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फ्यूचर पाॅइन्ट
व्यूस : 2147 | जुलाई 2016

ज्योतिषी: क्या आप अपने पति के भविष्य के बारे में जानना चाहती हैं?

पत्नी: बकवास मत करो, उसके भविष्य को तो मै देख लूंगी, तुम तो मुझे बस उसका भूतकाल बता दो। Arun Bansal . 9350508000 अंग फड़कने का महत्व.. अंगों के फड़कने से भी शुभ-अशुभ की सूचना मिलती है। दायीं आँख ऊपर की ओर के फलक में फड़कती है तो धन,कीर्ति आदि की वृद्धि होती है, नौकरी में पदोन्नति होती है।


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नीचे का फलक फड़कता है तो अशुभ होने की संभावना रहती है। बाँयी आँख का उपरी फलक फड़कता है तो दुश्मन से और अधिक दुश्मनी हो सकती है। नीचे का फलक फड़कता है तो किसी से बेवजह बहस हो सकती है और अपमानित होना पड़ सकता है। बाँयी आँख की नाक की ओर का कोना फड़कता है तो फल शुभ होता है।

पुत्र प्राप्ति की सूचना मिल सकती है या किसी प्रिय व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है। दायीं आँख फड़कती है तो यह शुभ फलदायक होता है। लेकिन अगर किसी स्त्री की दायीं आँख फड़कती है तो उसे अशुभ माना जाता है। दोनों आँखंे एक साथ फड़कती हांे तो चाहे वह स्त्री की हो या पुरुष की, उनका फल एक जैसा ही होता है।

किसी बिछुड़े हुए अच्छे मित्र से मुलाकात हो सकती है। दायीं आँख पीछे की ओर फड़कती है तो इसका फल अशुभ होता है। बायीं आँख ऊपर की ओर फड़कती हो तो इसका फल शुभ होता है। स्त्री की बायीं आँख फड़कती हो तो शुभ फल होता है। गला तेज गति से फड़कता है तो स्वादिष्ट और मनपसंद भोजन मिलता है। किसी स्त्री का कंठ फड़कता है तो उसे गले का आभूषण प्राप्त होता है।

कंठ का बायां भाग फड़कता है तो धन की उपलब्धि कराता है। किसी स्त्री के कंठ के निचले हिस्से का फड़कना कम मूल्य के आभूषणों की प्राप्ति की सूचना देता है। कंठ का ऊपरी भाग फड़कता है तो सोने की माला मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कंठ की घाटी के नीचे फड़कन होती है तो किसी हथियार से घायल होने की संभावना रहती है।

सिर के बायीं ओर के हिस्से में फड़कन हो तो इसे बहुत ही शुभ माना गया है। आने वाले दिनों में यात्रा करनी पड़ सकती है। यदि आपकी यात्रा बिजनेस से सम्बंधित है तो ज्यादा नहीं तो थोड़ा बहुत लाभ अवश्य होगा। आपके सिर के दायीं ओर के हिस्से में फड़कन है तो यह शुभ फलदायक स्थिति है।

आपको धन, किसी राज सम्मान, नौकरी में पदोन्नति, किसी प्रतियोगिता में पुरस्कार, लाॅटरी में जीत, भूमि लाभ आदि की प्राप्ति हो सकती है। आपके सिर का पिछला हिस्सा फड़कता है तो समझ लीजिए आपका विदेश जाने का योग बन रहा है.और वहां आपको धन की प्राप्ति भी होने वाली है, लेकिन अपने देश में लाभ की कोई संभावना नहीं है। आपके सिर के अगले हिस्से में फड़कन हो रही है तो यह स्थिति स्वदेश या परदेश दोनों में ही धन मान प्राप्ति का कारण बन सकती है।

आपका सम्पूर्ण सिर फड़क रहा है तो यह सबसे अधिक शुभ स्थिति है। आपको दूसरे का धन मिल सकता है,मुकद्दमे में जीत हो सकती है, राजसम्मान मिल सकता है या फिर भूमि की प्राप्ति हो सकती है। सम्पूर्ण मूँछों में फड़कन है तो इसका फल बहुत ही शुभ माना गया है। इससे दूध,दही,घी,धन धान्य का योग बनता है। अगर आपकी मूंछ का दायां हिस्सा फड़कता है तो इसे शुभ समझना चाहिए।

आपकी बायीं मूंछ फड़कती है तो आपका किसी से बहस या झगड़ा हो सकता है। आपके तालू में फड़कन है तो यह आर्थिक लाभ का शुभ संकेत है। दायें तालू में फड़कन है तो यह बीमारी की सूचना दे रहा है। बायंे तालू में फड़कन है तो आप किसी अपराध में जेल जा सकते हैं। आपके दायंे कंधे में फड़कन है तो आपको धन, सम्मान प्राप्त हो सकता है और बिछुड़े हुए भाई से मिलाप हो सकता है। बायां कंधा फड़क रहा है तो रक्त विकार या वात संबंधी विकार उत्पन्न हो सकते हैं।

आपके दायंे घुटने में फड़कन है तो आपको सोने की प्राप्ति हो सकती है और यदि दायंे घुटने का निचला हिस्सा फड़क रहा है तो यह शत्रु पर विजय हासिल करने का संकेत है। आपके बायंे घुटने का निचला हिस्सा फड़क रहा है तो आपके कार्य पूरा होने की संभावना बढ़ जाती है। बायंे घुटने का ऊपरी हिस्सा फड़क रहा है तो इसका फल कुछ नहीं होता है। आपके पेट में फड़कन है तो यह अन्न की समृद्धि की सूचना देता है. यदि पेट का दायां हिस्सा फड़क रहा है तो घर में धन-दौलत की वृद्धि होगी, सुख और खुशहाली बढ़ती है।

