ज्योतिषीय सामग्री एवं उपाय

ज्योतिषीय सामग्री एवं उपाय  

प्रश्न: ज्योतिष में भिन्न-भिन्न समस्याओं के लिये रत्न, रुद्राक्ष, तंत्र, मंत्र, यंत्र, लाॅकेट एवं अन्य दुर्लभ सामग्री द्वारा निराकरण हेतु सटीक उपाय बताएं। उत्तर: भारतीय ज्योतिष पद्धति के अनुसार सात मुख्य ग्रह हैं जो कि निरंतर हमारे जीवन को संचालित करते रहते हैं। ये ग्रह हैं: सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि। राहु-केतु दो छाया ग्रह हैं जिनका प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थय के लिये यह जरूरी है कि खाद्य, जल, नमक, विटामिन आदि का उचित अनुपात शरीर में हो, इसी प्रकार मानव की श्रेष्ठता एवं सफलता के लिये यह जरूरी है कि उसके जीवन पर समस्त ग्रहों का उचित प्रतिनिधित्व हो। एक उत्तम जीवन के लिये यह जरूरी है कि उसका शरीर स्वस्थ हो, भाग्य प्रबल हो, संतान एवं पत्नी, का पूर्ण सुख हो तथा आय क े उचित साधन हा े ं। प ुत्र-पत्नी, विलासितापूर्ण जीवन, आय, भाग्योदय आदि के अलग-अलग कारक ग्रह हैं। इन समस्त ग्रहों का उचित अनुपात ही मानव-जीवन की श्रेष्ठता के लिए आवश्यक है। एक भी ग्रह की दुर्बलता जीवन को अपूर्ण बना देती है। ऐसी स्थिति में उस दुर्बल ग्रह को बली करने के लिये स ंब ंधित धातु रत्न, रुद ्राक्ष, त ंत्र-म ंत्र य ंत्र आ ैर लाॅकेट या अन्य दुर्लभ वस्तुओं का उपया ेग भिन्न-भिन्न समस्याआ े ं क े लिये अनिवार्य हो जाता है। विशेष कार्यों के लिये विशेष उपाय फिल्म प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, वितरक के लिये हीरा उपयोगी है। राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्य करने वालों के लिये माणिक और मूंगा उत्तम है। कलाकार, संगीतकार, गीतकार, अस्पतालों के डाॅक्टरों के लिये हीरा-मोती, सफेद पुखराज उत्तम है। लेखक, कारागार में कार्य करने वालों के लिए पन्ना और माणिक उपयोगी है। शासकीय अधिकारी के लिये नीलम आ ैर म ू ंगा, ब ै ंक कर्म चारी, वाणिज्य संबंधी व्यक्ति, गणित से आजीविका कमाने वाले इन्कम टैक्स विभाग के अधिकारी को पन्ना पहनना चाहिये। लोहे-पटसन, कोयले के व्यापारी- मूंगा-नीलम पहनंे, जज-मैजिस्टेट- फौज के अधिकारी माणिक पहनें, वकील-प ्रा ेफ ेसर-म ू ंगा-पन्ना धारण कर सकते हैं। कमीशन एजेंट-आढ़ती के लिए मूंगा-पुखराज श्रेष्ठ होता है। संतान प्राप्ति के लिये: संतान गोपाल यंत्र की पूजा करें, बृहस्पति की पूजा करें, सूर्य बाधक हो तो हरिवंश पुराण का पाठ करें। सूर्य मंत्र इनमें से कोई एक ऊँ घृणिः सूर्याय नमः या ऊँ घृणिः सूर्य आदित्य नमः का जाप 7000 बार करें। यदि चंद्रमा बाधक हो तो शिव पूजन करें या 11000 बार ‘ऊँ सोमाय नमः’ का जप करें। मंगल बाधक हो तो रुद्राभिषेक करें या ऊँ अंगारकाय नमः का जाप 10000 बार करें। बुध बाधक हो तो कांस्य पात्र का दान करें या ‘ऊँ बुधाय नमः’ का जाप 9000 बार करें। शुक्र बाधक हो तो ऊँ शंु शुक्राय नमः या शुक्र गायत्री मंत्र ‘ऊँ शुक्राय विद्महे शुक्लाम्बर धरः धीमहि तन्नौ शुक्रः प्रचोदयात’ का जाप करें। बृहस्पति के लिये ऊँ ग्रां ग्रीं, ग्रौं सः गुरुवे नमः का जाप करें। शनि बाधक हो तो महामृत्यंुजय का जाप करें और ऊँ शं शनैश्चराय नमः का जाप 23000 बार करें। राहु बाधक हो तो ऊँ रां राहवे नमः का जाप करें। केतु बाधक हो तो ऊँ कें केतवे नमः का जाप करें या ‘‘वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्वि घ्न ं क ुरू म े द ेव सर्व कार्य े ष ु सर्वदा।।’’ का जाप करें। बीमारी दूर करने के लिये: लग्नेश का रत्न धारण करें। मृत संजीवनी मंत्र:- ऊँ हौं जूं सः ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं त्रयंम्बकम् यजामहे भर्गो देवस्य धीमहि सुगन्धिम् पुष्टि वर्धनम्। धियो यो नः प्रचोदयात् ऊर्वारूक मिव बन्धनानमृत्योर्मुक्षीय मामृतात। स्वः भुवः भूः ऊँ सः जूं हौं ऊँ।। का जाप 11 बार रोज करें। रुद ्राक्ष स े भी उच्च रक्त चाप, स्नायुविक कष्ट, वातरोग के लिये भुजा में काले या लाल धागे से बांध लेने पर लाभ मिलता है। दोनों भुजाओं पर बांधने से कभी पक्षाघात नहीं होता। महिलाओं के लिये कमर में बांधने से प्रसवादि में सरलता, अनियमित मासिक स े बचाव कर सकती ह ै ं। वात-पित्त-कफ चर्म रोग के लिये रुद्राक्ष एक उत्तम औषधि है। कुष्ठ रोग-दाद खाज फोड़ा फंुसी के लिये लाभदायक है। रुद्राक्ष को पीसकर नारियल के तेल में मिलाकर लेप बनायें। जले हुए स्थान पर लगाने से तत्काल जलन शांत होती है। यदि बाधायें आ रही हों तो इन यंत्रों का े सिद्ध करक े धारण किया जा सकता है। भिन्न-भिन्न कार्यों के लिये भिन्न-भिन्न यंत्र होते हैं जो तालिका में वर्णित हैं। तंत्र द्वारा समाधान: Û सात पीली कौड़ी अपने गल्ले या तिजा ेरी म े ं रखन े स े धन म े ं व ृद्धि होती है। Û 21 कौड़ियों को हल्दी से रंगकर पुष्य नक्षत्र, रविवार या गुरुवार पीले वस्त्र में बांधकर तिजोरी या अर्थवाली जगह घर में रखने पर धन बाधा दूर होती है। Û किसी शुभ मुहूर्त में हत्था जोड़ी को प्राप्त कर तथा लाल रेशमी वस्त्र में सिंदूर, 11 साबुत लौंग तथा हत्था जोड़ी को धन की जगह पर वस्त्र में बांधकर रखें। धन, शत्रु व तांत्रिक बाधाओं का निराकरण होगा। Û काले चावलों को लाल कपड़े में बांधकर धन स्थान पर रखने पर धन व सुख-समृद्धि बाधा दूर होती है। Û शतभिषा नक्षत्र मंे लाल रंग की घुंघची की जड़ लाकर लाल कपड़े में रखकर गले में धारण करें या दायीं भुजा में पहनें तो समस्त कार्यों में सफलता व धन वृद्धि होगी। Û मृगशिरा नक्षत्र में केले के पत्ते का एक छोटा सा टुकड़ा पीले कपडे में लपेटकर ताबीज की तरह बनाकर पील े धाग े म े ं गल े या दायी ं बाज ू म े ं धारण करन े स े मान-सम्मान, यश-प्रतिष्ठा व धन बाधा दूर होगी। शत्रु नाश के लिये: यदि शत्रु अधिक परेशान करते हैं, उन्नति में बाधा डालते हैं तो बिल्ली की जेर के प्रयोग से अपने गुप्त शत्रुओं से मुक्ति पा सकते हैं। प्रथम सोमवार एक चांदी की डिब्बी को लाल वस्त्र पर रखकर डिब्बी में सिंदूर के साथ 21 लौंग तथा कपूर रखें और रुद्राक्ष की माला से ‘‘ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चै’’ का तीन माला जाप