पंचपक्षी एवं प्रश्न शास्त्र (भाग-1)

पंचपक्षी एवं प्रश्न शास्त्र (भाग-1)  

मनोज कुमार
व्यूस : 2968 | जुलाई 2015

दैनिक जीवन में प्रत्येक मनुष्य को हर दिन सैकड़ों परेशानियों से जूझना पड़ता है, हर काम के लिए भाग-दौड़ करनी पड़ती है। अतः स्वाभाविक रूप से सबको यह जानने की जिज्ञासा मन में उठती है कि वे कैसे जानें कि उनका अमुक काम सफल होगा अथवा नहीं या उन्हें समस्याओं से कब एवं कैसे मुक्ति मिलेगी। प्राचीन तमिल संतों ने इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर के लिए पंचपक्षी शास्त्र का काफी सफलतापूर्वक उपयोग किया।

प्रश्न कोई भी, कैसा भी हो सकता है, जैसे-

1. क्या मैं परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाउंगा?

2. क्या मेरी बहू गर्भवती है? यदि है तो लड़का होगा या लड़की?

3. क्या मेरा उधार दिया हुआ पैसा वापस मिलेगा?

4. क्या मैं नया घर खरीद पाउंगा? इत्यादि।

ये सारे ऐसे आम प्रश्न हैं जिनका उत्तर जानने की अभिलाषा हर किसी के मन में होती है। ऊपर वर्णित प्रश्न कुछ उदाहरण मात्र हैं। इसके इतर भी हजारों प्रश्न मन में जन्म ले सकते हैं जिनका उत्तर जानने की स्वाभाविक अभिलाषा होती है। प्राचीन तमिल संतों ने पंचपक्षी के माध्यम से इन प्रश्नों के उत्तर जानने की कुछ विधियां बतलाई हैं जो काफी प्रभावपूर्ण हैं तथा इनसे प्रश्नों के बिल्कुल सटीक एवं सही उत्तर मिलते हैं। विधि प् प्रश्नकर्ता के मुंह से जो भी प्रश्न निकले, उसके मुंह से निकले पहले शब्द का पहला स्वर वर्ण देखें। उस स्वर वर्ण के आधार पर पक्षी का निर्धारण करें। पक्षी का निर्धारण करने के उपरांत यह देखें कि वह पक्षी उस समय किस प्रकार की गतिविधि में संलग्न है। यदि उस समय वह पक्षी शासन में शासन, शासन में खाना, खाना में शासन अथवा खाना में खाना की गतिविधि में संलग्न हो तो प्रश्न का उत्तर हां में होगा तथा प्रश्नकर्ता का वह कार्य निश्चय ही सिद्ध होगा।

पाठकों की सुविधा के लिए स्वर वर्ण से पक्षी के निर्धारण के लिए एक सारणी नीचे दी जा रही है:

प्रथम स्वर वर्ण से पक्षी का निर्धारण शुक्ल पक्ष प्रथम स्वर वर्ण कृष्ण पक्ष गिद्ध अ, आ, ऐ, औ मुर्गा उल्लू इ, ई गिद्ध कौआ उ, ऊ उल्लू मुर्गा ए मयूर मयूर ओ कौआ विधि प्प् जिस समय प्रश्न किया जा रहा है, उस समय कौन सा नक्षत्र है, यह पता करें। उस नक्षत्र के अनुसार पंचपक्षी का निर्धारण करें। फिर पता करें कि वह पक्षी उस समय किस गतिविधि में संलग्न है। पंचपक्षी की गतिविधि में संलग्नता के आधार पर प्रश्न के उत्तर दें। विधि प् में जिस प्रकार से पक्षी की गतिविधियों में संलग्नता के आधार पर उत्तर देने का तरीका बतलाया गया उसी का अनुसरण करें। विधि प्प्प् किसी भी प्रश्न का उत्तर प्रश्नकर्ता के जन्मपक्षी के आधार पर भी दिया जा सकता है। प्रश्नकर्ता का जन्मपक्षी ज्ञात करें तथा उसका जन्मपक्षी उस समय जिस गतिविधि में संलग्न है, उसी आधार पर प्रश्नों के उत्तर दें। इसका विवरण विधि-प् में बताया गया, उसी का अनुसरण करें। यदि प्रश्नकर्ता का जन्म नक्षत्र ज्ञात नहीं है तो उसके प्रथम नाम के प्रथम स्वर वर्ण के आधार पर उसके पक्षी का निर्धारण करें तथा इसके उपरांत फलादेश करें। यहां एक बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि शुक्ल पक्ष तथा कृष्ण पक्ष में पक्षी अलग-अलग होंगे। उपर्युक्त तीनों विधियां मुख्य एवं महत्त्वपूर्ण हैं तथा इन्हीं तरीकों से फलादेश किया जाता है जो काफी सही एवं सटीक होता है।

