कस्पल पद्धति

कस्पल पद्धति  

आर.एस. चानी
व्यूस : 4352 | दिसम्बर 2015

विवाह हेतु किसी भी जातक की कुंडली में लग्न के सब-सब लाॅर्ड की लिंकेज 5वें या 7वें या 11वें भाव से स्टैलर (स्टार लेवल) या पोजीशनल स्टेटस लेवल पर होनी अनिवार्य है क्योंकि 5वां भाव प्रेम, मोहब्बत, चुंबकीय आकर्षण, 7वां भाव विवाह का मूलभाव है और 11वां भाव इच्छापूर्ति का है। कस्पल ज्योतिष में 2रे भाव को विवाह के लिये साथ में नहीं जोड़ा जाता क्योंकि 7वें (मूल भाव) से 2रा भाव अष्टम पड़ता है तथा किसी भी भाव का अपने से अष्टम भाव के साथ जुड़ना कोई अच्छी लिंकेज/योग स्थापित नहीं करता। इसलिये विवाह के लिये मूल भाव 7वें के साथ 5वें और 11वें भावों को सहायक भावों के रूप में लिया जाता है। कस्पल कुंडली को कैसे पढ़ा जाये नक्षत्र थ्योरी/ ज्योतिष का स्वर्णिम नियम है कि सभी ग्रह अपने नक्षत्र स्वामी का फल देते हैं जिसे हम स्टैलर स्टेटस कहते हैं तथा ग्रह अपना फल तभी देने में सक्षम होता है जब उस विशिष्ट ग्रह का उस विशिष्ट कुंडली में पोजीशनल स्टेटस होता है। इस प्रकार ग्रह दो प्रकार से फल देने में सक्षम हो जाता है। 1 स्टैलर स्टेटस और 2. पोजीशनल स्टेटस।

अब प्रश्न उठता है कि किसी भी ग्रह को पोजीशनल स्टेटस कैसे मिलता है? यह तीन प्रकार से मिलता है पहला ग्रह अपने ही नक्षत्र में हो यानि कि गुरुह्नगुरु गुरु, गुरु के ही नक्षत्र में हो दूसरा आपसी बदलाव यानि कि बुधह्नमंगल (बुध, मंगल के नक्षत्र में है) मंगलह्नबुध, (मंगल, बुध के नक्षत्र में) यानि कि एक दूसरे के नक्षत्र में तीसरा, ग्रह को पोजीशनल स्टेटस तब मिलता है जब कुंडली में कोई ग्रह किसी भी ग्रह का नक्षत्र स्वामी नहीं बनता यानि कि उस विशिष्ट ग्रह के स्टार जोन में कोई ग्रह न हो। इस तीसरी कंडीशन को उदाहरण के साथ समझाया गया है। मेष, सिंह और धनु राशि में 00 से लेकर 130 200 मिनट तक क्रमशः अश्विनी, मघा और मूल का नक्षत्र रहता है। इस तीनों ही नक्षत्रों का स्वामी केतु है। अगर कुंडली में कोई भी ग्रह इन तीनों ही स्टार जोन में नहीं है तो इस कंडीशन में उस विशिष्ट कुंडली में केतु को पोजीशनल स्टेटस नहीं मिलता। आईये अब अध्ययन करें कि कस्पल कुंडली को कैसे पढ़ा जाये। कस्पल कुंडली किस प्रकार से फल देगी। कस्पल कुंडली को पढ़ने और समझन का बहुत ही आसान तरीका है जिसे हम यहां समझाने का प्रयास कर रहे हैं। जैसा कि विदित है हर ग्रह अपने नक्षत्र स्वामी का फल प्रदान करता है।

