भारतीय उद्योग की रीढ़ टाटा समूह

भारतीय उद्योग की रीढ़ टाटा समूह  

भारतीय उद्योग की रीढ़ टाटा समूह अशोक शर्मा किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए आवश्यकता होती है पराक्रम और साहस की। साथ ही धन, भाग्य और कर्म भी आवश्यक हैं। यदि प्रयास लगन और समर्पित भाव से किए जाएं तो सफलता प्राप्त होती है। जन्म कुंडली में प्रथम भाव शरीर एवं व्यक्तित्व, दूसरा धन, तीसरा पराक्रम, चैथा जनता, भूमि, भवन एवं सुख, पंचम बुद्धि-विवेक, सप्तम व्यापार, नवम भाग्य, दशम कर्म, एकदश आय व लाभ का भाव है। टाटा समूह के संस्थापक ने जब लगन, मेहनत और विश्वास से उद्योग की स्थापना की तब शायद उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि उनकी संस्था इतना विशाल स्वरूप धारण कर लेगी। इसकी बागडोर जिन्होंने भी संभाली, उŸारोŸार प्रगति करते गए। समूह की तीन पीढ़ियों की कुंडलियों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि व्यापार से लाभ के प्रबल योग यदि कुंडली में हों तो व्यापार, व्यवसाय में सफलता अवश्य प्राप्त होती है। आज शेयर बाजार में ऐसी कंपनियां बहुत कम हैं जिनमें निवेशक बिना संशय के निवेश कर सकते हैं। टाटा समूह उनमें से एक महत्वपूर्ण व विश्वसनीय नाम है। आइए ज्योतिषीय विश्लेषण से जानने का प्रयास करते हैं कि ऐसा क्यों है? अशोक शर्मा स व्यापार भाव (सप्तम) के स्वामी की कर्म भाव दशम में स्थिति जातक के सफल व्यापारी या उद्योगपति होने की सूचक होती है। स यदि केंद्र का स्वामी केंद्र या त्रिकोण में हो, तो ‘विस्तार योग’ होता है। ऐसे व्यक्ति की सिद्धि, कार्य क्षेत्र या व्यापार व्यवसाय का क्षेत्र विस्तृत होता है। सर दोरबजी टाटा की कुंडली में सप्तमेश कर्म भाव में तथा कर्मेश सूर्य स्वगृही है। केंद्र के स्वामी सूर्य और शुक्र के केंद्र में व शनि तथा मंगल के त्रिकोण नवम भाव में स्थित होने के कारण विस्तार योग बनता है। टाटा समूह का उद्योग, व्यवसाय और प्रसिद्धि अन्य किसी भी उद्योग घराने से कम नहीं है। दशम, एकादश तथा द्वितीय भाव के स्वामियों का आपसी संबंध धन प्राप्ति और धन संग्रह का योग बनाता है। इस कुंडली में दशमेश सूर्य व एकादशेश बुध दोनों की युति तथा बुध की मिथुन राशि में स्थित धनेश बृहस्पति की धन भाव पर सप्तम दृष्टि के कारण धन संग्रह का श्रेष्ठ योग भी बन रहा है। धन स्थान तथा धनेश पर पाप ग्रह की दृष्टि न हो तो भी धन संग्रह के अच्छे अवसर प्राप्त होते हैं। इस कुंडली में धन भाव तथा गुरु दोनों ही राहु और शनि की दृष्टि से मुक्त हैं। कुंडली में चंद्र और मंगल की युति है और साथ में शनि है। यह योग धनदायी होता है और इसके फलस्वरूप धन स्थिर भी रहता है। लग्नेश नीच का होकर भाग्य स्थान में है। काल सर्प योग के कारक राहु की नवम भाव, लग्न, लग्नेश तथा एकादश भाव पर दृष्टि होने के कारण दोरबजी टाटा समूह के संस्थापक बने। वस्तुतः आर्थिक सफलता में कालसर्प योग की भूमिका भी अहम होती है। केंद्र के स्वामी कंेद्र में ही हों, तो अखंड साम्राज्य योग बनता है। जब चार के याग में से यदि तीन केंद्र में ही हों तो व्यक्ति विश्वविख्यात होता है। जेव्म् टाटा की कुंडली में यह योग विद्यमान है। उभयचारी योग, गजकेसरी योग, राज योग, शश योग जैसे विशेष फलदायक योगों के साथ साथ पराक्रम योग भी है। लग्नेश पराक्रम भाव में स्थित होकर अष्टम दृष्टि से शनि को देख रहा है तथा पराक्रमेश बुध पर राहु का प्रभाव जोखिम के साथ पराक्रम दिखाने का साहस प्रदान कर रहा है। लग्नेश का शनि से तथा पराक्रमेश का राहु से संबंध हो तो व्यक्ति दुस्साहस भरे कदम उठाता है और अपने क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करता है। श्री जे. टाटा की कुंडली में यह योग विद्यमान है और यह सर्वविदित है कि उन्होंने एक इंजिन का हवाई जहाज उड़ाने का विश्व रिकार्ड बनाया था। धनेश तथा लग्नेश का दृष्टि संबंध कर्मेश तथा सप्तमेश का दृष्टि संबंध भी है। इस योग के कारण टाटा अपने जीवन काल में सफलता के शीर्ष पर पहुंचे और संपूर्ण विश्व में विख्यात हुए। स पंचमेश तथा नवमेश केंद्र में हों और शुभ ग्रह से युत हों तो व्यक्ति अथाह संपŸिा का स्वामी होता है। यह योग जेव्म् टाटा की कुंडली में विद्यमान है। दो ग्रहों के आपस में स्थान परिवर्तन को महायोग कहते हैं। ग्रहों के व्यत्यय को तीन भागों में बांटा जा सकता है - शुभ, सामान्य तथा अशुभ। इस परिवर्तन को स्थानांतर योग भी कहते हैं। इस योग में जन्मे व्यक्ति को कभी भी धन की कमी नहीं होती। केंद, त्रिकोण व द्वितीय भाव से इन ग्रहों के संबंध हांे तो जातक पर लक्ष्मी सदैव धन बरसाती है। श्री आर. टाटा की कुंडली में यह योग विद्यमान है। लग्नेश तथा चतुर्थेश गुरु के धनेश व पराक्रमेश के साथ स्थान परिवर्तन योग के कारण महायोग बन रहा है। सप्तमेश, कर्मेश, भाग्येश, लाभेश और धनेश केंद्र में हैं। इस योग के कारण वह एक सफल उद्योपति व आदर्श औद्योगिक घराने के सफल संचालक बने। अतः टाटा सदृश कंपनी के शेयर खरीदें, जिनके मुखियाओं की कुंडली में लाभ एवं धन संग्रह के श्रेष्ठ योग हैं, तो कोई मंद भाग्य निवेशक भी लाभान्वित हो सकता है। इस समूह के लाभ का अनुपात किसी भी प्रकार से संदेहास्पद नहीं है।


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