धन प्राप्ति के 41 सरल टोटके-उपाय

धन प्राप्ति के 41 सरल टोटके-उपाय  

आर. के. शर्मा
व्यूस : 5539 | नवेम्बर 2017

आम भाषा में, अनजाने में हम- टोने-टोटके का शब्दार्थ- समान अर्थों में करते हैं जबकि इन दोनों के भिन्न अर्थ व परिभाषा होते हैं। ‘टोने-टोटके’ करना/करवाना कोई हास्य का विषय नहीं है। आइये हम सरल भाषा में दोनों की परिभाषा जानते हैं। टोने: तांत्रिक भाषा में टोने का अभिप्राय होता है, किसी कार्य सिद्धि के लिये किया जाने वाला ‘तांत्रिक-अनुष्ठान’। यह सात्विक तथा तामसिक अनुष्ठान दो भागों में बांटा जा सकता है।

1. सात्विक अनुष्ठान: इसमें हम सामान्य जीवन में आने वाली वस्तुओं का प्रयोग करते हैं। यह घर में किया जा सकता है। इसमें कुछ अनुचित व भयावह नहीं होता है।

2. तामसिक अनुष्ठान: यह अनुष्ठान केवल श्मशान में किया जाता है। यह बलि पशु-पक्षी आदि शक्तियों के आवाहन/पूजा पर आधारित है। इसके 6 रूप अर्थात् ‘षट् कर्म’ किये जाते हैं, यथा-1 शांति कर्म, 2. वश्य कर्म,3. स्तंभन कर्म, 4. विद्वेषण कर्म, 5. उच्चाटन कर्म तथा 6. मारण कर्म। टोटके: तंत्र की भाषा में किसी भी अप्रिय अथवा हानिकारक कार्य को नष्ट करने अथवा अपने पक्ष में करने के लिए शास्त्रों द्वारा निर्धारित क्रिया करने को ही ‘टोटके’ कहते हैं। हम इनको सुरक्षित एवं सरल उपाय कह सकते हैं। प्रत्येक परिवार के बुजुर्ग इन टोटकों (उपायों) को सदियों से घर में करते आये हैं।

जैसे - हर मां अपने पुत्र को परीक्षा में जाते वक्त दही- शक्कर खिला कर भेजती है। बिल्ली रास्ता काट जाये तो व्यक्ति घर वापस आकर पानी पीता है, फिर जाता है। किसी काम को जाते समय, घर से निकलते ही कोई टोक दे या पूछ ले कि कहां जा रहे हो? तो व्यक्ति घर वापस आकर कुछ देर बाद पुनः जाता है। परेशान व्यक्ति शनिवार को पीपल पर दीपक जलाता है, जल अर्पित करता है।

नियमित रूप से कोई कुत्ते या गाय को रोटी देता है अर्थात् ये सब बातें कोरा अंधविश्वास नहीं वरन् ये हर घर में किये जाने वाले टोटके हैं जो व्यक्ति को शांति और सुख देते हैं। नीचे कुछ सरल और अनुभूत टोटकों पर चर्चा करते हैं। इन टोटकों को यदि लाभ नहीं पहुंचता है तो हानि की भी संभावना नहीं होती है। वर्तमान समय में धन की महती आवश्यकता होती है। निर्धन व्यक्ति का जीवन निर्रथक सा ही है।

धन प्राप्ति के सरल टोटके (उपाय):

1. घर में नियमित रूप से अथवा शुक्रवार को ‘श्री-सूक्त’ अथवा ‘श्री लक्ष्मी सूक्त’ के पाठ से लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।

2. घर में सप्ताह में एक बार-पानी में सामान्य नमक- एक मुट्ठी मिलाकर पोछा लगायें। इससे घरेलू झगड़ों में कमी आयेगी तथा नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।

3. प्रातः उठकर सर्वप्रथम घर के मुख्य द्वार पर एक लोटा जल चढ़ायें।

4. प्रत्येक अमावस्या को पूरे घर की सफाई करें तथा कबाड़-कूड़ा घर से बाहर निकाल दें। स्नान के बाद घर के मंदिर में पांच अगरबत्ती जलायें।

5. किसी भी भिखारी को घर के अंदर घुसने न दें, उसे बाहर ही भीख दें।

6. पूर्णिमा को ‘ऊँ’ मंत्र की 108 आहुतियां दें।

7. माह में दो बार प्रत्येक कमरे में लोबान की धुनी घूमायें।

8. यदि प्रातः पूजा के वक्त कोई मेहमान घर में आता है तो बहुत ही शुभ है। आप उसे जलपान अवश्य करायें। यदि संध्या की पूजा के समय घर में कोई सुहागन स्त्री आती है तो समझें कि साक्षात् मां लक्ष्मी आयी हैं, उसका भी सम्मान करें।

