वास्तु के अनुसार व्यवसायिक कार्य

वास्तु के अनुसार व्यवसायिक कार्य  

व्यूस : 3556 | आगस्त 2012
वास्तु के अनुसार व्यावसायिक कार्य प्रमोद कुमार सिन्हा प्र0- व्यावसायिक कार्य के लिए किस तरह का भूखण्ड सर्वश्रेष्ठ होता है ? उ0- व्यावसायिक कार्य करने के लिए आयताकार या वर्गाकार भूखंड सर्वश्रेष्ठ होता है। आयताकार भूखंड को 1ः2 अनुपात से अधिक नही रखना चाहिए। भूखंड के दक्षिण-पश्चिम भाग की सतह ऊँची होनी चाहिए। दक्षिण-पश्चिम में निर्माण कार्य अधिक से अधिक करना चाहिए। उतर-पूर्व भाग की सतह नीची और अधिक से अधिक खुली रखनी चाहिए क्योंकि इनके खुला रखने तथा उतर-पूर्व की ओर ढलान होने से लक्ष्मी की स्वतः वृद्धि होती है। ईश्वर, गंगा और लक्ष्मी उतर-पूर्व में निवास करते हैं अतः यह स्थल नीचा, खुला, पानी भरा हो तो कार्य करने वाले लोग धनाढ्य तथा बडे से बडे़ सुख भोगते हैं। थोडी सी मेहनत करने पर ज्यादा से ज्यादा सफलता मिलती है और भाग्य को जगा कर सौभाग्यशाली बना देता है। व्यवसायी लोग अपने व्यवसाय, कारखाने या उद्योगों के उतर-पूर्व में पानी का अंडरग्राउंड टैंक, तालाब, स्वीमिंग पूल बनाकर अपने डूबते व्यवसाय को चार चाॅद लगा सकते है। ऐसा करने पर कर्ज, मुकदमे आदि की समस्या का शीघ्र ही समाधान हो जाता है। तालाब या पानी की व्यवस्था भूखंड के ईशान्य क्षेत्र में हो या भूखंड में लक्ष्मी या कुबेर के स्थान पर हो तो धन की कोई कमी नही रहती। व्यावसायिक स्थल के आसपास दरिद्रता स्वप्न में भी नजर नही आती तथा सोया भाग्य जाग जाता हैं। प्रत्येक कदम पर लोकप्रियता मिलने लगती है। प्र0- व्यावसायिक परिसर के निर्माण कार्य में किन बातों का ख्याल रखा जाता है ? उ0-उतर-पश्चिम से लेकर उतर-पूर्व तक किसी तरह का निर्माण भूलकर भी नही करना चाहिए अन्यथा धन-दौलत, काम-काज, दुकान, फैक्ट्री सभी बंद हो जाते हैं। सभी जगह बंधन लग जाता है। साझेदार, मित्र और रिश्तेदारों से संबंध खराब हो जाता है। मुकदमे आदि की वृद्धि हो जाती है। व्यावसायिक स्थल के दक्षिण-पश्चिम की सतहें या चारदीवारी ऊँची रखने से धन एवं आवक अच्छी रहती है। व्यावसायिक स्थल का वातावरण शांत रहता है। उस स्थान पर बैठकर कार्य करने से मनुष्य को राजा जैसे सुख की प्राप्ति होती है। दुकान का मालिक कार्यो तथा कर्मचारियों पर अपना पूर्ण नियंत्रण बनाये रखता है। कर्मचारी पूछे बिना कोई कार्य नही करते। सारे शक्तिशाली ग्रह साथ देते हैं। प्र0- व्यावसायिक परिसर या दुकान के कमरे की आंतरिक बनावट किस तरह की होनी चाहिए ? उ0-व्यावसायिक परिसर या दूकान के अंदर खंभो और स्तंभो में तीक्ष्ण कोण नही रखने चाहिए। यदि हो तो इसे ढंक कर रखें तथा बिजली और टेलीफोन के तार ढंके होने चाहिए। प्रकाश समान रूप से सारी दुकान में फैला हुआ होना चाहिए। दुकान का फर्श एवं सतहें सड़क से ऊँची या बराबर रखें। परंतु इसे सड़क से नीची कभी न रखें। दुकान तहखाने या खड्डे में नही होनी चाहिए। प्र0- दुकान में काउंटर किस स्थान पर रखना चाहिए ? उ0- दुकान में काउंटर दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण, दक्षिण-पूर्व, पश्चिम या उतर-पश्चिम में रखना श्रेष्ठ होता है। काउंटर के फर्नीचर में लकडी का इस्तेमाल अधिक से अधिक करना चाहिए। प्र0-व्यावसायिक स्थल में किस तरह की आकृति लगानी चाहिए ? उ0-संस्थान से जुडे़ कार्यो के चित्र शुभ होते हैं। व्यक्ति को चाहिए कि वह जो व्यापार करता हो, वही व्यापार करने वाले विश्व प्रसिद्ध व्यक्तियों, व्यवसाय के संस्थापक या पे्ररणा स्रोत का चित्र अपने कुर्सी के पीछे दीवार पर या संस्थान में उपयुक्त स्थान पर लगाए। व्यावसायिक स्थल में रूदन करते हुए व्यक्ति, बंद आंखों के प्राणियों के समूह, दुःखी व्यक्ति, सूअर, बाघ, सियार, सांप, उल्लू, खरगोश, बगुला, भयानक आकृतियों वाले और दीनता दर्शाने वाले चित्र कदापि नही लगाने चाहिए।?

Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

कांवरिया विशेषांक  आगस्त 2012

futuresamachar-magazine

फ्यूचर समाचार पत्रिका के कावंरिया विशेषांक में शिव पूजन और कावंर यात्रा की पौराणिकता, पूजाभिषेक यात्रा, कावंर की परंपरा, विदेशों में शिवलिंग पूजा, क्या कहता है चातुर्मास मंथन, कावंरियों का अतिप्रिय वैद्यनाथ धाम, शनि शांति के अचूक उपाय, सर्वोपयोगी कृपा यंत्र, रोजगार प्राप्त करने के उपाय, आदि लेखों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, नंदा देवी राज जात, क्यों होता है अधिकमास, रोग एवं उपाय, श्रीगंगा नवमी, रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी व्रत, धार्मिक क्रिया कलापों का वैज्ञानिक आधार, सम्मोहन, मुहूर्त विचार, पिरामिड एवं वास्तु, सत्यकथा, सर्वोपयोगी कृपा यंत्र, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

सब्सक्राइब


.