विश्व सुंदरी मानुषी छिल्लर

विश्व सुंदरी मानुषी छिल्लर  

आभा बंसल
व्यूस : 526 | जनवरी 2020

17 वर्ष के लंबे इंतजार के बाद भारत की मानुषी छिल्लर ने डपेे ूवतसक का खिताब जीत लिया। चीन में हुई प्रतियोगिता में 18 नवंबर 2017 को मानुषी 108 प्रतिभागियों को पीछे छोड़कर मिस वल्र्ड बनीं। इससे पहले 25 जून 2017 को इन्हें ‘फेमिना मिस इंडिया’ खिताब से भी नवाजा गया। इसके अतिरिक्त मानुषी मिस फोटोजेनिक एवं मिस हरियाणा का खिताब भी जीत चुकी हैं।

डाॅक्टर माता-पिता के घर जन्मी मानुषी खुद भी एक मेडिकल छात्रा हैं। इनके पिता डाॅ. मित्र वासु छिल्लर चिकित्सा में एम. डी. हैं व माता डाॅ. नीलम छिल्लर जैव रसायन में एम. डी. हैं। मूल रूप से हरियाणा झज्जर के सेंट थाॅमस स्कूल से पढ़ाई की और अब हरियाणा के भगत फूल सिंह गवर्नमेंट मेडिकल काॅलेज से एम. बी. एस. की पढ़ाई कर रही हैं। मानुषी एक प्रशिक्षित कुचीपुड़ी नृत्यांगना भी हैं। इन्होंने महान नर्तक राजा और राधा रेड्डी व कौशल्या रेड्डी से प्रशिक्षण लिया है। ये नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा का भी हिस्सा रहीं।

मानुषी छिल्लर से ग्रैंड फिनाले में एक अहम सवाल पूछा गया जिसका जवाब देकर वे विनर बनीं। प्रतियोगिता में मानुषी से पूछा गया था कि किस प्रोफेशन को सबसे ज्यादा तनख्वाह मिलनी चाहिए और क्यों?

इस सवाल पर मानुषी ने जवाब दिया कि एक मां को सबसे ज्यादा इज्जत मिलनी चाहिये वहीं सैलरी की बात है तो मतलब रुपयों से नहीं होना चाहिए बल्कि सम्मान और प्यार मिलना चाहिए। अपने आत्मविश्वास और सहजता के जरिये मानुषी टाॅप 40 से सीधे टाॅप 15 में जगह बनाने में कामयाब रहीं। इसके बाद टाॅप 10 और टाॅप 5 में इनकी जगह पक्की हुई। अंतिम पांच में इंग्लैंड, फ्रांस, केन्या और मैक्सिको की प्रतिभागी थीं और अंतिम तीन में चयन के बाद इनके अंतिम सवाल के मर्मस्पर्शी जवाब ने इन्हें विश्व सुंदरी का ताज पहना दिया।

मानुषी शक्ति अभिमान परियोजना से भी जुड़ी हैं जिसका लक्ष्य मासिक धर्म की स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाना है। इन्होंने इस परियोजना के लिए लगभग 20 गांवों का दौरा किया और 5000 से अधिक महिलाओं का उपचार किया। भारत वापस आने के बाद मानुषी हैदराबाद में आयोजित 2017 ग्लोबल उद्यमिता शिखर सम्मेलन में सेलिब्रिटी स्पीकर में से एक रहीं। इन्हें एनीमिया फ्री हरियाणा की ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी घोषित किया गया है और इनके सौंदर्य प्रोजेक्ट अभियान के साथ परियोजना को 18 करोड़ रुपये सरकारी समर्थन भी दिया गया है।

सरकारी स्कूलों में सभी लड़कियों के लिए सैनिटरी नैपकिन मुफ्त उपलब्ध कराने का विश्वास भी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने दिया है। मानुषी को विश्व सुंदरी का खिताब जीतने के कारण वर्ष 2017 के सी. एन. एन. आई बी. एन. इंडियन आॅफ दी ईयर पुरस्कार में विशेष अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है।

विश्वसुंदरी का खिताब जीतने के लिए मानुषी ने अपने करियर का पूरा एक साल दे दिया और इस दौरान इन्होंने अपनी डाइट, अभ्यास, नृत्य व सभी विधाओं पर काफी काम किया। इनकी मेहनत व लगन के अतिरिक्त इनकी जन्मकुंडली के सितारे भी इनके लिए जबरदस्त कार्य कर रहे थे तभी इन्हें यह सफलता मिल पाई।

