कैरियर निर्धारण में ज्योतिष की भूमिका

कैरियर निर्धारण में ज्योतिष की भूमिका  

जय डे
व्यूस : 3171 | अप्रैल 2010

कैरियर के निर्धारण में ज्योतिष अहम भूमिका निभा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति के पास एक विशेष गुण अवश्य होता है। ज्योतिष उस गुण को पहचान के, उसे सदुपयोग में कैसे लाया जाए, उसका मार्ग दर्शन करता है। कैरियर के निर्धारण में प्रथम और दशम भाव की भूमिका अहम है।

1. क) प्रथम भाव-जब लग्न के उप नक्षत्र स्वामी का संबंध 6ठे, 10वे भाव के नक्षत्रपति से या 6वे, 10वे के कार्येश के साथ हो तो जातक नौकरी में सफल होता है। ख) जब लग्न का उप नक्षत्र स्वामी का संबंध 7वे, 10वे भाव के नक्षत्रपति से या 7वंे, 10वें भाव कार्येश के साथ होने पर जातक व्यवसाय में सफल होता है। ग) जब लग्न के उप नक्षत्र स्वामी का संबंध 5वे, 9वे भाव के नक्षत्रपति से हो या 5वें, 9वें भाव के सबल कार्येश हों और 6, 7, 10वंे भाव से कोई संबंध न हो, तो जातक के पास कोई रोजगार नहीं होता। लग्न के उप नक्षत्र स्वामी का संबंध 2, 6, 10, 11वें भाव से हो तो, कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

2. दशम भाव - इस भाव से हम कार्यक्षेत्र, सम्मान, सरकारी कार्य, पद, रोजगार आदि के बारे में विचार करते हैं। दशम भाव के उप नक्षत्र स्वामी, जिस भाव के सबल कार्येश हो, उस भाव संबंधित कार्यक्षेत्र अपनाता है। एकादश भाव के उप नक्षत्र स्वामी 1 और 10वे भाव के कार्येश होने पर, जातक कार्य क्षेत्र में सफल होता है। दशम भाव के सबल कारक ग्रह एवं दशम पर दृष्टि संबंधित ग्रह के अनुरूप जातक को कर्यक्षेत्र प्राप्त हेाता है। विभिन्न प्रकार के कार्यक्षेत्र एवं संबंधित ग्रह निम्न प्रकार हैं-

शिक्षा एवं कैरियर पर भिन्नता: चतुर्थ भाव से प्रारंभिक शिक्षा तथा नवम् भाव से उच्च शिक्षा को देखते हैं। चतुर्थ भाव तथा नवम् भाव के कार्येश की दशा में अच्छी शिक्षा प्राप्त होती है और 3, 8, 12 भावों के कार्येश की दशा में प्राप्त बाधाएं आती हैं। चतुर्थ अथवा नवम् भाव के नक्षत्र स्वामी का संबंध दशम भाव के नक्षत्र से या दशम भाव के कार्येश से होने पर शिक्षा का लाभ कैरियर में मिलता है।


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कुंडली के आधार में आर्थिक समीक्षा:

1. यदि द्वितीय भाव के उप नक्षत्र स्वामी का संबंध 6, 11 वें भाव नक्षत्र से या कार्येश से होने पर- धन, वैभव बहुत ही अच्छा होता है।

2. यदि द्वितीय भाव के उप नक्षत्र स्वामी का संबंध 2, 11 वें भाव नक्षत्र से या कार्येश से होने पर- धन, वैभव अच्छा होता है।

3. यदि द्वितीय भाव के उप नक्षत्र स्वामी का संबंध 1, 3 वें भाव नक्षत्र से या कार्येश से होने पर- धन, वैभव साधारण होता है। 25 से 50 वर्ष में 2, 6, 10, 11 भावों के कार्येश की दशा होने पर आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है।

कैरियर के महत्वपूर्ण मोड़ का निर्धारण:

क) नौकरी में- 2, 6, 10, 11वें भावों के कार्येश की दशा होने पर कैरियर में प्रगति होती है। 5, 9, 12 वें भावों के कार्येश की दशा होने पर कैरियर में असुविधा होती है। प्रोमोशन- 10, 11, 2वें भावों के कार्येश की दशा और मंगल, गुरु, सूर्य, शुक्र की दशा होने पर। ट्रांसफर- 3 भावों के कार्येश की दशा, तृतीय और दशम भाव के कार्येश के संबंध दशा में होने पर।

