झंझावातों के बीच भारत

झंझावातों के बीच भारत  

व्यूस : 4169 | नवेम्बर 2012
झंझावातों के बीच भारत आचार्य किशोर वर्तमान भारतीय परिदृश्य में आंतरिक परिस्थितियां प्रतिकूल हैं, सरकार की जन विरोधी नीतियों ने लोगों को आंदोलन करने के लिए बाध्य कर दिया है, ऐसी परिस्थिति में सरकार के किसी भी समय गिरने की आशंका समय-समय पर व्यक्त की जाती रही है। आइए हम ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें कि वर्तमान सरकार रहेगी या जायेगी। देश की जन्म कुंडली के अनुसार 15.08.1947 को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में था जिसके स्वामी शनि हैं। इसलिए भारत को आजादी शनि की महादशा में प्राप्त हुई थी। वर्तमान समय में सूर्य की महादशा में शनि की अंतर्दशा 25.06.2013 तक रहेगी। यह समय भारत तथा अन्य देशों के लिए उथल-पुथल का रहेगा। शनि की महादशा भारत के लिए शुभ फलदायी रही। शनि की महादशा में 1947 से 1965 तक भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध में दोनों बार भारत को सफलता प्राप्त हुई। उस समय भारत के प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरु तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री थे। भारत देश की कुंडली का वृष लग्न है और योगकारक ग्रह शनि नवम्, दशम का स्वामी होकर तृतीय (पराक्रम भाव) में विराजमान है। 1962 फरवरी में चीन देश ने भारत पर आक्रमण किया तथा उसमें भारत की पराजय हुई। उस समय शनि की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही थी। भारत की कुंडली में राहु लग्न तथा केतु सप्तम भाव में कालसर्प दोष से ग्रसित होकर बैठे हुए हैं। युद्ध के समय गोचर की स्थिति के अनुसार 04.02.1962 तक मकर राशि में आठ ग्रह राशि से सप्तम भाव में बैठकर जन्म राशि को पूर्ण दृष्टि से देख रहे थे। इसी कारण भारत की पराजय हुई। बुध की महादशा 06.09.1965 से 07.09.1982 तक रही इस अवधि में बुध की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा जनवरी 1969 से दिसंबर 1971 तक रही। उस समय भारत और पाकिस्तान के परस्पर युद्ध में भारत को फिर से विजय प्राप्त हुई तथा पाकिस्तान का विभाजन होकर बांग्ला देश का जन्म हुआ। उस समय भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी थीं। इसके पश्चात् केतु की महादशा में सितंबर 1982 से सितंबर 1989 तक भारत का समय अच्छ नहीं बीता। केतु की महादशा में श्रीमती इंदिरा गांधी दुबारा प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हुईं परंतु केतु की महादशा तथा चंद्र की अंतर्दशा में अगस्त 1984 से मार्च 1985 के मध्य इनकी हत्या कर दी गई। वर्तमान समय में सूर्य की महादशा में शनि की अंतर्दशा 25.06.2015 तक रहेगी और यह समय भारत के लिए अनुकूल नहीं रहेगा। विशेष रूप से 16.12.2012 को गोचर की स्थिति के अनुसार शनि अपनी उच्च राशि में बैठकर तृतीय दृष्टि से धनु राशि में स्थित सूर्य को देखेंगे तथा मंगल पर भी दृष्टि रहेगी। 20.12.2012 से मंगल अपनी उच्च राशि में रहेंगे। शनि और मंगल दोनों का उच्च का होना देश के लिए शुभ नहीं होगा। 26.01.2013 तक देश में अशांति रहेगी तथा देश भयानक स्थिति से गुजरेगा। 