वास्तु और आपकी सेहत

वास्तु और आपकी सेहत  

व्यूस : 3579 | दिसम्बर 2006
वास्तु और आपकी सेहत आचार्य सेवाराम जयपुरिया घर की सार्थकता तभी है जब वहां निवास करने वाले लोगों की सेहत अच्छी रहे। हवादार व सूर्य की रोशनी से युक्त एक अच्छे घर में रहने की चाह सभी की होती है वास्तुदोष के कारण गृहस्वामी एवं परिवार के लोग स्वास्थ्य सुख से वंचित रह जाते हैं, कैसे आइए जानें... मनुष्य कर्ज लेकर, जेवर तक गिरवी रख घर बनाता है औ रतब यदि उस घर म े ंनिवास करने पर उसे रोग, कष्ट आदि का सामना करना पड़ता है तो घोर निराशा होती है। अतः उसे घर बनाने से पूर्व किसी वास्तु विशेषज्ञ से उचित सलाह कर लेनी चाहिए। यहां सेहत के अनुकूल वास्तु के कुछ प्रमुख उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है। भोजन बनाते समय पीठ के पीछे रसोईघर का दरवाजा या खिड़की होने से कमर दर्द की शिकायत आ जाती है, क्योंकि किसी के आवाज देने या कोई आहट होने पर पीछे मुड़कर देखने से शरीर का नाभि से सिर तक का ऊपरी भाग मुड़ता रहता है जबकि नीचे का भाग स्थिर रहता है। इसी कारण रीढ़ की हड्डियों में भी तकलीफ हो जाती है। ऐसी स्थिति में रसोई घर में कन्वेक्स मिरर का प्रयोग लाभकारी है। रसोई की स्लैब का पत्थर ग्रेनाइट का नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह ताप को अवशोषित नहीं करता। इससे अपेन्डिसाइटिस अर्थात आंत की सूजन या पेट के अन्य रोग हो सकते हैं। स्त्रियों के पेट के आॅपरेशन होने की संभावना बढ़ जाती है। अतः ग्रेनाइट के स्थान पर संगमरमर का उपयोग ऊर्जा को सोख लेता है। घर का स्वास्थ्य आप से जुड़ा होता है और आपका स्वास्थ्य घर से। अतः स्वस्थ रहने के लिए घर के दर्पणों को साफ रखें। दर्पणों को दक्षिण, दक्षिण-पूर्व व दक्षिण-पश्चिम में लगाना भी विभिन्न रोगों का कारक होता है। इस पर पड़ी धूल-मिट्टी इसके शुभ प्रभाव को घटाती है। घर में टूटे दर्पण व शीशे, टपकते नल, खराब बल्ब आदि न रहने दें तथा खिड़कियां साफ रखें। इससे आपकी सोच सकारात्मक होगी। उच्च या निम्न रक्तचाप वालों को दक्षिण में सिर करके सोना चाहिए ताकि पांव उत्तर दिशा में रहें, क्योंकि उत्तर दिशा में सकारात्मक ऊर्जा प्रव¬ाहमान रहती है। इस अवस्था में सोने से रक्तचाप में सुधार होगा। शयनकक्ष में ऐसे दर्पण कभी न लगाएं जो पलंग को परावर्तित करें। इस प्रकार के दर्पण कक्ष से शुभ फेंगशुई ऊर्जा को बाहर कर देते हैं और वैवाहिक जीवन कड़वाहट से भर जाता है। शयनकक्ष की भीतरी छत पर दर्पण लगाना और भी अधिक हानिकारक होता है। यह दर्पण कक्ष में स्थान बढ़ाने का भ्रम तो उत्पन्न ऊर्जा को सोख लेता है। घर का स्वास्थ्य आप से जुड़ा होता है और आपका स्वास्थ्य घर से। अतः स्वस्थ रहने के लिए घर के दर्पणों को साफ रखें। दर्पणों को दक्षिण, दक्षिण-पूर्व व दक्षिण-पश्चिम में लगाना भी विभिन्न रोगों का कारक होता है। इस पर पड़ी धूल-मिट्टी इसके शुभ प्रभाव को घटाती है। घर में टूटे दर्पण व शीशे, टपकते नल, खराब बल्ब आदि न रहने दें तथा खिड़कियां साफ रखें। इससे आपकी सोच सकारात्मक होगी। उच्च या निम्न रक्तचाप वालों को दक्षिण में सिर करके सोना चाहिए ताकि पांव उत्तर दिशा में रहें, क्योंकि उत्तर दिशा में सकारात्मक ऊर्जा प्रव¬ाहमान रहती है। इस अवस्था में सोने से रक्तचाप में सुधार होगा। शयनकक्ष में ऐसे दर्पण कभी न लगाएं जो पलंग को परावर्तित करें। इस प्रकार के दर्पण कक्ष से शुभ फेंगशुई ऊर्जा को बाहर कर देते हैं और वैवाहिक जीवन कड़वाहट से भर जाता है। शयनकक्ष की भीतरी छत पर दर्पण लगाना और भी अधिक हानिकारक होता है।

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