सामुद्रिक शास्त्र | स्वर विज्ञान से भविष्य का ज्ञान
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स्वर विज्ञान से भविष्य का ज्ञान पं. शरद त्रिपाठी प्राचीन काल में स्वर विज्ञान से भी फल कथन किया जाता था। इसका आधार श्वास-प्रश्वास (स्वर) को बनाया जाता है। स्वर तीन प्रकार के होते हैं: दायां स्वर: मेरुदंड के दायें भाग से नासिका के दायें छिद्र में आई हुई प्राण वायु का नाम दायां स्वर है। बायां स्वर: मेरुदंड के बायें भाग से नासिका के बायें छिद्र में आई हुई प्राण वायु का नाम बायां स्वर है। सुषुम्ना स्वर: मेरुदंड से नासिका छिद्रों में आई हुई प्राण वायु को सुषुम्ना स्वर कहते हैं। यमुना, सूर्य और पिंगला दायें स्वर के तथा गंगा, चंद्र और इंगला बायें तथा स्वर के नाम हैं। गंगा और यमुना नाड़ियों के बीच बहने वाले स्वर का नाम सुषुम्ना है। उपर्युक्त तीनों नाड़ियों का संगम भौंहों के बीच होता है जहां पर दैवी शक्ति वाले लोग शक्ति की आराधना के लिए ध्यान केंद्रित करते हैं। दायां स्वर पुल्लिंग (शिव) और बायां स्त्रीलिंग (शक्ति) का प्रतीक है। अतः प्रिय और स्थिर कार्य, शक्ति क े प्रवाह में अर्थात चंद्र स्वर में और अप्रिय तथा अस्थिर कार्य शिव के प्रवाह में अर्थात सूर्य स्वर में होते हैं। सुषुम्ना स्वर का उदय शिव और शक्ति के योग से होता है। इसलिए व्यावहारिक कार्यों को यह होने ही नहीं देता है, किंतु ईश्वर के भजन में अत्यंत सहायक होता है। भवसागर को पार करने में यह जहाज की तरह सहायता करता है। दीर्घायु की परीक्षा यदि सारी रात सूर्य स्वर तथा सारे दिन चंद्र स्वर चले, तो समझना चाहिए कि दीर्धायु प्राप्त होगी तथा शरीर निरोग रहेगा और दैहिक, दैविक और भौतिक ताप किसी तरह नहीं सताएंगे। किसी महीने की प्रतिपदा को सूर्योदय से संध्या तक सूर्य स्वर चलता रहे, तो समझना चाहिए कि एक माह तक शरीर अस्वस्थ रहेगा। छठे वर्ष मृत्यु भी समीप आ जाएगी। इंद्रिय शक्ति का ह्रास होगा और विभिन्न प्रकार की चिंताएं सताएंगी। विवाह संबंधी प्रश्नोत्तर प्रश्न: विवाह होगा या नहीं? यदि होगा, तो कब? उत्तर: यदि प्रश्नकर्ता ज्योतिषी के दायीं ओर बैठकर प्रश्न करे और उत्तरदाता का दायां स्वर चलता हो, तो विवाह शीघ्र होगा। इसके विपरीत यदि प्रश्नकर्ता उत्तरदाता के बायीं ओर बैठकर प्रश्न करे और उस समय उत्तरदाता का दायां स्वर चलता हो, तो विवाह में विलंब होगा। यदि प्रश्नकर्ता ज्योतिषी के बायी ं आरे बैठकर प्रश्न करे और उस समय ज्योतिषी का भी बायां स्वर प्रवाहित हो रहा हो, तो विवाह नहीं होगा। यदि प्रश्नकर्ता दायीं अथवा बायीं ओर अर्थात किसी भी तरफ बैठ कर प्रश्न करे और ज्योतिषी का सुषुम्ना स्वर चलता हो, तो विवाह नहीं होगा। यदि प्रश्नकर्ता का बायां और ज्योतिषी का दायां स्वर चलता हो, तो कुछ दिनों के पश्चात विवाह हो जाएगा। यदि प्रश्नकर्ता का बायां और स्वरज्ञानी का सुषुम्ना स्वर चलता हो, तो विवाह नहीं होगा। यदि प्रश्नकर्ता और ज्योतिषी दोनों का ही सुषुम्ना स्वर चलता हो, तो विवाह की कौन कहे, बात तक नहीं होगी। यदि प्रश्नकर्ता का सुषुम्ना और ज्योतिषी का दायां स्वर चल रहा हो, तो विवाह कुछ समय के पश्चात अवश्य होगा। चोरी से संबंधित प्रश्नोत्तर प्रश्न: चोरी गई वस्तु मिलेगी या नहीं? उत्तर: यदि प्रश्नकर्ता का दायां और ज्योतिषी का बायां स्वर चल रहा हो, तो चोरी गई वस्तु कठिनाई से मिलेगी। ऐसी अवस्था में कुछ सख्ती से काम लेना होगा। यदि प्रश्नकर्ता का बायां और स्वरज्ञानी का दायां स्वर चलता हो, तो वस्तु मिलेगी अवश्य, किंतु देर से। यदि प्रश्नकर्ता और उत्तरदाता दोनों का बायां स्वर चलता हो, तो वस्तु नहीं मिलेगी अथवा कठिनाई से मिलेगी। यदि प्रश्नकर्ता का सुषुम्ना स्वर और ज्योतिषी का बायां स्वर चलता हो, तो वस्तु का पता नहीं चलेगा, मिलना तो दूर की बात है। यदि प्रश्नकर्ता और उत्तरदाता दोनों का सुषुम्ना स्वर चले, तो यह अत्यंत खराब योग है- वस्तु कदापि नहीं मिलेगी। यदि प्रश्नकर्ता का बायां और ज्योतिषी का सुषुम्ना स्वर चलता हो तो वस्तु नहीं मिलेगी। पुत्र संतान और स्वर विज्ञान  जब स्त्री का बायां और पुरुष का दायां स्वर चल रहा हो और पृथ्वी तथा जल (वायु व तेज तत्व) के संयोग में अर्द्धरात्रि के समय गर्भाधान किया गया हो, तो पुत्र उत्पन्न होगा। ऋतुकाल के बाद की चैथी रात में गर्भ रहने से अल्पायु तथा दरिद्र पुत्र पैदा होता है। ऋतुकाल के बाद की छठी रात में गर्भ रहने से साधारण आयु वाला पुत्र उत्पन्न होता है। ऋतुकाल के बाद की आठवीं रात में गर्भ रहने से ऐश्वर्यशाली पुत्र पैदा होता है। ऋतुकाल के बाद की दसवीं रात्रि में गर्भ रहने पर चतुर पुत्र पैदा होता है। ऋतु काल के बाद की सोलहवीं रात में गर्भ रहने पर सर्वगुण संपन्न पुत्र पैदा होता है।

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