हिमाचल की शान: विद्या स्टोक्स

हिमाचल की शान: विद्या स्टोक्स  

आभा बंसल
व्यूस : 398 | फ़रवरी 2020

आज हिमाचल प्रदेश अपने उत्तम क्वालिटी के सेबों के लिए जाना जाता है। शायद हम नहीं जानते हंै कि इतनी सेबों की उत्तम वैरायटी की पैदाइश 1910 के आसपास अमेरिका से आए सैमुएल इवान स्टोक्स ने ही शिमला के कोटगढ़ थानेदार बेल्ट में की थी । उन्होंने वहां अनेकों सेबों के बागान लगाये थे और अब उनकी पुत्रवधू श्रीमती विद्या स्टोक्स परिवार के सभी लोग बागानों की देखभाल करती हैं और अपने समाजसेवी प्रवृत्ति व दरियादिली के कारण शिमला में बहुत लोकप्रिय राजनीतिज्ञ है

विद्या स्टोक्स का जन्म 8 दिसंबर 1928 को हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के कोटगढ़ गांव में हुआ था। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सन् 1970 से एवं प्रदेश कांग्रेस समिति की सन् 1974 से सक्रिय सदस्या रही हैं।

इन्होंने हिमाचल की विधानसभा का सन 1974 से 2012 तक आठ बार चुनाव जीत कर हिमाचल विधानसभा की व्सकमेज ूपददमत रह चुकी हैं।

विद्या जी ने शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से पूर्ण की और उनका विवाह श्री लालचंद स्टोक्स से हुआ जो शिमला के जाने-माने समाजसेवक एवं बागवानी ;भ्वतजपबनसजनतमद्ध विशेषज्ञ थे। ये प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकत्र्ता सत्यानन्द स्टोक्स की पुत्रवधू हैं। सत्यानंद जी हिमाचल प्रदेश के अग्रणी बागवानी विशेषज्ञ (च्पवदममत ीवतजपबनसजनतपेजद्ध थे। जिन्होंने हिमाचल प्रदेश में सेब उगाने की शुरूआत की। विद्या स्टोक्स की दो पुत्रियां हैं जो अमेरिका में रहती हैं।

विद्या स्टोक्स 83 वर्ष की अवस्था में 5 अगस्त 2010 को हाॅकी इंडिया की अध्यक्ष भी चुनी गई। इन चुनाव में इन्होंने प्रगट सिंह को हराया था।

विद्या जी आल इंडिया कांग्रेस कमिटी की 1976 में मेंबर नाॅमिनेट हुई थीं। और इंदिरा गांधी जी के साथ काफी काम किया था। 1980 में ये लोक सभा के आम चुनाव में प्रदेश कांग्रेस की फाइनेंस कमिटी की चेयरपर्सन थीं। ये स्टेट बैंक आॅफ इंडिया की निदेशक (डायरेक्टर) भी रही हैं।


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खेलों में विद्या जी की विशेष रूचि रही है। ये इंडियन वुमेन हाॅकी एसोसिएशन की अनेक बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं। अपने बहुत सारे अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में एवं भारत की महिला हाॅकी टीम का स्पेन में आयोजित विश्व कप में प्रतिनिधित्व किया था।

सेब के बागान इनको विरासत में तो मिले ही हैं। इन्हांेने भी उन्हें प्रचुर मात्रा मंे बढ़ाया है और आज भी 90 साल की उम्र में चुस्त दुरुस्त लगती हैं और हिमाचल की आबोहवा में अपने को एकदम फिट रखती हैं।

लक्ष्मी जी की अपार कृपा रही है तथा सोनिया जी का वरदहस्त भी इनके साथ रहा है। लेकिन राजनीति के अंदरुनी दावपंेच के चलते ये हिमाचल की मुख्यमंत्री नहीं बन पाई। इनकेे अनुसार अगर इन्हें यह गद्दी मिल जाती तो ये हिमाचल प्रदेश का काया पलट कर देतीं।

विद्याजी ने पिछले 60 वर्षों से अन्न रहित भोजन ही ग्रहण किया है और आज भी 90 वर्ष में बिल्कुल तरोताजा, चुस्त व तंदरूस्त हंै, क्योंकि ये केवल हरी सब्जियां व सलाद ही खाती हैं।