करें। जो शत्रु अधिक शक्तिशाली हो डिब्बी में से एक चुटकी सिंदूर निकाल कर उसके निवास पर डाल आयें वह तंग करना बंद कर देगा। विवाह बाधा दूर करने के लिये: गुरुवार को पीले कपड़े में रखकर ‘‘ऊँ बृं बृहस्पत्यै नमः’’ का जाप हल्दी की माला से करें और पीले रंग की चुनरी को किसी लक्ष्मीनारायण मंदिर में अर्पित करें और केसर को मस्तक पर लगायें बाधा दूर हो जायेगी। नये व्यवसाय को गति देने के लिये भी यह कारगर है। विद्याध्ययन बाधा दूर करने के लिये: भोज पत्र को एकाक्षी नारियल के साथ रखें और हल्दी की माला से ‘‘ऊँ ऐं सरस्वत्यै नमः’’ का तीन माला जाप करें और चांदी के ताबीज में भोजपत्र को डाल दें और विद्यार्थी के गले में डाल दें अड़चनें दूर होगी। यदि किसी स्त्री का े प ्रसव पीड ़ा अधिक हो तो एकाक्षी नारियल संुघायें। सामान्य प्रसव होगा। धनतेरस वा दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा में एकाक्षी नारियल रखकर पूजा की जाए तो कष्टों का नाश होता है और ऐश्वर्य और सुख संपत्ति मिलती है। कार्य क्षेत्र में भी सफलता मिलती है। हल्दी की माला से जाप करें। गोरोचन: गोरोचन गाय के नेत्रों से निकलता है जिसे एकत्रित करके सूखा लिया जाता है। यह पीले रंग का होता है और सूखने के बाद कठोर हो जाता है। यदि इसे अभिमंत्रित कर लें तो इसमें अधिक शक्ति आ जाती है। इससे अनेक कार्य सिद्ध किये जा सकते हैं जैसे आर्थिक समृद्धि, वशीकरण, प्रेम बाधा नाश, वैवाहिक बाधा दूर करना, सुख समृद्धि के लिये, घर में नकारात्मक ऊर्जा से बचाव, व्यवसाय म े ं उन्नति क े लिय े प ्रया ेग किया जाता है। चमत्कारिक कौड़ियाँ: जीवन म े ं आन े वाली अन ेक प ्रकार की समस्याओं को दूर करने के लिये प्राचीन काल से ही इनका प्रयोग होता आया है। इनका प्रयोग धार्मिक कार्यों में भी किया जाता है। धन वृद्धि उपाय के अतिरिक्त कौड़ियों का प्रयोग और कई प्रकार से समस्या दूर की जा सकती है जैसे नजर उतारने के लिये, विवाह बाधा दूर करने के लिये, व्यापार वृद्धि, परस्पर पति-पत्नी में प्रेम रहे, धन की स्थिरता क े लिय े अलग-अलग तरीका े ं स े प्रयोग किया जाता है। गोमती चक्र द्वारा उपाय: यह एक ऐसा पत्थर है, जिसका उपयोग तंत्र क्रियाओं द्वारा विभिन्न समस्याओं के निराकरण हेतु किया जाता है। यह पत्थर श्रीहरि के सुदर्शन चक्र स्वरूप है, अतः इसे रखना अतिशुभ है। स्वास्थ्य हेतु: (रोग मुक्ति हेतु): यदि परिवार में कोई असाध्य रोगी हो तो चार गोमती चक्र लाकर इन्हें जल द्वारा साफ कर े ं। अब ड ंठल सहित पान के दो पत्ते लेकर उसमें घी में डुबोया हुआ एक जोड़ा लौंग पान के पत्तों पर रखें और पान के पत्तों को इस प्रकार लपेटंे कि सारी सामग्री बंद हो जाये, फिर काले धागे से बांध भी लें। अब सीधे (दायें) हाथ में चार गोमती चक्र व उल्टे (बायें) हाथ में उपरोक्त पान लेकर होलिका (पर्व पर) की 11 बार परिक्रमा यह कहते हुये करें कि रोगी स्वस्थ हो। फिर होलिका को प्रणाम करें और चारों गोमती चक्रों को रोगी के पलंग के चारांे पायों में बांध दें। प्रातः कामना करें, लाभ होगा। गर्भ हेतु: यदि बार-बार गर्भ गिर रहा हो तो दो गोमती चक्र लाल कपड़े में बांधकर कमर में बांध दें, गर्भ गिरने संबंधी समस्या दूर होगी। तांत्रिक रक्षा कवच हेतु: यदि होली के दिन जातक 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने प ूरे परिवार के ऊपर से वार कर बहते जल में फेंक दें तो यह परिवार के लिए तांत्रिक रक्षा कवच का कार्य करता है। यदि चार गोमती चक्र को रेागी के बिस्तर से बांध दे तो थोड़े दिनों में रोगी स्वस्थ हो जाता है। पूर्ण स्वस्थ होने के बाद प्रातः इन्हें पीपल वृक्ष के नीचे गाड़ दें। शत्रु हेतु: यदि किसी के शत्रुओं की संख्या में वृद्धि हो रही हो तो शत्रु का नाम जितने अक्षर का है उतने गोमती चक्र लेकर उस पर शत्रु का नाम लिखकर इन्हें जमीन में गाड़ने से शत्रु परास्त होंगे। -होली के दिन गोमती चक्र पर थोड़ा संदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुये जलती हुई आग (होली) में फेंकने से शत्रु भी मित्र बन जाता है। -तीन गा ेमती चक्र का े ज ेब म े ं रखकर किसी मुकदमे (कोर्ट-कचहरी), प्रतियोगिता (कोई भी) के लिए जायंे तो अवश्य ही सफलता मिलती है। यदि कोर्ट-कचहरी से संबंधित कार्य हेतु जाते समय, घर के बाहर गोमती चक्र रखकर इस पर दाहिना (सीधा) पा ंव रखकर जाय ं े ता े उस दिन सफलता प्राप्त होती है। प्रमोशन हेतु एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे हृदय से प्रार्थना करें तो निश्चय ही सफल होंगे। अन्य: -यदि 11 गोमती चक्र को पीले कपड़े में लपेट कर तिजोरी में रखंे तो पूरे वर्ष भर तिजोरी भरी रहती है। -यदि गोमती चक्र को लाल सिंदूर की डिब्बी में रखंे तो घर में क्लेश दूर होकर ग्रह-शांति बनी रहती है। -दांपत्य प्रेम में वृद्धि हेतु लाल सिंदूर की डिब्बी में 11 गोमती चक्र रखकर घर में रखने से क्लेश दूर होकर अपार प्रेम वृद्धि होती है। - यदि पति-पत्नी में मतभेद हो तो तीन गोमती चक्र लेकर घर की दक्षिण दिशा में ‘हलूं बलजाद’ कहकर फेंक दें, मतभेद दूर होकर प्रेम बढ़ेगा। - यदि किसी का व्यापार न चल रहा हो तो दो गोमती चक्र लेकर उसे बांधकर ऊपर चैखट पर लटका दें और ग्राहक उसके नीचे से निकले तो व्यापार में वृद्धि होती है। - पांच गोमती चक्र जेब में रखकर कोर्ट-कचहरी जाये ं तो मुकदमे ं मे ं विजय होगी। -शुक्ल पक्ष सोमवार को सिद्ध योग में तीन गोमती चक्रों को चांदी के तार में एक साथ बांधें और उन्हें हर समय अपने साथ रखें, पदोन्नति व व्यवसाय की समस्या दूर होकर लाभ होगा। - यदि बच्चे के पढ़ाई में मन नहीं लगने की समस्या हो तो 11 गोमती चक्र बच्चे के सिर पर से 7 बार वारकर जल में बहा दें। लगातार 7 सोमवार यह उपाय करें। समस्या का निराकरण हो जायेगा। शंख द्वारा उपाय: श ंख का े व ेदशास्त्र म े ं लक्ष्मीजी का सहा ेदर (भाई) माना जाता है। अतः यह लक्ष्मी जी के साथ विष्णुजी को भी प्रिय है। इससे शिवलिंग (विशेष-पारद), श्री विष्णु ‘शालिग्राम’ (विशेष श्रीकृष्ण), ‘श्री यंत्र’ (पारद या स्फटिक विश्ेाष लक्ष्मी जी) आदि पर जल या पंचामृत से अभिषेक करने पर देवता