कन्या विवाह में देरीः कारण निवारण

कन्या विवाह में देरीः कारण निवारण  

व्यूस : 944 | सितम्बर 2016

विवाह संबंधी प्रश्न हमारे जीवन के लिये अति महत्वपूर्ण हैं। इस पर विचार करते समय यह जानना बहुत जरूरी है कि जातक की कुंडली में विवाह योग है कि नहीं। इस प्रश्न का उत्तर लग्न व लग्नेश, राशि तथा राशि का स्वामी, सप्तम भाव एवं सप्तमेश, षष्ठम एवं अष्टमेश और मंगल शुक्र स्त्री तथा पुरुष के लिये और स्त्रियों के लिये विशेष कर गुरु का विचार करना चाहिये। कुंडली चाहे स्त्री की हो या पुरुष की सप्तम भाव और इसके कारक शुक्र पर जरूर विचार करें। विवाह संबंधी प्रश्नों में जन्म लग्न तथा चंद्र लग्न दोनों पर विचार करें।

अधिक गहराई के लिये नवांश कुंडली पर भी विचार करें। विवाह के लिये उपरोक्त समस्त कारक प्रभावी होते हैं। इनका निर्बल होना या पापी होना या पाप प्रभाव में होने के कारण विवाह में बाधा आती है। प्रत्येक कारक के बारे में तथा कारक के द्वारा वे कौन से योग होते हैं जो विवाह में बाधा डालते हैं वे इस प्रकार हैं- लग्न व लग्नेश: यह जातक की कुंडली का मुख्य भाग होता है। यह भाव सप्तम से सप्तम होता है। विवाह के लिये इसका ज्ञान बहुत जरूरी है। लग्न का शुभ होना अत्यंत आवश्यक है इससे जातक का स्वास्थ्य, स्वभाव आदि मालूम होता है।

Û जिस कुंडली में लग्नेश यदि नीच राशि में होकर सप्तम भाव से कोई भी संबंध बनाये तो विवाह में अनेक बाधायें आती हैं।

Û लग्न में यदि सूर्य बैठा हो तथा अष्टम में राहु बैठा हो तो भी विवाह में बाधा आयेगी।

Û लग्नेश के साथ किसी भी भाव में अष्टमेश-12वें भाव का स्वामी एवं कोई भी पापी ग्रह बैठा हो तो विवाह में बाधा आती है।

Û लग्न भाव में यदि कोई भी पापी ग्रह बैठा हो तथा गुरु वक्री हो तो भी विवाह में बाधा आती है।

Û लग्नेश किसी पापी ग्रह के साथ अपनी नीच राशि में बैठा हो तो विवाह में बाधायें आती हैं।

Û यदि राशि तथा उसका स्वामी पाप प्रभाव में हो विशेष कर लग्न में यह स्थिति हो तो विवाह के अतिरिक्त और भी अनेक बाधायें आती हैं।


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सप्तम भाव एवं सप्तमेष-

Û सप्तम भाव में यदि शनि बैठे हों परंतु लग्न अथवा सप्तम भाव के स्वामी न हांे तो जातक के विवाह में अनेक बाधायंे आती हैं।

Û चन्द्रमा यदि सप्तम भाव का स्वामी हो कर छठे भाव में बैठा हो तो विवाह में अनेक बाधायें आती हैं।

Û सप्तमेश यदि अपनी नीच राशि में मंगल के साथ बैठा हो तो भी विवाह में बाधा आती है।

Û सप्तमेश यदि अष्टम भाव में हो तो विवाह में अनेक बाधायें आती हैं।

Û सप्तमेश के साथ राहु बैठा हो तो भी विवाह में बाधायें आती हैं।

Û सप्तमेश यदि किसी पापी ग्रह के साथ द्वादश में बैठा हो तो भी बाधायंे आती हैं।

Û सप्तमेश यदि द्वितीय भाव में हो तो भी विवाह में अनेक बाधायें आती हैं।

षष्ठम भाव एवं स्वामी: छठा भाव ज्योतिष में रोग व शत्रु का होता है, निरोगता के लिये इस भाव व इसके स्वामी का अध्ययन जरूरी है। यह भाव सप्तम से द्वादश होता है। विवाह के लिये इस भाव तथा इसके स्वामी का पापी ग्रह से मुक्त होना आवश्यक है। इसका स्वामी यदि पापी ग्रह है तो शुभ होता है क्याेिक अशुभ भाव का स्वामी पापी ग्रह होने सें शुभ फल देता है।

