Astrology Planetary Positions
Jyotish-Bhavishaya-ka-Darpan
April 2010
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ज्योतिष भविष्य का दर्पण

संसार के सभी कार्य किरणों पर आधारित हैं। आज के वैज्ञानिक युग में साइंस ने सिद्ध कर दिया है कि किरणों ही सब कुछ है। टी.वी. रिमोट कंट्रोल, वायरलेस, रेडियों, टेलीफोन आदि के पीछे किरणों की प्रक्रिया छिपी है। जैसे हम एक खास जगह को पकड़ने के लिए एक खास किरण का बटन दबाते हैं। जिससे ध्वनि का संचार होकर क्रियान्विति होती है। ठीक उसी तरह नाक्षाक्षर का भी यही कार्य है, आकाश मंडल में सभी नक्षत्र राशियों एवं ग्रह विद्यमान हैं। हर राशि एवं नाम के अक्षर नक्षत्रों एवं ग्रह की खास ध्वनि से जुड़े होते हैं। हमारे मुंह से शबद निकलने पर एक खास किरण निकलकर आकाश के वातावरण में जुड़ जाती है। जिहस पर नक्षत्र एवं ग्रह अपने-अपने गुणो की अलग-अलग विशेषता रखते हुए उन्हीं गुणों एवं दोषों का अच्छा एवं बुरा प्रभाव डालते हैं। प्रत्येक वस्तु पर समय द्वरा ब्रह्मांड का प्रभाव पाया जाता है। अतः वस्तु का स्वरूप ब्रह्मांड के अनुरूप ही होता है। तभी तो यतिपिन्डे तद् ब्रह्मांडे का सिद्धांत ज्योतिष एवं अध्यात्क दोनों द्वारा स्वीकृत हुआ है। ज्योतिष शास्त्र मौलिक सिद्धांत यह है कि कोई भी वस्तु चाहे वह स्थावर हो अथवा जगम इस विस्तृत ब्रह्मांड में जहां जिन शक्ति के अनुरूप दूसरे पदार्थों पर अपना प्रभाव डाल रही है। वहां वह स्वयं भी अन्य वस्तुओं से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकती है।

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Astham-Bhavastha-Shani-ka-Vivaha-par-Prabhava
January 2009
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अष्टम भावस्थ शनि का विवाह

प्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने एकमत से जातक की कुंडली के सप्तम भाव को विवाह का निर्णायक भाव माना है और इसे जाया भाव, भार्या भाव, प्रेमिका भाव, सहयोगी, साझेदारी भाव स्वीकारा है।

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Concept-Bhavottama
October 2009
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Concept of Bhavottama

A planet that occupies the same sign in birth chart and Navamsha is known as Vargottama. It yields extremely excellent results, similarly a planet which occupies the same Bhava in Navamsha & birth chart is known as Bhavottama.

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Pratispardhatamak-Pareeksha-Mein-Safalta-Kaise
April 2010
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प्रतिस्पर्धात्त्मक परीक्षा में सफलता कैसे ?

मानव के समस्त कार्य और व्यवसाय को संचालित करने में नेत्रों की भूमिका जिस प्रकार अग्रगण्य मानी गई है ठीक उसी प्रकार ज्ञान, विज्ञान विद्या के क्षेत्र में ज्योतिष विज्ञान दृष्टि का कार्य करता है।

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आत्महत्या क्यों, कैसे ?

इस आलेख में उन ग्रह स्थितियों दशा तथा गोचर का उदाहरण सहित वर्णन किया गया है जिनके कारण जातक आत्महत्या जैसा दुःसाहस कर बैठता है।

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Shiv Shakti Kavach

NazarSuraksha-kavach