प्रसन्न होते हैं तथा ग्रह दोष दूर होकर विभिन्न परेशानियां अपने प्रारब्ध अनुसार कम हो जाती हैं। शंख मुख्यतः दो प्रकार के हैं- 1. दक्षिणावर्ती 2. वामावर्ती वामावर्ती शंख बजाने के काम में लिया जाता है जिसकी ध्वनि से पूजा-पाठ संपन्न होता है। इससे हानिकारक व नकारात्मक ऊर्जा का नाश होकर शुभ व सकारात्मक ऊर्जा का वास होने से आत्मविश्वास व आत्मबल, शक्ति व दृढ़ता में वृद्धि, व्यक्ति आशावादी होता है, व्यर्थ का भय दूर होता है। दक्षिणावर्ती शंख पूजन में काम आता है जिससे दरिद्रता दूर होकर धन लाभ में वृद्धि, आर्थिक समृद्धि, व्यवसाय व नौकरी में वृद्धि, पद-प्रमोशन में वृद्धि तथा विभिन्न भौतिक सुखों में वृद्धि होकर स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इससे पितृदोष शांति, श्वांस व हृदय रोगांे में लाभ, वास्तु दोषों में लाभ, गर्भवती स्त्री को इसमंे रखा पानी पिलाने से जच्चा-बच्चा स्वस्थ, निरा ेगी रहता ह ै। यह क ुब ेर का श ंख ह ै े इसस े मन, संपत्ति, ऐश्वर्य की समस्या का निराकरण होता है। इसके अलावा शंख अन्य प्रकार के भी होते हैं तथा निम्न पर ेशानिया ं द ूर हा ेकर लाभ होता है: - गणेश शंख: यह सर्वा धिक शक्तिशाली ह ै। इसस े विद्या, पारिवारिक व सौभाग्य की समस्या दूर होकर इनमें लाभ होता है। इसके अलावा यह रोग, यश-मान सम्मान, व्यापार व नौकरी तथा सुख-समृद्धि की समस्याएं दूर कर आरोग्य आदि उपरोक्त लाभ देता है। - गोमती चक्र: इससे सुख-समृद्धि, सौभाग्य एवं सौंदर्य आदि की समस्याएं दूर होकर लाभ होता है। - कौड़ी शंख: इसम े ं-लक्ष्मी नारायण जी दा ेना े ं की कृपा बनी रहती है। यह ऐश्वर्य, संतान, वैवाहिक जीवन, मान-सम्मान व संपत्ति आदि की समस्याएं दूर कर लाभ देता है। - मोती शंख: इससे मन-मस्तिष्क संबंधी तथा दुर्भाग्य की समस्या दूर होकर मानसिक शांति, स्वस्थ जीवन व सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इससे हृदय रोग व ब्लड प्रेशर की समस्या भी दूर होती है। - अन्नपूर्णा शंख: यह संपत्ति की पर ेशानी द ूर करता ह ै तथा अति सौभाग्यदायक है। यह चमत्कारी व दिव्य शंख है। अपने ज्ञान के अनुसार फल देता है। - शनि शंख: यह काले रंग का शनि के दोष दूर करने वाला शंख है। जिन लोगों पर शनि की विभिन्न दशाएं (महा, अंतर आदि), साढ़ेसाती, ढईया आदि चल रहे हों उनके लिए इससे शनि देव की कृपा प्राप्त हो जाती है। इसे सरसांे के तेल में डुबोकर घर के मंदिर में शनिवार सायं स्थापित करना चाहिए। इससे शत्रु, स्वास्थ्य, दुर्घटना, दरिद्रता, अकाल मृत्यु आदि समस्याएं दूर होकर इनमें लाभ होता है। शनि के सभी दोष का निवारण करने हेतु आटे में काले तिल गूंथकर इसे शनि शंख में भरकर शनिवार को सिर से सात बार वार कर बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए, शनि संबंधित समस्याएं दूर होंगी। इससे कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी संबंधी बीमारी, जोड़ों का दर्द, एड़ी दर्द, पिंडली दर्द, पैर दर्द आदि दूर होकर स्वस्थ रहता है। 