भूखंडों का श्रेणीकरण

भूखंडों का श्रेणीकरण  

वास्तु सम्मत गृह निर्माण के लिए उत्तम भूखंड का होना आवश्यक है। अगर आप बिना वास्तुविद से सलाह लिये गृह निर्माण कर चुके हैं तो आप लेख में दिये गये भूखंडों की श्रेणी के अनुसार पढ़कर अपने घर का वास्तु ठीक कर सकते हैं। इस लेख में भूखंडों का वास्तु के नियमों के अनुसार वर्गीकरण किया गया है। वास्तु भूखंड के गुणों के अनुसार इसे चार श्रेणियों अति उत्तम, उत्तम, औसत एवं अशुभ में वर्गीकृत करता है। वास्तु में भूखंड की चार श्रेणियां हैं जिसके अनुसार प्रत्येक भूखंड को पुकारा जाता है। ‘ए’ श्रेणी का भूखंड: अति उत्तम ‘ए’ श्रेणी के भूखंड को अति उत्तम भूखंड कहा जाता है क्योंकि यह सभी वास्तु नियमों का पालन करता है तथा इसमें वास्तु दोष नगण्य होते हैं। अति उत्तम भूखंड में हर चीज यथास्थान एवं सही दिशा में होती है। ‘बी’ श्रेणी का भूखंड: उत्तम ‘बी’ श्रेणी के भूखंड को उत्तम भूखंड कहा जाता है क्योंकि इसमें कुछ दोष पाए जाते हैं हालांकि अध्किांशतः यह वास्तु नियमों का पालन करता है। कुछ दोषों की अवहेलना की जा सकती है जबकि कुछ दोषों को ठीक किया जा सकता है। ‘सी’ श्रेणी का भूखंड: औसत ‘सी’ श्रेणी के भूखंड को औसत भूखंड कहा जाता है क्योंकि इस तरह के भूखंड में कुछ दोष स्थिति एवं घर के विभिन्न विभागों का निर्माण गलत दिशा में करने के कारण होता है। ‘डी’ श्रेणी का भूखंड: अशुभ ‘डी’ श्रेणी के भूखंड को सबसे अशुभ भूखंड माना जाता है क्योंकि इसमें वास्तु सम्मत कुछ भी नहीं होता। अतः ऐसे भूखंड में दोषों का निर्धरण कर उसका समाधन शीघ्र करना चहिए। ‘ए’ श्रेणी के भूखंड का वास्तु ‘ए’ श्रेणी के भूखंड को अति उत्तम भूखंड कहा जाता है क्योंकि इसमें कुछ दोषों अथवा त्याज्य दोषों के अतिरिक्त सब कुछ वास्तु सम्मत होता है। अति उत्तम भूखंड में सब कुछ उचित स्थान एवं उचित दिशा में स्थित होते हैं। यहां कुछ बिंदु प्रस्तुत किए जा रहे हैं जो अति उत्तम भूखंड की विशेषताओं को प्रदर्शित करते हैं: ‘ए’ श्रेणी के भूखंड का प्रवेश द्वार पूर्व की ओर से है जिसे वास्तु में आदर्श द्वार दिशा माना जाता है। जमीन के नीचे उत्तर-पूर्व दिशा में पानी की टंकी बनी है। पूजा घर उत्तर-पूर्व में स्थित है। अति उत्तम भूखंड का लिविंग रूम उत्तर-पश्चिम में स्थित है। सेप्टिक टैंक उत्तर-पश्चिम दिशा के बाहरी बिंदु पर स्थित है। अति उत्तम भूखंड में शौचालय पश्चिम दिशा में निर्मित है। रसोई घर आदर्श रूप से दक्षिण-पूर्व में स्थित है जिसमें खाना बनाने का काम दक्षिण-पूर्व कोने पर पूर्वाभिमुख होकर किया जाता है तथा इससे लगा हुआ भोजन कक्ष है। दक्षिण-पश्चिम का कक्ष गृह स्वामी के लिए प्रस्तावित है। ‘ए’ श्रेणी के भूखंड में गैरेज दक्षिण-पूर्व में स्थित है। ओवरहेड टैंक दक्षिण-पश्चिम कोने पर लगाया गया है। ‘बी’ श्रेणी के भूखंड का वास्तु ‘बी’ श्रेणी के भूखंड में निर्माण में कुछ दोष रह जाते हैं किंतु यह वास्तु के अध्कितर नियमों का पालन करता है। इसके कुछ दोषों की अवहेलना की जाती है तथा कुछ में सुधर किया जाता है। नीचे ‘बी’ श्रेणी के भूखंड की विशेषताएं दी जा रही हैं जिसे उत्तम भूखंड कहा जाता है: ‘बी’ श्रेणी के भूखंड में प्रवेश द्वार उत्तर दिशा में है जो कि मुख्य दरवाजे के लिए दूसरा आदर्श विकल्प है तथा घर के लिए शुभ माना जाता है। अंडर वाटर टैंक उत्तर-पूर्व में स्थित है। इस प्रकार के भूखंड में गैरेज के लिए विकल्प के रूप में उत्तर-पश्चिम दिशा है। बालकनी उत्तर दिशा में आदर्श माना जाता है। लिविंग रूम उत्तर-पश्चिम में सर्वोत्तम होता है जहां बैठने की दिशा पूर्वमुखी हो। उत्तर-पूर्व कोने के अतिरिक्त पूजा घर पूर्व में होना श्रेष्ठ है। गृह स्वामी का शयन कक्ष दक्षिण-पश्चिम में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। शौचालय का स्थान उत्तम भूखंड में भी उत्तर-पश्चिम में होना ठीक है। ओवर हेड टैंक हमेशा सिपर्फ दक्षिण-पश्चिम में होना चाहिए। ‘सी’ श्रेणी के भूखंड का वास्तु ‘सी’ श्रेणी के भूखंड को औसत माना जाता है क्योंकि इस भूखंड में स्थिति एवं घर के विभागों के निर्माण से संबंध्ति कुछ दिशा दोष होते हैं। यहां ‘सी’ श्रेणी के औसत भूखंड की विशेषताएं नीचे दी जा रही हैं: इस प्रकार के भूखंड में प्रवेश द्वार पश्चिम की ओर से है जो ऊपर के श्रेणियों की तुलना में खराब है। औसत भूखंड में अंडरग्राउंड वाटर टैंक उत्तर-पश्चिम दिशा में है। इस प्रकार के भूखंड में रसोई घर उत्तर-पश्चिम में रखा जा सकता है जो कि औसत है तथा चूल्हा इस प्रकार रखा जाता है कि खाना बनाने वाले का मुंह उत्तर की ओर रहे। पूजा घर औसत भूखंड में उत्तर दिशा में है। भोजन कक्ष पश्चिमी हिस्से में स्थित है। औसत भूखंड में लिविंग रूम उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। इस भूखंड पर शौचालय दक्षिण-पश्चिम दिशा में निर्मित है। भंडार गृह भूखंड के दक्षिण-पश्चिम कोने पर स्थित है। ‘सी’ श्रेणी के भूखंड में गृह स्वामी का शयन कक्ष उत्तर-पूर्व कोने पर स्थित है। ‘डी’ श्रेणी के भूखंड का वास्तु ‘डी’ श्रेणी के भूखंड को सर्वाध्कि अशुभ माना जाता है क्योंकि इसमें निर्माण वास्तु नियमों का पालन करके नहीं किया जाता है। ऐसे भूखंड पर वास्तु दोष का निर्धरण करने के उपरांत दोष दूर करने के उपाय शीघ्र किये जाने आवश्यक हैं। नीचे वास्तु दोष के साथ अशुभ भूखंड की विशेषताएं प्रस्तुत की जा रही हैं: किसी भूखंड पर रसोई घर उत्तर-पूर्व दिशा में होना अशुभ माना जाता है। ऐसे भूखंड में सामान्यतः प्रवेश द्वार दक्षिण-पश्चिम कोने से होता है जोकि कापफी बुरा एवं अशुभ माना जाता है। इस भूखंड पर भोजन कक्ष उत्तर-पश्चिम दिशा में निर्मित है। पूजा घर पश्चिम दिशा में स्थित है। शौचालय रसोई घर से सटा हुआ उत्तर-पूर्व दिशा में है जो कि अत्यंत बुरा एवं अशुभ है। लिविंग रूम दक्षिण दिशा में उत्तराभिमुख है। ‘डी’ श्रेणी के भूखंड पर सीढ़ियां उत्तर-पूर्व कोने पर स्थित हैं। गृह स्वामी का शयन कक्ष दक्षिण-पूर्व में स्थित है। कुछ अत्यंत अशुभ भूखंडों में सीढ़ियां शौचालय खासकर पश्चिमी शौचालय के ठीक ऊपर से होकर गुजरती हैं जो कि घर में अध्किांश समस्याओं की प्रमुख जड़ होती है।


