्रस्तुत किया जा रहा है । 1. सरकारी नौकरी कर रहे अधिकरियों एवं कर्मचारियों की कुण्डलियों का विष्लेषण Case P1 P2 P3 P4 P5 P6 P7 P8 P9 P10 01 1 0 0 1 1 0 1 0 0 0 -02 0 0 1 0 1 0 0 0 1 0 -03 0 0 1 1 1 1 0 0 1 0 -04 1 1 1 1 1 1 1 0 0 0 -05 0 1 1 1 1 1 1 0 0 0 -06 1 1 1 1 1 1 0 0 0 0 -07 1 0 1 1 1 0 0 0 0 0 -08 1 0 1 1 1 0 0 0 0 0 -09 0 0 0 0 1 0 1 1 0 0 -10 1 0 1 0 1 0 1 0 0 0 -11 0 0 1 1 1 0 0 0 0 0 -12 1 0 1 1 1 1 0 0 1 0 -13 1 0 1 0 0 0 0 1 0 0 -14 1 0 1 0 1 0 0 0 0 1 -15 0 1 0 0 0 1 0 0 0 0 -16 1 0 0 0 1 0 1 0 1 0 -17 1 0 1 1 1 0 1 0 0 0 -18 1 0 1 0 1 0 0 0 0 0 -19 1 0 1 1 1 0 1 0 1 0 -20 1 0 0 0 1 0 0 0 0 0 -21 1 0 1 1 1 1 0 0 0 0 -22 1 0 1 0 1 0 0 0 0 0 -23 1 0 1 0 0 1 1 0 0 0 -24 1 0 1 0 1 1 0 0 0 0 -25 1 0 1 1 1 0 0 0 0 0 19 4 20 13 22 9 9 2 5 1 76% 16% 80% 52% 88% 36% 36% 8% 20% 4% उक्त परिणामों को निम्नांकित चित्र द्वारा भी दर्षाया जा सकता है। उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि 25 सरकारी कर्मचारियों की कुण्डली में मानदण्ड संख्या-5 सबसे अधिक 22 कुण्डलियों में पाया गया, जो 88 प्रतिषत है। मानदण्ड संख्या-3 कुल 20 कुण्डलियों में 80 प्रतिषत तथा मानदण्ड संख्या-1 कुल 19 कुण्डलियों में विद्यमान पाए गए, जिनका प्रतिषत उपरोक्तानुसार आरेखण में दर्षाया गया है। उपरोक्त निष्कर्षों के आधार पर मानदण्ड संख्या 2,8 एवं 10 सरकारी नौकरी की दृष्टि से असंगत पाए गए। 2. इन मानदण्डों को व्यवसाय एवं जाॅब वर्क करने वाले अर्थात् सरकारी नौकरी के अलावा अन्य स्त्रोतों से आजीविका अर्जन करने वाले 25 जातकों की कुण्डलियों का आंकलन किया गया । कुण्डलियों का विष्लेषण का आंकड़ा इस प्रकार हैः- Case P1 P2 P3 P4 P5 P6 P7 P8 P9 P10 01 1 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -02 0 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -03 1 0 1 0 0 0 0 0 0 0 -04 0 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -05 1 0 0 1 0 0 0 0 0 0 -06 0 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -07 0 0 0 0 0 0 0 0 1 0 -08 1 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -09 1 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -10 0 0 0 1 0 0 0 0 0 0 -11 0 0 1 0 1 1 0 0 0 0 -12 0 0 1 1 0 0 0 0 0 0 -13 0 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -14 1 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -15 0 0 0 0 0 1 0 0 0 0 -16 0 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -17 0 0 1 0 0 1 0 0 0 0 -18 0 0 0 1 0 0 0 0 0 0 -19 0 0 0 0 0 1 0 0 0 0 -20 0 0 0 0 0 0 0 0 0 0 -21 0 0 1 0 0 0 0 0 0 0 -22 1 0 1 0 1 0 0 0 0 0 -23 1 0 0 0 0 1 0 0 0 0 -24 1 0 1 1 0 0 0 0 0 0 -25 0 0 1 1 0 0 0 0 0 0 9 0 8 6 2 5 0 0 1 0 36% 0% 32% 24% 8% 20% 0% 0% 4% 0% उक्त परिणामों को निम्नांकित चित्र द्वारा भी दर्षाया जा सकता है। ƒƒ उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट हैं कि सरकारी नौकरी वाली जन्म कुण्डलियों में पाए जाने मानदण्ड व्यवसाय एवं P1 जन्मकुण्डली के केन्द्र-त्रिकोण अथवा 11वें भाव में बलवान सूर्य स्थित होना, P3 जन्मकुण्डली में दषमेष बलवान होकर