रसोई घर भारतीय संस्कृति में भोजन बनाने का स्थान शुद्ध होना तथा भोजन बनाने वाली का मन पाप रहित शुद्ध व शांत होना चाहिए। इसीलिए कहा गया है कि ‘‘जैसा खाये अन्न वैसा होवे मन’’ वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाय तो भोजन कीटाणु व जीवाणु रहित पौष्टिक तथा संतुलित होना चाहिए जिससे व्यक्ति को भरपूर ऊर्जा प्राप्त हो यह तभी संभव है जब भोजन बनाने वाला स्वयं शुद्धि का ध्यान रखे। भारतीय गृहिणी के परिप्रेक्ष्य में देखें तो प्रत्येक भारतीय गृहिणी अपना अधिकतम समय रसोई में बिताती है। अतः रसोईघर को बनाते समय यह ध्यान रखें कि हवादार, रोशनी युक्त (सूर्य की) तथा धुआं रहित हो। वास्तु शास्त्रानुसार किसी भी भवन के या प्लाॅट के आग्नेय कोण (पूर्व व दक्षिण के बीच की दिशा) में ही रसोईघर का निर्माण किया जाना चाहिए जो गृह स्वामी के लिये शुभकारी होता है। यदि किन्हीं कारणों से इस दिशा में बनाना संभव नहीं होता तो वायव्य कोण (उत्तर व पश्चिम के बीच दिशा) में बनाना चाहिए अन्य किसी भी दिशा में नहीं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है तो सूर्य का प्रकाश दिन भर में अधिक समय तक आग्नेय कोण पर पड़ता है जिससे रसोईघर में उपयुक्त ताप (गर्मी) से हानिकारक जीवाणु नष्ट होते रहते हैं। आधुनिक युग में रसोई घर विभिन्न उपकरणों से सुसज्जित बनाई जाती है। अतः निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।



वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के वास्तु विशेषांक में वास्तुशास्त्र के सिद्धांत - वर्तमान समय में उपयोगिता, ज्योतिष, वास्तु एवं अंकशास्त्र के संयुक्त क्रियान्वयन की रूपरेखा, वास्तुशास्त्र एवं फेंगशुई- समरूपता एवं विभिन्नता, वास्तु पुरूष का प्रार्दुभाव एवं पूजन विधि, वास्तु शास्त्र का वैज्ञानिक दृष्टिकोण, भूखंड चयन की गणीतीय विधि, गृह निर्माण एवं सुख समृद्धि का वास्तु, वास्तु एवं फेंगशुई, वास्तु दोष कारण व निवारण, वास्तु एवं बागवाणी, वृक्षों व पौधों से वास्तु लाभ कैसे लें, वास्तु मंत्र, वास्तु शास्त्र एवं धर्म, वास्तुशास्त्र में शकुन एवं अपशकुन, लाभदायक वास्तु सामग्री, क्रिस्टल की उपयोगिता, फलादेश में अंकशास्त्र की भूमिका, पाइथागोरियन अंक ज्योतिष, वास्तु के अनुसार शेक्षणिक संस्थान, हवन प्रदूषण में कमी लाता है, मां त्रिपुर सुंदरी का चमत्कारी शक्तिपीठ, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, अंक ज्योतिष के रहस्य, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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