9. आप जब भी घर वापस आयें तो कभी खाली हाथ न आयंे। कुछ नहीं तो रास्ते में पड़ा कागज का टुकड़ा ही उठा लायें।

10. प्रातः पूजा काल में या उठते ही घर में किसी बच्चे का रोना अशुभ है। कारण पता करें, हो सकता है कि घर में कोई ‘नकारात्मक-शक्ति’ अवश्य है।

11. घर में नमक कभी खुला न रखें।

12. घर के किवाड़ खोलते-बंद करते समय आवाज आये तो कब्जों में तेल डालें।

13. नियमित रूप से प्रथम रोटी गाय को तथा अंतिम रोटी कुत्ते को अवश्य दें।

14. आंगन के बीच में तुलसी का पौधा लगायें तथा उसकी नियम से पूजा भी करें।

15. प्रत्येक गुरुवार को केले के पौधे पर जल अर्पित करके घी का दीपक तथा शनिवार को पीपल पर गुड़ मिश्रित जल चढ़ाकर तेल का दीपक अवश्य जलायें।

16. नित्य पीपल पर जल चढ़ाना भी आर्थिक संपन्नता देता है।

17. शुक्रवार को किसी भी साईज का बंद ताला खरीदें, दुकानदार या आप भी खोल या बंद करके चेक न करें।

इस ताले को रात में अपने ‘शयन-कक्ष’ में रखें। शनिवार को सायंकाल नहाकर, ताले को किसी मंदिर में लेकर जायें। दर्शन करने के बाद, उस ताले को मंदिर में छोड़ आयें। पुजारी जब ताले को चाबी से खोलेगा, तो आपकी किस्मत का ताला तथा मां लक्ष्मी की तिजोरी का ताला आपके लिए खुल जायेगा।

18. प्रत्येक गुरुवार को किसी सुहागन को एक या अधिक-सुहाग का कोई सामान, गृहिणी अवश्य दें।

19. कठिन आर्थिक समस्या या रूके कार्यों के निष्पादन हेतु- आप शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से शुरू करके लगातार तीन गुरुवार - गरीबों या भिखारियों में पीले-मीठे चावल दें। आप चमत्कार देखेंगे। लगातार करना चाहंे तो बीच में 3 गुरुवार करने के बाद, एक गुरुवार छोड़कर फिर से शुरू कर सकते हैं। कम से कम एक किलो चावल, अधिक की कोई सीमा नहीं है। चमत्कारिक लाभ दिखाई देगा।

20. शाम को सूर्य डूबते समय घर-दुकान-आॅफिस की लाईट अवश्य जला दें। मंदिर में या तस्वीर/मूर्ति (लक्ष्मी की) के सामने 11 बार लक्ष्मी जी के मंत्र या ‘नाम’ का मन में श्रद्धा से सुमिरण करें।

21. आप घर में नियमित पूजा करते समय दीपक में रूई की बत्ती के स्थान पर लाल कलावा (मौली) का प्रयोग करें।

22. सदैव शनिवार के दिन गेहूं पिसवायें, उसमें एक मुट्ठी चने मिला दें।

23. कागज के नोट गिनते समय अंगुली पर थूक न लगायें।

24. मंदिर में चढ़ाया कोई सिक्का आपकी झोली अथवा आपके ऊपर गिर जाये तो उठाकर उसे घर ले आयें और तिजोरी में रख दें।

25. कोई हिजड़ा आपसे कुछ मांगे (बुधवार को) तो उसे दान अवश्य दें, पर आप उससे कोई एक सिक्का या नोट मांग लें, पर वह आपका दिया हुआ न हो। यह अपने पर्स या तिजोरी में रखें।

26. शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार को 10 बादाम लेकर हनुमान मंदिर में जायें। बादामों को उनके आगे रखकर, पूजा करने के बाद उनमें से केवल 5 बादाम घर लाकर, लाल वस्त्र में बांधकर तिजोरी में रख दें।

27. 21 शुक्रवार को 9 वर्ष से कम आयु की पांच कन्याओं को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें।

28. कभी दिन ढलते वक्त तथा रात में घर/दुकान आदि में झाड़ू न लगायें।

29. शुक्रवार को कोई सुहागन स्त्री आपके घर में आती है तो उसका सम्मान लक्ष्मी मानकर करें तथा उसे जलपान करायें।

30. बैंक आदि में धन जमा कराते समय मन ही मन लक्ष्मी मंत्र या नाम अवश्य जपना चाहिए।

31. दीपावली की रात्रि में सफेद 21 हकीक अपनी तिजोरी में रखें या घर के मध्य जमीन में गाड़ दें।

32. पूर्णिमा को प्रातः 10 बजे पीपल वृक्ष पर लक्ष्मी का फेरा अवश्य लगता है। इसलिये इस समय, आप पीपल वृक्ष के साथ लक्ष्मी की पूजा अवश्य करें।

