सूरत, सीरत और किस्मत

सूरत, सीरत और किस्मत  

आभा बंसल
व्यूस : 4529 | मई 2015

मेरी दादी कहा करती थी कि लड़कों की सीरत देखी जाती है सूरत नहीं और लड़कियों का ‘काम प्यारा होता है चाम नहीं’ आदि। बड़े बुजुर्गों की ये कहावतें आज भी उतनी ही सच हैं जितनी कि पहले थीं। परंतु ज्योतिष के आइने से देखें तो सूरत और सीरत के अलावा किस्मत भी बहुत जरूरी है। लड़का या लड़की कितना ही खूबसूरत हो, सीख अच्छी हो पर किस्मत साथ न दे तो सब कुछ धरा का धरा रह जाता है और सीरत और सूरत कितनी ही बुरी हो पर किस्मत अच्छी हो तो व्यक्ति खाकपति से भी अरबपति बन जाता है और सारे सुख भोगता है।

ऐसा ही हुआ हमारी इस सत्य कथा की नायिका के साथ। हिना को भगवान ने गजब की खूबसूरती दी थी और खूबसूरत होने के साथ-साथ वह बचपन से ही पढ़ाई मंे सदा अव्वल रहती थी। स्कूल तथा काॅलेज में जहां उसके सहपाठी उससे दोस्ती करने की होड़ में रहते वहीं सहेलियां मन ही मन रश्क करती थीं क्योंकि वही हर महफिल की जान बन जाती थी चाहे पढ़ाई की बात हो या फिर किसी प्रतियोगिता की, हिना सदा ही प्रथम आती। स्कूल के बाद उसने एम. बी. बी. एस. की प्रवेश परीक्षा भी आसानी से पास कर ली और आगे भी एम. डी. करके सफल स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलाॅजिस्ट) बन गई। इसी बीच जिंदगी में समीर आए और जल्द ही उसके हमसफर बन गये। समीर से जुड़कर हिना बहुत खुश थी और जिंदगी की सभी खुशियों को अपनी मुट्ठी में समेट कर रखना चाहती थी परंतु शादी के कुछ दिन बाद ही दोनों में झगड़े होने लगे। समीर पूरी तरह बदल गया था।

उसे हिना का काम करना अच्छा नहीं लगता था। वह चाहता था कि वह हाॅस्पीटल की बजाय घर पर अधिक समय बिताए, जबकि गायनेकोलाॅजिस्ट को तो कभी भी हाॅस्पीटल जाना पड़ता है उसमें दिन और रात को नहीं देखा जाता और समीर को उसके इस तरह के काम से चिढ़ होती थी। हिना के सपने टूटने लगे और वह पूरी तरह से बिखर गई। उसने यही फैसला किया कि अब वह समीर के साथ नहीं रह पाएगी और उसने तलाक ले लिया। हिना का काम बहुत अच्छा चल रहा था। दूर-दूर से निःसंतान दंपत्ति उससे सलाह लेने आते और उसकी सलाह से जल्दी ही उनकी गोद भर जाती। पर हिना की किस्मत ऐसी थी कि वह चाह कर भी मां नहीं बन सकती थी। उसका आंगन बिल्कुल सूना था। तभी उसकी जिंदगी में निशांत आए। दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगता और दोनों घंटों एक दूसरे से बात करते रहते। हिना की जिंदगी फिर से खुशनमा हो गई थी। तभी अचानक समीर की तरफ से भी दुबारा राजीनामे के संदेश आने लगे।

हिना के दूर जाने से उसे उसकी अहमियत का अहसास हुआ था और वह फिर से उसे अपनी जिंदगी में बुलाना चाहता था। अक्सर ऐसा होता है कि जो कुछ हमारे पास होता है उसको हम सहेज कर नहीं रख पाते और मृग मरीचिका की तरह अन्जाने सुख की तलाश में लगे रहते हैं और इसी ऊहापोह में हमारे सुख हमारी मुट्ठी से रेत की तरह फिसलते चले जाते हैं और जब हाथ खाली हो जाते हैं तब पता चलता है कि जो दूर था वो तो मिला नहीं और जो पास था वो भी चला गया। समीर के साथ भी यही हुआ। हिना ने उसे साफ मना कर दिया और एक दिन जब निशांत ने उसके सामने विवाह का प्रस्ताव रखा तो उसने फौरन कबूल कर लिया। दूसरे विवाह के पश्चात हिना बहुत खुश थी। निशांत के माता-पिता को वह पूरी इज्जत देती थी। इधर इसके हाॅस्पीटल का काम बहुत बढ़ गया था। इसलिए उसे काफी समय अपने क्लीनिक में देना पड़ता था। घर में उसने दो नौकर रख लिये थे लेकिन यह बात उसकी सासु मां को पसंद नहीं थी। वह चाहती थी