7. कछुआ शंख: यह आयुवर्धन करता है तथा आयु की समस्या दूर करता है। दक्षिणावर्ती शंख से निम्न समस्या दूर होकर लाभ होता है: 1. यह जहां होता है वहां मंगल ही मंगल करता है। 2. विशेष कार्य सिद्धि हेतु इसके दर्शन करके जायें। 3. यदि किसी स्त्री के संतान बाधा है तो इस शंख में दूध भरकर प्रतिदिन तब तक पिलावें जब तक संतान प्राप्ति न हो जाए। 4. यदि किसी जातक को पेट के रोग हैं तो उसमें रात को जल भर कर प्रतिदिन पीने से पेट के सभी रोगों का निराकरण होता है। 5. इससे शिवजी का अभिषेक करने पर कालसर्प योग व पितृदोष बाधा निवारण जल्दी होता है। 6. इससे भूत, प्रेत, पिशाच, ब्रह्मराक्षस आदि ऊपरी बाधाओं में लाभ होता है। 7. इससे रोग, ऋण, शत्रु, दुर्घटना, मृत्यु, चोरी आदि से रक्षा होती है।तनाम उद्देश्य श्रीयंत्र धन प्राप्ति के लिए श्री वैभव लक्ष्मी यंत्र ऐश्वर्य प्राप्ति के लिये श्री महा लक्ष्मी यंत्र लक्ष्मी प्राप्ति के लिये श्री कुबेर यंत्र धन वृद्धि के लिए वशीकरण यंत्र द ूसरा े ं का े वश म े ं करने के लिये व्यापार वृद्धि यंत्र व्यापार वृद्धि के लिये मारूति यंत्र जगह बेचने के लिए सर्वकार्य सिद्धि यंत्र सभ् ा ी क ा र्य ा े ं क ी सफलता के लिये ऋण म ुक्ति बीसा यंत्र कर्जा े ं की म ुक्ति क े लिये सरस्वती यंत्र विद्या प्राप्ति के लिये कालसर्प योग यंत्र दुष्प्रभाव कम बगलामुखी यंत्र शत्रु नाश के लिये वाहन दुर्घटना यंत्र वाहन द ुर्घ टना स े बचने के लिये विश्वकर्मा यंत्र आ ैद्या ेगिक एव ं ग ्रह बाधाओं को दूर करने के लिये नवग्रह यंत्र नवग्रहों की शांति के लिये बंधन मुक्ति यंत्र जादू-टोने, भूत, प्रेत दूर करने के लिये मत्स्य यंत्र वास्तु में जल संग्रह दोषों को समाप्त करने के लिये गणेश सिद्धि यंत्र बाधाओं को दूर करने के लिए


वक्री ग्रह विशेषांक  अप्रैल 2015

फ्यूचर समाचार के वक्री ग्रह विषेषांक में वक्री, अस्त व नीच ग्रहों के शुभाषुभ प्रभाव के बारे में चर्चा की गई है। बहुत समय से पाठकों को ऐसे विशेषांक का इंतजार था जो उन्हें ज्योतिष के इन जटिल रहस्यों को उद्घाटित करे। ज्ञानवर्धक और रोचक लेखों के समावेष से यह अंक पाठकों में अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। इस अंक के सम्पादकीय लेख में वक्री ग्रहों के प्रभाव की सोदाहरण व्याख्या की गई है। इस अंक में वक्र ग्रहों का शुभाषुभ प्रभाव, अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल, वक्री ग्रहों का प्रभाव, नीच ग्रह भी देते हैं शुभफल, क्या और कैसे होते हैं उच्च-नीच, वक्री एवं अस्तग्रह, कैसे बनाया नीच ग्रहों ने अकबर को महान आदि महत्वपूर्ण लेखों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त बी. चन्द्रकला की जीवनी, पंचपक्षी के रहस्य, लाल किताब, फलित विचार, टैरो कार्ड, वास्तु, भागवत कथा, संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, वास्तु परामर्ष, ज्योतिष और महिलाएं, व्रत पर्व, क्या आप जानते हैं? आदि लेखों व स्तम्भों के अन्तर्गत बेहतर जानकारी को साझा किया गया है।

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