33. अपने पूजा घर में लक्ष्मी जी की मूत्र्ति स्थापित करें- साथ में ‘श्री यंत्र’ भी स्थापित करें- उस यंत्र पर सिद्ध कमलगट्टे की माला करने से ‘लक्ष्मी’ का विग्रह’ (मूर्ति) शीघ्र जाग्रत हो जाता है।

34. तिजोरी में लाल रेशमी वस्त्र में 11 छुआरे बांधकर रखें।

35. प्रत्येक शनिवार को आप दिन में 12 बजे के आस-पास, अपनी लंबाई से 5 गुणा से कुछ अधिक लाल धागा लेकर ‘जटा वाले नारियल’ (हरा) पर लपेट कर किसी बहते जल में प्रवाहित करें। हाथ जोड़कर वापस आ जायें। पीछे मुड़कर न देखें। ऐसा सिर्फ सात बार करें।

36. अचानक आर्थिक हानि अधिक होती है तो आप सात शुक्रवार को किन्हीं सात सुहागिनों को अपनी पत्नी के माध्यम से लाल वस्तु उपहार में दें - जैसे लाल चूड़ी या साड़ी या ब्लाॅउज पीस या रूमाल -सिगरफ - लालता (महावर) बिन्दिया आदि भी, साथ में इत्र भी दें। तुरंत हानि होना बंद हो जायेगा।

37. किसी को भी बुधवार को धन उधार न दें यह धन वापस नहीं आता है।

38. किसी को भी प्रातः, पूजाकाल एवं संध्या की पूजा के समय उधार न दें।

39. यदि आपको रास्ते में खेत में मोर नाचता दिखाई दे तो आप तुरंत उस स्थान की मिट्टी उठाकर अपनी जेब में रख लें। फिर घर आकर उस मिट्टी को धूप-दीप दिखाकर किसी चांदी के ताबीज या डिब्बी या लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर तिजोरी में रख दें।

40. शुक्रवार के दिन कोई विवाहित महिला यदि आपसे जलपान अथवा कोई उचित चीज मांगे तो तुरंत पूजा करें।

41. यदि शुक्रवार के दिन-आपको कहीं सिक्का पड़ा मिले अथवा कोई भूल से अधिक दे दे तो- उस सिक्के को लाल वस्त्र में लपेटकर तिजोरी में रख दें...। वास्तु दोषों को दूर करने के लिए टोटके -वास्तु दोष दूर करने के लिए किसी शुभ गृह प्रवेश के मुहूर्त में 5 रत्न या चांदी के छोटे-छोटे 5 टुकड़े ले कर, उन्हें गो दूध, फिर गंगा जल से स्नान करा कर, षोडशोपचार विधि से श्री उमा-महेश्वर का पूजन कर के, ‘शिव तांडव स्तोत्र का एक पाठ करें।

फिर इनको घर की चारों दिशाओं में 1-1 फुट नीचे गाड़ दें। 5वां रत्न या चांदी का टुकड़ा मुख्य द्वार में कहीं गड्ढा कर गाड़ दें। धीरे-धीरे, वास्तु दोष से मुक्ति प्राप्त हो कर, सुख-शांति प्राप्त होगी।

- दक्षिणमुखी मकान हो, नैर्ऋत्य में फाटक हो, ईशान में शौचालय हो, ऐसी स्थिति में तोड़-फोड़ करना बहुत कठिन होता है। ऐसे समय आंतरिक साज-सज्जा में सुधार कर सकते हैं। गंगा जल से घर में छिड़काव करें। संगम की रेत की, ब्रह्म स्थान में गड्ढा खोद कर, जमीन में स्थापना करें। वास्तु देवता से प्रार्थना रोज करें। वास्तु देवता के नाम से 1 थाली रोज निकालें एवं पक्षियों के लिए रखें।

- मुख्य द्वार पर आगे-पीछे गणेश जी की प्रतिमा या चित्र लगाएं।

- द्वार पर मंगल कलश, मछली का चित्र, स्वस्त्तिक चिह्न, शुभ-लाभ जो भी लगा सकते हों, लगाएं।

- रात में धूप-दीप, अगरबत्ती लगाएं। विघ्नहत्र्ता गणेश जी एवं शिव जी की आरती रोज सुबह शाम करें। आरती करते समय घंटी भी बजाते रहें। ¬ शब्द का उच्चारण करें।

- घर के समीप जंभीरी, आम, केला, निर्गुंडी, जौ, अशोक शिरसा और चमेली आदि सुगंधित वृक्ष शुभ होते हैं। बेल, अनार, नागकेसर, कटहल, नारियल के वृक्ष भी हमेशा शुभ फलदायी होते हैं।



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