13.04.2013 को मंगल जब मेष राशि में प्रवेश करेंगे तब शनि, राहु, सूर्य, बुध, केतु, मंगल एक दूसरे को पूर्ण दृष्टि से देखेंगे जिसके कारण भारत तथा विश्वभर में प्रलय की अधिक संभावना होने की आशंका है। विदेशों पर भारत से अधिक कष्ट होने की संभावना है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि 16.12.2012 से 20.05.2013 तक का समय विश्व भर के लिए काफी संकट का होगा, कुछ विदेशी देशों का विध्वंस भी हो सकता है। मेष, अग्नि तत्व राशि में सूर्य, मंगल को वायु तत्व राशि तुला राशि से शनि, राहु की दृष्टि एक दूसरे को होगी जिसके कारण आगजनी, भूकम्प, आकाशीय दुर्घटनाएं, जान माल की हानि होने की संभावना अधिक हो जाएगी तथा आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ेगा क्योंकि लग्न से बारहवें घर में सूर्य, मंगल, केतु और लग्नेश शुक्र भी बारहवें घर (व्यय भाव) को सक्रिय करेंगे। भारत समेत कई देशों में सŸाा परिवर्तन मार्च 2013 से मई 2013 तक हो सकता है। भारत की कुंडली के अनुसार योगकारक ग्रह उच्च राशि का होकर लग्न से छठे भाव में बैठकर शत्रुओं से विजय दिलाएगा परंतु प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह जी, श्रीमती सोनिया गांधी जी तथा यू.पी.ए सरकार के लिए स्थिति चिंताजनक होगी। आज से लगभग 30 वर्ष पहले भी शनि जब उच्च राशि में तुला राशि में विराजमान थे तब इंदिरा जी की हत्या हुई थी तथा पूरे भारत में और हिंदुओं में तनाव पैदा हुआ था तथा भारत में गंभीर रूप से अराजकता फैल गई थी। उन्हंे अपने घरों तथा शहरों को छोड़ना पड़ा था। यदि हम भारत के प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी की कुंडली को देखें तो उनकी अष्टमेश चंद्रमा की महादशा चल रही है। उनकी लग्न कुंडली से चंद्र को शनि की दृष्टि है और गोचर में भी शनि अष्टम भाव को देख रहे हैं। राहु में चंद्रमा की अंतर्दशा 14.06.13 तक है। इस अवधि में इन्हें स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा। अष्टमेश की अंतर्दशा परिवर्तन भी करा सकता है। यह परिस्थिति जब मंगल धनु में रहेंगे तब लग्न से अष्टम भाव को देखेंगे- 10.11.12 से 18.12.12 तक और जब मंगल मकर में रहेंगे तब भी सप्तम दृष्टि से अष्टम भाव को देखेंगे 19.12.12 से 27.01.13 तक का यह समय कष्टकारी रहेगा। श्रीमती सोनिया गांधी जी की कुंडली के अनुसार 2018 तक केतु की महादशा चलेगी तथा इनकी जन्म कुंडली में केतु अस्त है तथा गोचर में भी केतु चंद्र से बारहवें भाव में चल रहे हैं, यह स्थिति भी इनके लिए हानिकारक है क्योंकि गोचर में चंद्रमा से बारहवें घर में केतु नीच राशि में है। सोनिया जी की कुंडली में केतु में चंद्रमा की अंतर्दशा दिसंबर 2012 तक चलेगी। यह समय इनका मारकेश समय है। जब-जब केतु को मंगल की दृष्टि पड़ेगी अर्थात 28.01. 12-04.03.13 तक कुंभ राशि से केतु को पूर्ण चतुर्थ दृष्टि से देखेंगे तब उन्हें अपने स्वास्थ्य पर पूर्ण ध्यान देना होगा। 13.04.13 से 25.04.13 तक अपनी सरकार से कुछ परेशानी रहेगी। मंत्रिमण्डल को बचाना मुश्किल होगा और जब 24 मई 2013 के बाद मंगल वृष राशि में जाएगा तब हर तरफ से परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

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श्री महालक्ष्मी विशेषांक  नवेम्बर 2012

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