होटल की वास्तु व्यवस्था

होटल की वास्तु व्यवस्था  

व्यूस : 4736 | दिसम्बर 2007
होटल की वास्तु व्यवस्था होटल एवं रेस्टोरेंट भी व्यावसायिक प्रतिष्ठान होते हंै। परंतु इनकी आंतरिक व्यवस्था अन्य दुकानों या आॅफिसों से बिल्कुल भिन्न होती है। आधुनिक समय में होटल, रेस्टोरेंट एवं जलपान गृह का प्रचलन पहले से काफी अधिक बढ़ गया है। वर्तमान में आवागमन के साधनों के साथ ही इनका स्थान भी बहुत महत्वपूण्र् ा हो गया है। लोग दूसरे नगरों में जाने पर परिजनों या मित्रों के घर रुकने की अपेक्षा होटल में ठहरना अधिक पसंद करते हैं। इसी प्रकार किसी भी आमोद-प्रमोद के मौके पर उन्हें रेस्टोरेंट में भोजन करना अधिक अच्छा लगता है। होटल एवं रेस्टोरेंट आदि की वर्तमान मांग को देखते हुए इनका व्यवसाय बहुत अधिक बढ़ गया है। इसलिए इनके निर्माण हेतु निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए। आवासीय होटल के निर्माण हेतु भूखंड का चयन वास्तु शास्त्र के अनुसार होना चाहिए। यदि भूखंड के ईशान कोण में बढ़ा हो तो वह शुभ होता है। अन्य दिशाओं का बढ़ा अथवा घटा होना अशुभ फल प्रदान करता है। संकरा न होकर चैड़ा होना चाहिए - इससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनी रहती है। होटल का प्रवेश द्वार पूर्व दिशा अथवा ईशान कोण में होना लाभदायक होता है। भूखंड का ढाल पूर्व, ईशान एवं उत्तर की ओर रहे। भूखंड में पानी का बहाव पूर्व दिशा अथवा ईशान कोण में होना चाहिए। होटल में यात्रियों के प्रयोग हेतु बिस्तर आदि का भंडारण कक्ष दक्षिण या पश्चिम दिशा में होना चाहिए। होटल की बिल्डिंग के बाहर भूखंड पर दक्षिण एवं पश्चिम दिशाओं में ऊंचे वृक्ष लगवाने चाहिए। होटल का पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण दिशा वाला भाग अधिक ऊंचा होना चाहिए। यदि होटल के रसोईघर में लकड़ियों का उपयोग किया जाना हो तो उनका भंडारण दक्षिण दिशा में करें। फुलवारी, स्विमिंग पुल, तालाब, फव्वारे आदि उत्तर, पूर्व अथवा ईशान कोण में बनवाने चाहिए। होटल का मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर पूर्व दिशा में बनवाना शुभ होता है। अगर ऐसा संभव न हो तो ईशान कोण में बनवाया जा सकता है। विद्युत जनरेटर, ट्रांसफार्मर, मेन स्विच बोर्ड आदि की स्थापना होटल या रेस्टोरेंट के आग्नेय कोण में करें। होटल की बालकोनी ईशान कोण में रखें। शौचालय तथा स्नानघर ईशान कोण में बनवाने चाहिए। किसी भी होटल का दरवाजा हमेशा अंदर को खुलना चाहिए। अंदर की ओर खुलने से होटल में धन-संपदा बनी रहती है। होटल के प्रवेश द्वार पर झंडे, विज्ञापन बोर्ड, खंभे, ग्राहकों को लुभाने वाली वस्तुएं आदि एक ही ओर नहीं होनी चाहिए। इनका दोनों तरफ होना अति आवश्यक है। नोट: अस्पताल, सिनेमा घर एवं होटल के लिए भूखंड का चयन उसी प्रकार करना चाहिए जिस तरह से औद्योगिक प्रतिष्ठानों के बारे में लिखा गया है।

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वास्तु विशेषांक   दिसम्बर 2007

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