धोखे का ग्रह

धोखे का ग्रह  

व्यूस : 5950 | मार्च 2012
धोखे का ग्रह पं. उमेश शर्मा एक से 120 वर्ष तक की आयु को औसत आयु माना गया है। एक तालिका 12ग10 की बना लें और जिस वर्ष सूर्य वर्षफल में पहले भाव में आये उस वर्ष के खाने के ऊपर सूर्य लिख कर बाकी ग्रहों को क्रमवार से लिख दें। जैसे: जन्म- 15 सितंबर 1985, समय- 15ः20, स्थान- देहली और बुध के साथ अष्टम भाव में स्थित है और वर्षफल में आठवें वर्ष वह लग्न यानी कि पहले भाव में आते हैं अतः सूर्य को आठवें वर्ष के खाने के ऊपर लिख कर बाकी ग्रहों को क्रमवार लिखें। लेख में दिये गये उपर्युक्त तालिका देखें: 1. मौत = भाव नं0 8 के ग्रह। 2. पित्री ग्रह = भाव नं0 9 के ग्रह। 3. राशि खत्म = भाव नं0 12 के ग्रह। मान लो कि उम्र के हिसाब से धोखे की तालिका में संचालित ग्रह है=बुध उधर वर्षफल के हिसाब से उम्र का संचालित ग्रह या राशि नं0 के हिसाब से संचालित उम्र का ग्रह बुध ही आ जाये तो बुध धोखे का ग्रह होगा यानी एक ही साल में वर्षफल का ग्रह या राशि नं0 बोलने का ग्रह और धोखे की तालिका का ग्रह एक ही हो जाये तो वह ग्रह सर्वव्यापक उम्र के लिहाज़ से धोखे का ग्रह होगा। यह जरुरी नहीं कि धोखे का ग्रह नीच ही हो। सबसे ऊॅंच होता हुआ भी हर एक ग्रह धोखे का ग्रह हो सकता है चाहे वह लाख ऊॅंच हालत का ही क्युं न हो। धोखा देने वाला ग्रह जन्म कुंडली में जिस भाव में हो उस ग्रह का उस बैठे होने वाले भाव के अनुसार जिन-जिन चीजों से संबंध हो उनमें वह ग्रह उस साल धोखा देगा। इसी प्रकार ऊपर का तमाम हिसाब अगर साल में लिख कर देखा तो साल के बारह महिनों में भी वही असर ज़ाहिर होगा यानि तालिका में साल की जगह महीना मानें और भाव नं0 1 को बैसाख इसी प्रकार भाव नं0 2 को जेठ, भाव नं03 को आषाढ़ भाव नं0 4 को सावन, भाव नं0 5 को भादों, भाव नं0 6 को अश्विन, भाव नं0 7 को कार्तिक, भाव नं0 8 को मार्गशीर्ष, भाव नं0 9 को पौष, भाव नं0 10 को माघ, भाव नं0 11 को फाल्गुन और भाव नं0 12 को चैत्र मास मान कर इनकी अंग्रेजी तारीखें भी देखी जा सकती है। धोखें का ग्रह दुगनी रफ्तार से अपना असर दिखाता है चाहे अच्छा हो या बुरा। उपरोक्त उदाहरण में जातक को 20वां वर्ष चल रहा है। धोखे की तालिका के अनुसार धोखे का ग्रह सूर्य है व ग्रह-तालिका(सूत्र नं0 10 को देखें) के अनुसार जातक बृहस्पति ग्रह के प्रभाव में है। राशि-तालिका(सूत्र नं0 12 को देखें) के अनुसार जातक पर भाव नं0 4 यानी कर्क राशि का प्रभाव है जिसका स्वामी चन्द्रमा है। अतः सूर्य जो धोखे का ग्रह है इसका अच्छा या बुरा प्रभाव भाव नं0 10 के अनुसार होगा। लेकिन अगर सूर्य इन तालिकाओं के अनुसार दो बार आ जाये तो अवश्य ही धोखा देगा चाहे अच्छा या बुरा। विशेष नोटः-. कुंडली में भाव नं0 10 के ग्रह अगर भाव नं0 10 में दुबारा आ जायें तो वो भी धोखे का ग्रह (चाहे अच्छा या बुरा) होगा।

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