ग्रह अपना फल तभी देने में सक्षम होता है जब उस ग्रह का पोजीशनल स्टेटस होता है। कस्पल कुंडली इस प्रकार अपना फल प्रदान करती है। मान लीजिये ग्रह एह्नबी-सी-डी (मान लीजिये ग्रह ए, ग्रह बी के नक्षत्र में, ग्रह सी के सब (उप) में और ग्रह डी के सब-सब में (उप उप) है। ;च्संदमज । पे पद जीम ेजंत व िचसंदमज ठए पद जीम ेनइ व िचसंदमज बए पद जीम ेनइ ेनइ व िच्संदमज क् ग्रह ए को हम सोर्स ग्रह कहते हैं, ग्रह बी को इन्वोल्वमेंट, ग्रह सी को कमिटमेंट और ग्रह डी को फाईनल कनफर्मेशन बोला जाता है। इसे और अच्छी तरह समझने का प्रयास करें। मंगलह्नचंद्र-शनि-बुध, मंगल चंद्र के नक्षत्र में, शनि के सब (उप) में और बुध के सब-सब (उप उप) में हैं। अब हमें चंद्र को (जो कि स्टार लेवल है यानि कि इन्वोल्वमेंट लेवल है) कस्पल पोजिशनल चार्ट में देखेंगे कि चंद्र बारह की बारह कस्पल पोजीशन में किन-किन कस्पल भावों में राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी, सब लाॅर्ड स्वामी और सब-सब लाॅर्ड और ऐसे ही हम मंगल के सब लाॅर्ड जो कि शनि है और सब-सब लाॅर्ड जो कि बुध है जिन्होंने क्रमशः कमिटमेंट और फाईनल कन्फर्मेशन करनी है। इन्वोल्वमेंट पहले ही मंगल का नक्षत्र स्वामी चंद्र कर चुका है।

मान लीजिये मंगल 7वें भाव का सब-सब लाॅर्ड है और कस्पल कुंडली में जिसकी भाव का प्रोमिस/ पोटैशियल/संकेत पढ़ना हो तो उस भाव के सब-सब लाॅर्ड से पढ़ा जाता है। मान लीजिये आपको कुंडली में लग्न का प्रोमिस पढ़ना है तो आप लग्न के सब-सब लाॅर्ड का अध्ययन करेंगे। अगर आपको 10वें भाव का प्रोमिस पढ़ना है तो आप 10वें भाव के, अगर 7वें भाव का संकेत पढ़ना है तो 7वें भाव के सब-सब लाॅर्ड का अध्ययन करेंगे। मान लीजिये मंगल 7वें भाव का सब-सब लाॅर्ड है और हमने ऊपर देखा कि मंगल, चंद्र के नक्षत्र, शनि सब, और बुध के सब-सब में है। यानि कि मंगल ने चंद्र को इन्वोल्व कर लिया है और हमने देखा अगर कुंडली में चंद्र 7वें भाव/कस्प में प्रकट हो जाता है तो समझिये 7वां भाव सक्रिय हो गया है। इस जातक को 7 वें भाव के फल मिलते हैं। फल निगेटिव होंगे या पोजीटिव, हां होंगे या न यह बतलायेगा मंगल का सब लाॅर्ड शनि जो कि कमिटमेंट करेगा। अगर शनि 5वें या 11वें कस्प में प्रकट हो जाता है तो यह मंगल 7वें भाव के फल हां में देने में सक्षम हो जायेगा क्योंकि विवाह के मूल भाव 7वें से 5वें और 11वें भाव जो कि विवाह के लिये सहायक हैं। हमने देखा 7वें भाव की इन्वोल्वमेंट होने के बाद शनि द्वारा 5वें 11वें भाव से कमिटमेंट हो गई है।

अब मंगल का सब-सब लाॅर्ड बुध, अंतिम पुष्टिकरण यानि कि फाईनल कनफर्मेशन करेगा तथा बुध का भी 5वें या 7वें या 11वें या 7वें भाव से फेवरेबल भावों में प्रकट होना अनिवार्य है। अब जरा दूसरा पहलू देखें, हमने देखा ग्रह मंगल, चंद्र के नक्षत्र, शनि के सब और बुध के सब-सब में है। मंगलह्न चंद्र, शनि-बुध, इसको लिखने का ढंग यही है जैसा कि ऊपर वाली लाइन में बताया गया है। मान लीजिये चंद्र 7वें भाव में प्रकट हो, इन्वोल्वमेंट कर रहा है और मंगल का सब लाॅर्ड शनि अगर 6ठे भाव/कस्प में प्रकट हो गया तो यह जातक को शादी नहीं देगा बल्कि ताकत के लिये यह बेहतर स्थिति होगी। अब हम एक कदम और आगे चलते हैं। हमने देखा कि ग्रह दो प्रकार से फल प्रदान करने में सक्षम हैं। पहला स्टैलर स्टेटस से और दूसरा पोजीशनल स्टेटस से। ऊपर हमने स्टैलर स्टेटस को पढ़ा क्योंकि मंगल, चंद्र के नक्षत्र में है और चंद्र जिन-जिन कस्पल पोजीशन्स में प्रकट होगा और जिस भाव में बैठा होगा उसका फल प्रदान करने में सक्षम होगा। मंगल तब तक अपना फल देने में सक्षम नहीं होगा जब तक कुंडली में मंगल का पोजीशनल स्टेटस नहीं होगा। मान लीजिये मंगल का इस विशिष्ट कुंडली में पोजीशनल स्टेटस है।

