विवाह एवं दाम्पत्य सुख के अबधक योगों में मंगली योग प्रमुख है। इसके प्रभाववश न केवल विवाह में देरी ही होती है,अपितु कभी-कभी सगाई या विवाह होकर भी रिश्ता टूट जाता है। इस मंगली योग का हौआ इतना है की कुछ लोग यह पता लगाने पर की उनका
विस्तृत विवरणमनुष्य के जीवन में विवाह एक ऐसा मोड है, जहां उसका सारा जीवन एक निर्णय पर आधारित होता है। जिस व्यक्ति के साथ जीवन भर चलना है, वह अपने मन एके अन्सुआरा हिया, या नहीं, यह कुछ क्षणों में कैसे जानें? उसका भाग्य एवं भविष्य भी तो आपके
विस्तृत विवरणविवाह के सन्दर्भ में वर एवं कन्या के माता-पिता मंगल दोष के भय से सदैव आक्रांत रहते है। जन-मानस में मंगल दोष का भय इतना अधिक व्याप्त है की मंगली कन्या के माता-पिता कन्या हेतु मंगली वर खोजते है। इस कारण भी कन्या के विवाह में विलम्ब होता
विस्तृत विवरणमंगल दोष के परिहार के बारे में महर्षि पराशर कहते है। यदि वैधव्य योग वाली कन्या का विधुर योग वाले युवक से विवाह किया जाए तो निश्चय ही विधवा योग भंग होता है। अर्थात पति या पत्नी किसी की भी अकाल मृत्यु नहीं होगी। यहाँ यह समझना आवश्यक है
विस्तृत विवरणमानव इतिहास गवाह है की ब्रहमांड का कोई भी ग्रह मानव को इतना आकर्षित नहीं कर पाया जितना की मंगल ग्रह ने किया है। इस लाल रंग के आकर्षक ग्रह के बारे में जानने के लिए वैज्ञानिक हमेशा से उत्सुक रहे है, यह उन्हें अचंभित कर रोमांच से
विस्तृत विवरणमंगल का अर्थ शुभ एवं कल्याण होता है। फिर क्या हम मंगल ग्रह को अशुभ या क्रूर कहकर मंगल शब्द का उपहास नहीं कर रहे है? ज्योतिष विज्ञान में मंगल को पराक्रम का कारक माना गया है। सौर परिवार में इसे सेनापति का दर्जा दिया गया है। सामान्यत: लोग मंगल के
विस्तृत विवरणयदि गोचर में मंगल अनिष्ट फल दे रहा हो, तो उसके शमन के लिए मंगलवार को, नीचे दी गई वस्तुओं का योग ब्रह्माण को दान करना चाहिए। लाल फूल, लाल फल, लाल चंदन, लाल कपड़ा, लाल गुड, लाल मसूर दाल, गेहूं , तांबा, सोना, केशर, कस्तूरी, रक्त प्रवाल
विस्तृत विवरणमंगला दोष जितना और जिस रूप में प्रचारित है, उतना है नहीं। मंगल दोष वाली अनेकानेक कुंडलियों के जातक सुखी वैवाहिक जीवन जी रहे है। सवाल उठाता है यदि प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, द्वादश में केवल मंगल की उपस्थिति ही वैवाहिक सुख के विनाश का
विस्तृत विवरणस्कंद पुराण में कहा गया है, मंगलो भूमि पुत्राश्च रिहार्ता-धन्कर्ता, अर्थात मंगल भूमि के पुत्र है, और जो उनकी उपासना आदि करता है वह कभी भी ऋण ग्रस्त नहीं होता और उसके जीवन में धन संपति का कभी अभाव नहीं रहता है। जीवन में सर्वत्र मंगल ही मंगल होता है।
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