अगर अपने बच्चों से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो क्या करें?

अगर अपने बच्चों से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है तो क्या करें?  

रिपन गुलाटी
व्यूस : 2628 | जुलाई 2015

समय के बदलाव के साथ मनुष्य की प्राथमिकता भी बदलती जाती है। मनुष्य जवानी की दहलीज पर पहुंचते ही अपने करियर की ओर ध्यान केंद्रित करता है। करियर व समय चक्र के बदलाव के साथ उसकी प्राथमिकता शादी के प्रति बढ़ जाती है। शादी के बाद अगले पड़ाव की ओर बढ़ता है जहां पहले वह खुद अपने मां-बाप का बेटा-बेटी कहलाता है अब वह खुद मां बाप की संज्ञा में परिवर्तित हो जाता है। उसकी प्राथमिकता भी अब बच्चों के पालन पोषण की ओर ज्यादा केन्द्रित हो जाती है।

किंतु इस काल अवधि में उसको अलग-अलग परेशानियांे का सामना करना पड़ता है। हम इन परेशानियों का हल ज्योतिष शास्त्र से करने की कोशिश करेंगे। बच्चों पर ग्रहों का प्रभाव शुभ ग्रहों का प्रभाव अगर बच्चे की जन्मकुंडली में लग्न, लग्नेश, चंद्र लग्न, चंद्र लग्नेश, सूर्य लग्न व सूर्य लग्नेश पर हो तो बच्चा संस्कारी होता है। पाप ग्रहों जैसे राहु, मंगल, शनि व केतु का प्रभाव लग्न, लग्नेश, चंद्र लग्न, चंद्र लग्नेश, सूर्य लग्न व सूर्य लग्नेश पर हो तो बच्चा उपद्रव फैलाता है।

- शनि ग्रह का ज्यादा प्रभाव हो तो बच्चा झूठ बोलता है।

- राहु ग्रह का ज्यादा प्रभाव हो तो बच्चा चोरी करता है और जानबूझ कर दूसरों को हानि पहुंचाता है।

- मंगल का ज्यादा प्रभाव होने पर बच्चा उपद्रव फैलाता है।

- शुक्र का ज्यादा प्रभाव होने पर बच्चा कल्पनाओं में खोया रहता है।

अगर आपका बच्चा बार-बार बीमार होता रहता है और उपचार के उपरांत भी विशेष लाभ नहीं मिल पाता है तो क्या करें? ऐसी स्थिति में मंगलवार के दिन किसी सुनार को अष्टधातु का कड़ा बालक के नाप के अनुसार बनवाने के लिए दें तथा उस कड़े को शनिवार के दिन सुनार से घर ले आयें। कड़े को गंगाजल से धोकर शुद्ध करें तथा उस कड़े पर थोड़ा सा सिंदूर लगा दें। कड़े को हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष रखकर हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें।

इसके बाद उस कड़े को बच्चे के दाहिने हाथ में पहना दें। हनुमान जी की कृपा से बच्चा शीघ्र ही स्वस्थ हो जाएगा।

अगर आप अपने बच्चे की शिक्षा के प्रति ज्यादा चिंतित रहते हैं तो क्या करें?

बच्चे की अच्छी पढ़ाई के लिए भी गणपति जी के मंदिर में सफेद कंबल दें।


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बच्चे के गले में चांदी में मोती जड़ित लाॅकेट धारण करवायें। इसके अलावा बच्चे के पिता को गणेश-सरस्वती के आगे 7 बृहस्पतिवार शुद्ध घी का दीपक जलाकर बच्चे की अच्छी शिक्षा के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

अगर आपका बच्चा परीक्षा के समय नर्वस हो जाता है और परीक्षा में पेपर गलत कर आता है तो क्या करें?

जिस दिन भी परीक्षा हो, बच्चे को परीक्षा देने जाने से पहले घर से दही का सेवन करवायें। हर परीक्षा वाले दिन यह प्रक्रिया अवश्य करें किंतु समय हर बार अलग-अलग होना चाहिए। अगर आपका बच्चा झूठ बोलता है तो आप क्या करें? दो तुलसी के पत्ते रोज सुबह सूच्चे (बिना खाए-पिए) मुंह अपने बच्चे को खिलायें और चांदी के टुकड़े पर ‘ऐं’ लिखवा कर लाल धागे में डालकर सोमवार को बच्चे के गले में धारण करवायें। 

आपका बच्चा चोरी व फरेब करता है तो क्या करें?

आप हनुमान चालीसा का पाठ बच्चे को पास में बैठा कर करें, अगर आप हनुमान चालीसा का पाठ बच्चे से करवायेंगे तो और भी अच्छा रहेगा। बच्चे को हनुमान मंदिर लेकर जायें और वहां पर हनुमान जी के चरणांे का तिलक बच्चे के माथे पर लगायें।

अगर आपका बच्चा बुरी आदतों व नशे की लत में फंस गया हो तो क्या करें?

दो तुलसी के पत्ते हनुमानजी को चढ़ायें व बजरंगबाण का पाठ करें और भगवान से प्रार्थना करें कि मेरा बच्चा इन बुरी आदतों से बाहर निकले, अब इन दो पत्तों को अपनी संतान को खिला दें। धीरे-धीरे अवश्य ही आपका बच्चा बुरी आदतों से बाहर निकलेगा।

अगर आपका बच्चा कम आयु में ही किसी के प्रेम में फंस गया है तो क्या करें?

एक लोहे के टुकड़े या छड़ को आग पर अच्छी तरह गर्म करें फिर पानी में डुबो कर उसे ठंडा करें। इस प्रक्रिया को तीन बार करें और प्रत्येक बार लोहे को ठंडा करते समय कहें, जिस प्रकार यह गर्म लोहा पानी में शीतल हुआ है उसी प्रकार मेरे बच्चे का प्रेम अमुक (जिस लड़के या लड़की के प्रेम में है उसका नाम) से शीतल हो जाये। फिर उस पानी से बच्चे का मुंह धुलवायें और उस पर छीटें मारें। यह प्रक्रिया दोहराते रहें। धीरे-धीरे अवश्य ही आपका बच्चा कच्चे प्रेम से बाहर निकल आयेगा।


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मंगल दोष विशेषांक  जुलाई 2015

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फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में मंगल दोष की विस्तृत चर्चा की गई है। कुण्डली में यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम भाव एवं द्वादश भाव में यदि मंगल हो तो ऐसे जातक को मंगलीक कहा जाता है। विवाह एक ऐसी पवित्र संस्था जिसके द्वारा पुरुष एवं स्त्री को एक साथ रहने की सामाजिक मान्यता प्राप्त होती है ताकि सृष्टि की निरन्तरता बनी रहे तथा दोनों मिलकर पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर सकें। विवाह सुखी एवं सफल हो इसके लिए हमारे देश में वर एवं कन्या के कुण्डली मिलान की प्रथा रही है। कुण्डली मिलान में वर अथवा कन्या में से किसी एक को मंगल दोष नहीं होना चाहिए। यदि दोनों को दोष हैं तो अधिकांश परिस्थितियों में विवाह को मान्यता प्रदान की गई है। इस विशेषांक में मंगल दोष से जुड़ी हर सम्भव पहलू पर चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त स्थायी स्तम्भ में भी विभिन्न विषयों को समाविष्ट कर अच्छी सामग्री देने की कोशिश की गई है।

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