भगवान महावीर विशेषांक  अप्रैल 2016

फ्यूचर समाचार का इस माह का विशेषांक जैन धर्म को समर्पित है। जैन धर्म को प्राचीन धर्मों में से एक माना जाता है। इस विशेषांक के अन्तर्गत जैन धर्म के सभी पक्षों को पेश करने का प्रयास किया गया है। इस विशेषांक के अन्दर अति विशिष्ट लेखों को जगह दी गई है। इन लेखों के अतिरिक्त ज्योतिष, वास्तु एवं अंकशास्त्र आदि के लेख भी पूर्व की भांति ही सम्मिलित किए गये हैं। जैसे- भूखण्डों का श्रेणीकरण, दी सन, वास्तु सम्मत प्लाॅट, शेयर बाजार में मंदी-तेजी, ग्रह स्थिति एवं व्यापार, कुछ उपयोगी टोटके, आप और आपके प्रेम सम्बन्ध, बलिदान की प्रतिमूर्ति नीरजा भनोट आदि। इनके अतिरिक्त जैन धर्म पर प्रकाशित लेख इस प्रकार हैं- जैन धर्म इतिहास की नजर में, जैन धर्म का कर्म सिद्धान्त, जैन शिक्षा एवं संदेश, अहिंसा में स्थिरता के प्रेरक भगवान महावीर, चतुर्मास - क्या करें और क्या न करें, जैन धर्म के प्रमुख पर्व आदि।

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