अगर आपके पेट का बायां हिस्सा फड़कता है तो धन-समृद्धि धीमी गति से बढ़ती है, वैसे यह शुभ नहीं है। पेट का ऊपरी भाग फड़कता है तो यह अशुभ होता है। लेकिन पेट के नीचे का भाग फड़कता है तो स्वादिष्ट भोजन की प्राप्ति होती है। पीठ दायीं ओर से फड़क रही है तो धन-धान्य की वृद्धि हो सकती है लेकिन पीठ के बायंे भाग का फड़कना ठीक नहीं होता है। मुकद्दमे में हार या किसी से झगड़ा हो सकता है। बायीं पीठ में फड़कन धीमी हो तो परिवार में कन्या का जन्म होना संभव है और फड़कन तेज हो तो अपरिपक्व यानि समय से पहले ही प्रसव हो सकता है।

पीठ का ऊपरी हिस्सा फड़क रहा हो तो धन की प्राप्ति होती है और पीठ का निचला हिस्सा फड़कता है तो बहुत से मनुष्यों की प्रशंसा मिलने की संभावना रहती है। Ashok Bhatia 9811131939 आस्था ..... एक बार, एक ‘अत्यंत गरीब’ महिला, जो ‘कान्हा’ पर, बेइंतिहा ‘विश्वास’ करती थी !


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अत्यंत ही, विकट स्थिति में आ गई !!!!! कई दिनों से खाने के लिए, पूरे परिवार को नहीं मिला! एक दिन, उसने रेडियो के माध्यम से, ‘कान्हा’ को, अपना सन्देश भेजा, कि वह उसकी मदद करे ! यह प्रसारण, एक ‘नास्तिक, घमण्डी, और अहंकारी, उद्योगपति ने, सुना ! और उसने सोचा कि, क्यों न, इस महिला के साथ, कुछ ऐसा ‘मजाक’ किया जाये, कि उसकी ‘कृष्ण’ के प्रति ‘आस्था’, डगमगा जाये ! उसने, अपने ‘सेक्रेटरी’ को कहा, कि वह,‘ढेर सारा खाना’ और ‘महीने भर का राशन’, उसके घर पर, देकर आ जाय और जब वह महिला पूछे, किसने भेजा है ?

तो, कह देना, कि ‘शैतान’ ने भेजा है ! जैसे ही, ‘महिला’ के पास, सामान पंहुचा ! पहले तो, उसके ‘परिवार’ ने, तृप्त होकर, भोजन किया !!!! फिर, वह सारा राशन, ‘अलमारी’ में रखने लगी ! जब, ‘महिला’ ने पूछा नहीं कि, यह सब किसने भेजा है ?

तो,‘सेक्रेटरी’ से रहा नहीं गया, और पूछा !!!! आपको क्या ‘जिज्ञासा’ नहीं होती कि, यह सब किसने भेजा है ?

उस ‘महिला’ ने, ‘बेहतरीन’ जवाब दिया ! मैं इतना क्यों सोंचू, या पूंछू? मुझे, मेरे ‘कान्हा’ पर, ‘पूरा भरोसा‘ है ! मेरा ‘कृष्ण’, जब आदेश देता है, तो, ‘शैतानों’ को भी, उस ‘आदेश’ का, पालन करना पड़ता है! Mauli Dubey : 9899500754 शनि से पीड़ित व्यक्ति को कोई अन्य व्यक्ति यदि सोने के गिलास में भी शराब पीने को दे और कहे कि पीने के बाद गिलास भी तुम्हारा है तो भी नहीं पीना चाहिये वरना पीने वाले और पिलाने वाले दोनों का अनिष्ट निश्चित है अर्थात् शनि पीड़ित व्यक्ति को किसी लालच में आकर भी शराब नहीं पीना चाहिए। शराब पीना छोड दें तो शनि से बचाव निश्चित है।

यदि पिता के वश में पुत्र न हो तो यदि पिता, पुत्र का पहना हुआ जुराब पहन ले तो पुत्र पिता के वश में हो जायेगा।


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रत्न विशेषांक  जुलाई 2016

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भूत, वर्तमान एवं भविष्य जानने की मनुष्य की उत्कण्ठा ने लोगों को सृष्टि के प्रारम्भ से ही आंदोलित किया है। जन्मकुण्डली के विश्लेषण के समय ज्योतिर्विद विभिन्न ग्रहों की स्थिति का आकलन करते हैं तथा वर्तमान दशा एवं गोचर के आधार पर यह निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते हैं कि वर्तमान समय में कौन सा ग्रह ऐसा है जो अपने अशुभत्व के कारण सफलता में बाधाएं एवं समस्याएं उत्पन्न कर रहा है। ग्रहों के अशुभत्व के शमन के लिए तीन प्रकार की पद्धतियां- तंत्र, मंत्र एवं यंत्र विद्यमान हैं। प्रथम दो पद्धतियां आमजनों को थोड़ी मुश्किल प्रतीत होती हैं अतः वर्तमान समय में तीसरी पद्धति ही थोड़ी अधिक प्रचलित है। इसी तीसरी पद्धति के अन्तर्गत विभिन्न ग्रहों के रत्नों को धारण करना है। ये रत्न धारण करने के पश्चात् आश्चर्यजनक परिणाम देते हैं तथा मनुष्य को सुख, शान्ति एवं समृद्धि से ओत-प्रोत करते हैं। फ्यूचर समाचार के वर्तमान अंक में रत्नों से सम्बन्धित अनेक उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय आलेखों को सम्मिलित किया गया है जो रत्न से सम्बन्धित विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हैं।

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