(7 लेख)
इच्छित संतान प्राप्ति कैसे

जनवरी 2012

व्यूस: 1081

हमारी भारतीय संस्कृति में मानव को चरम लक्ष्य पूर्णता तथा आनंद रूपता को माना गया है. हमारी संस्कृति सोलह संस्कार में गर्भाधान संस्कार प्रथम है. यही संस्कार मानव प्राथमिक पवित्रता शुद्ध भावना दर्शाता है.... और पढ़ें

ज्योतिषउपायबाल-बच्चे

दशा-फल विचार और उसकी इतिकर्तव्यता

आगस्त 2006

व्यूस: 775

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में फल शब्द कर्मफल का वाचक एवं बोधक है। क्योंकि कर्मफल वर्तमान जीवन में उसके घटनाचक्र के रूप में घटित होते हैं, अतः जीवन में घटित होने वाली घटनाओं को अथवा जीवन के घटनाचक्र को भी फल कहते हैं।... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

आयुनिर्णय की पृष्ठभूमि

अप्रैल 2006

व्यूस: 654

आयु-निर्णय: भारतीय ज्योतिष में ‘आयुनिर्णय’ को आत्मतत्व एवं जीवन के घटनाचक्र के ज्ञान को शरीर माना गया है। जैसे आत्मा के बिना शरीर अनुपयोगी एवं व्यर्थ होता है - ठीक उसी प्रकार आयु के ज्ञान के बिना जीवन के घटनाचक्र का ज्ञान अन... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

योगकारक का फलप्राप्ति काल

मार्च 2006

व्यूस: 544

लघुपाराशरी के योगाध्याय के श्लोक संख्या 14-17 तथा 20-21 इन छः श्लोकों में योगकारक ग्रह का लक्षण एवं उदाहरण की विस्तार से विवेचना की गयी है। इस प्रसंग में यह स्वाभाविक प्रश्न है कि योगकारक ग्रहों का फल कब और कैसे मिलेगा? इस ... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

लघुपाराशरी के अनुसार अंतर्दशाफल की मीमांसा

अकतूबर 2006

व्यूस: 512

दशाधीश के विरुद्ध फलदायक ग्रहों की अंतर्दशा का फल: लघुपाराशरी के अनुच्छेद 54 के अनुसार अंतर्दशाधीशों को निम्नलिखित आठ वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है। 1. संबंधी-सधर्मी 2. संबंधी-विरुद्धधर्मी 3. संबंधी-उभयधर्मी 4. संबंध... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणभविष्यवाणी तकनीक

आयु एवं मारक स्थान

मई 2006

व्यूस: 480

वैदिक दर्शन के अनुसार आत्मा अमर है। इसका कभी भी नाश नहीं होता। केवल कर्मों के अनादिप्रवाह के कारण आत्मा अनेकानेक योनियां बदलती रहती है। अनादिकालीन कर्मप्रवाह के कारण आत्मा का सूक्ष्मशरीर (लिंग शरीर), कार्मण शरीर एवं स्थूल (... और पढ़ें

ज्योतिषघरभविष्यवाणी तकनीक

मारकेश निर्णय के अपवाद

जुलाई 2006

व्यूस: 431

मारकेश-निर्णय के प्रसंग में यह सदैव ध्यान रखना चाहिए कि पापी शनि का मारक ग्रहों के साथ संबंध हो तो वह सभी मारक ग्रहों का अतिक्रमण कर स्वयं मारक हो जाता है। इसमें संदेह नहीं है। (1)... और पढ़ें

ज्योतिषभविष्यवाणी तकनीक

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