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यह ब्रह्मांड प्रकृति की एक अद्भुत, अद्वितीय एवं सुंदर रचना है जहां सिर्फ सत्य एवं वास्तविकता पर आधारित तथ्यों की ही मान्यता है। जिस प्रकार मानवीय पहलू के हर विषय नियमबद्ध हैं तथा नियमों के द्वारा ही शासित एवं संचालित होते हैं उसी प्रकार पूजा-पाठ के भी कुछ शास्त्र-सम्मत विधान हैं। जब तक नियमों, विधानों एवं सिद्धांतों का अक्षरशः पालन नहीं किया जाता तब तक पूजा से मिलने वाला लाभ सही एवं सकारात्मक रूप में नहीं मिल सकता। आजकल घर की योजना बनाते वक्त, स्थानाभाव के कारण हम एक अलग पूजा रूम की आवश्यकता को नजरअंदाज कर देते हैं। निश्चित रूप से यह कोशिश होनी चाहिए कि पूजा के लिए एक अलग रूम हो क्योंकि यह घर का ऐसा महत्वपूर्ण स्थान है जहां रोज सुबह जाकर हम ईश्वर को याद करते हैं तथा वहां की सकारात्मक ऊर्जा एवं तरंगों से न ही सिर्फ हमारे मस्तिष्क, शरीर एवं आत्मा में स्फूर्ति, शक्ति एवं ऊर्जा का संचार होता है वरन् घर एवं पड़ोस का संपूर्ण वातावरण ही ऊर्जावान हो जाता है। इससे हमारी कार्यक्षमता एवं सृजनशीलता में भी वृद्धि होती है जो हमारे लिए प्रगति, समृद्धि एवं अंततः शांति एवं संतोष का मार्ग प्रशस्त करती है। पूजा रूम का निर्माण करते वक्त कुछ सावधानियां बरतने एवं वास्तु के नियमों के अनुरूप निर्माण कार्य को अंजाम देने की आवश्यकता है। पूजा एवं साधना से हमारे मन को शांति मिलती है तथा हम ऊर्जावान महसूस करते हैं। यदि पूजा रूम का निर्माण गलत दिशा, परिमाण अथवा वास्तु नियमों के प्रतिकूल करेंगे तो चाहे हम जितनी भी पूजा अथवा साधना वहां बैठकर करें, हमें कोई फायदा नहीं होगा। वास्तु के कुछ अहम सिद्धांत हैं जिनका पालन पूजा रूम बनाते वक्त अवश्य करना चाहिए। पूजा रूम के लिए उपयुक्त दिशाएं पूजा रूम घर के उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में बनाना सर्वश्रेष्ठ है किंतु वैकल्पिक तौर पर उत्तर या पूर्व दिशा में भी पूजा रूम बनाना उत्तम है। पूजा करते समय चेहरा सदैव पूर्व, उत्तर अथवा उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पूजा रूम कदापि सीढ़ियों के नीचे अथवा बेसमेंट में न बनायें, दिशा चाहे कोई भी हो। विशेष पूजा ब्रह्मस्थान में की जा सकती है अथवा बड़े क्षेत्रफल वाले भवनों में पूजा रूम ब्रह्म स्थान में भी बनाया जा सकता है। बेडरूम में पूजा रूम बनाना पूर्णतया वर्जित है। मूर्तियां पूजा रूम में रखी जाने वाली भगवान की मूर्तियों की ऊंचाई 2’’ से कम तथा 9’’ से अधिक नहीं होनी चाहिए। इन मूर्तियों को इतनी ऊँचाई पर रखना चाहिए कि जब हम पूजा करने बैठें तो मूर्तियों के पैर हमारे छाती के लेवल पर हों। यदि खड़े होकर पूजा करने की व्यवस्था है तब भी यही नियम लागू होगा अर्थात् मूर्तियों के पैर छाती के स्तर पर ही होंगे। जिस स्लैब अथवा कैबिनेट पर देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी हों उसके ऊपर कुछ भी नहीं रखा जाना चाहिए। एक ही देवी/देवता की दो मूर्तियां नहीं होनी चाहिए। दो मूर्तियां एक-दूसरे के सामने भी नहीं रखना चाहिए। प्रवेश द्वार एवं खिड़कियां पूजा रूम का प्रवेश द्वार एवं खिड़कियां उत्तर एवं पूर्व दिशा में होनी चाहिए। दरवाजा दो पल्लों का ही होना आवश्यक है। एक पल्ले का दरवाजा नहीं लगाना चाहिए। स्वयं से बंद होने वाला स्वचालित दरवाजा भी पूजा रूम के लिए वास्तु सम्मत नहीं है। पूजा रूम में दहलीज बनाना शुभ एवं उपयुक्त है। दरवाजे एवं खिड़कियां लकड़ी के ही होना उपयुक्त है। लोहा अथवा टीन के दरवाजे एवं खिड़कियां वास्तु सम्मत नहीं हैं। अग्निकुंड अग्निकुंड पूजा रूम के दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा में होना चाहिए। अग्नि को आहूति देते समय मुंह पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। सामग्रियां पूजा रूम में यथासंभव तांबे के बर्तनों का उपयोग होना चाहिए। कलश अथवा जलस्रोत उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखना चाहिए। दीपक अथवा लैंप दक्षिण-पूर्व में रखना वास्तु सम्मत है। पूजा रूम में मृत व्यक्तियों/पूर्वजों की फोटो न लगाएं, वेदी उत्तर-पूर्व में रखें। आलमारी, शोकेश अथवा कबर्ड दक्षिण या पश्चिम की दीवार से सटाकर लगाएं किंतु ध्यान रखें कि इनकी ऊंचाई मूर्तियों के लेवल से कम हो। लैंप स्टैंड अथवा अपलाईटर दक्षिण-पूर्व कोने में रखें किंतु इनकी स्थिति मूर्तियों के ठीक सामने होनी चाहिए ताकि इनका प्रकाश मूर्तियों पर ठीक प्रकार से पड़े। फ्लोरिंग पूजा रूम में फ्लोरिंग के लिए सेरामिक टाइल्स, मोजैक एवं मार्बल अच्छे विकल्प हैं किंतु पूजा रूम के लिए श्वेत मार्बल अधिक अनुशंसित है। रंग पूजा रूम की दीवार के लिए लाइट येलो, सफेद एवं लाइट ब्लू रंग उपयुक्त है। इनमें से कोई एक रंग चुनकर दीवारों पर करवाना चाहिए। कुछ आवश्यक तथ्य - पूजा का स्थान कदापि बेडरूम में नहीं बनाना चाहिए। पूजा रूम टाॅयलेट के बगल में अथवा सामने नहीं होना चाहिए। पूजा रूम के ठीक ऊपर या नीचे टाॅयलेट नहीं होना चाहिए। - पूजा रूम में किसी भी प्रयोजन से प्रवेश करना हो तो उसके पूर्व हाथ एवं पैर अवश्य धो लें। पैर धोते समय एक-दूसरे पैर को आपस में रगड़कर धोना वर्जित है। दायें हाथ से पानी डालें तथा बायें हाथ से पैर साफ कर धोयें। - पूजा रूम में त्रिभुजाकार फ्रेम में देवी/देवता का चित्र न बनायें। - पूजा रूम में दो शटर वाला दरवाजा लगाना चाहिए। खुद से बंद होने वाला स्वचालित दरवाजा न लगायें। - पूजा रूम में कोई भी भंजित अथवा खंडित मूर्ति नहीं होनी चाहिए। - पूजा रूम में कोई भी फालतू सामग्री रखना अशुभ है। - पूजा रूम में एक ही देवी/देवता की दो मूर्तियां नहीं होनी चाहिए। मूर्तियां एक दूसरे के आमने-सामने रखना भी उपयुक्त नहीं है।