Û यदि षष्ठेश सप्तमेश के साथ किसी भी भाव में बैठा हो तो जातक के विवाह में अनेक बाधायें आती हैं।

Û षष्ठेश के साथ यदि कोई नीच राशि का ग्रह सप्तम भाव पर या उसके स्वामी पर दृष्टि डालता है तो भी विवाह में बाधा आती है।

Û षष्ठेश यदि सप्तमेश के साथ राहु अथवा केतु से दृष्ट हो तो विवाह में बाधा आती है।

Û छठे भाव में यदि सप्तमेश बैठा हो और किसी पाप ग्रह से दृष्ट हो तो भी जातक के विवाह में अनेक बाधायंे आती हैं।

Û शुक्र व मंगल दोनों ही पंचम या नवम भाव में हांे तो विवाह बाधा योग होता है।

मंगल- शुक्र तथा गुरु विशेष कर स्त्री के लिये-कन्या की कुंडली में गुरु विवाह, संतान व पति का कारक होता है। गुरु का पीड़ित अथवा दूषित होना विवाह में बाधा देता है। शुक्र का पूर्ण पाप प्रभाव से मुक्त व बली होना विवाह की बाधा को दूर करता है। शुक्र को वैवाहिक व यौन सम्बन्धांे का कारक माना गया है। अतः शुक्र का प्रभाव दाम्पत्य सुख के लिये बहुत आवश्यक है। इसके बाद मंगल द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम तथा द्वादश भाव में है तो जातक मंगली होता है जिसके कारण विवाह में बाधा आती है।

इसके अतिरिक्त विवाह में बाधा आने के निम्नलिखित कारण भी होते हैं:

- किसी भी जातक की कुंडली में विवाह योग है परंतु सप्तमेश पाप प्रभाव में है तो विवाह में बाधा आती है।

- शनि यदि सप्तमेश न हो और सप्तम भाव में बैठा हो तो विवाह 34 वर्ष के बाद होता है।

- बृहस्पति या सप्तमेश पर किसी पापी ग्रह का प्रभाव हो तो विवाह में बाधा आती है।

- सप्तमेश या गुरु त्रिक भाव 6-8-12 में हो तो भी विवाह में बाधा आती है।

- शुक्र किसी पापी ग्रह के साथ पंचम या सप्तम या नवम भाव में हो तो विवाह में बाधा होती है।

- सूर्य व चन्द्रमा पर शनि की दृष्टि होने पर विवाह में बाधा आती है।

- द्वितीयेश व सप्तमेश पाप प्रभाव में हो तथा शुक्र त्रिक भाव में हो तो भी बाधा आती है।

- सप्तमेश लग्न से द्वितीय षष्ठम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में हो तो भी बाधा आती है। - बुध केतु के साथ लग्न में हो।


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- सप्तम भाव में शनि के साथ केतु हो।

- लग्न में बृहस्पति, शुक्र अथवा बुध वक्री हो तो विवाह में बाधा होती है।

- सप्तमेश अष्टम भाव में व अष्टमेश सप्तम में हो तो भी विवाह में बाधा।

- त्रिक भाव में चन्द्रमा तथा चतुर्थ में शुक्र हो तो विवाह में बाधा होती है।

- सूर्य लग्न, चन्द्र लग्न या शुक्र लग्न से सातवें भाव में कोई नीच, पापी या अस्त ग्रह हो तो विवाह में बाधायें आती हैं।