विद्या स्टोक को इस बात का अफसोस है कि उन्हें अपने जीवन का मास्टर स्ट्रोक नहीं मिल पाया जिसको हासिल करने की उनमें पूरी काबलियत थी और जिसके लिए पिछले 4 दशकों से वे सक्रिय राजनीति में रहीं। चाहे वे मुख्यमंत्री पद पर नहीं पहुंच पाई पर वे सदा ही कांग्रेस पार्टी के लिए वफादार रहीं और कभी भी अपने लिए पद पाने के लिए पार्टी पर जोर नहीं डाला।

विद्या जी के अनुसार यदि वे राजनीति में नहीं होती तो वे एक अत्यंत सफल बैंकर बनती। 36 वर्ष की युवावस्था में राजनीति में प्रवेश करने से पूर्व ये देश की सबसे कम उम्र की स्टेट आॅफ इंडिया की महिला निदेशक थीं।

36 वर्ष की अवस्था में जब इन्होंने राजनीति में प्रवेश किया तो इनका गोचरीय शनि चंद्रमा से पंचम भाव में गोचर कर रहा था।

इन्होंने 1974, 1982, 1985, 1990, 1998, 2003, 2007 व 2012 में कुल 8 बार विधान सभा चुनाव जीता।

1974 में जब ये पहली बार विधान सभा का चुनाव जीती तो उस समय चंद्रमा से पंचम भाव में गुरु व नवम भाव में शनि का गोचर हो रहा था।


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1982 व 1985 के चुनाव के समय इनकी साढ़ेसाती चल रही थी।

1990 में शनि लग्नेश के ऊपर गोचर कर रहा था।

1998 में गोचरीय गुरु पंचम भाव में था तथा शनि लग्नेश पर दृष्टि डाल रहा था।

2003 में गोचरीय गुरु उच्चराशिस्थ होकर राजयोग के दशम भाव में था जबकि शनि नवम भाव में गोचर कर रहा था।

2007 में दशम भाव पर डबल ट्रांजिट इम्पेक्ट अर्थात गोचरीय गुरु व शनि दोनों का ही प्रभाव पड़ रहा था।

2012 मंे इनकी साढ़ेसाती चरम पर थी जो इन्हें सत्ता के बेहद निकट लेकर आई। परंतु सत्ता यानी मुख्यमंत्री पद की गद्दी इनके हाथ से निकल गई और एक सफल राजनीतिज्ञ अपने मास्टर स्ट्रोक से चूक गईं।

हिमाचल वासियों के दिलों पर हुकूमत करने वाली विद्या स्टोक्स ने अपना पूरा जीवन जनता की व कांग्रेस पार्टी की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। जब भी इन्होंने चुनाव जीता गोचरीय शनि व गुरु का प्रभाव चंद्रमा से, नवम, पंचम, दशम भाव या लग्नेश पर देखा गया। यह तो सार्वभौम सिद्धांत है ही कि राजनीतिज्ञों को साढ़ेसाती का लाभ मिलता है।

विद्याजी की जन्मकुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण

विद्या स्ट्रोक्स की चंद्रकुंडली तुला लग्न की है और लग्नेश शुक्र चतुर्थ भाव में विराजमान है, ज्योतिषीय योग के अनुसार ऐसा जातक आजन्म सुखी रहता है तथा उसका स्वभाव मधुर होता है।

धन भाव में चतुग्र्रही योग, धनेश व भाग्येश का स्थान परिवर्तन योग तथा केंद्रस्थ गुरु यह संकेत देता है कि जीवन में धन, मान, ज्ञान, पारिवारिक सुख तथा प्रचुर मात्रा में पैतृक संपत्ति प्राप्त होगी।

केंद्र में शुभ ग्रहों की स्थिति इनके ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ होने तथा विवाद से दूर रहने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

इन्होंने विगत पांच दशकों में राष्ट्र की सक्रिय राजनीति में रहकर अनवरत सेवा की है। ज्योतिष के विश्लेषण के अनुसार जनवरी 2020 से जनवरी 2023 तक का समय इनके स्वास्थ्य के लिए हल्के-फुल्के कष्ट का संकेत दे रहा है।

राष्ट्र व कांग्रेस पार्टी को इनके मार्गदर्शन की आवश्यकता है। इसलिए हम इनके दीर्घजीवी होने की कामना करते हैं।

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