केन्द्र त्रिकोण अथवा 11वें भाव में स्थित/युति होना, P5 जन्मकुण्डली में बलवान पाराषरी राजयोग विद्यमान होना, ƒƒ निम्न मापदण्ड (P4, P6, P7) सरकारी नौकरी के लिए सहायक घटक हैं जो अन्य कुण्डलियों में भी हो सकते हैं। सरकारी नौकरी वाली कुण्डलियों में ये घटक उपस्थित होने पर सरकारी नौकरी की पुष्टि होती है। P4 जन्मकुण्डली में केन्द्र-त्रिकोण भावों में चन्द्रमा स्थित होना P6 जन्मकुण्डली में बलवान पंच महापुरूष योग विद्यमान होना P7 जन्मकुण्डली में बलवान शनि मंगल मित्र रााषि में हो अथवा दोनों में से एक उच्च राषि में स्थित हो निम्न मानदण्ड सरकारी नौकरी के लिए अप्रांसगिक है ताकि इसे इस दृष्टि से नजरअंदाज किया जा सकता है। P2 जन्मकुण्डली में लग्न अथवा चतुर्थ भाव में बृहस्पति बलवान होकर स्थित होना, P8 जन्मकुण्डली के षष्ठ भाव में बलवान गुरू हो तथा एकादष भाव में चन्द्रमा स्थित होना, P9 जन्मकुण्डली में षष्ठ एवं अष्ठम भाव एवं उनके स्वामी ग्रहों में सम्बन्ध स्थित होना, P10 जन्मकुण्डली में नीच भंग राजयोग स्थित हो, ƒƒ सभी मानदण्डों का आंकलन और परिणामों का अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकला कि शोध विषय के प्रारम्भ में जो 10 मानदण्ड दिए गए हैं उनको निम्नांकित श्रेणियों में विभजित किया जाकर सरकारी नौकरी प्राप्ति की दृष्टि से परखना चाहिए। लल मुख्य घटक - मानदण्ड P1,P3,P5 सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं जो सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारियों की कुण्डलियों में उपलब्ध होगे और अन्य कार्य यथा जाॅब वर्क या व्यवसाय करने वाले की कुण्डलियों में उपलब्ध नहीं होगे । लल सहायक घटक - यदि मुख्य घटक कुण्डली में उपस्थित हो तो सहायक घटक च्4एच्6एच्7 की कुण्डली में उपस्थिति सरकारी नौकरी होंने की पुष्टि करते हैं । लल शेष घटकों P2,P8,P9,P10 को नजर अंदाज किया जा सकता है। सुझाव ƒƒ कुण्डलियों के आंकलन के दौरान कुछ स्थितियाँ ऐसी थी जिनमें भाव/भावेष/ग्रह पर मिश्रित प्रभाव होने से यह निर्णय ले पाना कठिन था कि उसे बली ग्रह माना जावे या निर्बल। ऐसी स्थिति में शोधकर्ता का सुझाव है कि ऐसी परिस्थितियों में ज्योतिष को देष काल परिस्थितियों के अनुसार अपना विवेक एवं अनुभव के आधार पर निर्णय करना चाहिए। ƒƒ किसी भी कुण्डली को देखने से पहले उसकी शुद्धता जातक के जीवन में घटित हुई घटनाओं और जातक के व्यक्तित्व के आधार पर अवष्य परखना चाहिए।


2017 ज्योतिष के नजरिए से  जनवरी 2017

रिसर्च जर्नल के इस विशेषांक को खास तौर पर कानपुर में होने वाले ज्योतिषीय सेमीनार के लिए तैयार किया गया है। इस विशेषांक में बहुत सारे लेख जन्म व सांसारिक मुद्दों के सम्बन्ध में लिखे गये हैं। इनके अतिरिक्त इसमें बहुत सारे अुनसंधान लेख मेवाड़ यूनीवर्सिटी के पी.एच.डी के विद्यार्थियों द्वारा भी लिखे गये हैं, उनमें से कुछ लेख इस प्रकार हैं:- 2017 के भारत में रोग-व्याधियों पर पूर्वानुमान, वर्ष 2017 ज्योतिष के आइने मे, वर्ष 2017 का भविष्यफल, 2017 में नेताओं का भविष्य और भारत वर्ष, अष्टम भाव विवेचन, संवत्सर चक्र व ज्योतिष के आइने में वर्ष 2017, वर्ष 2017: राशियों में शनि की साढ़ेसाती व गोचर आदि। यहां अंग्रजी पाठकों के लिए भी लेख सम्मिलित किये गये हैं।

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