ख) व्यवसाय में- 7, 10, 11वें भावोें के कार्येश की दशा होने पर व्यवसाय में प्रगति होती है। 6, 9 वें भावें कार्येश की दशा होने पर पार्टनरशिप में बाधाएं आती हैं। 5, 11 वें भावों के कार्येश की दशा होने पर पार्टनरशिप अच्छा चलता है। 8, 12 वें भावों के कार्येश की दशा होने पर कई प्रकार की परेशानियां आती हैं।

छात्र की बेहतर शिक्षा की लिए वास्तु नियम:

Û अध्ययन कक्ष कौन सी दिशा में हो- उŸार, उŸार-पूर्व, पूर्व दिशा अध्ययन कक्ष के लिए उŸाम है।

Û अध्ययन कक्ष का द्वार किस दिशाा में हो- उŸार, उŸार-पूर्व, पूर्व तथा पश्चिम।

Û अध्ययन कक्ष के टेबल किस आकार के हो- चैकोर टेबल अच्छा है, टेबल बहुत बड़ी न हो।

Û अध्ययन कक्ष के टेबल किस दिशा में हो- दक्षिण, पश्चिम दिशा टेबल भरी न हो तो उŸार- पूर्व दिशा में हो। टेबल दीवार से लगी न हो और सामने दरवाजा न हो।

Û अध्ययन कक्ष के टेबल में रखें वस्तु- जिस पुस्तक या कापी का अध्ययन कर रहे हो वहीं टेबल में रखें। अनावश्यक पुस्तक, कापी टेबल पर न रखें। टेबल लैंप का प्रयोग हो तो उसे दक्षिण - पूर्व में रखें। उŸार - पूर्व में सरस्वती पिरामिड रखना लाभदायक है।

Û अध्ययन करते समय मुख किस दिशा में हो - उŸार, उŸार-पूर्व में हो। टेबल पश्चिम में हो और पूर्व की ओर मुख हो।

Û पुस्तक टेबल में किस दिशा में रखें - पुस्तक टेबल के दक्षिण - पश्चिम, पश्चिम-दक्षिण, पश्चिम में रखें। पुस्तक कप बोर्ड के पास ही रखें।


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Û अध्ययन कक्ष की अन्य व्यवस्था - कक्ष में भारी सामान जैसे सोफा, फाइल कैबिनेट, बुक शैल्फ दक्षिण या पश्चिम में रखें। कम्प्यूटर, म्यूजिक सिस्टम दक्षिण-पूर्व में रखें। टेलीविजन अध्ययन कक्ष में न रखें। कक्ष के मध्य भाग को खाली रखें। हरे रंग के बल्ब जला के रखें।

Û अध्ययन कक्ष के दीवारे के रंग- हल्का शेड में नीला, हरा, नारंगी या गुलाबी। परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए उपाय:

Û रविवार से शुरू कर ताम्र पात्र से सूर्य पर जल चढ़ाएं व सूर्य मंत्र का 21 बार जप करें। और जल में रोली, चीनी, गुलाब का फूल डालंे।

Û गुरुवार को सूर्यास्त से ठीक पहले किसी पतल की दोने में पांच अलग-अलग मिठाई और दो हरी इलायची पीपल वृक्ष के नीचे अर्पित करें। लगातार सात गुरुवार करें।

Û परीक्षा वाले दिन, दही और शक्कर दो कटोरी में रखें। एक परीक्षा के तीन घंटे पहले खिलाएं, दूसरा जाने से पहले खिलाएं।

Û हल्दी की गांठ, केसर को पूजा कर पीले कपड़े में बांध कर अपने पास रखें।

Û परीक्षा में प्रश्न पत्र लेन से पहले - 5 वार हनुमानजी को याद कर कहे- ‘‘¬ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन कुमार। बल, बुद्धि विद्या दहु मोहि, हरहु क्लेश विकार।।’’ परिणाम अच्छा आने पर प्रभु को धन्यवाद कर चोला अर्पित करें।

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कैरियर और व्यवसाय विशेषांक  अप्रैल 2010


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