युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  

1 जुलाई 1973 को जन्मे अखिलेश यादव ने अपनी स्कूली शिक्षा इटावा के इसाक मेमोरियल स्कूल में पूरी की। फिर राजस्थान के धौलपुर मिलिट्री स्कूल से शिक्षा ग्रहण की और उसके बाद मैसूर के एस. जे. काॅलेज आॅफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। बाद में सिडनी चले गये और सिडनी विश्वविद्यालय से पर्यावरण अभियांत्रिकी में परास्नातक किया। पढ़ाई खत्म करके अखिलेश वापस उत्तर प्रदेश आ गये और अपने पिता मुलायम सिंह यादव के साथ जुड़ गये। खास बात यह थी कि समाजवादी पार्टी में शामिल होने से पहले उन्होंने डाॅण् राम मनोहर लोहिया के जीवन व विचारों का गहन अध्ययन किया। गहन अध्ययन और पार्टी में लोगों के बीच अच्छे संपर्क बनाने के बाद वर्ष 2000 में अखिलेश ने कन्नौज से उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अखिलेश शुरू से ही एक अच्छा समाजवादी बनना चाहते थे। अखिलेश का विवाह एक आर्मी आॅफिसर की बेटी डिंपल से हुआ। उनकी प्रेम कहानी भी किसी बाॅलीवुड की प्रेम कहानी से कम नहीं। कहते हैं न जोड़ियाँ तो आसमानों में बनती हैं इसीलिए शायद अखिलेश और डिम्पल एक दोस्त के माध्यम से एक पार्टी में मिले और जल्दी ही दोनों दोस्त बन गये। दोस्ती प्यार में बदली और धीरे.धीरे दोनों एक दूसरे के हमसाए और फिर हमसफर बन गये और अब अखिलेश के दिल पर चलता है बेहद खूबसूरत और अत्यंत सौम्य एवं शांत डिम्पल का राज। डिंपल और अखिलेश के प्यार की बगिया में उनके तीन फूल अदितिए अर्जुन और टीना हैं जिसमें अर्जुन और टीना जुडवाँ हैं। राजनीति से जुड़ने के बाद 2009 के लोकसभा उप चुनाव में फिरोजाबाद सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी एसपी. एस बघेल को 67301 मतों से हराकर सफलता प्राप्त की और इसके अतिरिक्त कन्नौज से भी जीते। बाद में उन्होंने फिरोजाबाद सीट से त्यागपत्र दे दिया और कन्नौज सीट अपने पास रखी। मार्च 2012 के विधान सभा चुनाव में 224 सीटें जीतकर मात्र 38 वर्ष की आयु में ही वे उत्तरप्रदेश के 33वें मुख्यमंत्री बन गये। लेकिन जुलाई 2012 में जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने उनके कार्य की आलोचना करते हुए व्यापक सुधार का सुझाव दिया तो जनता में यह संदेश गया कि सरकार तो उनके पिता और दोनों चाचा चला रहे हैं अखिलेश नहीं। उनकी सरकार को दूसरा झटका तब लगा जब एक आई. ए. एस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को निलंबित करने पर चारांे ओर से उनकी आलोचना हुई जिसके परिणामस्वरूप उन्हें नागपाल को बहाल करना पड़ा। 2013 में मुजफ्फरनगर के दंगों में 43 व्यक्तियों के मारे जाने व 93 के घायल होने पर कफ्र्यू लगाना पड़ा तथा सेना ने आकर स्थिति पर काबू किया। मुस्लिम व हिंदू जाटों के बीच हुए इस भयंकर दंगे से उनकी सरकार की बड़ी किरकिरी हुई। अखिलेश ने जब राजनीति की शुरूआत की तो उनका टेम्परामेंट इतना कूल नहीं था जितना कि अब है। अब उनमें अधिक शालीनता आ गई है। हमेशा मुस्कुराकर अपनी बात कहने वाले अखिलेश अपने संगठन में मिस्टर कूल के नाम से फेमस हैं। अखिलेश यादव को फुटबाल