संसार के सभी कार्य किरणों पर आधारित हैं। आज के वैज्ञानिक युग में साइंस ने सिद्ध कर दिया है कि किरणों ही सब कुछ है। टी.वी. रिमोट कंट्रोल, वायरलेस, रेडियों, टेलीफोन आदि के पीछे किरणों की प्रक्रिया छिपी है। जैसे हम एक खास जगह को पकड़ने के लिए एक खास किरण का बटन दबाते हैं। जिससे ध्वनि का संचार होकर क्रियान्विति होती है। ठीक उसी तरह नाक्षाक्षर का भी यही कार्य है, आकाश मंडल में सभी नक्षत्र राशियों एवं ग्रह विद्यमान हैं। हर राशि एवं नाम के अक्षर नक्षत्रों एवं ग्रह की खास ध्वनि से जुड़े होते हैं। हमारे मुंह से शबद निकलने पर एक खास किरण निकलकर आकाश के वातावरण में जुड़ जाती है। जिहस पर नक्षत्र एवं ग्रह अपने-अपने गुणो की अलग-अलग विशेषता रखते हुए उन्हीं गुणों एवं दोषों का अच्छा एवं बुरा प्रभाव डालते हैं। प्रत्येक वस्तु पर समय द्वरा ब्रह्मांड का प्रभाव पाया जाता है। अतः वस्तु का स्वरूप ब्रह्मांड के अनुरूप ही होता है। तभी तो यतिपिन्डे तद् ब्रह्मांडे का सिद्धांत ज्योतिष एवं अध्यात्क दोनों द्वारा स्वीकृत हुआ है। ज्योतिष शास्त्र मौलिक सिद्धांत यह है कि कोई भी वस्तु चाहे वह स्थावर हो अथवा जगम इस विस्तृत ब्रह्मांड में जहां जिन शक्ति के अनुरूप दूसरे पदार्थों पर अपना प्रभाव डाल रही है। वहां वह स्वयं भी अन्य वस्तुओं से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकती है।
Read Moreप्राचीन ज्योतिषाचार्यों ने एकमत से जातक की कुंडली के सप्तम भाव को विवाह का निर्णायक भाव माना है और इसे जाया भाव, भार्या भाव, प्रेमिका भाव, सहयोगी, साझेदारी भाव स्वीकारा है।
Read MoreA planet that occupies the same sign in birth chart and Navamsha is known as Vargottama. It yields extremely excellent results, similarly a planet which occupies the same Bhava in Navamsha & birth chart is known as Bhavottama.
Read Moreमानव के समस्त कार्य और व्यवसाय को संचालित करने में नेत्रों की भूमिका जिस प्रकार अग्रगण्य मानी गई है ठीक उसी प्रकार ज्ञान, विज्ञान विद्या के क्षेत्र में ज्योतिष विज्ञान दृष्टि का कार्य करता है।
Read Moreइस आलेख में उन ग्रह स्थितियों दशा तथा गोचर का उदाहरण सहित वर्णन किया गया है जिनके कारण जातक आत्महत्या जैसा दुःसाहस कर बैठता है।
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