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कि हिना ज्यादा समय घर को दे और नौकर की बजाय खुद घर का काम करे ताकि सबको ज्यादा आत्मीय सुख मिले लेकिन हिना अपने काम को नहीं छोड़ सकती थी और इसी बात पर आए दिन उसकी अपनी सासु मां से तकरार होने लगी। निशांत मूक दर्शक की तरह सब देखता रहता। हिना अपना बच्चा चाहती थी पर निशांत नहीं चाहता था कि बच्चा नौकर के द्वारा पाला जाए। इसलिए वह बच्चे के लिए भी तैयार नहीं था और कुछ ही समय में शादी का दूसरा बंधन भी हिना के पैरों में बंधी बेड़ियों जैसा लगने लगा। उसने तो दूसरे विवाह के पश्चात अपने बच्चे की कल्पना की थी पर यहां वह अपने अस्तित्व को ही तलाश रही थी। आज उसके दूसरे विवाह को कई वर्ष हो गये हैं। जहां उसके क्लीनिक में दूर-दूर से लोग आकर खुश होकर घर जाते हैं वहीं हिना के लिए घर जैसी कोई सुखद छत नहीं है। घर होकर भी वहां सिर्फ रात बिताने जाती है।

सारा समय अस्पताल में ही बिता देती है और अब यही सोच रही है कि क्या उसका जीवन वाकई हिना की तरह ही है जो एक बार तो खूबसूरत रंग दिखा देती है पर जल्दी ही बदरंग हो जाती है। हिना अब निशांत से भी तलाक लेना चाहती है और यही चाहती है कि वह अकेले ही अपनी जिंदगी अपने ढंग से जीयेगी तथा स्वयं सिंगल मदर बन अपने खुद के बच्चे को अपना नाम देगी। जहां हजारों लोगों को औलाद देकर खुश किया वहीं खुद भी वह मां बन कर इस सुख को भोगना चाहती है। कुंडली विश्लेषण हिना की कुंडली में लग्नेश शुक्र द्वादश भाव में अपनी नीच राशि में बुध और मंगल से युति बना रहा है और उस पर शनि की तृतीय दृष्टि पड़ रही है। विंशोत्तरी दशा शनि: 1 व. 7 मा. 27 दिन शुक्र 30/04/2002 30/04/2022 शुक्र 30/04/2005 सूर्य 30/08/2006 चंद्र 30/04/2008 मंगल 30/06/2009 राहु 30/06/2012 गुरु 01/03/2015 शनि 30/04/2018 बुध 28/02/2021 केतु 30/04/2022 हिना 8 10 4 12 2 9 5 11 3 7 1 राचं. 6 सूबु. शु. शकेगुमंलग्न में नैसर्गिक पाप ग्रह राहु स्थित है अतः लग्न और लग्नेश दोनों की अच्छी स्थिति न होने से हिना को जीवन का पूर्ण सुख प्राप्त नहीं हुआ और अत्यंत तनावपूर्ण जीवन व्यतीत कर रही है। लग्न में स्थित राहु हिना को बहुत महत्वाकांक्षी बनाता है

वह ऊंचाइयों को छूना चाहती है परंतु नीचस्थ चंद्र और नीचस्थ शुक्र उसे मानसिक रूप से कमजोर कर रहे हैं और वह अपने काल्पनिक संसार में ज्यादा घूमती रहती है। पंचमेश और चतुर्थेश होकर योगकारक शनि दशम भाव (कार्य क्षेत्र भाव) में स्थित होने से हिना प्रसूति विशेषज्ञ चिकित्सक के पद पर यश, मान और प्रतिष्ठा पूर्वक कार्य कर रही है वहीं दशमेश चंद्रमा को अपनी नीच राशि में होने से इन्हें अपने कार्य क्षेत्र में रात दिन अथक परिश्रम भी करना पड़ रहा है। वैवाहिक स्थिति पर विचार करें तो मंगल सप्तमेश होकर द्वादश भाव में मांगलिक योग बना रहे हैं जिससे हिना के वैवाहिक सुख में बाधाएं आ रही हैं। सप्तम भाव में केतु की स्थिति शुभ नहीं है।

केतु की दशा में इनका विवाह विच्छेद भी हो गया। पति कारक गुरु की अष्टम भाव में स्थिति शुभ नहीं है इसीलिए दो बार विवाह करने पर भी इन्हें अपने पति से पूर्ण सहयोग प्राप्त नहीं हुआ और अब अपना सफर फिर से अकेले शुरू करने की तैयारी में हंै। लेकिन पंचमेश की शुभ स्थिति होने से हिना को संतान तो होनी चाहिए। इसमें विलंब अवश्य हुआ है परंतु हिना को मातृत्व का सुख तो मिलना ही चाहिए। हिना की जन्मपत्री में सप्तम भाव में राहु, केतु, शनि व मंगल जैसे ग्रहों का प्रभाव तथा दांपत्य सुख के कारक शुभ ग्रहांे गुरु, शुक्र व चंद्रमा की अशुभ स्थिति के चलते इन्हें वैवाहिक सुख से वंचित रहना पड़ रहा है।

लग्नस्थ राहु के प्रभाव से हिना अपने व्यक्तित्व का विकास व सौंदर्य की अभिवृद्धि करने में तो सक्षम हो गई परंतु शेष ग्रहों की प्रतिकूलता के फलस्वरूप किस्मत का ऐसा खेल हुआ कि गजब के सौंदर्य व योग्यता के बावजूद भी अपनी जिंदगी में वांछित खुशियां नहीं जुटा पाई और इन्हें एकाकी जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ा। आगे वर्ष 2018 के बाद इनके जीवन में खुशियों के लौटने की संभावनाएं फिर से जीवंत होंगी।


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साईं विशेषांक  मई 2015

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