- गुरु यदि नीच राशि में हो तो विवाह में बाधा होती है।

- 7वें तथा 12वें भाव में दो-दो या इससे अधिक पाप ग्रह बैठे हों तथा पंचम भाव में चन्द्रमा हो तो भी बाधा होती है ।

- सप्तमेश शुभ युक्त न हो कर त्रिक भाव में अस्त हो कर या नीच राशि का बैठा हो तो जातक अविवाहित रहता है।

- शुक्र तथा चन्द्रमा दोनों एक साथ कहीं भी बैठे हों यदि उनसे सप्तम भाव में मंगल तथा शनि दोनों हों अर्थात चन्द्रमा और शुक्र की युति से सातवें भाव में मंगल-शनि की युति हो तो विवाह नहीं होता।

- शुक्र एवं मंगल दोनों सप्तम भाव में हांे तो भी विवाह नहीं होता।

- शुक्र-बुध-शनि तीनांे ही नीच या शत्रु नवांश में हांे तो भी विवाह नहीं होता।

- सूर्य स्पष्ट में चार राशि तेरह अंश बीस कला जोड़ने से जो राशि आये यदि वह सप्तम भाव का स्पष्ट हो तो विवाह नहीं होता।

- सप्तम भाव में बुध तथा शुक्र दोनों हो तो विवाह अधेड़ उम्र में होता है।

- स्त्री कुंडली में सप्तम भाव में शनि तथा लग्न या चतुर्थ भाव में मंगल आठ अंश तक हो तो वह कन्या कुंवारी रहती है।

- स्त्री कुंडली में सप्तमेश के साथ शनि भी बैठा हो तो विवाह बड़ी आयु में होता है।

- पंचम भाव में शुक्र तथा चतुर्थ में राहु हो तो 33वें वर्ष में विवाह होता है। विवाह बाधा समाप्ति के सरल उपाय * विवाह में किसी कारण कोई बाधा आती है तो गाय को हरी घास खिलाये एवं किन्नर को कुछ धन दान दें।

* सप्तमेश ग्रह के मंत्र का जाप करें।

* पुरुष जातक शुक्रवार को गाय को चावल और खीर खिलायें और स्त्री जातक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलायें।

* बेडरूम के नैर्ऋत्य कोण को साफ रखें।

* कन्या गुरुवार को जल मंे एक चुटकी हल्दी डाल कर नहाए।

* गाय को आटे के पेड़े में चने की दाल और गुड़ डाल कर हर बृहस्पतिवार खिलायें।

* बृहस्पतिवार को कन्या पांच बेसन के लड्डू और एक कलगी भगवान विष्णु को अर्पित करें और मन ही मन शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें।

* शुक्ल पक्ष के बृहस्पतिवार से शुरू करें- रोजाना केसर का तिलक मस्तक और नाभि पर लगायें।

* लड़का या लड़की हर बृहस्पतिवार गणेश सहस्त्रनाम का पाठ करें।

* रिश्ते आ रहे हों लेकिन विवाह पक्का न हो रहा हो तो कन्या 40 दिन इस मंत्र का लगातार एक माला का जाप करें। ऊँ हृीं क्लीं हुं मात्ङग्यै फट् स्वाहाः।।

* प्रत्येक शनिवार को श्री हनुमान जी की तस्वीर के समक्ष चमेली के तेल का दीपक जला कर सुंदर कांड का पाठ करें।

* मंगलवार को मीठा व्रत करना चाहिए। यदि नियमित करने में असमर्थ हो तो 28 व्रत जरूर करें

। * प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी के 108 नामों का जाप करें।


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* आप अपने साथ एक पीले वस्त्र में एक लौंग का जोड़ा एक पीतल का सिक्का एवं थोड़ा केसर अवश्य रखें।