अब आप लग्न से लेकर 12 कस्प तक देखिये कि मंगल किन-किन कस्पल पोजीशन्स में, राशि स्वामी, नक्षत्र स्वामी, सब लाॅर्ड और सब सब लाॅर्ड के रूप में प्रकट हो रहा है तथा कौन से भाव में बैठा है। मंगल उन सभी भावों का फल प्रदान करने में सक्षम हो जायेगा जिन-जिन भावों/कस्पों में प्रकट हो रहा होगा। उन सभी भावों को भी हम अब इन्वोल्वमेंट भाव के रूप में पढ़ेंगे तथा इन भावों का फल पोजीटिव भाव के रूप में पढ़ेंगे तथा इन भावों का फल पोजीटिव होगा या निगेटिव, हां होगा या न यह तो मंगल का सब लाॅर्ड शनि ही बतलायेगा। शनि ही इस केस मंे भी कमिटमेंट करेगा तथा पहले की तरह मंगल का सब-सब लाॅर्ड बुध, फाईनल कनफर्मेशन करेगा। अब कस्पल इंटरलिंक थ्योरी को समझने के लिये एक कदम और आगे चलते हैं। हमारी थ्योरी इन्वोल्वमेंट, कमिटमेंट और फाईनल कनफर्मेशन की है। इन्वोल्व हुए भाव से 1, 3, 5, 9, 11 पोजीशन्स, फेवरेबल पोजीशन कहलाती हैं। इन्वोल्व हुए भाव से 2, 6, 10 वीं पोजीशन न्यूट्रल कहलाती हैं तथा इन्वोल्व हुए भाव से 4, 7, 8, 12 की पोजीशन्स अन फेवरेबल पोजीशन्स कहलाती हैं।

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वास्तु विशेषांक  दिसम्बर 2015

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वास्तु संरचना का विज्ञान है जिसका उद्देश्य मनुुष्य की सुख समृद्धि है। हर संरचना चाहे वह घर हो अथवा दुकान अथवा फैक्ट्री अथवा कार्यालय, प्रत्येक संरचना के निर्माण में वास्तु नियमों का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। यदि कोई भी संरचना वास्तु सम्मत नहीं हैं तो यह अनेक प्रकार की आर्थिक, स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं, दुःख, वैवाहिक जीवन में कठिनाई, पारिवारिक विवाद आदि को जन्म देता है। फ्यूचर समाचार के वास्तु सम्बन्धित इस विशेषांक में अनेक उल्लेखनीय आलेखों को समाविष्ट किया गया है जिसमें वास्तु के महत्वपूर्ण सिद्धान्तों का विश्लेषण सूक्ष्मता से किया गया है। इनमें से अति महत्वपूर्ण आलखों में शामिल हैं: नारद पुराण में वास्तुशास्त्र का सूक्ष्म वर्णन, वास्तु शास्त्र में पंच तत्व, भवन निर्माण में वास्तुशास्त्र का महत्व, वास्तु शास्त्र एक वैज्ञानिक पद्धति, वास्तु शास्त्र एवं धर्म, दिशा दोष दूर करने के वास्तु उपाय, फेंग शुई और वास्तु में अंतर और समानताएं, वास्तु एवं फेंग शुई के उपाय, मल्टीस्टोरी फ्लैट की वास्तुु की उपयोगिता एवं व्यवस्था, फ्लैट खरीदने में किन बातों का खयाल रखें आदि। इसके अतिरिक्त इस विशेषांक में सभी स्थाई स्तम्भों का समावेश भी पूर्व की भांति किया गया है जिसमें विविध आयामी आलेख सम्मिलित हैं।

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