खेलना व देखना काफी पसंद है। उनका पसंदीदा खिलाड़ी रोनाल्डो और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर हैं। साइकिल सपा का चुनाव चिह्न है और अखिलेश की पसंदीदा सवारी भी। वे जब भी सैफई जाते हैं तो साइकिल पर सवार होकर निकल पड़ते हैं और कई किलोमीटर तक साइकिल की सवारी उनके लिए आम बात है। देखना यह है कि अब उन्हें अपनी पार्टी के लिए साइकिल चिह्न का तोहफा मिलता है या नहीं। ज्योतिषीय विश्लेषण अखिलेश का कर्क लग्न होने से सौम्य लग्न तथा लग्न में सौम्य ग्रह बुध व शुक्र स्थित होने से इनमें सौम्यता व शालीनता का भाव विद्यमान है। इन ग्रहों के कारण इनमें विशेष आकर्षण भी है जिसके कारण लोगों का इनके प्रति विश्वास तथा आकर्षण बना हुआ है। दशमेश मंगल त्रिकोण भाव में युवा अवस्था (3 अंश) में होकर स्थित हंै जिसके फलस्वरूप इन्हें युवा अवस्था में ही यू.पी. जैसे विशाल राज्य का मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कुंडली में छठे भाव का राहु इन्हें कुशल राजनीतिज्ञ बना रहा है तथा विरोधियों के षड्यंत्र से बचाने में भी सहायता प्रदान कर रहा है। अपनी कूटनीति से ये विरोधियों पर भारी पड़ रहे हैं। जब 2012 में पहली बार मुख्यमंत्री बने उस समय बुध में दशमेश मंगल की राजयोग कारक अंतर्दशा चल रही थी जिसके फलस्वरूप इन्हें उत्तम राजयोग की प्राप्ति हुई। कुंडली में सप्तमेश शनि तथा पंचमेश मंगल का परस्पर दृष्टि संबंध होने से इनका अपनी इच्छा से प्रेम विवाह हुआ। भाग्येश बृहस्पति के सप्तम भाव में होने से विवाह के पश्चात इनके भाग्य में उन्नति हुई तथा वैवाहिक जीवन भी सुचारू रूप से चल रहा है। इनकी कुंडली में नीच भंग राज योग भी है। भाग्येश बृहस्पति जिस राशि में नीच के हो रहे हैं उस राशि का स्वामी शनि चंद्रमा से केंद्र में है जिसके कारण बृहस्पति का नीच भंग हो रहा है और इसीलिए इन्हें अपने भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। इसका ज्वलंत उदाहरण हाल की बुध में बृहस्पति की अंतर्दशा में दिख रहा है। पार्टी में इतना विरोध और पिता और चाचा से इतना विरोधाभास होने पर भी सारी समाजवादी पार्टी इनके साथ खड़ी दिख रही है। इनकी कुंडली में बारहवें भाव में चार ग्रह एक साथ होने से परव्राजक योग बन रहा है और इसी योग के कारण इनमें हठधर्मिता का भाव विद्यमान है। ये एक बार जो हठ कर लेते हैं उस पर लंबे समय तक स्थिर रहते हैं। वर्तमान समय में इनकी बुध की महादशा है व बृहस्पति की अंतर्दशा चल रही है। 25 जनवरी तक चंद्रमा की प्रत्यंतर रहेगी अर्थात 25 जनवरी 2017 तक का समय इनके लिए उतार-चढ़ाव वाला रहेगा और पार्टी में कलह बनी रहेगी। लेकिन 26 जनवरी 2017 से मंगल की प्रत्यंतर्दशा प्रारंभ होगी जो उनके लिए सकारात्मक हो सकती है। लेकिन गोचर में शनि चंद्र से सांतवें भाव में स्थित होंगे जो राजनीतिक भविष्य के लिए सुखद स्थान नहीं है। उनकी पार्टी सपा की कुंडली के सितारे भी अनुकूल दिखाई नहीं देते इसलिए अखिलेश का भाग्य उनका पूरा साथ देगा और वे फिर से उत्तर प्रदेश की कमान संभाल पायेंगे इस बात में संशय है।

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