* प्रत्येक गुरुवार निकट के किसी मंदिर में जाकर देवी देवता की मूर्ति को हल्दी से तिलक करें तथा देवी-देवता के चालीसा का पाठ करें फिर अपनी बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। इसके बाद पीपल के वृक्ष में जल दें और उसकी गीली मिट्टी मस्तक और नाभि में लगायें। यह उपाय 11 बृहस्पतिवार करें।

* विष्णु मंदिर में जा कर गुरुवार को पीली रेशमी चुनरी माता लक्ष्मी के चरणों में रखें और भगवान विष्णु को केसर की डिब्बी के साथ कोई पीला वस्त्र अर्पित करें। अन्य प्रभावशाली उपाय मंत्र जाप विधि

* कन्या के शीघ्र विवाह हेतु सात जनेऊ हल्दी के घोल में पीले रंगें, सात पीतल के सिक्के, सात साबुत हल्दी गांठ, सात गुड़ के टुकड़े, सात पीले पुष्प, 70 सेमी. पीला वस्त्र, 70 ग्राम चने की दाल, भोजपत्र का वर्गाकार टुकड़ा, हल्दी व रोली की स्याही, अनार कलम आदि सामग्री।

गुरुवार को गुरु के नक्षत्र में गुरु होरा में निम्न यंत्र को भोजपत्र पर अनार कलम व हल्दी, रोली की स्याही अंकित करें। ध्यान रहे रेखाओं को बनाने व अंकों को भरने का क्रम बाएं से दाएं तथा नीचे से ऊपर रखें। मन में पार्वती जी का स्मरण करते हुए अपनी इच्छा/ कामना करते रहें। यंत्र को पीले रंग के वस्त्र पर स्थापित कर उस पर पीले पुष्प अर्पित करें तथा उपरोक्त सारी सामग्री चढ़ायें तथा इसकी एक पोटली बनाकर सुरक्षित स्थान पर शुद्ध जगह पर रखें।

गुरु के होरा काल में निम्न मंत्र की तीन माला (पीली या हल्दी की श्रेष्ठ रहेगी) प्रतिदिन पार्वती जी का ध्यान करते हुए नित्य पूजा में जप करें। मंत्र: कात्यायनी महामाये महा योगिन्यधीश्वरी। नंद गोप सुतं देवी पतिं में कुरूते नमः।।’’ साथ में प्रत्येक गुरुवार निम्न उपाय भी करें -

* गाय को गुड़, रोटी खिलायें।

* केले व पीपल वृक्ष मंे जल चढ़ायें।

* पक्षियों को अन्न दें (पीली मक्का आदि)।

* चीनी मिला जल प्रातः सूर्य को तांबे के लोटे से अघ्र्य दें।

* निम्न मंत्र का प्रतिदिन एक माला जप करने पर विवाह में विलंब दूर होता है। इससे विवाह शीघ्र होता है। यह मंत्र पृथ्वी तत्व राशि ( वृष, कन्या, मकर) वालों को जप करने पर शीघ्र विवाह का परिणाम मिलता है।

‘‘प्रिया सोचू पिर हरहू सबु सुमिरहु श्री भगवान। पार बतिही निरमयऊ जेहि सोई करिहि कल्याण।।’’

इस मंत्र के अंत में भगवान शिव या भगवान श्रीराम का स्मरण करें।

* वायु तत्व राशि (मिथुन, तुला, कुंभ) के लिए निम्न मंत्र जप करना चाहिए। ‘‘सिन्दूरपत्रं रतिकामदेहं दिव्याम्बरं सिंधु समोहितांगम् सान्ध्यारूणं धनुः। पंकज पुष्पबाण पंचायुध भुवनमोहन मोक्षणार्थम् कलै मन्मथाय। महाविष्णुस्वरूपाय महाविष्णुपुत्राय। महापुरूषाय पतिसुखं में शीघ्र देहि देहि।।

* अग्नि तत्व राशि (मेष, सिंह, धनु) के लिये निम्न मंत्र जप करें- ‘‘हे गौरि शंकरार्धागि। तथा त्वं शंकर प्रिया। तथा मां कुरू कल्याणी । कांतकांता सुदुर्लभाम्।।’’ सभी मंत्रों की जप विधि उपरोक्त वर्णित अनुसार ही होगी।