क्या होगा जब प्रश्न शुक्ल पक्ष में पूछे जाएंगे

1. यदि प्रश्न पूछे जाने के समय पक्षी शासन करने की गतिविधि में संलग्न हो तो प्रश्नकर्ता के सभी कार्य सफल होंगे। धन में वृद्धि होगी, बहुत सारे उपहार एवं दान प्राप्त होंगे। संचित धन में कमी नहीं आयेगी तथा आमदनी खर्च की तुलना में अधिक होगी। जातक की स्थिति काफी शक्तिशाली होगी। उसे सरकार से सहायता मिलेगी तथा आर्थिक लाभ भी होगा। धूम-धाम से काफी अच्छा विवाह होगा। गर्भावस्था की स्थिति में बच्चे का जन्म आसानी से हो जायेगा तथा बच्चे का लिंग पक्षी के अनुसार होगा। अनेक स्रोतों से धनागमन होगा। बीमारी ठीक हो जायेगी, पद एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। वाहन एवं जेवरात खरीदे जा सकते हैं। कुल मिलाकर यह सर्वश्रेष्ठ समय है।

2. यदि प्रश्न पूछने के दौरान पक्षी खाना खाने की गतिविधि में संलग्न हो तो जातक को सुख प्राप्त होगा। संपत्ति अर्जित होगी, व्यवसाय में उन्नति होगी तथा अच्छा जीवनसाथी प्राप्त होगा। जो लोग यात्रा पर गये हुए हैं वे लोग सुरक्षित लौट आएंगे। चोरी हुआ सामान वापस मिल जायेगा। फसल अच्छी होगी। दिमाग में यदि किसी लड़की की बात आये तो उसका विवाह हो जायेगा। बीमारी से मुक्ति मिल जायेगी। यदि गर्भावस्था है तो कन्या का जन्म होगा। किंतु इन सारी सफलताओं के बावजूद भी किसी भी तरह की बीमारी हो सकती है तथा मन की शांति भंग हो सकती है।

3. यदि प्रश्न पूछने के समय पक्षी घूमने की गतिविधि में संलग्न हो तो जातक के मान-सम्मान की हानि होगी। फसल सूख जायेंगे तथा बर्बाद हो जाएंगे। यदि विवाह होनी है तो वह रूक जायेगा अथवा उसमें अवरोध उत्पन्न होगा। जीवन में निराशा व्याप्त होगी। यदि किसी प्रतियोगिता परीक्षा में भाग लिया है तो परिणाम नकारात्मक होंगे।

4. यदि प्रश्न पूछने के समय पक्षी सोने की गतिविधि में संलग्न हो तो बीमारी का प्रहार होगा। शत्रुता बढ़ेगी। हर तरफ से निराशा एवं दुःख का वातावरण बनेगा। कन्या का विवाह रूक जायेगा। हर प्रयास असफल साबित होंगे। यात्रा का लक्ष्य पूरा नहीं हो पायेगा तथा जो यात्रा पर गये हैं वे आसानी से नहीं लौट पाएंगे। करियर एवं व्यवसाय में भी मार खानी पड़ेगी। जातक के ऊपर अकारण इल्जाम लग सकते हैं। यह समय बिल्कुल बचकर रहने का है। इस समय यदि आप किसी वी. आई. पी. से मिलने जाते हैं तो वह आपसे नहीं मिलेगा।

5. यदि प्रश्न पूछते समय पक्षी मरने की गतिविधि में संलग्न हो तो हर ओर से दुःख भरे समाचार सुनने को मिलेंगे तथा अनावश्यक खर्च होंगे। जीवन के हर क्षेत्र में धोखा एवं निराशा व्याप्त होगी। यात्रा पर गये लोग शायद ही लौट पाएंगे। रास्ते में उन्हें काफी दुख झेलनी पड़ेगी तथा इसके साथ उनकी मृत्यु तक हो सकती है। हर कार्य में असफलता हाथ लगेगी तथा संचित धन बर्बाद होगा।