आइये जानें मानुषी के आकाशीय सितारों की कहानी

मानुषी की जन्मकुंडली के अनुसार इनका वृषभ लग्न है और लग्नेश शुक्र चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में स्थित है और मानुषी को आकर्षक व्यक्तित्व और सौंदर्य प्रदान कर रहे हैं।ं लग्न एवं लग्नेश पर भाग्य स्थान से बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि होने से इनके सौंदर्य व ज्ञान में भी चार चांद लगा रहे हैं। कर्मेश योगकारक शनि की लाभ स्थान से लग्न तथा शुक्र पर दृष्टि होने से इनका सौंदर्य प्रतियोगिताओं की ओर अधिक रूझान बढ़ा और समय-समय पर मानुषी ने उनका लाभ उठाया।

पंचम भाव में राहु की शुभ स्थिति व कर्मेश शनि की लग्न व नवांश में भी शुभ स्थिति होने से तथा मंगल की कर्म स्थान व कर्मेश पर पूर्ण दृष्टि होने से मानुषी एम. बी. बी. एस कर रही हैं। चतुर्थेश उच्च के सूर्य व पंचमेश बुध की बारहवें भाव में अत्यंत शुभ स्थिति होने से इन्हें विश्वसुंदरी के रूप में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई है।

भाग्येश शनि व लाभेश गुरु का स्थान परिवर्तन योग बनने से इन्हें भाग्य का पूर्ण सहयोग मिला जिसके कारण मानुषी इतनी ऊंचाई पर इतनी जल्दी पहुंच गईं और अपने भाग्य के बल पर प्रचुर मात्रा में धनार्जन भी कर रही हैं। पंचमेश सूर्य व द्वादशेश मंगल का परिवर्तन योग भी इन्हें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के योग प्रदान कर रहा है। प्रतियोगिता संबंधी सफलता के भाव का स्वामी शुक्र शुभ स्थिति में होने से तथा राहु और शनि के भी अत्यंत बलवान स्थिति में होने से सभी प्रतिस्पद्र्धी प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त हुई।

शुक्र और चंद्रमा की शुभ स्थिति के कारण ये महिलाओं के कल्याण के लिए भी कार्य कर रही हैं। मानुषी की नवमांश कुंडली में तीन ग्रह स्वनवमांश में होने से इन्हें पढ़ाई के अतिरिक्त दूसरे क्षेत्र में भी प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। राहु और शनि की एक दूसरे पर दृष्टि होने से आगे भविष्य में राजनीति के क्षेत्र में भी पद प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। मानुषी की चंद्र कुंडली भी बहुत बलवान स्थिति में है। चंद्र कुंडली लग्नेश चंद्रमा लग्नस्थ है। केंद्रस्थ गुरु गजकेसरी योग बना रहा है। दशम भाव में सूर्य, बुध व तृतीय भाव में राहु के होने से अत्यंत बलवान राजयोग बन रहा है व अक्षय कीर्ति योग भी बन रहा है।

चंद्र कुंडली में द्वितीयेश उच्च का होकर दशम भाव में है तथा साथ ही द्वितीयेश व दशमेश का स्थान परिवर्तन योग बन रहा है। इसके अतिरिक्त सप्तमेश व भाग्येश का स्थान परिवर्तन भी भाग्योन्नति के लिए विशेष शुभ है। वर्तमान समय में लग्नेश शुक्र की महादशा चल रही है। अतः शुक्र की महादशा में चंद्र कुंडली में दशम भाव पर शनि व गुरु के संयुक्त गोचरीय प्रभाव से इन्हें विश्व सुंदरी का खिताब हासिल हुआ।

इसके अतिरिक्त मानुषी की कुंडली में अधिक गुण योग, वीणा योग, चामर योग, सुनफा योग, काहल योग, गजकेसरी योग, मालव्य महापुरूष योग भी विराजमान हैं जिन्होंने मानुषी को वाक्पटु, बुद्धिमति, धनी, ओजस्वी व नृत्य व संगीत की कला में निपुण बनाया और इतनी कम उम्र में विश्वव्यापी सफलता दिलायी।

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