* यदि मंगली दोष के कारण विवाह में देरी हो रही हो तो पार्वती मंगल का पाठ मंगलवार या नवरात्र से आरंभ कर शीघ्र पूर्ण करें।

* श्री मंगला गौरी के 16 व्रत कर 17वें मंगलवार को व्रत उद्यापन करें तथा मंत्र- ‘‘ऊँ हृीं मंगले गौरी विवाह बाधा नाशाय स्वाहा।’’ का संकल्प लेकर 64000 या सवा 1 लाख मंत्र जाप अनुष्ठान, पूर्ण आहूति यज्ञ करायें। यह उपाय भी मंगली दोष के कारण विवाह विलंब हेतु है।

* सुंदर कांड का पाठ करायें।

* चैत्र या अन्य नवरात्र में मां गौरी की पूजा अर्चना के साथ नियमित नौ दिन तक न्यूनतम नौ बार या कुल 108 बार ‘‘श्री रामरक्षा स्तोत्र’’ का पाठ करें।

* श्री कृष्ण जी की पूजा करें।

* शिव-शक्ति की पूजा करें। श्रावण सोमवार या महाशिवरात्रि को रूद्राभिषेक करायें।

* गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करें।

* गायत्री मंत्र का सवा लाख जप का अनुष्ठान करायें।

* इष्टदेव व कुलदेवी-देवता की नियमित पूजा करें।


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* कन्या हर गुरुवार उबटन लगाकर स्नान करे या जल में हल्दी डालकर स्नान करे।

* गुरुवार के दिन कन्या स्टील के लोटे में जल, गंगाजल, हल्दी मिलाकर आधा-आधा लोटा जल क्रमशः केले व पीपल वृक्ष को ‘‘ऊँ बृं बृहस्पतये नमः’’ मंत्र जप व जल्दी विवाह प्रार्थना कर चढ़ायें।

* वास्तु उपाय: कन्या के विवाह में देरी दूर करने हेतु शयन कक्ष में शयन बेड वायव्य कोण (उ.प.) में रखकर सोयें। लाल किताब के योग, उपाय यदि शुक्र, राहु की युति हो तो चांदी के गोल बर्तन में काजल, बहते दरिया का पानी और शुद्ध चांदी का टुकड़ा डालकर किसी धर्म स्थान में देना चाहिए। साथ ही दूसरे पात्र को उपरोक्त समय पर अपने पास रखें।

* यदि 1, 7 भाव में राहु हो तो संकल्प के समय एक चांदी का टुकड़ा लड़की के घर वाले अपनी बेटी को दें।

* यदि सूर्य, बुध व शुक्र की युति हो तो एक तांबे के लोटे में साबुत मूंग भरकर संकल्प के समय हाथ लगाकर इसे जल प्रवाह करें।

* यदि शुक्र अष्टम भाव में स्थित हो तो नीले फूल घर के बाहर जमीन में दबा दें या गंदे नाले में डाल दें। फेंगशुई उपाय: इन उपायों से भी कन्या का विवाह शीघ्र होता है-

* ‘‘लव-बडर््स’’ प्रतीक नैर्ऋत्य में लगायें।

* शयनकक्ष के नैर्ऋत्य में ‘‘पियोनिया पुष्प’’ प्रतीक लगायें।

* शयनकक्ष के नैऋ्र्रत्य में ‘‘दोहरी खुशी का सांकेतिक चिह्न लगायें।

* शयनकक्ष में ‘‘लव एवं रोमांस प्रतीक’’ लगायें।

* मैण्डेरिन डक’’ का जोड़ा घर में लगायें।

* घर में ‘‘डाॅल्फिन मछलियां’’ पूर्व/ पश्चिम में रखें।

* घर में ‘‘हारमोनी रिलेशनशिप’ प्रतीक’’ लगायें।

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