मानव जीवन पर ग्रहों का निद्गिचत रूप से प्रभाव पड़ता है। हमारा व्यक्तित्व, स्वास्थ्य, शौर्य, विद्या, धन और कार्य क्षेत्र सभी कुछ ग्रहों से प्रभावित होता है। बचपन में विद्यार्जन से लेकर व्यवसाय के निर्धारण तक कुंडली में स्थित सभी ग्रह विद्या तथा कार्य क्षेत्र को प्रभावित करते हैं और हर व्यक्ति का भाग्य व कर्म क्षेत्र किसी न किसी तरह से इन्हीं ग्रहों के अनुरूप ही निर्धारित होता है।
Read Moreज्योतिष ग्रंथों में कर्मक्षेत्र के चयन हेतु असंखय सिद्धांत एवं नियम प्रतिपादित हैं। इन नियमों को किसी जातक की जन्मकुंडली में लागू कर उसके वास्तविक व्यवसाय का निर्धारण कर पाना अत्यंत कठिन एवं दुरूह है। सारे सिद्धांतों को लागू कर लेने के बाद भी उसके कार्य क्षेत्र के प्रति संदिग्धता बनी रहती है। यहां कैरियर निर्माण के कुछ अनुभूत एवं प्रायोगिक ज्योतिषीय तथ्य पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत हैं।
Read Moreकडली के भावों एवं ग्रहों की विशिष्ट स्थितियां व्यक्ति में खेलों के प्रति रुझान तथा आवश्यक क्षमता उत्पन्न करती हैं। उसमें सफल खिलाड़ी बनने की क्षमताओं का सही आकलन कर लिया जाए, तो इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रारंभ से ही उचित प्रशिक्षण द्वारा उसे एक सफल खिलाड़ी बनाया जा सकता है।
Read Moreसुखस्थमूलं धर्मः धर्मस्य मूलं अर्थः। वृत्ति मूलं अर्थः अर्थ मूलो धर्म कामौ॥
Read Moreमानव का समग्र विकास शिक्षा पर ही होता है और आजकल अन्तिम लक्ष्य भी यही है। द्वितीय या पंचम भाव में बुध, बृहस्पति हो अथवा द्वितीयेश, पंचमेश बुध, बृहस्पति से संबंध करे तो जातक कुशल वक्ता और प्रबुद्ध तर्कशक्ति वाला होता है। वकालत के लिए यह जरुरी है। कानूनी विद्या में सफलता पाने या वकील बनने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को देखना चाहिए।
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