शनि पर विशेष-दीपावली विशेषांक  नवेम्बर 2014

फ्यूचर समाचार के शनि पर विशेष दीपावली विशेषांक में अनेक रोचक व ज्ञानवर्धक लेख जैसे सम्पत्ति प्राप्ति के उपाय, दीपावली पर किये जाने वाले उपयोगी टोटके व उपाय आदि अनेक लेख सम्मिलित किये गये हैं। आवरण कथा में शनि देव पर एक परिचय के अतिरिक्त शनि की ढैया, साढ़ेसाती, दशा, गोचर फल व शनि के बारे में उनकी एक मित्र या शत्रु के रूप में धारणा, शनि की न्याय ज्ञान व वैराग्य के कारक के रूप में मान्यता आदि जैसे अनेक लेख हैं। अन्य लेखों में शनि के रत्न नीलम तथा शनि शमन के अन्य उपाय, व्रत व शनि के विभिन्न धामों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। सत्य कथा, शनि व करियर, अध्यात्म, भागवत कथा, क्या आप जानते हैं?, टोटके, पंच-पक्षी, शेयर बाजार, ग्रह, स्थिति व व्यापार, विचार गोष्ठी, हैल्थ कैप्सूल,व विभिन्न वास्तु सम्बन्धी लेख पत्रिका की शोभा बढ़ा रहे हैं।

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