क्या होगा जब प्रश्न कृष्ण पक्ष में पूछे जाएंगे

1. यदि प्रश्न पूछते समय पक्षी शासन करने की गतिविधि में संलग्न हो तो भय, झगड़े एवं बीमारियों का सामना जातक को करना पड़ेगा तथा बीमारी से मुक्त होना अत्यंत दुष्कर साबित होगा। यद्यपि कि शासन करने की गतिविधि में हर कार्य सफल होते हैं किंतु कृष्ण पक्ष में शासन करने की गतिविधि थोड़ी कमजोर हो जाती है। हालांकि फिर भी इसके कुछ परिणाम अच्छे होते हैं। जैसे- इस काल में सरकारी सहायता प्राप्त होगी, धूमधाम से विवाह होगा। यदि प्रश्न गर्भ के संदर्भ में है तो बच्चे का जन्म आसानी से हो जायेगा तथा बच्चे का लिंग पक्षी के अनुसार होगा। कई स्रोतों से धन का आगमन होगा।

2. यदि प्रश्न पूछते समय पक्षी खाने की गतिविधि मंे संलग्न हो तो वर्षा नहीं होगी। महिला होने की स्थिति में उसे अनेक दुख एवं कठिनाइयां झेलनी पड़ेंगी। छोटी-मोटी बीमारी हो सकती है। शत्रुता में वृद्धि होगी। घरेलू जीवन सुखी रहेगा। किंतु इस समय यात्रा पूर्णतः वर्जित है। कृष्ण पक्ष होने के कारण सफलता का प्रतिशत कम रहेगा।

3. यदि प्रश्न पूछने के समय पक्षी घूमने की गतिविधि में संलग्न हो तो हर प्रयास सफल होंगे। विवाहादि शुभ कार्य संपन्न होंगे। लाभ में वृद्धि होगी। पहले से चली आ रही बीमारी ठीक होगी। आपकी कही हुई बातों की लोग कद्र करेंगे तथा आपके आदेश का पालन करेंगे। घरेलू जीवन में सुख-शांति रहेगी। इस समय किसी भी तरह की परेशानी का अनुभव नहीं होगा। अच्छी वर्षा होगी। जो लोग यात्रा पर गए हैं वे सुरक्षित लौट आएंगे।

4. यदि प्रश्न पूछते समय पक्षी सोने की गतिविधि में संलग्न हो तो जातक को अनेक प्रकार की बीमारियों का सामना करना पड़ेगा। धन हानि होगी, झगड़े होंगे तथा जीवन में दुख एवं निराशा व्याप्त हो जायेगी। जो कोई भी कार्य शुरू किया गया है वे सभी असफल सिद्ध होंगे। जो यात्रा पर गये हैं उन्हें काफी परेशानी होगी तथा उनका लौटना थोड़ा मुश्किल है। लंबे समय से चली आ रही बीमारियां कभी ठीक नहीं होंगी। यदि आप किसी वी. आई. पी. से मिलने जा रहे हैं तो मुलाकात बिल्कुल असफल साबित होगी।

5. यदि प्रश्न पूछने के समय पक्षी मरने की गतिविधि में संलग्न हो तो मृत्युतुल्य कष्ट होगा। बीमारियां घातक हो जाएंगी। लोग आपके बारे में तरह-तरह की बातें बनायेंगे तथा आपके मन की शांति भंग हो जायेगी। दूसरों के साथ शत्रुता में वृद्धि होगी। आपके घर चोरी हो सकती है। आपको चारों ओर से दुख एवं परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। जो लोग यात्रा पर गये हैं उनके लौटने की संभावना न के बराबर है। यदि इस अवधि में कोई यात्रा करता है तो यात्रा के दौरान उसे अपनी जान भी गंवानी पड़ सकती है। किसी भी तरह का कोई लक्ष्य पूरा नहीं होगा।

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मंगल दोष विशेषांक  जुलाई 2015

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फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में मंगल दोष की विस्तृत चर्चा की गई है। कुण्डली में यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम भाव एवं द्वादश भाव में यदि मंगल हो तो ऐसे जातक को मंगलीक कहा जाता है। विवाह एक ऐसी पवित्र संस्था जिसके द्वारा पुरुष एवं स्त्री को एक साथ रहने की सामाजिक मान्यता प्राप्त होती है ताकि सृष्टि की निरन्तरता बनी रहे तथा दोनों मिलकर पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर सकें। विवाह सुखी एवं सफल हो इसके लिए हमारे देश में वर एवं कन्या के कुण्डली मिलान की प्रथा रही है। कुण्डली मिलान में वर अथवा कन्या में से किसी एक को मंगल दोष नहीं होना चाहिए। यदि दोनों को दोष हैं तो अधिकांश परिस्थितियों में विवाह को मान्यता प्रदान की गई है। इस विशेषांक में मंगल दोष से जुड़ी हर सम्भव पहलू पर चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भ में भी विभिन्न विषयों को समाविष्ट कर अच्छी सामग्री देने की कोशिश की गई है।

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