व्यापारिक संस्थान में नियमित आकार व ईशान का महत्व

व्यापारिक संस्थान में नियमित आकार व ईशान का महत्व  

गोपाल शर्मा
व्यूस : 1646 | जुलाई 2017

कुछ दिन पूर्व पंडित जी, हैदराबाद में एक समाचार पत्र के पाँचवें तल पर प्रस्तावित कार्यालय को देखने के लिए गये। उसे किसी स्थानीय वास्तु विषेषज्ञ ने नकार दिया था। परन्तु वह एक नामचीन व्यावसायिक परिसर व उनके पुराने दफ्तर के काफी नजदीक था, इसलिये प्रषासन ने अंतिम निर्णय लेने से पहले वैकल्पिक सुझाव तथा निर्णय के वैज्ञानिक कारण जानने के लिये पंडित जी को आमंत्रित किया था। निरीक्षण के पष्चात दिये गये सुझाव प्रबुद्ध पाठकों के लाभार्थ संक्षेप में निम्नलिखित हैं:

1. भवन जिस प्लाॅट पर स्थित है, उस प्लाॅट की उत्तर दिषा का पूर्व की ओर 10 डिग्री झुकाव ;ज्पसजद्ध है। यह स्थिति उस रिपोर्ट से विरोधाभास में है, जिसे स्थानीय वास्तु विषेषज्ञ ने 0.0 बताया है।

2. भवन का प्रवेष द्वार आग्नेय दिषा से है, जो कि वाणिज्य संस्थान के लिए अति शुभ है।

3. भवन की पूर्व दिषा में सड़क है जो कि उत्तम है।

4. आॅफिस का प्रवेष पूर्वी दिषा से है जो कि संस्थान की वृद्धि के लिए उत्तम है।

5. लिफ्ट आग्नेय कोण में है जो गड्ढा होने के कारण आर्थिक उन्नति के लिए अषुभ है।

6. सीढ़ियाँ ईषान दिषा में हैं जिस से कम्पनी में धन के आवागमन की कमी रहेगी।

7. भवन का आकार नियमित नहीं है जिस कारण नैर्ऋत्य, दक्षिण और आग्नेय दिषा में वृद्धि है। नैर्ऋत्य दिषा में झुकाव संस्था को मुकद्दमेबाजी में फंसा सकता है। दक्षिण में भी वृद्धि संस्था के नाम और प्रसिद्धि के लिए अति अषुभ है। आग्नेय कोण में वृद्धि के कारण भी आग और दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है।

8. टाॅयलेट और वाॅषरूम की स्थिति उत्तर व उत्तर पूर्व में होना धन का नाष व अत्यधिक मानसिक तनाव का कारण बन सकता है।

9. आगंतुक कक्ष का पूर्व/ईषान दिषा में होना अति उत्तम है।

10. पैंट्री की स्थिति भी अधिकांष दक्षिण-पष्चिम में होने से चिन्तनीय हो गई है।

11. काॅन्फ्रेंस रूम दक्षिण-पष्चिम व पष्चिम दिषा में भी हो सकता है।

12. एक अन्य छोटा काॅन्फ्रेंस रूम जो वायव्य दिषा में है, वह उत्तम है।

13. डण्क्ण् के कक्ष का वायव्य दिषा में होना स्थायित्व की कमी व बाहर धूमते रहना दर्षाता है। उपायः- - जैसा कि साइट पर बताया गया था कि पैंट्री की पूर्वी दीवार का भाग और आॅफिस का भाग तीन फीट तक या विंडो लेवल तक सीधा करें। (यह दीवार दक्षिण की दीवार से 90 डिग्री में होना चाहिए) ऐसा करने से नैर्ऋत्य, दक्षिण, आग्नेय कोण का जो भाग बढ़ा हुआ है, उसका दुष्प्रभाव काफी हद तक कम हो जाएगा परन्तु पूर्णतया खत्म नहीं होगा। इससे बहुत अधिक स्थान भी व्यर्थ हो जायेगा - डण्क्ण् का कार्यालय भी बड़े काॅन्फ्रेंस से बदला जा सकता है।

सारांषः- 1. टाॅयलेट आॅफिस के ईषान व उत्तर में स्थित है तथा किसी भी उपाय द्वारा उसके असर को खत्म करना असंभव है। इस कारण कम्पनी का पूर्णतया विकास नहीं हो सकता।

2. अनियमित आकार के कारण समस्यायें बनी रहेंगी।

3. सीढ़ियां जो कि उत्तर-पूर्व दिषा में स्थित हैं, उसके दुष्प्रभावस्वरूप धनागमन में कमी/विलम्ब अवष्यंभावी है। इसलिये किसी अन्य स्थान का चयन ही श्रेयस्कर रहेगा। प्रष्नः- पंडित जी नमस्कार, एक बहुमंजिली आवासीय परिसर में छठे फ्लोर पर हम यह दक्षिण मुखी फ्लैट खरीदना चाह रहे हैं। कृप्या वास्तु अनुसार हमारा मार्गदर्षन करें ? राघव कष्यप, बेंगलुरू उत्तरः- प्रिय राघव जी, इस घर में प्रवेष द्वार दक्षिण में न होकर आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में है। साधारणतया दक्षिणमुखी घर को लेना अच्छा नहीं होता, परन्तु आग्नेय कोण में मुख्य द्वार होना अच्छा है। दक्षिण में रसोई का स्थान भी उचित है।

उत्तर में एक शयन कक्ष तथा पूर्व में दूसरा शयन कक्ष भी अच्छा है। परन्तु इस घर में दोनांे शौचालयों का उत्तर-पूर्व (ईषान कोण) में होना मुख्य वास्तु दोष है। इस स्थान से ही अधिकतर शुभ ऊर्जाएं अन्दर प्रवाहित होती हैं तथा इसीलिए यह स्थान पूजा के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। रसोई के कारण दक्षिण दिषा का विस्तार भी घर मंे बीमारी एवं अवांछित खर्चों को आमंत्रित करता है। बैठक के पीछे कवर्ड बालकनी भी पूरे हिस्से में नहीं है। इससे भी पष्चिम दिषा का कोना कट गया है। चूंकि इस घर में इनमें से कोई भी दोष ठीक नहीं हो सकता, अतः आपके लिए कोई दूसरा फ्लैट ढूंढना ही अच्छा रहेगा।

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हृदय रोग एवं ज्योतिष विशेषांक  जुलाई 2017

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हृदय रोग एवं ज्योतिष विशेषांक में हृदय रोग के ज्योतिषीय योगों व कारणों की चर्चा करने हेतु विभिन्न ज्ञानवर्धक लेख व विचार गोष्ठी को सम्मिलित किया गया है। इस अंक की सत्य कथा विशेष रोचक है। वास्तु परिचर्चा और पावन तीर्थ स्थल यात्रा वर्णन सभी को पसंद आएगा। देवशयनी एकादशी पर्व का वर्णन भी इस अंक में किया गया है। फलित विचार नामक स्थायी स्तम्भ में विभिन्न भावों के विशेष फल की चर्चा की गई है। तन्त्र शास्त्र नामक स्थायी स्तम्भ में तन्त्र और शक्ति पात् पर रोचक लेख लिखा गया है। टैरो स्तम्भ में माइनर अर्काना और टू आॅफ पेन्टाकल्स की चर्चा की गई है।

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