दक्षिण-पश्चिम में दोष जीवन में अवरोध

दक्षिण-पश्चिम में दोष जीवन में अवरोध  

गोपाल शर्मा
व्यूस : 1736 | अप्रैल 2012

पंडित जी पिछले माह दिल्ली के एक वरिष्ठ राजनीतिज्ञ एवं प्रसिद्ध आयात-निर्यात व्यापारी के सैनिक फार्म स्थित आवास में वास्तु परीक्षण के लिए गए। उनसे मिलने पर उन्होंने बताया कि जब से उनका परिवार इस घर में आया है, सेहत ठीक नहीं रहती और लोगों से मनमुटाव भी बढ़ गया है। व्यापार में हानि होती रहती है तथा हर समय अनावश्यक तनाव बना रहता है। वास्तु परीक्षण करने पर पाए गए वास्तु दोष:

Û दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम काफी अधिक खुला था। अधिकतर बना हुआ क्षेत्र पूर्व, उत्तर-पूर्व, उत्तर की ओर था, जो सभी ओर से विकास में बाधा उत्पन्न होने का कारण होता है। घर के मालिक की स्वास्थ्य एवं आर्थिक हानि होने की संभावना रहती है।

Û दक्षिण पश्चिम में जनरेटर रखा था, जो कि आर्थिक हानि, मानसिक तनाव व मतभेद होने का मुख्य कारण होता है।

Û उत्तर के कोने में पानी का फव्वारा लगाया हुआ था पर उसके नीचे प्लेटफार्म बना हुआ था जिससे उत्तर का कोना काफी ऊंचा हो गया था। फव्वारे के आस-पास भारी सजावटी पत्थरों की वजह से यह कोना भारी भी हो गया था जिससे पैसा रुक जाता है तथा आपसी तालमेल के अभाव में बहुत से महत्वपूर्ण कार्य होते-होते रह जाते हैं।

Û बिल्डिंग में अधिकतर बेसमेंट दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम की ओर बना था जो कि घर के मालिक के लिए घातक भी हो सकता है। षडयन्त्र, धन हानि, कर्ज तथा मुकदमेबाजी होने की संभावना बनी रहती है। Û बिल्डिंग का पश्चिम का कोना कटा हुआ था जो कि जीवन में आराम चैन की कमी लाता है। जीवन में अनावश्यक भागदौड लगी रहती है।

Û घर में अधिकतर घडियां व शीशे दक्षिण की ओर लगे थे जो कि धन व स्वास्थ्य हानि का कारण होते हंै। सुझाव:

Û दक्षिण की ओर के खुलेपन को कम करने के लिए प्लाॅट पर हैज बनाने तथा 99 पिरामिड समूह लगाकर विभाजित करने की सलाह दी गई।

Û दक्षिण-पश्चिम में रखे जनरेटर को दक्षिण में रखने की सलाह दी गई।

Û पानी के फव्वारे को जमीन की सतह या उससे नीचे की ओर बनाने को कहा जिसके आगे छोटा सा लोटस पोण्ड बनाने को कहा गया। फव्वारे के आस-पास रखे सजावटी भारी पत्थरों को भी हटाने को कहा गया। भारी पत्थर दक्षिण पश्चिम में गेट के पास लाॅन में रखे जा सकते हैं। बिल्डिंग में बेसमेंट में उत्तर पूर्व व उत्तर की ओर बडे़-बडे़ शीशे लगाने को कहा तथा बेसमेंट के चारों कोनों में पिरामिड लगाने की सलाह दी गई तथा उन्हें कहा गया कि जितनी जल्दी हो सके उत्तर,उत्तर-पूर्व की ओर बेसमेंट को बढ़ा लें।

Û बिल्डिंग के कटे हुए पश्चिम के कोने को मैटल के परगोला से ठीक करने की सलाह दी गई।

Û घर में सभी घडियां व शीशे उत्तर-पूर्व, पूर्व, उत्तर व पश्चिम में लगाने को कहा गया। पं. जी ने उन्हें आश्वासन दिया कि सभी वास्तु सुझावों को कार्यान्वित करने के पश्चात उनके जीवन में अवश्य सुख शांति का संचार होगा व सभी समस्याओं से शीघ्र छुटकारा मिलेगा।



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