दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला (देवी दुर्गा के बत्तीस नाम)

दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला (देवी दुर्गा के बत्तीस नाम)  

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व्यूस : 9190 | अकतूबर 2010

यदि मां दुर्गा के इन 32 नामों का हम प्रतिदिन स्मरण करें तो सुख-शांति मिलती है एवं सभी प्रकार के भय दूर होते हैं। मां दुर्गा के इन 32 नामों का उच्चारण सारे दुख दूर कर देता है। यदि दुख परेशानी के समय इन नामों का उच्चारण किया जाए तो दुख अल्प समय में ही दूर हो जाता है। नवरात्रों में नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ विशेष नैवेद्य: Û प्रथम नवरात्र के दिन मां के चरणों में गाय का शुद्ध घी अर्पित करें, इससे आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है तथा शरीर निरोगी रहता है।

  • दूसरे नवरात्र को मां को शक्कर का भोग लगाएं व घर में सभी सदस्यों को दें इससे आयु वृद्धि होती है।
  • तृतीय नवरात्र को दूध या दूध से बनी मिठाई (खीर) का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान करें। इससे दुखों की मुक्ति होती है व परम आनंद की प्राप्ति होती है।
  • चतुर्थ नवरात्र को माल-पुए का भोग लगाकर मंदिर में ब्राह्मण को दान दें, जिससे बुद्धि का विकास होता है एवं निर्णय शक्ति बढ़ती है।
  • पंचम नवरात्र को केले का नैवेद्य चढ़ाने से शरीर स्वस्थ रहता है।
  • षष्ठ नवरात्र को शहद का भोग लगाने से आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है।
  • सातवें नवरात्र को गुड़ का नैवेद्य चढ़ाकर बाद में ब्राह्मण को दान करें इससे शोक से मुक्ति मिलती है व आकस्मिक संकटों से रक्षा होती है।
  • आठवें नवरात्र को नारियल का भोग लगाएं व नारियल को दान कर दें इससे संतान संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
  • नवमी के दिन तिल का भोग लगाकर ब्राह्मण को दान करें। इससे मृत्यु भय से राहत मिलेगी तथा कोई अनहोनीे से बचाव रहेगा।

ऊँ दुर्गा दुर्गतिशमनी दुर्गाद्विनिवारिणी दुर्ग मच्छेदनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरुपिणी दुर्गमार्गप्रदा दुर्गम विद्या दुर्गमाश्रिता दुर्गमज्ञान संस्थाना दुर्गमध्यान भासिनी दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरुपिणी दुर्गमासुर संहंत्रि दुर्गमायुध धारिणी दुर्गमांगी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गमेा दुर्गदारिणी नामावलिमिमां यस्तु दुर्गाया मम मानवः पठेत् सर्वभयान्मुक्तो भविष्यति न संशयः। दुर्गा का अर्थ ‘दुर्गा’ शब्द का अर्थ क्या है? दुर्गा शब्द का अर्थ है- ‘द‘ अर्थात् दैत्यनाशक, ‘उ’- उत्पात नाशक, ‘र’- रोगनाशक, ‘ग’ गमनाशक तथा आ- आमर्षनाशक। अर्थात् मां दुर्गा की उपासना करने से सभी प्रकार के कष्टों एवं दुखों से मुक्ति मिलती है। नवरात्रों में भक्तजन बड़ी श्रद्धा और भक्ति से दुर्गा मां की पूजा-अर्चना करते हैं व व्रत रखते हैं, तो मां भी सभी भक्तों पर अपनी करुणा बरसाती है व उन्हें इच्छित फल प्रदान करती है। नवरात्रों में मंत्रों का जप करके जीवन को सुखमय बनाया जा सकता है। सर्व कल्याण हेतु सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सवार्थसाधिके। शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।। अखण्ड सौभाग्य हेतु देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परम् सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।।

सर्व बाधा निवारण हेतु सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन-धान्य सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन, भविष्यति न शंसयः।। सुलक्षणा पत्नी प्राप्ति हेतु पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृŸाानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागस्य कुलोद्भवाम्।। दरिद्रता नाश हेतु दुर्गेस्मृता हरसि भतिमशेशजन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। दरिद्रयदुखभयहारिणी कात्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचिŸाा।। शत्रु नाश हेतु ऊँ ह्रीं बगुलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वाम् कीलय बुद्धिम् विनाशय ह्रीं ऊँ स्वाहा।।

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दुर्गा पूजा विशेषांक  अकतूबर 2010

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दुर्गा उपासना शक्ति उपासना का सुंदरकांड है। इस अंक में शक्ति उपासना नवरात्र व्रत पर्व महिमा, दुर्गासप्तशती पाठ विधि, ५१ शक्तिपीठ, दशमहाविद्या, ग्रह पीड़ानिवारण हेतु शक्ति उपासना आदि महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। इन लेखों का पठन करने से आपको शक्ति उपासना, देवी महिमा व दुर्गापूजा पर्व के सूक्ष्म रहस्यों का ज्ञान प्राप्त होगा।

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